@nagashwin7 है। यह सौभाग्य ही है कि उसके कुंडल छिन गए हैं। यह सौभाग्य ही है कि वह अजेय भाला घटोत्कच पर प्रयोग हो चुका है। यदि उसके पास वह कवच होता और यदि उसके पास वे कुंडल होते, तो शक्तिशाली कर्ण तीनों लोकों में सबको, यहाँ तक कि अमरों (देवताओं) को भी हराने में सक्षम होता।
आदरणीय सुषमा खरकवाल जी,
भारतीय जनता पार्टी
मेयर, लखनऊ
आप कृपया अपनी राजनीतिक मजबूरीवश मेरी दिवंगत माँ का नाम लेकर एक महिला के रूप में एक अन्य महिला का अपमान न करें। नारी के सम्मान में आपसे बस इतना आग्रह है।
यदि आपके घर में कोई बड़े-बुजुर्ग हों या बच्चे तो उनसे पूछ लीजिए कि आपका ये अति निंदनीय द्वेषपूर्ण बयान उचित है या नहीं। बाक़ी आप स्वयं एक महिला हैं। महिला ही जब महिला का अपमान करेगी तो कौन आपको नैतिक रूप से सही कहेगा।
भारतीय समाज में कभी भी, किसी की भी माँ का अपमान स्वीकार्य नहीं है। आपका राजनीतिक भविष्य उज्ज्वल होता अगर आप उसे नैतिक मानकों पर इतना नीचे न ले जातीं, आज आपके समर्थक भी शर्मिंदा हैं। जिनको प्रभावित करने के लिए आप अपना स्तर गिरा रही हैं, वो किसी के भी सगे नहीं हैं। आप अपना स्तर बनाए रखें और संतुलन भी।
मैं आपसे किसी क्षमा की भी अपेक्षा नहीं रखता हूँ और न ही ऐसा कहने के बाद क्षमा के कोई
मायने रह जाते हैं। आपका अकेले में बैठकर जो पछतावा होगा, हमारे लिए इतना ही बहुत है।
सादर
आपका भाई
अखिलेश
2003 में The Story of the Weeping Camel नाम की एक फिल्म बनाई गई। इसमें जर्मनी की एक फिल्म टीम मंगोलिया के Gobi Desert में रहने वाले एक घुमंतू (nomadic) परिवार की ज़िंदगी को रिकॉर्ड कर रही थी।
इस दौरान एक खास घटना हुई:
एक ऊँटनी (माँ ऊँट) ने दो दिन की बहुत कठिन प्रसव पीड़ा के बाद बच्चे को जन्म दिया
लेकिन उसने अपने ही बच्चे को अपनाने से मना कर दिया
अगर वह दूध नहीं पिलाती, तो बच्चा मर सकता था
परिवार को एक पुरानी परंपरा याद आई, जिसे Hoos (हूस) रिवाज कहते हैं।
क्या किया गया?
परिवार ने अपने दो बच्चों को रेगिस्तान में एक संगीतकार को बुलाने भेजा
वह व्यक्ति आया और उसने Hoos नाम का एक खास गाना/मंत्र (chanting ritual) किया
क्या हुआ इसके बाद ?
उस संगीत के दौरान माँ ऊँट रोने लगी (उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे)
फिर उसने अपने बच्चे को स्वीकार कर लिया और उसे दूध पिलाने लगी
👉 यह बहुत भावुक और दुर्लभ घटना थी, जिसे फिल्म टीम ने कैमरे में कैद कर लिया।
यह Hoos रिवाज इतना अनोखा है कि UNESCO ने 2015 में इसे दुनिया की Intangible Cultural Heritage की सूची में शामिल किया