आज यूथ कांग्रेस ने यह पुस्तक नहीं जलायी होती तो नेहरू जी समय से चल रही देश को मनुस्मृति से चलाने की कुप्रथा चलती ही रहती। मनुवादी नेहरू, इंदिरा, राजीव के संस्कारों से देश को मुक्त कर के संविधान के प्रति समर्पित करने के लिए है इस वंश में @RahulGandhi का अवतार हुआ है।
चित्रकूट धाम में आई मंदाकिनी नदी की बाढ़ इतनी विकराल है कि रामघाट में जहाँ फुटओवर ब्रिज तक डूब गया है. जो कि नदी तल से 35-40 फीट ऊंचाई पर होगा. शहर पूरी तरह से कट गया है. कई कॉलोनियों में पानी छत तक पहुँच गया है. आसपास के दर्जनों गांव पूरी तरह कट चुके हैं. क्षेत्र की कई छोटी नदियाँ सब विकराल रूप में हैं.
#flood #chitrkoot #satna
ट्विटर का आज की तारीख में क्या रोल रह गया है?
मेरी अपनी समझ में आज ट्विटर सूचना देने, विचारों का स्वस्थ आदान-प्रदान कराने अथवा सरकारों और संस्थाओं से प्रश्न पूछने का मंच कम रह गया है, लोगों को आपस में लड़ाने और हर समय यह विश्वास दिलाने का माध्यम अधिक बन गया है कि देश का प्रत्येक व्यक्ति किसी दूसरी जाति, धर्म, प्रदेश या विचारधारा के व्यक्ति का दुश्मन हो चुका है।
जब ट्विटर आया था, तब ऐसा लगता था कि यह एक लोकतांत्रिक मंच बनेगा, जहाँ सामान्य व्यक्ति भी सीधे अपनी बात रख सकेगा, सरकारों से प्रश्न पूछ सकेगा और मुख्यधारा के समाचार माध्यमों से बाहर की जानकारी प्राप्त कर सकेगा, लेकिन धीरे-धीरे यह पूरा मंच राजनीतिक प्रचार, गुमनाम पहचानों, आधी-अधूरी सूचनाओं और जानबूझकर पैदा किए गए विवादों के हाथों में चला गया।
पहले किसी खाते के साथ नीला निशान देखकर यह माना जाता था कि उस व्यक्ति की पहचान सत्यापित है, लेकिन अब सत्यापन के नाम पर पैसा दीजिए और नीला निशान ले लीजिए, उसके बाद आप अपने खाते का नाम “राजपूताना”, “पंडित जी”, “शर्मा जी का बेटा”, “सनातनी योद्धा” या कुछ भी रखकर किसी भी जाति, धर्म और समुदाय की ओर से बोलना शुरू कर सकते हैं, जबकि किसी को यह मालूम नहीं होता कि उस खाते के पीछे वास्तव में कौन बैठा है।
वह व्यक्ति उसी समुदाय का है भी या नहीं, वह किसी राजनीतिक दल के लिए काम कर रहा है, किसी संगठित प्रचार तंत्र का हिस्सा है, विदेश में बैठकर यह सब चला रहा है अथवा केवल विवाद पैदा करके अपनी पहुँच और कमाई बढ़ाना चाहता है, इसका पता लगाने की न तो कोई कोशिश करता है और न ही ट्विटर हमें इसके बारे में कुछ बताता है।
“शर्मा जी का बेटा” नाम का खाता मुसलमानों के बारे में लिख रहा है, “राजपूताना” नाम का खाता बता रहा है कि देश में राजपूतों को कोई पूछ नहीं रहा, कोई कथित सरदार खाता ब्राह्मणों को गाली दे रहा है और कोई कथित ब्राह्मण खाता ठाकुरों को अपमानित कर रहा है, लेकिन हम केवल उस खाते का नाम और तस्वीर देखकर उसकी बात को पूरे समुदाय की बात मान लेते हैं तथा एक ऐसे व्यक्ति के कारण पूरे समाज से दुश्मनी पाल लेते हैं जिसका नाम, चेहरा, उद्देश्य और वास्तविक पहचान तक संदिग्ध है।
संभव है कि मूल खाता नकली हो, लेकिन उससे पैदा होने वाली नफरत बिल्कुल असली होती है। यही ट्विटर का सबसे खतरनाक खेल है, क्योंकि वह समाज में मौजूद मतभेदों को केवल दिखाता नहीं है, बल्कि सबसे उग्र, सबसे अपमानजनक और सबसे भड़काऊ बात को उठाकर हमारे सामने इस प्रकार प्रस्तुत करता है जैसे पूरा देश उसी भाषा में सोच रहा हो, जबकि वास्तविक भारत में यही लोग एक साथ काम कर रहे होते हैं, व्यापार कर रहे होते हैं, एक-दूसरे के घर जा रहे होते हैं, त्योहारों में शामिल हो रहे होते हैं और आवश्यकता पड़ने पर एक-दूसरे की सहायता भी कर रहे होते हैं।
कुछ समय ट्विटर पर बिताइए और आपको लगने लगेगा कि भारत पूरी तरह बर्बाद हो चुका है, चीन प्रत्येक क्षेत्र में हमसे बहुत आगे निकल गया है, अमेरिका समाप्त होने वाला है, इंडोनेशिया हमसे आगे पहुँच चुका है, हर संस्था बिक चुकी है, प्रत्येक समुदाय संकट में है और देश में अब कुछ भी अच्छा नहीं बचा है, जबकि जमीन पर वास्तविकता कभी भी इतनी सरल, एकतरफा और नाटकीय नहीं होती।
सरकार अपना प्रचार चला रही है, विपक्ष अपना प्रचार चला रहा है, राजनीतिक समर्थक अपने नेताओं को महान सिद्ध करने में लगे हैं, विरोधी उन्हें देश की प्रत्येक समस्या का कारण बता रहे हैं और अनगिनत गुमनाम खाते जाति तथा धर्म के नाम पर ऐसा वातावरण बना रहे हैं जैसे भारत में सामान्य जीवन समाप्त हो चुका है।
मेरा शुरू से मानना है कि ट्विटर को देश की वास्तविक स्थिति समझने का माध्यम मानना ही सबसे बड़ी भूल है, क्योंकि ट्विटर भारत नहीं है, बल्कि वह भारत की सबसे नाराज़, सबसे शोर मचाने वाली, सबसे संगठित और सबसे अधिक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई परछाईं है।
वहाँ जाइए, कुछ अच्छे और विश्वसनीय लोगों को पढ़िए, उपयोगी जानकारी प्राप्त कीजिए, स्वस्थ व्यंग्य और हास्य का आनंद लीजिए और फिर बाहर निकल आइए, लेकिन किसी गुमनाम खाते की जातीय या धार्मिक गाली देखकर अपने मित्र, पड़ोसी, सहकर्मी अथवा किसी पूरे समुदाय के प्रति धारणा मत बनाइए।
जब भी कोई पोस्ट पढ़कर अचानक बहुत गुस्सा आए, प्रतिक्रिया देने से पहले केवल इतना पूछ लीजिए कि क्या मुझे वास्तव में मालूम है कि इस खाते के पीछे कौन बैठा है, और कहीं वह व्यक्ति मुझसे ठीक वही प्रतिक्रिया तो नहीं चाहता जो मैं अभी उसे देने जा रहा हूँ?
संभव है कि इसी एक प्रश्न से बहुत सारा प्रचार, बहुत सारी नफरत और बहुत सारी बेवजह की लड़ाई वहीं समाप्त हो जाए।
येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
जिस प्रकार दानवों के महाबली और पराक्रमी राजा बलि को रक्षा सूत्र (धर्म के बंधन) से बांधा गया था, उसी प्रकार हे रक्षासूत्र! मैं तुम्हें (इस कलाई पर) बांधती/बांधता हूँ। हे रक्षे (रक्षासूत्र)! तुम सदा स्थिर रहना, स्थिर रहना (अर्थात मेरी रक्षा के संकल्प से कभी विचलित मत होना)।
यह धर्मो रक्षति रक्षितः का ही एक स्वरूप है। तुम धर्म की रक्षा करो तो धर्म ही तुम्हारी रक्षा करेगा।
यह इतना सुंदर है कि भ्रातृ प्रेम के अंधे समर्पण में हिंदू बहन भाई की अधर्म और अनैतिकता को कवच नहीं देती है। वरन् उसे धर्म से बाँध के उसके सदाचार को ही उसकी सुरक्षा का ढाल बनाती है। यह हिंदू धर्म का सौंदर्य है कि अनैतिक हो तो ना आपका वर्ण आपकी रक्षा करेगा ना आपका रिश्ता। इसी निरपेक्ष नैतिकता से स्वस्थ समाज बनता है।
#Rakshabandhan #रक्षाबंधन धन्यवाद @Garima1907 राखी मिली ❤️🥰
मनुस्मृति का कथित अनुवाद करने वाले विलियम जोन्स की सच्चाई कम लोगों को पता होगी। उसने क्यों कहा था कि Manusmriti के रहते हिंदुओं को ईसाई बनाना असंभव है। पूरी डॉक्यूमेंट्री फिल्म: https://t.co/6edBKoKRLh
#WATCH दिल्ली। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने एक देश एक चुनाव पर कहा, "...ये कैसे मुमकिन होगा? किसी विधानसभा में अगर बहुमत कम हुआ या फिर किसी कारण से सरकार गिर गई तो फिर अगला चुनाव बचे हुए समय के लिए ही होगा, इसमें पैसा खर्च नहीं होगा क्या? यह देश के अंदर मुमकि ही नहीं है।"
AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर उन्होंने कहा, "भीमराव अंबेडकर के संविधान से तो इनका (भाजपा) वास्ता तो दूर-दूर तक नहीं है। ये बाबा साहेब के दिए हुए संविधान को रौंदना चाहते हैं। इन्हें बस ताकत नहीं मिल पा रही है।"
कांग्रेस का महिला विरोधी और अनुसूचित विरोधी चरित्र आज सबके सामने है।
आज कर्नाटक और हिमांचल की कैबिनेट में कोई महिला मंत्री नहीं है, इससे बड़ा महिला विरोध क्या हो सकता है। तथ्यात्मक बातें कही हैं @IGuruPrakash जी ने।
2020 में यह तिलचट्टा बारहवीं की परीक्षा दे रहा होगा, तब से यह इस्तीफ़ा माँग रहा है, लगता है इसने अपने पिता श्री से भी पिता होने का इस्तीफ़ा माँग लिया होगा इसलिए बाप का नाम इसकी ज़िन्दगी से कट गया 🙄😐😑
हेलो @grok!
नीचे @rajkumarbhatisp नामक विद्वान ने जो कॉपी पेस्ट किया है, उसका परीक्षण करके सत्य असत्य का निर्वचन करो।
यह भी बताना कि राजकुमार भाटी की मंशा क्या है?
मंडल जी, एक समय था जब आप दासता, गुलामी, ऊँच-नीच, और दलित उत्पीड़न के खिलाफ तर्क देते थे। आज आप दासता के समर्थन में तर्क तलाश कर रहे हैं। यह आत्म परिवर्तन है या आत्म हत्या?
Imagine how badly Rahul Ji has gotten under the BJP’s skin.
On one hand, @KirenRijiju can’t even go for a half-naked swim without invoking @RahulGandhi.
On the other, senior citizen @girirajsinghbjp has been reduced to calling himself a 74-year-old “new baby born”
Ye kya haal kar rakha hai aapne inn sab ka Rahul ji?
बीजेपी और आरएसएस के इशारे पर कुछ मनुवादी जमूरे आजकल आरक्षण विरोधी अभियान चला रहे हैं । इनका कहना है कि आरक्षण जातिगत आधार पर नहीं आर्थिक आधार पर होना चाहिए । इन जमूरों से और उनके राजनीतिक आकाओं से मेरा सवाल है कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के काकोरी स्थित माता शीतला मंदिर में विधायक जय देवी कौशल के साथ जो अपमानजनक और उपेक्षापूर्ण व्यवहार हुआ है, वह जातिगत आधार पर हुआ है या आर्थिक आधार पर ? अगर इस सवाल का जवाब आप दे सकें तो आपके कुतर्क पर थोड़ा बहुत विचार किया जा सकता है ।
जय देवी कौशल मलिहाबाद सीट से भारतीय जनता पार्टी की विधायक हैं । उनके पति कौशल किशोर दो बार बीजेपी के सांसद और केंद्र में मंत्री रह चुके हैं । निश्चित तौर पर जय देवी कौशल ना तो आर्थिक रूप से कमजोर हैं ना सामाजिक और राजनीतिक रूप से । किंतु जिस मंदिर के लिए उन्होंने अपने प्रयास से एक करोड रुपए की आर्थिक मदद कराई उसी मंदिर के जीर्णोद्धार के अवसर पर आयोजित पूजा में उन्हें ना अगरबत्ती जलाने दी गई ना नारियल फोड़ने दिया गया और ना पूजा में बैठने दिया गया । वजह केवल एक थी कि वह किसी मनुवादी वर्ग से न होकर दलित पासी समाज से आती हैं । पीडीए समाज का हिस्सा हैं।
मनुवादियों के द्वारा पीडीए के अपमान का यह कोई नया और अकेला किस्सा नहीं है । इसका एक लंबा इतिहास है । इसी इतिहास में शम्बूक की गर्दन काटना आता है और एकलव्य का अंगूठा काटना भी । बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को क्लास वन अफसर होते हुए पूरे शहर में किसी ने मकान किराए पर नहीं दिया था । केवल इसलिए कि वे दलित जाति से आते थे । देश के रक्षा मंत्री जगजीवन राम ने जब बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में डॉ संपूर्णानंद की प्रतिमा का अनावरण किया था तो मनुवादियों ने उस प्रतिमा को गंगाजल से धुलवाया था । उत्तर प्रदेश के शानदार मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव जी ने 2017 में चुनाव हारने के बाद जब मुख्यमंत्री आवास खाली किया तो मनुवादी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उस आवास को गंगाजल से धुलवा कर पवित्र करवाया था । 2024 के लोकसभा चुनाव में श्री अखिलेश यादव जब कन्नौज के एक मंदिर में पूजा करके आए तो बाद में मनुवादी पुजारियों ने उस मंदिर को गंगाजल से धुलवाया ताकि एक शूद्र के प्रवेश से अपवित्र हुआ मंदिर पवित्र हो सके ।
ऐसे उदाहरणों से भारत का इतिहास और वर्तमान भरा पड़ा है । मैं यह नहीं कहता कि हर देशवासी जातिवाद का शिकार है । मैं यह भी नहीं कहता कि कुछ जातियों के सभी लोग जातिवाद करते हैं । सभी जातियों में अच्छे, समझदार, मिलनसार और समानता की बात करने वाले लोग हैं । लेकिन जिन लोगों के दिमाग में यह जातिवादी कूड़ा भरा हुआ है वे भारत की एक बड़ी बीमारी हैं । और इस बीमारी का इलाज करना बहुत जरूरी है । वरना ये लोग पूरे भारत को बीमार करके मृत्युशैया की ओर ले जाएंगे ।
एक बात पीडीए समाज के लोगों से कहना चाहता हूं । जय देवी किशोर और कौशल किशोर हमारी विरोधी पार्टी भाजपा के नेता हैं । मेरा उनसे कोई व्यक्तिगत परिचय भी नहीं है । किंतु जय देवी का अपमान मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी बहन का अपमान किया गया हो । और इस पर मुझे गुस्सा आया । इसलिए अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहा हूं । पीडीए समाज के लोग जिस दिन पीडीए के हर व्यक्ति के खिलाफ होने वाले अपमानजनक व्यवहार को खुद का अपमान मानने लगेंगे और उस पर मुखरता के साथ प्रतिक्रिया देने लगेंगे, ये मुट्ठी भर मनुवादी बिलों में छुप जाएंगे । यह मेरा दावा है । जागो पीडीए जागो ।