@JaiBihar1409@ews_army It's neither religious scripture nor the holy book of Brahmins. It is merely one among many texts of Hindu theology and philosophy, not an authentic historical document. One who burn the Manusmriti, they end up giving this text far more importance than it actually deserves
@JaiBihar1409@globalmavrick@ews_army Education was decentralized, thriving via local and regional patronage regardless of central empires. Under British rule, these institutions were systematically marginalized as funding shifted to the colonial model, causing their gradual structural and economic erosion.
@JaiBihar1409@ews_army Manusmriti are prescriptive, outlining idealized social hierarchies—not descriptive of actual historical life. Myth or lies it depends upon individuals. I haven't any 52 practicing manu, definitely seen bhimtas burning it.
@JaiBihar1409@ews_army Religious books are not taken as historical sources unless they can be verified. Hardly any Hindu reads or follows the Manusmriti. Those who do are usually Bhimtas, for political reasons
The survey is government documents, it was done by British
@KraantiKumar Mitanni Inscriptions (1400 BCE)
Bogazköy Inscriptions (15th Century BCE)
The Sinauli Excavations (2000 BCE–1800 BCE)
Pali (Buddha's Language) is drived from Sanskrit.
you could have google it but bhimta's want only propaganda
भरत तिवारी ने स्पष्ट बोला था कि न्याय के लिए वो किसी को क्षति नहीं पहुंचायेगा बल्कि खुद का बलिदान देगा। और उस बलिदान के बाद एक ऐसी चिंगारी निकलेगी जो प्रदेश और देश के भ्रष्ट तंत्र को सुधारने का काम करेगी।
#अमर_क्रांतिकारी_भरत_तिवारी
@svembu 🤡you should also mention that U.S. Supreme Court effectively ended race-conscious Affirmative Action programs in 2023. USA didn't have 60% reservation.
अम्बेडकर के बारे में फैलाये गये मिथक और उनकी सच्चाई ?
1-मिथक-अंबेडकर बहुत मेधावी थे।
सच्चाई - अंबेडकर ने अपनी सारी शैक्षणिक डिग्रीयां तीसरी श्रेणी में पास की।
2-मिथक -अंबेडकर बहुत गरीब थे!
सच्चाई -जिस जमानें में लोग फोटो नहीं खींचा पाते थे उस जमानें में अंबेडकर की बचपन की बहुत सी फोटो है, वह भी कोट पैंट और टाई में!
3-मिथक- अंबेडकर ने शूद्रों को पढ़ने का अधिकार दिया !
सच्चाई -अंबेडकर के पिता जी खुद उस ज़माने में आर्मी में सूबेदार मेजर थे! इसके अलावा सविंधान बनाने वाली सविंधान सभा में 26sc और 33st के सदस्य शामिल थे !
4-मिथक- अंबेडकर को पढ़नें नहीं दिया गया।
सच्चाई -उस जमानें में अंबेडकर को गुजरात बडोदरा के क्षत्रिय राजा सियाजी गायकवाड़ नें स्कॉलरशिप दी और विदेश पढ़ने तक भेजा और ब्राह्मण गुरु जी ने अपना नाम अंबेडकर दिया।
5-मिथक- अंबेडकर नें नारियों को पढ़ने का अधिकार दिया!
सच्चाई- सविंधान बनाने वाली सविंधान सभा में 15 महिलाएं शामिल थी जिसमें एक दलित महिला भी शामिल थी और इन 15 महिलाओ ने संविधान बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया!
6- मिथक-अंबेडकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे!
सच्चाई -अंबेडकर नें सदैव अंग्रेजों का साथ दिया भारत छोड़ो आंदोलन की जम कर खिलाफत की एंव जिस साइमन कमीशन ने लालालाजपत राय की हत्या की और भगतसिंह को फांसी हुई, अम्बेडकर अंग्रेजों के उस साइमन कमीशन के साथ थे एंव अंग्रेजों को पत्र लिखकर बोला कि आप और दिन तक देश में राज करिए उन्होंने जीवन भर हर जगह आजादी की लड़ाई का विरोध किया।
7-मिथक -अम्बेडकर बड़े शक्तिशाली थे!
सच्चाई- 1946 के चुनाव में पूरे भारत भर में अंबेडकर की पार्टी की जमानत जप्त हुई थी।
8- मिथक-अंबेडकर नें अकेले आरक्षण दिया!
सच्चाई- आरक्षण संविधान सभा नें दिया जिसमें कुल 299 लोग थे, अंबेडकर का उसमें सिर्फ एक वोट था, आरक्षण सब के वोट से दिया गया था और भारत में कई दलित जातियों को आरक्षण 1909 में ही दे दिया गया था !
9-मिथक-अंबेडकर ने सविंधान बनाया।
सच्चाई- अंबेडकर केवल संविधान की 16 समितियों में से सिर्फ एक प्रारूप समिति के ही अध्यक्ष थे जबकि सविंधान बनाने वाली पूरी संविधान सभा के अध्यक्ष परम् विद्वान डाक्टर राजेंद्र प्रसाद जी थे और सविंधान का मसौदा, ढांचा बी एन राव ने बनाया था !
10-मिथक-अंबेडकर राष्ट्रवादी थे।
सच्चाई-1931में गोलमेज सम्मेलन में गांधी जी से भारत के टुकड़े करनें की बात कर दलितों के लिए अलग दलिस्तान की मांग की थी।
11-मिथक- आरक्षण को लेकर संविधान सभा के सभी सदस्य सहमत थे।
सच्चाई- इसी आरक्षण को लेकर सरदार पटेल से अंबेडकर की कहा सुनी हो गई थी। पटेल जी संविधान सभा की मीटिंग छोड़कर बाहर चले गये थे, बाद में नेहरू के कहनें पर पटेल जी वापस आये थे। सरदार पटेल नें कहा कि जिस भारत को अखण्ड भारत बनानें के लिए भारतीय देशी राजाओं, महराजाओं, रियासतदारों, तालुकेदारों नें अपनी 546 रियासतों को भारत में विलय कर दिया जिसमें 513 रियासतें क्षत्रिय राजाओं की थी।इस आरक्षण के विष से भारत भविष्य में खण्डित होने के कगार पर पहुंच जाएगा।
12-मिथक-अंबेडकर स्वेदशी थे।
सच्चाई- देश के सभी नेताओं का तत्कालीन पहनावा भारतीय पोशाक धोती -कुर्ता, पैजामा-कुर्ता, सदरी व टोपी, पगड़ी, साफा आदि हुआ करता था। गांधी जी नें विदेशी पहनावा व वस्तुओं की होली जलवाई थी। यद्यपि कि नेहरू, गाधीं व अन्य नेता विदेशी विश्वविद्यालय व विदेशों में रहे भी थे फिर भी स्वदेशी आंदोलन से जुड़े रहे।अंबेडकर की कोई भी तस्वीर भारतीय पहनावा में नही है। अंबेडकर अंग्रेजियत के हिमायती थे ।
अंत में कहना चाहते हैं कि अंग्रेज जब भारत छोड़ कर जा रहे थे तो अपने नापाक इरादों को जिससे भविष्य में भारत खंडित हो सके के रुप में अंग्रेजियत शख्सियत अंबेडकर की खोज कर लिए थे।
हमारा उद्देश्य सच्चाई बयां करने की कोशिश करना है। तथ्यों की जानकारी स्वयं अपने स्तर पर भी पता कर सकते हैं। ये सभी तथ्य गूगल पर मिल जायेंगे।
🙏
@IsAwinLooM@mktyaggi Its always bhimtas stealing GCs surname like Pandey, Sharma, Singh, Verma, etc.
SCs/STs/Mahars adopt Rajput, Maratha, or Brahmin surnames to "pass" or gain social/professional advantage
@KraantiKumar claiming "no mention of caste system in Jainism" and "no caste discrimination" is inaccurate.
Jain doctrine teaches spiritual equality of souls, but Jain texts discuss varna/occupational divisions, and Jain society developed its own caste-like groups (e.g., Oswal, Shrimal)
@KraantiKumar Lord Mahavira was the 24th Tirthankara of Jainism" — correct.
In the same way, Lord Buddha was the 28th Buddha of Buddhism" — cute try, but no.
@Shastri_Yog @bramhasmiiii Blaming one caste for millennia of complex socioeconomic issues ignores historical nuance.
Brahmins were not rulling class , they are not majority.
Bhimta were not able dig a well says alot itself.
@immgkj_ This is the same model that was used to generate the fake atrocities. Now they wanna turn ambedkar into some sort of god.
They have mastered the art of fabrication and staging.