यह कैसा भारत जहां साधु संत ऋषि मुनियों के देश में साधु संतों के आवागमन मे बाधा डाली जाती है! इतना भी विज्ञान में आसक्त नहीं होना चाहिए ! यह देश की नीति रीति व पुरातन संस्कृति के विरुद्ध है! साधु संतों को किसी भी व्यवस्था के लिए बाध्य किया जाना प्रकृति के विरुद्ध है!
सत्ता के सर्वोच्च पद पर विराजमान व्यक्ति की छवि को विरोध पक्षों से जितना खतरा नहीं है उसे ज्यादा खतरा तो शासन के अधीनस्थ लोगों के वाणी से व्यवहार से क्रियाकलापों से है!
दसों दिशाओं से कुछ न कुछ प्रकृति का तांडव देखने को मिल रहा है! फिर भी सोया हुआ जगत विज्ञान को ही सब कुछ मान कर बैठा है! और यही विज्ञान विनाश का कारण बनता जा रहा है! ईश्वर को दंड देना है तो पहले ही मति का हरण कर लेता है? वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा ही देखने को मिल रहा है!
प्रकृति के विरुद्ध चलोगे और सुखद परिणाम की आशा रखोगे ऐसा कभी नहीं होता है! प्रकृति के आगे हार जीत की बात तो करना बेमानी है वहां तो सब को सिलेंडर होना पड़ता है! सुखी होकर चाहे दुखी होकर सबको प्रकृति के नियम में आना होगा!