@RajPoliceHelp@AlwarPolice@PoliceRajasthan
अलवर के मालाखेड़ा क्षेत्र के ग्राम बडेर में हुई फायरिंग की घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और आम नागरिक की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
इस घटना में गंभीर रूप से घायल हुए किसान पुत्र गजेन्द्र सिंह पिछले कई दिनों से जयपुर में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं। एक ओर अस्पताल में उनका उपचार चल रहा है, वहीं दूसरी ओर उनका परिवार चिंता, असुरक्षा और न्याय की उम्मीद के साथ हर दिन काटने को मजबूर है।
प्रश्न यह है कि जब एक युवक अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है, तब इस घटना के जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर और त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही? क्या एक किसान परिवार की पीड़ा और उसके बेटे का जीवन प्रशासन के लिए पर्याप्त चिंता का विषय नहीं है?
राजस्थान सरकार और राजस्थान पुलिस से अपेक्षा है कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करते हुए दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए तथा यह संदेश दिया जाए कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
आज गजेन्द्र सिंह का परिवार केवल अपने बेटे के स्वस्थ होने की प्रार्थना नहीं कर रहा, बल्कि न्याय की भी प्रतीक्षा कर रहा है। न्याय में देरी पीड़ित परिवार के घावों को और गहरा करती है।
हम सभी की मांग है — गजेन्द्र सिंह को न्याय मिले, दोषियों को दंड मिले और पीड़ित परिवार को सुरक्षा का भरोसा मिले।
#JusticeForGajendraSingh #Alwar #Malakhera #RajasthanPolice #RajasthanGovernment JusticeDelayedJusticeDenied StandWithGajendraSingh
#जयपुर ज़ी राजस्थान की खबर का बड़ा असर
सरकारी स्कूल का सिस्टम पूरी तरह फेल ? फेल बच्चों को किया पास, जांच बैठी तो फिर किया फेल, निवाई की हिंगोनिया बुजुर्ग सरकारी स्कूल का है मामला, परीक्षा की गोपनीयता भंग करने पर नहीं हुई अब तक कार्रवाई, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के बजाय बदल दिया रिजल्ट, ज़ी राजस्थान के पास है, बच्चों को पास करवाने वाले और फेल का रिजल्ट, संस्था प्रधान को APO करके फिर जांच क्यों नहीं की गई ? सवाल उठ रहा, क्या संस्था प्रधान कर रहे हैं जांच को प्रभावित ? CDEO सुबे सिंह यादव पर भी जांच को प्रभावित करने का आरोप, इसके अलावा भी कई सवाल उठ रहे हैं एज्युकेशन सिस्टम पर
@VishnuRajasthan #LatestNews #RajasthanNews #RajasthanWithZee
विद्यार्थी हितों से जुड़े। प्रतिनिधियों के साथ इस तरह का व्यवहार अशोभनीय है @RajPoliceHelp से निवेदन है कि दोषियों पर उचित कार्यवाही होनी चाहिए।
@Bhiwadipolice@HSamoochi
मुख्यमंत्री आज 3 बजे भाजपा कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस से ज्यादा ये राजस्थान के मीडिया का इम्तहान है। क्या कारण है कि बीते ढाई साल में राजस्थान का मीडिया सीएम से सीधा सवाल नहीं कर पाया कि उनका और प्रमोद शर्मा का क्या संबंध है ? क्या वे प्रमोद शर्मा के संपर्क में हैं ?
इतना बड़ा मीडिया ट्रायल्स हो गया, प्रमोद शर्मा राजस्थान का सबसे हॉट इश्यू बना हुआ है और मीडिया अब तक एक सवाल सीधे सीएम से नहीं कर पाया। ये बेइज्जती लायक बात है।
आज उम्मीद है कि जो पत्रकार बंधु प्रेस कॉन्फ्रेंस कवर करने के लिए जा रहे हैं वे एक सवाल सम्माननीय मुख्यमंत्री से पूछेंगे कि उनका प्रमोद शर्मा से क्या संबंध है।
@Zinda_Avdhesh आप बहादुर और स्पष्ट पत्रकार हो इसलिए आपसे ज्यादा उम्मीद रहेगी 🙏
ओरण बचाओ आंदोलन हमारी संस्कृति, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा का संकल्प है।
इस पवित्र उद्देश्य को समर्थन देने के लिए तनोट, जैसलमेर से जयपुर आ रही #ओरण_बचाओ पद यात्रा में शामिल होकर अपनी सहभागिता निभाऊंगा।
REET शिक्षक भर्ती 2023 लेवल-2 अंग्रेजी (विशेष शिक्षा एमआर)
प्रधान चौधरी 6104450
मार्क्स 142.28
पूर्व परिणामcut off GEN=36.03
संशोधित परिणाम cut off GEN=37.7
प्रार्थी के मेरिट से 105 नंबर ज़्यादा है
संशोधित परिणाम में रोल न. नहीं होने से विभाग ने स्थाईकरण रोक लिया@alokrajRSSB
https://t.co/ASBlzqCuM4 पत्रकार से पत्रकार की बात। [@the_kilanaut जी के साथ @avadheshjpr] के साथ मीडिया, ज़मीनी सच्चाई और न्यूज़रूम के अंदर की कहानियों पर खास संवाद।
हालिया स्टिंग ऑपरेशन से चर्चित एवं जाने माने पत्रकार @avadheshjpr जी से इस स्टिंग पर खुली चर्चा की है @the_kilanaut जी ने ।
सुनिए पूरी कहानी।
https://t.co/CI5z4MlYlv
:अरावली के लिए 100m ऊंचाई का मानक: विकास और पर्यावरण के बीच एक नाजुक संतुलन
नियमों में स्पष्टता आने से प्रशासनिक कार्यों को गति मिलेगी लेकिन रेगिस्तान को रोकने वाली 'छोटी पहाड़ियों' के वजूद पर आंच नहीं आनी चाहिए। प्रगति जरूरी है पर सुरक्षा चक्र की कीमत पर नहीं।
#savearavali
100 मीटर का नियम = 100% भविष्य पर खतरा”
अरावली सिर्फ पत्थरों की श्रृंखला नहीं है! यह उत्तरी भारत की जल सुरक्षा, स्वच्छ हवा और मरुस्थलीकरण के खिलाफ आख़िरी ढाल है।
हालिया 100 मीटर की संकीर्ण परिभाषा से अरावली का लगभग 90% हिस्सा कानूनी सुरक्षा से बाहर हो गया है। यह विकास नहीं, भविष्य के साथ समझौता है।
100 मीटर का नियम काग़ज़ पर छोटा है,लेकिन इसके परिणाम पूरी पीढ़ी को बंजर बना सकते हैं।
एक तरफ़ सरकार करोड़ों की ग्रीन वॉल की बात करती वहीं दूसरी तरफ़ अरावली की 90% जमीन खनन के हवाले करना,विकास नहीं धोखा है।
हमें संरक्षण बनाम विकास नहीं,
संरक्षण के साथ विकास चाहिए।
राजस्थान खामोश नहीं रहेगा!
क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ़ पहाड़ों की नहीं,हमारी पीढ़ियों की है।
जोश में रहना है। ✊
#savearavali
#SaveAravaliHills
#GirishRathore #CaptainGSR7