लाइब्रेरियन भर्ती चढ़ी इगो की भेंट 😔
@alokrajRSSB जी कहते हैं — जांच पूरी हो चुकी है, क्लियर रिपोर्ट आते ही रिजल्ट जारी कर देंगे।
वहीं SOG का कहना है — लाइब्रेरियन भर्ती से जुड़ा कोई परिवाद हमारे पास दर्ज ही नहीं है, विभाग ने सिर्फ मदद मांगी थी, हमने दे दी… हमारे पास कोई रिपोर्ट नहीं है।
दूसरी तरफ विभाग का दावा — रिपोर्ट RSSB बोर्ड को भेज दी गई है, 4-5 बार पत्र भी लिख चुके हैं… अब रिजल्ट जारी करना पूरी तरह बोर्ड के हाथ में है।
❗अब सवाल ये है —
आखिर अभ्यर्थी जाए तो जाए कहाँ…?
एक तरफ विभाग, दूसरी तरफ बोर्ड, और बीच में फंसा बेरोजगार युवा…
@alokrajRSSB जी, इन अभ्यर्थियों की क्या गलती है?
जिन्होंने मेहनत से परीक्षा पास की… आज वही नौकरी होते हुए भी घर बैठने को मजबूर हैं।
ये सिर्फ भर्ती नहीं, हजारों युवाओं के भविष्य का सवाल है।
@arvindchotia@RajCMO@madandilawar@BhajanlalBjp@educationnagari
कभी बड़ा असहाय महसूस होता था जब चर्चित पॉडकास्टों में ऐसे मेहमानों को बुलाया जाता था जो राजपूत इतिहास का सार्वजनिक रूप से उपहास करते थे, उसे तोड़मरोड़ कर प्रस्तुत करते थे। उस समय न तो राजपूतों के पास अपना मंच था, न प्रभावी प्रतिनिधि। लेकिन इतिहासविद् राजवीर सिंह चालकोई ने रणवीर इलाहाबादिया के पॉडकास्ट में जिस स्पष्टता, तथ्यों और ठोस प्रमाणों के साथ राजपूत इतिहास को प्रस्तुत किया, उसने सचमुच संतोष से भर दिया।
पॉडकास्टर का झुकाव भले ही बार-बार बातचीत को महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान तक सीमित कर हिंदू बनाम तुर्क का कोण देने की कोशिश करता दिखा, लेकिन राजवीर सर ने परिपक्वता के साथ चर्चा का दायरा व्यापक रखा। उन्होंने उन अनेक राजपूत योद्धाओं को भी सामने रखा, जिनका योगदान राजस्थान के इतिहास में तो दर्ज है, पर मुख्यधारा के इतिहास लेखन में जिन्हें अक्सर “क्षेत्रीय” कहकर हाशिए पर डाल दिया गया। अर्नोराज, महाराजा जयचंद गहड़वाल, दुर्गादास राठौड़, गोगाजी चौहान, नायिकादेवी चंदेल और विग्रहराज चौहान जैसे योद्धाओं का उल्लेख कर उन्होंने अपनी धरती और विरासत के प्रति दायित्व निभाया है।
आशा है कि आज की पीढ़ी यह समझेगी कि वर्तमान समय में शिक्षा ही सबसे प्रभावी शस्त्र है। राजवीर सर शतायु हों, यही कामना है।
रूचि तिवारी ने सुनाई आपबीती
तू ब्राह्मण है,तेरा नंगा परेड निकालेंगे कपड़े फाड़े जा रहे थे
क्या ब्राह्मण होना गुनाह है
क्या पुलिस SC/ST के लिए क्या जनरल के लिए नहीं है
हिंदुओं अगर बहन का साथ नहीं देंगे तो आप हिंदू के नाम
पर आप कलंक हो शेयर करते रहो
पैदा हुई तो सरकारी योजनाओं से वंचित हुई क्योंकि ठाकुर थी।
स्कूल गई तो सरकारी छात्रवृतियों से वंचित हुई क्योंकि ठाकुर थी।
कॉलेज गई तो सबसे ऊँचा कटऑफ लाना पड़ा क्योंकि ठाकुर थी।
नौकरी करने गई तो सबसे महंगा फॉर्म भरना पड़ा क्योंकि ठाकुर थी ।
फिर क्यों ना यह लड़की गर्व से ख़ुद को ठाकुर कहे।
-मैं तो कहता हूँ सरकार को अनारक्षित वर्ग के आधार कार्ड पर लिख के देना चाहिए कि यह वहीं त्यागी लोग है, जो इस देश में परजीवियों को पाल रहे हैं।
Slashing the tax exemption on pension of disabled army veterans is an insensitive, harsh and cruel move.
Withdrawing tax exemption breaks the State’s promise to those who stood for us when it mattered most.
This must be reversed in the interest of the Nation and its protectors.@FinMinIndia@SpokespersonMoD
Veterans slam tax on disability pension
The proposed tax on disabled soldiers is wrong. These soldiers continued their service even after getting injured, completed their tenure, and now suffer lifelong health problems because of those injuries. Taxing their disability pension is unjust: Col RL Bhanot (R)speaks to @gauravcsawant
यूजीसी विवाद में बीच देश की महामहिम राष्ट्रपति ने अपने ऑफिशियल ट्वीट के माध्यम से कहा
मेरी सरकार, दलितों, पिछड़ों, वंचितों, जनजातीय समाज, सभी के लिए पूरी संवेदनशीलता से काम कर रही है !
इस ट्वीट पर वर्ल्ड वाइड मशहूर पत्रकार Chitra Tripathi जी ने दिल जीतने वाला रिप्लाई करते हुए कहा
सरकार सामान्य वर्ग के लिए भी पूरी संवेदनशीलता से काम करेगी ? और उम्मीद है की राष्ट्रपति के अगले अभिभाषण में
सामान्य वर्ग का भी जिक्र होगा 🔥
आपको बता दें की राष्ट्रपति जी के इस ट्वीट पर X ने कम्युनिटी नोट भी भेज दिया है 😂
@Didwana_jhalko भाईसाहब थोड़ा banwasa में आकर स्कूल वाला रास्ता देखना बच्चे कितनी मुश्किल से स्कूल जाते है पूरा रास्ता कीचड़ और गंदगी से भरा पड़ा है। पंचायत को चुने हुए पांच साल हो गए कुछ काम नहीं किया। और सांसद कोटे से स्वीकृत स्कूल का टीन शेड के फर्श की घिसाई तक नहीं की है।
जिस प्रखंड ज्ञानी जी को हिंदुओं ने सदैव सपोर्ट किया वो अपनी कुर्सी बचाने के चक्कर में मौन धारण करके बैठे हुए है,
@SudhanshuTrived जी, कैसे नींद आती होगी जब इतना घोर अधर्म हो रहा है और आप द्रोणाचार्य बने बैठे है ?
और आप कहा है @sambitswaraj जी ?
आपकी अंतरात्मा आपको धिक्कारती नहीं है ?
#UGC_RollBack #UGC_काला_कानून_वापस_लो #UGCRegulations
अधर्म हो रहा है और आप मौन है तो आप भी अधर्मी है।
न्याय तभी सार्थक माना जा सकता है, जब वह सभी नागरिकों के लिए समान, निष्पक्ष और संतुलित रूप से लागू हो। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी नई इक्विटी रेगुलेशन्स में संतुलन के अभाव के कारण उच्च शिक्षण संस्थानों में चिंता, भ्रम और असुरक्षा का वातावरण बन रहा है।
यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि भेदभाव की परिभाषा को सीमित दायरे में क्यों रखा गया है, तथा झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों की स्थिति में उत्तरदायित्व तय करने और दंड देने का स्पष्ट प्रावधान क्यों नहीं है। संतुलित और समावेशी प्रतिनिधित्व के बिना गठित समितियाँ न्याय के वास्तविक उद्देश्य को पूर्ण नहीं कर पातीं और उनके निर्णय कई बार केवल औपचारिक बनकर रह जाते हैं।
इन नियमों को संविधान के समानता, निष्पक्षता और गरिमा के सिद्धांतों के अनुरूप जाति-निरपेक्ष, पारदर्शी और सभी के लिए सुरक्षित बनाया जाए, ताकि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के अधिकारों और सम्मान को क्षति न पहुँचे।
सरकार से विनम्र आग्रह है कि वह विधि के शासन और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा, सम्मान और न्याय सुनिश्चित करे, जिससे शिक्षा संस्थानों का वातावरण विश्वासपूर्ण, न्यायसंगत और भयमुक्त बना रहे।
@narendramodi@dpradhanbjp@ugc_india@BhajanlalBjp #UGCRegulations
इतिहास के दोहरे मापदंडों पर अब गहन विवेचना होनी चाहिए जहाँ बाहरी आक्रांताओं और उपनिवेशी ताकतों के भीषण अत्याचारों को ‘अतीत की बात’ कहकर भुला दिया जाता है, जबकि भारतीय समाज के एक वर्ग को निरंतर ‘ऐतिहासिक अपराधी’ के रूप में चिन्हित कर वर्तमान में प्रतिशोध का निशाना बनाया जा रहा है।