पंडिताईन के जिस्म में बहुत गर्मी है यार 🥵 , मन करता है कि ब्राह्मण लड़कियों के Bu₹ का पानी जोड़ के तालाब बना दूँ फिर रोज छप छप करके पंडिताईन के Bu₹ के पानी से नहा लूँ 💦🍑🥀🍇
मुझे उसी समय से यह बात खटकती थी जब मैने यह पढ़ा था, शुद्रकुतायन बौद्ध भांत सवालखीया ने भूमिहार की तारीफों के पुल बांधते हुए उनके बातों को हास्य बता कर उन्हें श्रमण परंपरा का बताने की कोशिश की, यह खुद बौद्ध बन गया था पर शूद्रपारी की वैधता के लिए शूद्रपारि को कन्नौजिया धोबी कहता था
ब्राह्मण होता है, और पंक्तिपावन वो होता है जो भीख मांग के खाये.... बाकी धरती अलग चलता है, सरयू हमारा अपना कटोरा लेके अलग चलता है।
इसीलिए इसे भूमिहारों से जलन और दुर्भावना अत्यधिक है।
#राजा_ram_बघेल_की_नाजायज_औलाद_सरयू
जैसा मैने कहा था, नकली बार बार 100% शुद्ध होने का दावा करता है, सबको सर्टिफिकेट बांटता है, हिजड़ा औरत से भी ज्यादा श्रृंगार करता है, वही हाल शूद्र सरयू का है जिसने अपने शुद्धिकरण को कुछ ज्यादा ही दिल से लगा लिया।
नोट -सरयू बाकी दुनिया से उल्टा चलता है, इनमें सबसे ऊंचे पंक्तिपावन
शूद्र पारी पोंगा कहता है - चूंकि कुछ कान्यकुब्ज ब्राह्मण धनवान हैं, अप्रतिग्रही हैं, दान त्याग दिए हैं, भिक्षाटन नहीं करते हैं इसलिए वो नीच ब्राह्मण हुए और उन्हें राजा को अपने राज्य से बाहर निकाल देना चाहिए।
भिखारी कुलश्रेष्ठ सरयू...
भिखारीउत्तम भिखमंगश्री
उसी पन्ने में ये सवालाखी यह कहता है कि कान्यकुब्ज ने धोखेबाजी से शुद्रश्पारी को दारू पिलाकर जबरदस्ती इनको अपने में जोड़ लिया
किसी ने सही कहा है गंदा खून गंदा है पहले बेचारों कान्यकुब्ज की पहचान लगा कर खुदको पोंगा बताया फिर गंदे रक्त का प्रवाह दिखाया.
बहुत बढ़िया खोज @MungerKU
कह रही ब्राह्मण होकर ठाकुर को खूब दे रही हूँ 💦
घटना रीवा जिले की है जहां राजा राम बघेल ने शूद्रपरिन स्वालाखी को पोंगा बनाया था आज राजा राम बघेल के वंशजों को खूब दे रही है
उपकार के बदले उपकार 💦
Shudrapari Gandi Nasal sawalakhi Farji neech ki jamat gutter chaaps
The case was shudrapari bhangis were fighting between themselves accusing one another as bhumihar and kurmi for the seat of mahant, Typical bhangi blood 🤣🤣
BHU would rather die than associating with bhngis
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बाप मर गया बाप बनाते-बनाते, बेटा बैठे गाली दे रहा है! बासदेवानंद बनाम शंतनानंद (1942) केस में इलाहाबाद HC ने देखा था कि शंतनानंद ने संन्यास वैध करने को खुद को सरयूपारीण ब्राह्मण बताया, पर जिरह में माना कि वो आज़मगढ़ के भूमिहार थे। आज भी यही ढोंग चल रहा है!