मशहूर कंपनी @letsblinkit का घटियापन देखो
अभी लड़का मुझे ऑर्डर डिलीवर करने आया मैंने उस से वैसे ही पूछा की कितने कमा लेते हो उसने बताया भाई सुबह 7 बजे से अब तक केवल 292 रुपए मिले है लेकिन उस ने एक हैरान करने वाली बात बताई
कल एक कस्टमर ने लगभग 2 घंटे ऑर्डर डिलीवरी के लिए वेट करवाया और फिर ऑर्डर कैंसिल कर दिया . ना ब्लिंकिट ने कुछ दिया ना कस्टमर ने
राइडर की क्या गलती है ये blinkit बताए और पालिसी भी पब्लिक करे ऑर्डर कैंसिल और एक्स्ट्रा टाइम पर आप राइडर को क्या देते हो ?
ये राइडरस के साथ धोखा है ब्लिंकिट
सालों बाद कोई कविता लिखी है इरशाद फ़रमाए 😎
असहमति का अंतिम गीत 😎
वे कहते हैं
चुप रहो।
मैं पूछता हूँ
क्यों?
क्या इसलिए
कि सच की आवाज़
सिंहासनों की नींद उड़ा देती है?
या इसलिए
कि सवाल पूछने वाले होंठ
किसी भी तानाशाही को
सबसे अधिक असहज लगते हैं?
वे हँसते हैं
तुम्हारे बोलने से होगा क्या?
तुम्हारे बोलने से बदलेगा क्या?
मैं भी मुस्कुरा देता हूँ।
क्योंकि
नदियाँ भी
पहले एक बूँद ही थीं।
आँधियाँ भी
पहले एक हवा का झोंका थीं।
क्रांतियाँ भी
पहले किसी एक मनुष्य की
बेचैन आत्मा में जन्मी थीं।
यदि हर व्यक्ति
यही सोचकर चुप रहता
कि मेरे बोलने से क्या होगा
तो इतिहास आज भी
जंजीरों की भाषा बोल रहा होता।
मुझे
मेरी असहमति के साथ रहने दो।
मेरे हिस्से का सच
मुझसे मत छीनो।
मेरी आवाज़
भले ही कमज़ोर हो,
लेकिन मेरी ख़ामोशी
झूठ की सबसे बड़ी ताक़त बन जाएगी।
मैं सहमत नहीं हो सकता
सिर्फ़ इसलिए
कि बहुमत सहमत है।
मैं सिर नहीं झुका सकता
सिर्फ़ इसलिए
कि भीड़ ने घुटनों के बल चलना सीख लिया है।
क्योंकि
सहमति हमेशा सत्य नहीं होती,
और असहमति हमेशा अपराध नहीं होती।
जिस दिन
मैं हर अन्याय पर
ताली बजाने लगूँगा,
जिस दिन
हर झूठ पर
मुस्कुराने लगूँगा,
जिस दिन
हर अत्याचार को
व्यवस्था कहने लगूँगा
उस दिन
समझ लेना,
मेरी साँसें चल रही होंगी,
पर मैं जीवित नहीं रहूँगा।
ज़रूरी नहीं
जो सहमत है,
वह ज़िंदा भी हो।
कई लोग
बरसों पहले मर जाते हैं,
बस उनकी देह
सरकारी आँकड़ों में
जीवित दर्ज रहती है।
वे खाते हैं,
सोते हैं,
नौकरियाँ करते हैं,
नारे लगाते हैं,
तालियाँ बजाते हैं,
लेकिन उनका विवेक
किसी अँधेरे तहख़ाने में
क़ैद पड़ा रहता है।
और जो अब तक नहीं मरे,
वे सवाल करते हैं।
वे पूछते हैं
रोटी कहाँ है?
न्याय कहाँ है?
बराबरी कहाँ है?
आज़ादी किसके हिस्से में है?
और डर किसके हिस्से में?
वे पूछते हैं,
क्योंकि प्रश्न
मनुष्य होने का
सबसे बड़ा प्रमाण है।
याद रखो
सभ्यताएँ
तलवारों से नहीं,
सवालों से आगे बढ़ती हैं।
लोकतंत्र
तालियों पर नहीं,
असहमतियों पर जीवित रहता है।
विचार
आदेश से नहीं,
संवाद से जन्म लेते हैं।
इसलिए
मेरी आवाज़ को
मेरे ही विरुद्ध मत खड़ा करो।
मुझे
मेरी असहमति के साथ रहने दो।
यदि मेरी आवाज़
तुम्हें असुविधा देती है,
तो शायद समस्या
मेरी आवाज़ नहीं,
तुम्हारे मौन की आदत है।
मैं बोलूँगा।
भले ही
मेरे शब्द
हवा में खो जाएँ।
मैं बोलूँगा।
भले ही
मेरी प्रतिध्वनि
मुझ तक ही लौट आए।
मैं बोलूँगा।
क्योंकि
चुप्पी से लंबी कोई मृत्यु नहीं,
और असहमति से सुंदर
कोई जीवन नहीं।
जब तक
मेरे भीतर
एक भी प्रश्न जीवित है,
तब तक
मैं भी जीवित हूँ।
और जिस दिन
मेरे प्रश्न मर जाएँगे,
उसी दिन
मेरे भीतर का मनुष्य भी
मर जाएगा।😎
फ़ोटो बस यू ही
मेट्रो बंद करो।
रास्ते बंद करो।
दुकानें बंद करो।
Internet बंद करो।
खाना बंद करो।
अपना हक़ मांग रहे छात्रों के ख़िलाफ़ सरकार ने ये क्रूर कदम उठाए।
बस एक चीज़ बंद नहीं कर पाए, मोदी जी - पेपर लीक।
How dare you threaten students for exercising their democratic rights?
Please note, you are the ones that will be held accountable when the time comes.
शर्म करो नीतीश कुमार जी और चंद्रबाबू नायडू 😡
आज देशभर में जितने भी पेपर लीक हुए है और छात्रों को अपने हक की आवाज के लिए सड़को पर उतरना पड़ा है।
उसके लिए जितनी मोदी सरकार जिम्मेदार है उसे कहीं ज्यादा ये दोनों लोग जिम्मेदार है।
क्यों क्योंकि अगर इन दोनों ने सत्ता के लालच में मोदी सरकार को समर्थन नहीं दिया होता तो आज केंद्र में बीजेपी की न तो सरकार होती न ही मोदी और धर्मेन्द्र प्रधान जैसे अनपढ़ देश के नेता होते।
इन दोनों लोगों ने अपनी कुर्सी और अपने बच्चों के भविष्य के लिए देश के युवाओं को बर्बाद किया है।
और अब खुद AC में आराम से बैठकर मजे कर रहे है।
शर्म करो @NitishKumar और @ncbn 😡
🚨 JANTAR MANTAR IS A PROTEST SITE, NOT A DIGITAL OPEN-AIR PRISON! 🛑
Delhi Police has stationed Facial Recognition Vans to live-scan peaceful protesters. They are harvesting biometrics and extracting personal data on the spot—and we have three direct questions for the administration:
❌ UNDER WHAT LAW IS THIS LEGAL?
Supreme Court ruled that Privacy is a Fundamental Right (Puttaswamy case). Mass-scanning citizens exercising their legal right to protest is unconstitutional.
📂 WHERE IS THIS DATA COMING FROM?
How are these AI systems identifying youth live on site? Are national databases, Aadhaar records, and public registries being illegally cross-matched to turn citizens into targets?
⚠️ HOW WILL THIS DATA BE WEAPONISED?
Who stores these facial scans? How long will they be kept? Are secret registries being built to shadow-ban, intimidate, and target students for demanding accountability?
Mr. Modi, our students are demanding Dharmendra Pradhan’s resignation.
Don’t insult their intelligence with this pathetic midnight video.
1. Sack Pradhan.
2. Punish those who beat students.
3. Apologise
दिल्ली पुलिस का यह काला चेहरा सामने आया है देख लो अगर आप जंतर मंतर पर हो तो
नही हो तो ज्यादा से ज्यादा शेयर कर दो दिल्ली पुलिस यूज़ कर रही है facial recognition वेन में बैठकर यह हर युवाओ के चेहरे से पूरी प्राइवेसी का उलंघन किया जा रहा है ।
यह सब आंदोलन कर रहे हैं सबकी डिटेल पुलिस चेहरे से ले रही है तो यह तो कल या आंदोलन के बाद भी युवाओ पर मुकदमा बनाकर परेशान किया जा सकता है
विरोध करो सब युवा इसका ज्यादा से ज्यादा शेयर करो
The longer Narendra Modi waits to remove Dharmendra Pradhan, the worse the situation will get for him.
Even BJP voters are getting fed up of his ego and arrogance.
राहुल गांधी दिल्ली में बैठते है और दिल्ली का यूनिट बिल्कुल डेड है . जिस दिन राहुल गांधी को स्टेडियम में डिटेन किया गया था उस दिन भी दिल्ली यूनिट फेल साबित हुआ वो तो अखिलेश यादव और बाक़ी लोग आ गए , अगर दिल्ली यूनिट के भरोसे रहते तो सिस्टम गड़बडा जाता .फिर आगे सुनो प्लान हुआ एक बड़े दफ्तर के बाहर विरोध करने का लेकिन मुश्किल से 70 लोग जमा हुए जिनको IP एस्टेट में ले गए जैसे ही वो दफ्तर से निकले .
सीधा सीधा कहु तो कांग्रेस का दिल्ली यूनिट डेड है
जानकारी में कुछ कमी हो तो कोई नेता संपर्क करे ठीक करेंगे इसको 💀