@pradip103@narendramodi मोदी का मास्टर स्ट्रोक है बे ,
परमपिता परमेश्वर की असीम अनुकम्पा से अब हम अमेरिका का 51 वां राज्य बन चुके हैं। हमे अब विकसित होने से कोई नही रोक सकता।
अमरीका की कॉलोनी बन कर अब मोदी अमरीका के चुनाव लड़ेंगे
मजा तो तब आएगा, जब गवर्नर मोदी अगला प्रेसिडेंशियल इलेक्शन लड़ेंगे।
“जब RSS पब्लिक में मार्च निकालता है,तो उन्हें Security कौन देता है ?
गृह मंत्रालय Security देता है ! तो मैं जानना चाहता हूँ कि मैं किसे Security दे रहा हूँ !
ये कौन लोग हैं ?
कहॉं शाखा चलाते हैं ?
Funding कौन करता है ?
बताना पड़ेगा !”
@PriyankKharge जी ने RSS की नाक में नकेल डाल दी है 🔥🔥🔥
@LambaAlka जरा सी देरी के लिए उन्हें पेपर नहीं देने दिया गया और ये लोग कह रहे है मोदी एयरपोर्ट पर रुके रहे जब उनको इतना ही फिक्र है तो पेपर क्यों नहीं देने दिया गया जरा सी देरी के लिए ,70 पेपर लीक हुए 17 से ज्यादा बच्चे मर गए तब कहा थे मोदी ?
जिस समय बेटियां कोख़ में मारी जा रही हो उस समय एक ग़रीब पिता अपनी मेहनत और ज़िन्दगी भर की कमाई लगा अपनी बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना लेकर #NEET परीक्षा केंद्र परीक्षा दिलाने पहुँचता है - फिर जो कुछ भी हुआ वह बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है.
कहीं छात्र तो कहीं अभिभावक निराश होकर ग़लत कदम उड़ाने को मजबूर हो रहे हैं- एक भ्रष्ट, नाकार मोदी सरकार है जिसकी संवेदनाएं दम तोड़ चुकी हैं.
यह एक दुर्भाग्यपूर्ण और कड़वा सच है कि हमने गाय, गोबर, गौमूत्र, गंदगी, जात, मजहब, चोरी, छिनैती पॉकेटमारी, झूठ, छल की सियासत वगैरह से अपने देश भारत की छवि, दुनिया भर में इतनी बिगाड़ रखी है कि यह अब सीधे हमारे देश के रेवेन्यू पर असर डाल रहा है.
एक अकेले #NewYork City में एक साल में 60 Million टूरिस्ट पहुंचते हैं.
जबकि पूरे भारत में एक साल में महज 14 मिलियन पर्यटक ही आते हैं.
यह आंकड़ा #WorldBank के प्रेसिडेंट #Ajay_Banga ने दिया है.
भारत जैसे विशाल देश के पास दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक, हर राज्य में अलग संस्कृति, खान-पान, यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स, हिमालय की वादियां और विशाल समुद्र तट हैं—फिर भी एक अकेला शहर #न्यूयॉर्क पूरे देश भारत से से 4 गुना से ज्यादा पर्यटकों को खींच ले जाता है.
पश्चिमी देशों में एक धारणा बनी हुई है कि भारत में घूमना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.जब तक जमीन पर टूरिस्ट पुलिसिंग, साफ-सफाई और पारदर्शी व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, आम विदेशी पर्यटक आने से कतराएगा ही.
विदेशी पर्यटकों के लिए सुरक्षा बहुत बड़ा मसला है. विशेषकर महिला पर्यटकों की सुरक्षा, स्वच्छता और स्कैम, ठगी, ओवरचार्जिंग, छेड़छाड़ आदि कई वजहों हैं जो विदेशियों को यहां आने से रोकती है.
रही सही कसर वो भारतीय पूरी कर देते हैं जो विदेशों में घूमने के नाम पर सड़क पर गरबा भांगड़ा करने लगते हैं. होटलों से सामान चुरा लेते हैं. विदेशी महिलाओं को घूर घूर कर परेशान कर देते हैं....
लेकिन इन सबसे ऊपर जो है वो है हम भारतीयों के basic civic sense की कमी. जो अन्य सभी परेशानियों की भी जड़ है...
लेकिन हम तो हम हैं,
हम नहीं सुधरेंगे...
आज राहुल गांधी का जन्मदिन है लिखने को बहुत कुछ है लेकिन जैसे ही आज फेसुबक खोला तो सबसे पहले भाई Aseem Tiwari की पोस्ट सामने आ गई अब उसे पढ़कर लगा कि आज के दिन इससे बेहतर और कुछ नहीं लिखा जा सकता और हम भी यही लिखते और पढ़कर ये भी लगा कि राहुल गांधी उम्मीद हैं और उस उम्मीद का सुरक्षित रहना भी जरूरी है इसलिए वो स्वस्थ रहें और उनके आसपास के लोग उनकी सुरक्षा का ध्यान रखें। अब आप असीम भाई का लिखा हुआ पढ़िए...✍️
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आज राहुल गांधी छप्पन साल के हो रहे हैं.
यह बधाई किसी दरबारी की आरती नहीं है, यह किसी पार्टी दफ्तर की दीवार पर चिपका पोस्टर नहीं है, यह उस आदमी को याद करने की कोशिश है जिसे इस देश की राजनीति ने सबसे आसान मजाक समझा, और जिसने उसी मजाक को धीरे धीरे अपनी जिद, अपनी यात्रा, अपनी भाषा और अपने धैर्य से एक गंभीर सवाल में बदल दिया.
राहुल गांधी को पसंद करना ज़रूरी नहीं है, उनसे सहमत होना भी ज़रूरी नहीं है, राजनीति में किसी भी नेता को देवता बना देना वैसे भी लोकतंत्र का पहला आलस्य है, लेकिन यह मानना पड़ेगा कि इस आदमी ने उस दौर में चलना चुना जब बाकी लोग उड़ते हुए पोस्टर बनना चाहते थे, इसने उस समय सुनना चुना जब हर तरफ सिर्फ भाषणों का धुआं था, इसने उस समय सवाल पूछे जब सवाल पूछना देशद्रोह, नकारात्मकता, परिवारवाद, टुकड़े टुकड़े और न जाने कितनी सरकारी मुहरों के नीचे दबा दिया गया था.
छप्पन साल की उम्र अपने आप में कोई उपलब्धि नहीं होती, उम्र तो कैलेंडर भी पूरी कर लेता है, फर्क यह है कि इन छप्पन सालों में आदमी ने क्या बचाया, अपनी भाषा बचाई या सिर्फ अपना नारा बचाया, अपना विवेक बचाया या सिर्फ अपनी जयकार बचाई, अपने भीतर मनुष्य बचाया या सिर्फ माइक के सामने खड़ा एक विशाल आकार बचाया.
एक तरफ छप्पन इंच का दावा था, सीना नापकर राष्ट्रवाद बेचने का महान भारतीय स्टार्टअप, मानो देश कोई दर्जी की दुकान हो और देशभक्ति का बिल कपड़े के नाप से बनता हो, दूसरी तरफ छप्पन साल का एक आदमी, जिसने छाती नहीं नापी, सड़क नापी, भीड़ नहीं खरीदी, लोगों के बीच गया, शक्ति का अभिनय नहीं किया, कमजोरी स्वीकार की, और यही बात कई लोगों को सबसे ज्यादा चुभती है.
क्योंकि ताकत का अभिनय करने वालों को सबसे अधिक डर उस आदमी से लगता है जो अभिनय नहीं करता.
राहुल गांधी की राजनीति की सबसे बड़ी बात यह नहीं कि वह हमेशा सही हैं, सबसे बड़ी बात यह है कि वह गलती करने के बाद भी मनुष्य दिखते हैं, वे गुस्से में भी आदमी लगते हैं, हार में भी आदमी लगते हैं, हँसी में भी आदमी लगते हैं, और आज की राजनीति में आदमी लगना भी एक जोखिम भरा काम हो गया है, यहां तो नेता या तो अवतार है या विज्ञापन, या तो महामानव है या महामंच, सामान्य मनुष्य के लिए जगह बची ही कहां है.
उन पर जितना हँसा गया, उतना शायद किसी भारतीय नेता पर नहीं हँसा गया, उनकी टीशर्ट से लेकर दाढ़ी तक, उनकी हिंदी से लेकर चाल तक, उनकी छुट्टियों से लेकर चुप्पियों तक, सब पर व्यंग्य हुआ, और कई बार ठीक भी हुआ, सार्वजनिक जीवन में आलोचना कोई अन्याय नहीं है, मगर एक समय के बाद यह साफ दिखने लगा कि मजाक विचार का नहीं था, मजाक उस संभावना का था जिसमें सत्ता से डरना बंद हो जाए
मैं राहुल गांधी को मसीहा नहीं मानता, मुझे मसीहाओं से दिक्कत है, मसीहा आते ही नागरिकों को भक्त बना देते हैं, और इस देश ने भक्तों की लागत बहुत ज्यादा चुका दी है, मैं राहुल गांधी का इसलिए सम्मान करता हूं कि उन्होंने कम से कम नागरिक को नागरिक कहने की कोशिश की, बेरोजगार को आंकड़ा नहीं कहा, किसान को फोटो अवसर नहीं कहा, छात्र को भीड़ नहीं कहा, मजदूर को राष्ट्र निर्माण का बैकग्राउंड म्यूज़िक नहीं बनाया, उन्होंने ऐसे लोगों की तरफ देखा जिन्हें सत्ता अक्सर कैमरे के बाहर रखती है.
यहां राहुल गांधी की बधाई दरअसल एक आदमी की बधाई नहीं है, यह उस संभावना की बधाई है कि राजनीति में अभी भी करुणा बच सकती है, असहमति बच सकती है, सवाल बच सकते हैं, और सबसे ज़रूरी, शर्म बच सकती है.
शर्म, वही चीज जो आजकल सबसे कम मिलती है.
छप्पन इंच की राजनीति ने हमें सिखाया कि नेता जितना ऊंचा बोलेगा, उतना बड़ा होगा, राहुल गांधी की छप्पन साल की उम्र शायद यह याद दिलाती है कि नेता कभी कभी धीमे बोलकर भी बड़ा हो सकता है, कभी कभी ठहरकर भी बड़ा हो सकता है, कभी कभी हारकर भी बड़ा हो सकता है, और कभी कभी मजाक सहकर भी बड़ा हो सकता है.
जो लोग छप्पन इंच पर फूल चढ़ाते रहे, उन्हें आज छप्पन साल के इस आदमी को देखकर थोड़ी बेचैनी होनी चाहिए, क्योंकि एक छप्पन शरीर का दावा था, दूसरा छप्पन समय की गवाही है, एक छप्पन ने डर पैदा किया, दूसरे छप्पन ने डर के बावजूद बोलना सीखा, एक छप्पन मंच पर गूंजता रहा, दूसरा छप्पन सड़क पर धूल खाता रहा, एक छप्पन ने भक्त पैदा किए, दूसरा छप्पन शायद नागरिकों को याद दिला रहा है कि झुकना कोई राष्ट्रीय कर्तव्य नहीं है.
जन्मदिन मुबारक राहुल गांधी.
कई बार आपसे असहमति रहेगी, सवाल रहेंगे, आलोचना भी रहेगी, लेकिन इस दौर में आपका होना ज़रूरी है, क्योंकि अंधेरे में हर दीया सूरज नहीं होता, पर हर दीया यह प्रमाण ज़रूर होता है कि अंधेरा अंतिम सत्य नहीं है.
छप्पन साल की उम्र में यह आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि है कि जिन्होंने आपको खत्म मान लिया था, वे आज भी आपको समझाने, छोटा करने, मिटाने और मजाक बनाने में अपनी पूरी ऊर्जा खर्च कर रहे हैं.
राजनीति में आदमी की असली मौजूदगी वही होती है, जब उसके विरोधियों की नींद में भी उसका नाम आता रहे.
#HappyBirthdayRahulGandhi
ग़ुलामी! जानते हैं क्या होती है? इस विडीओ में समझ आएगा।
समस्या भाषा नहीं है, नरेंद्र मोदी अंग्रेज़ी नहीं बोल पाते, इसलिए हिन्दी बोल रहे हैं और अनुवादक अंग्रेज़ी में बोल रहा है, यहाँ तक कोई दिक़्क़त नहीं है।
दिक़्क़त है शब्दों में, दिक़्क़त है बॉडी लैंग्वेज की, दिक़्क़त है राग-दरबारी गाने से। आमतौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति को 'मिस्टर प्रेसिडेंट' कह कर सम्बोधित किया जाता है। लेकिन यहाँ नरेंद्र मोदी उन्हें बार-बार 'एक्सेलेन्सी' कह रहे हैं। ये है सबसे बड़ी ग़ुलामी की निशानी।
अब आते हैं शब्दों पर। नरेंद्र मोदी, डॉनल्ड ट्रम्प की किस बात के लिए भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे हैं? पूरी दुनिया में तहलका मचाने के लिए? पश्चिमी एशिया में कौन सी शांति स्थापित की ट्रम्प ने, जिसकी नरेंद्र मोदी इतनी तारीफ़ किए जा रहे हैं?
हमारे नाविक मारे गए, उसके लिए इतने मीठे शब्दों में अनुनय-विनय? कि उनकी जान की रक्षा महत्वपूर्ण है? माना कि डिप्लोमैटिक बातचीत में आप किसी का कॉलर नहीं पकड़ सकते, लेकिन इतना घिघियाया भी नहीं जाता। आपको बोलना चाहिए था कि भारत शान्ति का पक्षधर ज़रूर है, लेकिन भारत की सेनाओं ने चूड़ियाँ नहीं पहन रखी हैं। अमेरिका की ऐसी कोई भी धृष्टता, हमारे सम्बन्ध हमेशा के लिए चौपट कर सकती है।
आप हाथ में पर्ची लिए एक-एक लाइन डर-डर के बोल रहे हैं, आपका हलक़ सूखा जा रहा है। बुला लीजिए किसी बॉडी लैंग्वेज एक्स्पर्ट को, और पूछिए उससे कि क्या ये विडीओ देख कर ऐसा नहीं लग रहा है कि शहंशाह के दरबार में बैठा एक मुलाज़िम, उस शहंशाह की शान में क़सीदे पढ़ रहा है?
पुराने ज़माने में अगर बादशाह सलामत किसी को चाकू फेंक कर मारें और निशाना चूक जाए तो दरबारी कहते थे कि 'ख़ंजर ने ना-फरमाबरदारी कर दी' मतलब चाकू ने महराज के आदेश की अवहेलना की है। आप भी कुछ वैसा करते नज़र आ रहे हैं।
@narendramodi जी, पूरी दुनिया में एक सनकी ने जीना हराम कर रखा है, और आप उसे 'शान्ति के प्रयासों' के लिए धन्यवाद कर रहे हैं?
बेहद शर्मनाक है ये!
Görüntüler Batı Şeria'nın Nablus şehrine bağlı Hawwara kasabasından,israil askeri Filistin'li genci ailesinin yanında zorla kaçırmak istiyor, genç itiraz edince orada yargısız infaz yaparak katlediyor, dünya, israil terörünü konuşmuyor !
सवाल तो खड़ा होगा ही मोहन भागवत को जो सुरक्षा मिली है वो मेरे, आपके, राहुल गांधी, ममता बनर्जी के और इस देश के ,150 करोड़ आम नागरिकों के करोड़ों के टैक्स से उसका खर्च उठाया जा रहा है। भाई भागवत जी आप हो कौन?
प्रियांक खड़गे सही डायरेक्शन में सवाल कर रहे हैं कि जो 2500 से ज्यादा ज्ञात और हजारों अज्ञात संस्थाएं तुम चला रहे हो उसकी कमाई कहां से आती है।
प्रियांक @PriyankKharge को बताना चाहिए कि जब यह RSS अमेरिका में अपनी संस्था का विस्तार करता है तो वहां रजिस्ट्रेशन कराते हैं टैक्स देते हैं लेकिन भारत में नहीं देते। क्यों नहीं कराते भाई? तुम हो कौन कि तुम्हे सुरक्षा चाहिए? तीन बार बैन किए जा चुके हो। गांधी हत्या के आरोपियों का गुणगान करोगे और तुम रजिस्ट्रेशन नहीं कराओगे।
"चंपत राय ने 3 करोड़ की जमीन 24 करोड़ में ख़रीदी। ये नजूल की जमीन है जो न खरीदी जा सकती है, न बेची जा सकती है। चंदा चोरी का ऐसा खेल चल रहा जो आप सपने में भी नहीं सोच सकते।"
- संजय सिंह
निशब्द हूँ
ट्रेन की एक भरी बोगी में इस देश के एक युवा ने तड़प तड़प के दम तोड़ दिया
यह सच कैसे स्वीकारा जाए - यह कितना भयावह है
इतना बेबस तो मेरा देश कभी नहीं था
दूध का कारोबार करने वाले भाई ने नितिन गड़करी से प्रभावित होकर M 20 दूध लाने का सोचा है - 20% मिनरल वाटर युक्त दूध 😂😂
यदि आप M-20 और M-80 को उसी रूप में रखना चाहते हैं, तो परिष्कृत पाठ इस प्रकार होगा:
आगे चलकर M-20 दूध को एक साल के भीतर हम M-80 दूध भी देने लगेंगे, यानि 80 प्रतिशत मिनरल वाटर युक्त दूध, इसके कई चमत्कारिक फायदे हैं और ये जेब पर भी काफी हल्का होगा, लगभग 20 रुपये लीटर 😆
सवाल पूछा तो पूरा चैनल बंद कर दिया!
अभिसार शर्मा सरकार से तीखे सवाल पूछते थे, इसलिए न्यूज़क्लिक पर ED, IT और दिल्ली पुलिस ने छापेमारी कर दी।
चैनल मालिक प्रबीर पुरकायस्थ 5 महीने के लिए जेल गए, अभिसार को पूछताछ में घसीटा गया।
बैंक खाते बंद हुए चैनल बंद हुए 100 लोग अचानक बेरोजगार हो गए।
अब अदालत का फैसला आया कि सारी कार्रवाइयाँ गलत और अवैध थीं।
जिन 100 परिवारों की रोजी-रोटी छीन ली गई, उनका नुकसान कौन भरेगा...
सरकार मुआवजा देगी?
AAP सरकार ने बेरोजगार युवाओं पर लाठी चलवाई है।
ये युवा 2600 अप्रेंटिसशिप यूनियन से जुड़े हैं, जो पटियाला में बिजली बोर्ड के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे।
आम आदमी पार्टी ने चुनाव से पहले युवाओं को नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन अब उन्हें लाठियां दी जा रही हैं।
📍 पंजाब
ग़ज़ब का देश है
लाखों बच्चों को नौकरी दिलाने वाले खान सर आज फैजल खान हो गए
सस्ती और अच्छी शिक्षा देने वाला khan sir आज माफिया हो गए
हॉस्पिटल खोलकर सस्ता इलाज दिलाने वाले खान सर आज देशद्रोही हो गया
अपने पीटते गार्ड को बचाने के लिए खान सर पर FIR हुई है और अब कभी भी गिरफ्तारी हो सकती है