मौलवी जी को सुन कर,प्रभु-कृपा से मुझे फ़ारसी के मशहूर कवि मसीह थानेसरी जी की सैंकड़ों वर्ष पूर्व,सीता जी पर फ़ारसी में लिखी कविता याद आ गई जो नेशनल म्यूज़ियम में आज भी सुरक्षित है।
तन–श रा पैरहन उरियान् न दीदे
चू जान् अन्दर तन् ओ तन् जान् न दीदे।
تنش را پیرهن عریان ندیده
چو جان اندر تن و تن جان ندیده
सीताजी के कपड़ों ने भी उन्हें कभी कपड़ों के बिना नहीं देखा था।
जिस तरह आत्मा शरीर के अन्दर रहती है,लेकिन शरीर ने कभी आत्मा को नहीं देखा।
Even Sitaji ji’s clothes had never seen her without clothes, just as soul lives inside body,but the body has never seen the soul.
1- ‘जो हमारी बहनों को हाथ लगाएंगे, उनकी लंका लगा देंगे’
2- ‘कपड़ा तेरे बाप का, आग तेरे बाप की, तेल तेरे बाप का, जलेगी भी तेरे बाप की’,
3- 'तेरी बुआ का बगीचा है क्या जो हवा खाने आ गया'
जो लोग “आदिपुरुष” देख चुके हैं क्या कन्फर्म कर सकते हैं कि सचमुच यही डॉयलॉग्स हैं फ़िल्म में ? मुझे यक़ीन नहीं हो रहा हैं !
1- ‘जो हमारी बहनों को हाथ लगाएंगे, उनकी लंका लगा देंगे’
2- ‘कपड़ा तेरे बाप का, आग तेरे बाप की, तेल तेरे बाप का, जलेगी भी तेरे बाप की’,
3- 'तेरी बुआ का बगीचा है क्या जो हवा खाने आ गया'
जो लोग “आदिपुरुष” देख चुके हैं क्या कन्फर्म कर सकते हैं कि सचमुच यही डॉयलॉग्स हैं फ़िल्म में ? मुझे यक़ीन नहीं हो रहा हैं !
@DrHimanshuSoni Checkout these ....low potency .. N second largest market ho gya ab toh ...
Profitable business h bro :
Badiya 4-5 month medicine chalti h aram se dete h dekhle mann ho tera 🤣(6 yr lge ge .... Teri back na lage toh )
Received this on my timeline today. Don’t know how old it is or where it’s from, but I’m awestruck by this gentleman who’s not just faced his disabilities but is GRATEFUL for what he has. Ram, can @Mahindralog_MLL make him a Business Associate for last mile delivery?