#SupremeCourt के जज बोलेः रेवड़ियां बांटने के लिए पैसा है, जजों की सैलरी-पेंशन के लिए नहीं
स्वास्थ्य पर खर्च GDP का 5.2% के बजाय 1.9%
5-साल से कम 35% बच्चे कुपोषित
अमीरों का 14,56,226 करोड़ का उधार बट्टे खाते में
आपके पेट में दर्द नहीं होता, गरीब महिलाओं को मदद से क्यों होता है
आज सुबह दिल्ली में बीस दिन से भूखे एक आदमी को सफेद चादरों के पीछे क्यों छिपाया गया?
उस कमजोर शरीर में ऐसा क्या था, जिससे सत्ता को इतना डर लगने लगा?
सूरज निकलते ही पुलिस एक भूखे आदमी के मंच पर क्यों पहुंची?
वो कौन-सा सवाल पूछ रहा था, जिसका जवाब देने से आसान उसे उठाकर ले जाना लगा?
क्या एक खाली पेट सरकार के लिए इतना बड़ा खतरा बन सकता है?
और अगर नहीं, तो फिर उस आदमी के पास मंत्री की जगह पुलिस क्यों भेजी गई?
किसकी आवाज़ को सफेद चादरों से ढक दिया गया?
और सत्ता क्यों भूल गई कि सवालों को ढंकने से सवाल खत्म नहीं हो जाते?
उस आदमी का नाम है, सोनम वांगचुक.
https://t.co/JSTwgRFNnA
आज सुबह सोनाम वांगचुक को जबरदस्ती उठाकर सफदरजंग हॉस्पिटल ले गई दिल्ली पुलिस.
पुलिस का बयान आया: हाई कोर्ट के आदेश और मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह के बाद, @Wangchuk66 की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें ज़रूरी मेडिकल देखभाल के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
जानकारी के लिए, दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश था: वांगचुक की "सरकारी डॉक्टरों द्वारा नियमित रूप से मेडिकल जांच" की जानी चाहिए.
उनकी पत्नी गीतांजलि ने सफदरजंग अस्पताल से X पर लिखा: "कृपया उन्हें मुँह के ज़रिए या नसों के माध्यम से कोई भी दवा या तरल पदार्थ तब तक न दिया जाए, जब तक मुझसे, उनके परिवार से और पिछले 20 दिनों से उनकी सेहत पर नज़र रख रहे डॉक्टरों से सहमति न ले ली जाए." अस्पताल में उनको फ़ोन के साथ सोनाम से मिलने की इजाज़त नहीं मिल रही है. मांगने के बावजूद, उन्होंने मेडिकल रिपोर्टस भी नहीं मिल रही हैं.
आज उनकी भूख हडताल का 21वॉं दिन है. अब एक नज़र सुबह के वीडियो पर डालें, सादे कपड़ों में sports shoes पहने पुलिस वाले जबरन स्टेज पर चढ़ते हैं. वहां कुछ volunteers उनको रोकने की कोशिश करते हैं तो धक्कम-धक्का दिखता है. तैयारी और सोच देखें, सफ़ेद चादरों से पुलिसकर्मी स्टेज को मुस्तैदी से कवर कर देते हैं. ताकि जो वो कर रहे हैं वो दिखाई ना दे, वर्ना चादरों की दीवार की क्या ज़रूरत थी.
अब CJP @Cockroachisback प्रमुख @Abhijeet_Dipke ने भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है. कह रहे हैं 20 जुलाई को संसद तक मार्च ज़रूर होगा.
कल देर रात ये वीडियो बनाया. देखें, देश के अलग-अलग राज्यों से जंतर मंतर पहुंचे, छात्र छात्राओं का जज्बा.
https://t.co/0ss8mQaTfc
आज सुबह सोनाम वांगचुक को जबरदस्ती उठाकर सफदरजंग हॉस्पिटल ले गई दिल्ली पुलिस.
पुलिस का बयान आया: हाई कोर्ट के आदेश और मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह के बाद, @Wangchuk66 की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें ज़रूरी मेडिकल देखभाल के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
जानकारी के लिए, दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश था: वांगचुक की "सरकारी डॉक्टरों द्वारा नियमित रूप से मेडिकल जांच" की जानी चाहिए.
उनकी पत्नी गीतांजलि ने सफदरजंग अस्पताल से X पर लिखा: "कृपया उन्हें मुँह के ज़रिए या नसों के माध्यम से कोई भी दवा या तरल पदार्थ तब तक न दिया जाए, जब तक मुझसे, उनके परिवार से और पिछले 20 दिनों से उनकी सेहत पर नज़र रख रहे डॉक्टरों से सहमति न ले ली जाए." अस्पताल में उनको फ़ोन के साथ सोनाम से मिलने की इजाज़त नहीं मिल रही है. मांगने के बावजूद, उन्होंने मेडिकल रिपोर्टस भी नहीं मिल रही हैं.
आज उनकी भूख हडताल का 21वॉं दिन है. अब एक नज़र सुबह के वीडियो पर डालें, सादे कपड़ों में sports shoes पहने पुलिस वाले जबरन स्टेज पर चढ़ते हैं. वहां कुछ volunteers उनको रोकने की कोशिश करते हैं तो धक्कम-धक्का दिखता है. तैयारी और सोच देखें, सफ़ेद चादरों से पुलिसकर्मी स्टेज को मुस्तैदी से कवर कर देते हैं. ताकि जो वो कर रहे हैं वो दिखाई ना दे, वर्ना चादरों की दीवार की क्या ज़रूरत थी.
अब CJP @Cockroachisback प्रमुख @Abhijeet_Dipke ने भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है. कह रहे हैं 20 जुलाई को संसद तक मार्च ज़रूर होगा.
कल देर रात ये वीडियो बनाया. देखें, देश के अलग-अलग राज्यों से जंतर मंतर पहुंचे, छात्र छात्राओं का जज्बा.
https://t.co/0ss8mQaTfc
जो बातें खोखली लग रही रहीं थीं वो खोखली साबित हुईं, और वो भी इतनी जल्दी.
मोदी बहुत खूबसूरत आदमी हैं. अगर उन पर हमला हुआ, तो अमेरिका उन्हें बचाने आएगा. ऐसी बातें ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री के लिए कही थीं.
लेकिन अब ट्रंप अमेरिकी संसद में ऐसा बिल आगे बढ़वा रहे है, जो भारत से भेजे जाने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकता है.
तो सवाल है, क्या दोस्ती कैमरे के सामने होती है और सजा बिल के अंदर लिखी जाती है?
मोदी इतने अच्छे दोस्त हैं, तो भारत को दुश्मनों वाली धमकी क्यों?
आंकड़ों को देखेंगे, और ये बहुत महत्वपूर्ण है इसको समझें, रूस से सस्ता तेल खरीदकर भारत के जितने पैसे बचेंगे, क्या उससे दस गुना ज्यादा रकम भारत निर्यात में गँवा सकता है?
क्या पूरा मामला निजी जेबों को भरने का है?
चूँकि यहाँ हर मुद्दे को परत-दर-परत खोला जाता है, तो जब इस बिल को जांचा गया, तो पता लगा कि असल में ट्रम्प जिस डाल पर बैठे हैं उसी को काट रहे हैं.
और कैसे बिल में 'कहीं पे निगाहें और कहीं पे निशाने' का खूब खेल हुआ है. और अंत में भारत को क्या करना चाहिए?
@YouTube #DibangOfficial
https://t.co/3KB4srVPyc
जो बातें खोखली लग रही रहीं थीं वो खोखली साबित हुईं, और वो भी इतनी जल्दी.
मोदी बहुत खूबसूरत आदमी हैं. अगर उन पर हमला हुआ, तो अमेरिका उन्हें बचाने आएगा. ऐसी बातें ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री के लिए कही थीं.
लेकिन अब ट्रंप अमेरिकी संसद में ऐसा बिल आगे बढ़वा रहे है, जो भारत से भेजे जाने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकता है.
तो सवाल है, क्या दोस्ती कैमरे के सामने होती है और सजा बिल के अंदर लिखी जाती है?
मोदी इतने अच्छे दोस्त हैं, तो भारत को दुश्मनों वाली धमकी क्यों?
आंकड़ों को देखेंगे, और ये बहुत महत्वपूर्ण है इसको समझें, रूस से सस्ता तेल खरीदकर भारत के जितने पैसे बचेंगे, क्या उससे दस गुना ज्यादा रकम भारत निर्यात में गँवा सकता है?
क्या पूरा मामला निजी जेबों को भरने का है?
चूँकि यहाँ हर मुद्दे को परत-दर-परत खोला जाता है, तो जब इस बिल को जांचा गया, तो पता लगा कि असल में ट्रम्प जिस डाल पर बैठे हैं उसी को काट रहे हैं.
और कैसे बिल में 'कहीं पे निगाहें और कहीं पे निशाने' का खूब खेल हुआ है. और अंत में भारत को क्या करना चाहिए?
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भारत सरकार को एक बात समझनी होगी, ट्रंप की तारीफ को कूटनीतिक जीत मत मानिए.
निजी दोस्ती को राष्ट्रीय सुरक्षा कवच मत समझिए.
बिना दस्तखत वाले व्यापार समझौते को सफलता बताकर जनता को भरोसा मत दिलाइए.
ट्रंप मोदी को फरिश्ता कह सकते हैं और उसी शाम भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाले बिल को समर्थन दे सकते हैं.
इसलिए भारत का जवाब साफ होना चाहिए, बहुत साफ होना चाहिए, हम तेल वहां से खरीदेंगे, जहां से देश के लिए सही कीमत और भरोसेमंद आपूर्ति हो.
हम व्यापार वहां से करेंगे, जहां से बराबरी की शर्तें होंगी.
हमारी विदेश नीति का फैसला नई दिल्ली में होगा, वॉशिंगटन में या वाशिंगटन के दबाव में नहीं होगा.
दोस्ती का मतलब आदेश मानना नहीं होता, साझेदारी का मतलब सजा की धमकी नहीं होता और राष्ट्रीय हित पर लगाया गया टैरिफ किसी सामान पर लगाया गया टैक्स नहीं होता वो देश की संप्रभुता को भेजा गया बिल होता है.
#DibangOfficial @YouTube वीडियो देखें और इस बारे में चर्चा हो. मैं हूँ तैयार...
https://t.co/l8ZmJhVu8w
भारत सरकार को एक बात समझनी होगी, ट्रंप की तारीफ को कूटनीतिक जीत मत मानिए.
निजी दोस्ती को राष्ट्रीय सुरक्षा कवच मत समझिए.
बिना दस्तखत वाले व्यापार समझौते को सफलता बताकर जनता को भरोसा मत दिलाइए.
ट्रंप मोदी को फरिश्ता कह सकते हैं और उसी शाम भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाले बिल को समर्थन दे सकते हैं.
इसलिए भारत का जवाब साफ होना चाहिए, बहुत साफ होना चाहिए, हम तेल वहां से खरीदेंगे, जहां से देश के लिए सही कीमत और भरोसेमंद आपूर्ति हो.
हम व्यापार वहां से करेंगे, जहां से बराबरी की शर्तें होंगी.
हमारी विदेश नीति का फैसला नई दिल्ली में होगा, वॉशिंगटन में या वाशिंगटन के दबाव में नहीं होगा.
दोस्ती का मतलब आदेश मानना नहीं होता, साझेदारी का मतलब सजा की धमकी नहीं होता और राष्ट्रीय हित पर लगाया गया टैरिफ किसी सामान पर लगाया गया टैक्स नहीं होता वो देश की संप्रभुता को भेजा गया बिल होता है.
#DibangOfficial @YouTube वीडियो देखें और इस बारे में चर्चा हो. मैं हूँ तैयार...
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