एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं
उत्तरप्रदेश विधान परिषद MLC चुनाव मे सपा ने 11 उम्मीदवार उतारा जिसमे एक भी मुस्लिम नेताओं का नाम नहीं।
अब कोई जुम्मन और चमचे मेरे कमैंट्स बॉक्स मे भोकेंगे की यह भाजपा हराने का टेक्निक है।
अबे जुम्मन यह कौनसा टेक्निक है ??
मुसलमानो का अजीमुश्शान रहनुमा सुल्तान सलाउद्दीन अय्युबी। ने आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1187 को किब्ला-ए-अव्वल बैतूल मुक़द्दस को जालिम सलीबियों के नापाक पंजो से आजाद कराये थे #SalahuddinAyubi
शाही जामा मस्जिद उज्जैन...
मध्यप्रदेश में आधी रात शाही जामा मस्जिद बचाने
घर छोड़ मस्जिद में इकट्ठा हुआ मुस्लिम समाज का
बच्चा, बूढ़ा, जवान भारी तादाद में मस्जिद के अंदर
और बाहर मुस्लिम समाज का हुजूम रात भर रहा।
सलाम है आपके जज्बे को... और आपके लिए 👇
उसूलों पर जहाँ आँच आए, तो टकराना ज़रूरी है!
जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है।
सुचना
UP से दरिगैंग के जितने भी मुस्लिम विधायक, सांसद सीमांचल में हमारे AIMIM के मुस्लिम विधायकों को हरवाने के लिए गए थे वो सब तैयार रहे, हम जल्द ही आप सबका हालचाल पूछने आ रहे है
"सुचना समाप्त हुई, धन्यवाद "
The #Houthis come from the same region from which #Abraha once marched against Makkah. Allah protected His Sacred City then, and He will continue to protect it. If even the Dajjal will be unable to enter the two Holy Cities, the Houthis will certainly fail to threaten their sanctity.
अल्लाह तआला ने उलमा-ए-देवबंद को जो इल्मी हैसियत, इज़्ज़त और रुतबा अता फ़रमाया है, वह किसी की आलोचना या नफ़रत से कम नहीं हो सकता।
हैरत की बात तो यह है कि जो बिदअती अपने स्पेस में बैठकर उलमा-ए-देवबंद और देवबंदियों की बुराई करते हैं, उन्हें गालियाँ देते हैं, वही लोग ज़रूरत पड़ने पर उन्हीं उलमा-ए-देवबंद के फ़तवों को हर जगह कोट भी करते हैं।
इल्म और ख़िदमत की अपनी एक पहचान होती है।
उलमा-ए-देवबंद का रुतबा किसी के बोलने से नहीं, उनकी सदियों की इल्मी ख़िदमात से कायम है।
सर वक्फ, सर बुलंद, देवबंद देवबंद
AIMIM के तमाम चाहने वालों से मेरी एक अपील है।
अगर कोई राजनीतिक व्यक्ति AIMIM को ज्वाइन करता है, तो आप उसे सिर पर बिठाते हैं, उसकी तारीफ़ों के पुल बाँधते हैं। लेकिन अगर वही व्यक्ति किसी वजह से मजलिस छोड़ देता है, तो आप उसी पर तंज़ कसने लगते हैं और उसकी आलोचना करने लगते हैं।
क्या आपको नहीं लगता कि आपके इस रवैये से कोई भी बड़ा और क़ाबिल राजनीतिक लीडर भविष्य में मजलिस से जुड़ने से पहले सौ बार सोचेगा?
हर लीडर के अपने समर्थक होते हैं, अपना राजनीतिक सर्कल होता है और उनके साथ व्यक्तिगत रूप से जुड़े हुए लोग होते हैं। किसी का राजनीतिक सफ़र एक दिन में नहीं बनता। इसलिए हमें किसी के मजलिस में आने पर उसका सम्मान करना चाहिए और अगर वह किसी वजह से अलग होता है, तब भी उसके राजनीतिक क़द और उसकी व्यक्तिगत पहचान का सम्मान बरकरार रखना चाहिए।
हमारे इस तरह के बयान और तंज़ मजलिस को मज़बूत नहीं, बल्कि नुक़सान पहुँचा सकते हैं। आज अगर कोई बड़ा राजनीतिक चेहरा मजलिस से जुड़ने में हिचकिचाता है, तो इसकी एक बड़ी वजह मजलिस समर्थकों का यही रवैया हो सकता है।
ज़रा शर्म से सोचिए… क्या यही मोहब्बत है?
नबी ﷺ के नाम पर डीजे बजाकर नाचने वालों से बस इतना सवाल है— जिस हस्ती ﷺ ने हमें हया सिखाई,
क्या उन्हीं के नाम पर बेहयाई का प्रदर्शन करना मोहब्बत है?
ज़रा सोचिए…
हम किसका नाम लेकर क्या कर रहे हैं?
नबी ﷺ की मोहब्बत का दावा करना बहुत आसान है,
लेकिन उनकी सुन्नत के मुताबिक अपनी ज़िंदगी बदलना ही असली इम्तिहान है।
अगर दिल में सचमुच इश्क़-ए-रसूल ﷺ है,
तो डीजे की आवाज़ नहीं, नमाज़ की आवाज़ दिल को प्यारी होनी चाहिए।
नाचने की महफ़िल नहीं, सुन्नत की पैरवी हमारी पहचान होनी चाहिए।
अपने आपको दूसरों के सामने सही साबित करने से पहले,एक बार अपने ज़मीर के सामने खड़े होकर पूछिए—
क्या नबी ﷺ इस तरीके से खुश होंगे?
आज भी वक्त है…
तमाशा छोड़िए, तौबा कीजिए और मोहब्बत को सुन्नत के रास्ते पर लाइए।
मोहब्बत-ए-रसूल ﷺ का सबसे खूबसूरत तरीका है—सुन्नत को अपनी ज़िंदगी में उतारना।
अल्लाह हमें सच्ची मोहब्बत-ए-रसूल ﷺ और सही अमल की तौफ़ीक़ दे। 🤲🏻
केशव मौर्य सिर्फ़ मदरसों पर हमला कर सकते हैं, क्योंकि उनकी कुर्सी दरअसल एक स्टूल है।
जिन्हें अंग्रेज़ों से मोहब्बत हो, उन्हें मदरसे कैसे पसंद आएँगे? मदरसे अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ साज़िशों और आज़ादी की जद्दोजहद के मरकज़ थे। उन्होंने बेशुमार मुजाहिदीन-ए-आज़ादी पैदा किए, जबकि सावरकर अंग्रेज़ों को माफ़ीनामे लिख रहे थे।
आज़ाद भारत का पहला दहशतगर्द गोडसे किसी मदरसे का तालीब-ए-इल्म नहीं था। लेकिन भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद मदरसे में पढ़े थे। मुंशी प्रेमचंद और राजा राम मोहन राय ने भी मदरसे में तालीम हासिल की थी।
दस्तूर का आर्टिकल 30 हर अक़ल्लियती बिरादरी को अपने तालीमी इदारे क़ायम करने और चलाने का हक़ देता है। ये बेहद शर्मनाक है कि एक दस्तूरी ओहदे पर बैठा शख़्स ऐसी ज़हरीली ज़बान इस्तेमाल करे।
मगर जब कुर्सियाँ कम हों, तो स्टूल वालों को अपनी सियासी अहमियत बनाए रखने के लिए ज़हर उगलना ही पड़ता है।
आज 3 अलग राज्यों की एक–एक विधानसभा उपचुनाव का नतीजा आया है।
1)बिहार बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने 18953 वोटो से जीत दर्ज की
2)मध्य प्रदेश दतिया उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी के घनश्याम सिंह ने 6016 वोटो से जीत दर्ज की
3)गुजरात मांजलपुर उपचुनाव में भाजपा के सतेंद्रभाई पटेल ने 30630 वोटो से जीत दर्ज की..!
BJP MLA from Delhi @RaviNegi_mla,
is again targetting Muslim community by sharing a provocative video of a Man name Ganesh Jha pretending to be a Muslim. This was debunked in March by me.
Hello @PIBFactCheck, show some spine, Do your job of calling out people from the BJP.
Hello @narendramodi, Party workers pe bhi ek video banado, Shayad thoda Zaher kam hoga social media pe. Shayad.
लोकसभा में सपा सुप्रीमो @yadavakhilesh ने दिल्ली में पीटे गए युवाओं का मुद्दा उठाया है। अखिलेश के संबोधन के दौरान स्पीकर साहब की ‘निष्पक्षता’ साफ नज़र आ रही है। अखिलेश ने सवाल किया कि क्या बेटियों के कपड़े फाड़ेंगे आप? युवाओं के लिए सदन में क्यों नहीं बोल सकते हैं!