बाअदब, बामुलाहिज़ा, होशियार!
शहंशाह मोदी मुंबई जा रहे हैं। उनकी नजरों को गरीबी न दिखे इसका इंतजाम कर दिया गया है।
हर बार की तरह गरीबों के घरों को ढक दिया गया, ताकि शहंशाह का गरीबी देख मन खराब न हो।
शहंशाह इस मर्तबा दरियादिल हैं, उन्होंने गुजरात की तरह दीवार नहीं खड़ी करवाई।