प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन ब���्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।
शांतिपूर्ण विरोध एक अटूट और मौलिक अधिकार है।
भारत के निर्दोष छात्रों पर हमला करने के आदेशों का आँखें बंद करके पालन करने वाले हर पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारी ये बात ध्यान रखें:
संविधान ही आपका मालिक है।
सत्ता हमेशा के लिए नहीं रहती।
जवाबदेही ज़रूर तय की जाएगी।
Peaceful protest is a sacred and fundamental right.
Every police officer and govt official blindly following orders to attack India’s innocent students should keep in mind:
The Constitution is your master.
Power is not permanent.
Accountability will follow.
एक ऐतिहासिक घड़ी के गवाह बन रहे हैं।
आज संसद की ओर जाने वाली हर सड़क पर युवा हैं। पचास साल बाद उन्होंने फिर याद दिलाया है - संसद का रास्ता सड़क से होकर जाता है।
#संसद_मार्च#DharmendraPradhanResign
"समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध,
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध"
17 दिन से आमरण अनशन पर बैठे @Wangchuk66 के लिए "ना मोदी बोलेगा - ना गोदी बोलेगा" आप अपनी अंतरात्मा से पूछिए आप कब तक खामोश रहेंगे ?
क्या आप किसी अनहोनी का इंतजार कर रहे है ?
सभी बहुत चिंतित हैं। सरकार को बात करनी चाहिए। सरकार नहीं करती है तो समाज को आगे आना चाहिए। सोनम के साथ-साथ छात्र भी अनशन पर बैठे हैं। कितने साल तक परीक्षाओं में चोरी और धांधली को यह देश स्वीकार करेगा। 13 साल बीत गए फिर भी परीक्षाएँ विश्वसनीय नहीं हो सकी हैं। बात केवल परीक्षा की नहीं है, पढ़ाई के मामले में भी जो नुकसान हुआ है, वहाँ से वापसी करना संभव नहीं है।
इसी अवसर पर गंगा की सफाई और अविरलता को लेकर प्रो जी डी अग्रवाल के अनशन को याद करने की ज़रूरत है। 2018 में 109 दिनों के अनशन के बाद उनकी मौत हो गई थी। तब काफी सवाल उठे थे। मीडिया की पुरानी रिपोर्ट आप देख सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को तीन तीन पत्र लिखे। उन पत्रों को निकाल कर पढ़ सकते हैं। गंगा के लिए प्रो जी डी अग्रवाल ने जान दे दी और गंगा के नाम पर राजनीति करने वालों ने उन्हें भुला दिया। गंगा की समस्याओं का समाधान करने के बजाए गंगा के घाट पर आरती का आयोजन कर लोगों के सवालों की धारा मोड़ दी गई। अच्छा होता कि प्रो जी डी अग्र��ाल को सुना जाता, गंगा भी साफ होती और तब उसके किनारे आरती की शोभा और दिव्य होती। जो मीडिया जंतर मंतर नहीं जा पा रहा है वह गंगा के नाम पर प्रो जी डी अग्रवाल के अनशन की कहानी के पन्ने फिर से पलट सकता है। गंगा के लिए तो बोल ही सकते हैं।
आदरणीय रेल मंत्री जी
मैं आज पहली बार रींगस जंक्शन स्टेशन पर आया हूं। अपनी गाड़ी का इंतजार कर रहा हूं। इसी दौरान इस दिव्यांग भाई को अपनी बैसाखियां उठाकर सीढियां चढ़ते देखकर मन व्य���ित हो गया। यहां किसी लिफ्ट या एस्केलेटर की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बुजुर्गों, बीमारों और दिव्यांगों को बड़ी परेशानी उठानी पड़ती है। विकल्�� कुछ भी नहीं है। मजबूरी में करना तो सब कुछ पड़ता ही है।
रेल मंत्री जी,
रींगस जंक्शन स्टेशन खाटू श्याम जी मंदिर के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण स्टेशन है। बड़ी संख्या में यहां बुजुर्ग और बीमार भक्त ट्रेनों से आते हैं। उनकी सुविधा के लिए यहां कम से कम एक लिफ्ट का होना बेहद जरूरी है।
हालांकि मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूं कि पिछले कुछ बरसों में बड़ी संख्या में रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प हुआ है और ��ड़ी संख्या में ही लिफ्ट और एस्केलेटर भी लगे हैं। ऐसे में आपसे अपेक्षा भी बढ़ गई है। साइज में छोटे लेकिन धार्मिक महत्व के इस बड़े स्टेशन पर लिफ्ट जैसी सुविधा को उच्च प्राथमिकता पर लिया जाना चाहिए। यहां तीन ही प्लेटफॉर्म हैं इसलिए एक जोड़ी लिफ्ट भी पर्याप्त होगी।
मैं उम्मीद करता हूं कि इस विषय को आप गौर से खुद देखेंगे और खाटूश्यामजी के भक्तों की पीड़ा को समझकर दूर भी करेंगे।
जय श्री श्याम
@AshwiniVaishnaw @RailMinIndia
खाटूश्यामजी के सभी भक्त इस मांग को अपने अपने हिसाब से जरूर उठाएं। अधिक से अधिक रिट्वीट कर सरकार तक बात पहुंचाने में मदद जरूर करें।
#Jaipur राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ ने निकला कैंडल
पदोन्नति में 2 वर्ष के शिथिलन में शर्त को समाप्त करने की मांग को लेकर निकला कैंडल मार्च, महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ सहित क���्मचारी हुए शामिल, कर्मचारियों ने 2026-27 के लिए पदोन्नति में 2 वर्ष के शिथिलन में लगाई गई शर्त' का किया विरोध, कर्मचारियों ने कहा जिन कर्मचारियों ने वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26 के दौरान शिथिलन का लाभ लिया है, उन्हें अब इस वर्ष पदोन्नति में 2-वर्षीय शिथिलन का लाभ नहीं दिया जाएगा, इस शर्त के विरोध में कर्मचारियों द्वारा 'शहीद स्मारक' पर एक कैंडल मार्च निकाला
@Rvishnusharma #LatestNews #RajasthanNews #RajasthanWithZee
माननीय प्रधानमंत्री जी,
जन्मदिन की शुभकामनाएँ अपनी ���गह हैं, लेकिन शिक्षा मंत्रालय का मूल्यांकन शुभकामनाओं से नहीं, परिणामों से होगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का पूरा क्रियान्वयन अभी तक नहीं हुआ है।
अगर राष्ट्रीय शिक्षा नीति इतनी सफलतापूर्वक लागू हो रही है, तो फिर बार-बार ��ेपर लीक क्यों हो रहे हैं? भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएँ क्यों हैं? लाखों युवा वर्षों तक परिणाम और नियुक्ति का इंतज़ार क्यों कर रहे हैं? सरकारी स्कूलों और उच्च शिक्षा की चुनौतियाँ आज भी जस की तस क्यों हैं?
जिन कर्मचारियों को वर्ष 2023-24 में यानी 3 वर्ष पहले पदोन्नति में अनुभव का लाभ मिला, उन कर्मचारियों को भी 2026-27 की पदोन्नति के लिए 2 वर्ष की छूट का मौका दिया जाना चाहिए।
यह 2 ��र्ष की छूट इन कार्मिकों को मिलेगा तो 2027 में एलडीसी, कनिष्ठ लेखाकार, स्टेनोग्राफर, कनिष्ठ अभियंता समेत अन्य दर्जन भर भर्तियों में बड़ी संख्या में पदों पर भर्तियां आयेगी।
यदि यह कार्य नहीं होता है तो आने वाले सालों में ना के बराबर इन भर्तियों में पद मिलेंगे।
बेरोज़गार युवाओं के लिए बड़ी भर्तियों का और कर्मचारियों के लिए पदोन्नति दोनों को राहत पहुंचाने का बहुत बड़ा रास्ता निकल सकता है।
इसलिए माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल जी को वर्ष 2023-24 में जिन कर्मचारियों ने पदोन्नति के लिए 2 वर्ष का अनुभव प्राप्त किया है उनको भी यह छूट ��िलनी चाहिए। @BhajanlalBjp @RajCMO
देश के लाखों युवाओं का विश्वास UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा पर टिका हुआ है, लेकिन आज वही विश्वास सवालों के घेरे में है।
यदि किसी एक कोचिंग संस्थान के कंटेंट से 100 में से 82 प्रश्न आते हैं, तो यह मात्र संयोग नहीं, बल्कि गंभीर जांच का विषय है। युवा जानना चाहते हैं कि उनकी वर्षों की मेहनत और ईमानदार तैयारी के साथ कहीं कोई अन्याय तो नहीं हो रहा है।
NSUI मांग करती है कि UPSC 2026 परीक्षा को लेकर युवाओं द्वारा सामने लाए गए तथ्यों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए तथा पूरी सच्चाई देश के सामने लाई जाए।
युवाओं के सपनों पर चोट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हम नेता प्रतिपक्ष @RahulGandhi जी के साथ हर छात���र की आवाज़ बनकर सड़क से सदन तक संघर्ष करेंगे।
युवाओं के अधिकार, पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए यह लड़ाई जारी रहेगी।
#UPSC
भरतपुर: बजरंग दल वाले मंथली मांगते थे- बोलते थे तेरी दुकान अच्छी चल रही है मंथली देनी पड़ेगी- जूस सेंटर मलिक ने फटकार के भगा दिया- फिर खुद मांस का टुकड़ा लाकर साजिश रची व जानलेवा हमला शुरू कर दिया- पीड़ित ���ूस सेंटर संचालक विक्रम फौजदार ने बताया..
काॅकरोच जनता पार्टी अब जबकि इंस्टाग्राम पर बीजेपी से बड़ी पार्टी बन ही गई है तो अब इसे जमीन पर भी उतर ही आना चाहिए।
महज चार दिन में करीब एक करोड़ सदस्य बनाकर इतिहास तो रच ही दिया गया है। अब चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन वगैरह की कार्रवाई पूरी करके राष्ट्रीय कार्यकारिणी की तत्काल घोषणा की जानी चाहिए। प्रदेश इकाइयों की घोषणा भी जल्द हो।
एक भव्य रोड शो भी होना चाहिए। यह रोड शो गाड़ियों के काफिले की बजाय पैदल ही निकले�� कश्मीर से कन्याकुमारी तक इस प्लान किया जा सकता है।
देश इंतजार कर रहा है
@Cockroach4India @CJP_2029
महिला आरक्��ण और सशक्तिकरण का ढोंग करने वाली भाजपा की 'सच्चाई', जैसे ही नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल जी संसद में बताने लगे तो उनके बोलने का समय समाप्त करते हुए माइक बंद कर दिया गया...!!