@Profdilipmandal@BCCI Suryakumar Yadav has so far scored only 718 runs in 32 matches at an average of 28 in ODIs. He is a talented player, but he is not in form right now. Another batsman should be given a chance in his place. The player who replaces him should be of any caste but should be talented.
गांठ बांध लीजिए...
★ कन्याओं का विवाह 21 से 25 वे वर्ष तक, और लड़कों का विवाह 25 से 29वें वर्ष की आयु तक हर स्थिति में हो जाना चाहिए।
★ फ्लैट न लेकर जमीन खरीदो, और उस पर अपना घर बनाओ! वरना आपकी संतानों का भविष्य पिंजरे के पंछी की तरह हो जाएगा।
★ नयी युवा पीढ़ी को कम से कम दो संतानों को जन्म देने के लिए प्रेरित करें।
★ गांव से नाता जोड़ कर रखें और गांव की पैतृक सम्पत्ति, और वहां के लोगों से नाता, जोड़कर रखें।
★ अपनी संतानों को अपने धर्म की शिक्षा अवश्य दें, और उनके मानसिक व शारीरिक विकास पर अवश्य ध्यान दें।
★ किसी भी और अ!तंकवादी प्रवृत्ति के व्यक्ति से सामान लेने-देने, व्यवहार करने से यथासंभव बचें।
★ घर में बागवानी करने की आदत डालें, और यदि पर्याप्त जगह है,तो देशी गाय पालें।
★ होली, दीपावली,विजयादशमी, नवरात्रि, मकर संक्रांति, जन्माष्टमी, राम नवमी, आदि जितने भी त्यौहार आयें, उन्हें आफिस/कार्य से छुट्टी लेकर सपरिवार मनाये।
(हो सके तो पैदल, व परिवार के साथ )
★ प्रात: काल 5-5:30 बजे उठ जाएं, और रात्रि को 10 बजे तक सोने का नियम बनाएं । सोने से पहले आधा गिलास पानी अवश्य पिये (हार्ट अटैक की संभावना घटती है)
★ यदि आपकी कोई एक संतान पढ़ाई में असक्षम है, तो उसको कोई भी हुनर (Skill) वाला ज्ञान जरूर दें।
★ आपकी प्रत्येक संतान को कम से कम तीन फोन नंबर स्मरण होने चाहिए, और आपको भी।
★ जब भी परिवार व समाज के किसी कार्यक्रम में जाएं, तो अपनी संतानों को भी ले जाएं। इससे उनका मानसिक विकास सशक्त होगा।
★ परिवार के साथ मिल बैठकर भोजन करने का प्रयास करें, और भोजन करते समय मोबाइल फोन और टीवी बंद कर लें।
★ अपनी संतानों को बॉलीवुड की कचरा फिल्मों से बचाएं, और प्रेरणादायक फिल्में दिखाएं।
★ जंक फूड और फास्ट फूड से बचें।
★ सांयकाल के समय कम से कम 10 मिनट भक्ति संगीत सुने, बजाएं।
★ दिखावे के चक्कर में पड़कर, व्यर्थ का खर्चा न करें।
★ दो किलोमीटर तक जाना हो, तो पैदल जाएं, या साईकिल का प्रयोग करें।
★ अपनी संतानों के मन में किसी भी प्रकार के नशे (गुटखा, तंबाखू, बीड़ी, सिगरेट, दारू...) के विरुद्ध चेतना उत्पन्न करें,तथा उसे विकसित करें।
★ सदैव सात्विक भोजन ग्रहण करें, अपने भोजन का ईश्वर को भोग लगा कर प्रसाद ग्रहण करें।
★ अपने आंगन में तुलसी का पौधा अवश्य लगायें, व नित्य प्रति दिन पूजा, दीपदान अवश्य करें।
★ अपने घर पर एक हथिय!र अवश्य रखें, और उसे चलाने का निरन्तर हवा में अकेले प्रयास करते रहें, ताकि विपत्ति के समय प्रयोग कर सकें। जैसे-लाठी,हॉकी,गुप्ती, तलव!र,भा'ला,त्रिशूल व बं'दू'क/पि'स्तौ'ल लाइसेंस के साथ।
★ घर में पुत्र का जन्म हो या कन्या का, खुशी बराबरी से मनाएँ। दोनों जरूरी है ! अगर बेटियाँ नहीं होगी तो परिवार व समाज को आगे बढाने वाली बहुएँ कहाँ से आएगी और बेटे नहीं होंगे तो परिवार समाज व देश की रक्षा कौन करेगा।
हर बेटी मेरी - जय श्री राम 🙏
अनुशासन, कर्मठता व सांगठनिक कौशल के आदर्श प्रतिमान, लोकप्रिय जननेता, देश की आंतरिक सुरक्षा-व्यवस्था सुदृढ़ करने में सतत रत, सहकार से समृद्धि भाव को निरंतर चरितार्थ कर रहे माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई!
प्रभु श्री राम से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं सुदीर्घ जीवन की प्रार्थना है।
@AmitShah
Congratulations, @KarthikeyanM64 who has excelled at the Qatar Masters 2023! His success has made India very proud.
He has achieved the incredible feat of defeating the reigning chess champion and the World No. 1, Magnus Carlsen.
May he keep up the fantastic work, and wishing him the very best for the next round.
@DivyeshBhogayat@_Divya51 @______0Sa_umya अरे भैया! मैं भी दलित हूं। लेकिन सभी धर्म ग्रंथो को पढ़ती हूं। जब उनका अर्थ घटन जब समझ में आ जाता है तो लगता है जैसे कुछ भी काल्पनिक नहीं है। और हां जब आप तर्क संगत या विज्ञान संगत बात करेंगे तो आपको ये लोग जवाब ही नहीं देंगे। क्योंकि पोल खुल जाने का डर लगता है।
@_Divya51 @______0Sa_umya श्रीमद् भागवत स्कंध 3, अध्याय 11, श्लोक 1.
आज ही पढ़ रहा था। ठीक से पढ़ना। इसमें परमाणु(nuclear) की व्याख्या है। और हां! भांग या गांजा पीने से ऐसा धर्म ग्रंथ लिख सकते हैं तो मुझे भी बताना वह भांग-गांजा मुझे भी चाहिए।🙏
@ItsMeBhumihar@NarpatSing73620 @______0Sa_umya 80 percent वैज्ञानिक सोच के बुद्धिमान चरित्रवान शूरवीर बहुजन समाज जो देवी देवताओं को नहीं मानता उनके होते हुए देश गुलाम कैसे हुआ देवी देवता तो इनविजिबल फोर्सेज h par ye to मनुष्य h
गुरुकुल कैसे खत्म हो गये..??
भारतवर्ष में गुरुकुल कैसे खत्म हो गये ? कॉन्वेंट स्कूलों ने किया ब र्बाद ,1858 में Indian Education Act बनाया गया। इसकी ड्राफ्टिंग लोर्ड मैकोले ने की थी। लेकिन उसके पहले उसने यहाँ (भारत) के शिक्षा व्यवस्था का सर्वेक्षण कराया था, उसके पहले भी कई अंग्रेजों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था के बारे में अपनी रिपोर्ट दी थी। अंग्रेजों का एक अधिकारी था G.W. Litnar और दूसरा था Thomas Munro ! दोनों ने अलग अलग इलाकों का अलग-अलग समय सर्वे किया था। Litnar, जिसने उत्तर भारत का सर्वे किया था, उसने लिखा है कि यहाँ 97% साक्षरता है और Munro, जिसने दक्षिण भारत का सर्वे किया था, उसने लिखा कि यहाँ तो 100% साक्षरता है मैकोले का स्पष्ट कहना था कि भारत को हमेशा-हमेशा के लिए अगर गुलाम बनाना है तो इसकी “देशी और सांस्कृतिक शिक्षा व्यवस्था” को पूरी तरह से ध्वस्त करना होगा और उसकी जगह “अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था” लानी होगी और तभी इस देश में शरीर से हिन्दुस्तानी लेकिन दिमाग से अंग्रेज पैदा होंगे और जब इस देश की यूनिवर्सिटी से निकलेंगे तो हमारे हित में काम करेंगे | मैकाले एक मुहावरा इस्तेमाल कर रहा है कि जैसे किसी खेत में कोई फसल लगाने के पहले पूरी तरह जोत दिया जाता है वैसे ही इसे जोतना होगा और अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था लानी होगी।” इस लिए उसने सबसे पहले गुरुकुलों को गैरकानूनी घोषित किया | जब गुरुकुल गैरकानूनी हो गए तो उनको मिलने वाली सहायता जो समाज की तरफ से होती थी वो गैरकानूनी हो गयी | फिर संस्कृत को गैरकानूनी घोषित किया और इस देश के गुरुकुलों को घूम घूम कर ख़त्म कर दिया | उनमें आG लगा दी, उसमें पढ़ाने वाले गुरुओं को उसने Maरा- पीTA, जेL में डाला। 1850 तक इस देश में 7 लाख 32 हजार गुरुकुल हुआ करते थे और उस समय इस देश में गाँव थे 7 लाख 50 हजार मतलब हर गाँव में औसतन एक गुरुकुल और ये जो गुरुकुल होते थे वो सब के सब आज की भाषा में Higher Learning Institute हुआ करते थे उन सबमे 18 विषय पढाया जाता था और ये गुरुकुल समाज के लोग मिलके चलाते थे न कि राजा, महाराजा | इन गुरुकुलों में शिक्षा निःशुल्क दी जाती थी। इस तरह से सारे गुरुकुलों को ख़त्म किया गया और फिर अंग्रेजी शिक्षा को कानूनी घोषित किया गया और कलकत्ता में पहला कॉन्वेंट स्कूल खोला गया उस समय इसे ‘फ्री स्कूल’ कहा जाता था, इसी कानून के तहत भारत में कलकत्ता यूनिवर्सिटी बनाई गयी, बम्बई यूनिवर्सिटी बनाई गयी, मद्रास यूनिवर्सिटी बनाई गयी और ये तीनों गुलामी के ज़माने के यूनिवर्सिटी आज भी इस देश में हैं, मैकोले ने अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी थी बहुत मशहूर चिट्ठी है वो, उसमें वो लिखता है कि: “इन कॉन्वेंट स्कूलों से ऐसे बच्चे निकलेंगे जो देखने में तो भारतीय होंगे लेकिन दिमाग से अंग्रेज होंगे और इन्हें अपने देश के बारे में कुछ पता नहीं होगा | इनको अपने संस्कृति के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने परम्पराओं के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने मुहावरे नहीं मालूम होंगे, जब ऐसे बच्चे होंगे इस देश में तो अंग्रेज भले ही चले जाएँ इस देश से अंग्रेजियत नहीं जाएगी।” उस समय लिखी चिट्ठी की सच्चाई इस देश में अब साफ़-साफ़ दिखाई दे रही है और उस एक्ट की महिमा देखिये कि हमें अपनी भाषा बोलने में शर्म आती है, अंग्रेजी में बोलते हैं कि दूसरों पर रोब पड़ेगा, अरे हम तो खुद में हीन हो गए हैं जिसे अपनी भाषा बोलने में शर्म आ रही है, दूसरों पर रोब क्या पड़ेगा। लोगों का तर्क है कि अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है, दुनिया में 204 देश हैं और अंग्रेजी सिर्फ 11 देशों में बोली, पढ़ी और समझी जाती है, फिर ये कैसे अंतर्राष्ट्रीय भाषा है। शब्दों के मामले में भी अंग्रेजी समृद्ध नहीं द रिद्र भाषा है। इन अंग्रेजों की जो बाइबिल है वो भी अंग्रेजी में नहीं थी और ईशा मसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे। ईशा मसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी। अरमेक भाषा की लिपि जो थी वो हमारे बंगला भाषा से मिलती जुलती थी | समय के का लचक्र में वो भाषा विलुप्त हो गयी। संयुक्तराष्टसंघ जो अमेरिका में है वहां की भाषा अंग्रेजी नहीं है, वहां का सारा काम फ्रेंच में होता है। जो समाज अपनी मातृभाषा से कट जाता है उसका कभी भला नहीं होता और यही मैकोले की रणनीति थी !जिसमे लगभग वो विजय पा चुके क्योंकि आज का युवा भारत को कम यूरोप को ज्यादा जनता है भारतीय संस्कृति को ढकोसला समझता है लेकिन पाश्चात्य देशों को नकल करता है सनातन धर्म की प्रमुखता और विशेषता को न जानते हुए भी बामपंथियों का समर्थन करता है।सभी बन्धुओ से एक चुभता सवाल हमसभी को धर्म की जानकारी होनी चाहिये क्योंकि धर्म ही हमे राष्ट्र धर्म सिखाती है धर्म ही
મારી દુકાન જામખંભાળિયા પઠાણ પાડા માં આવેલી છે.દુકાન ની સામે આ ડમ્પીંગ પોઇન્ટ છે જેનો કચરો નગરપાલિકા ના સફાઈ કર્મીઓ દ્વારા વારીને તેમજ ગટરો કાઢીને નાખવામાં આવે છે જે જોઈને સ્થાનિકો પણ ત્યાં કચરો ફેકે છે જેની દુર્ગંધ અસહ્ય બની જાય છે.
@COLLECTORDWK@sdmkhambhalia@PoonambenMaadam
सीना चौड़ा करने और ज्ञान वर्धन होने वाली जानकारी
पलक झपकने के समय को 1 निमिष कहा जाता है !
18 निमीष = 1 काष्ठ;
30 काष्ठ = 1 कला;
30 कला = 1 मुहूर्त;
30 मुहूर्त = 1 दिन व् रात (लगभग 24 घंटे )
अतः एक दिन (24 घंटे) में निमिष हुए :
24 घंटे = 30x30x30x18= 4,86,000 निमिष
जबकि, आधुनिक गिनती की इकाई के हिसाब से 24 घंटे में सेकेंड हुए ...
24x60x60 = 86,400 सेकंड
इस तरह....
86,400 सेकंड =4,86,000 निमिष
अतः 1 सेकंड में निमिष हुए :
1 निमिष = 86400 /486000 = 0.17778 सेकंड
अंततः.... 1/2 निमिष = 0.17778/2 = 0.08889 सेकंड
इसी तरह अगर हम योजन की बात करें तो....
श्री मद्भागवतम 3.30.24, 5.1.33, 5.20.43 आदि के अनुसार
1 योजन = 8 मील लगभग
तो, 2202 योजन = 8 x 2202 = 17,616 मील
अब हम अपने ऋग्वेद में उल्लेखित प्रकाश की गति को यदि आधुनिक गणना पद्धति में बिठाते हैं तो... हम पाते हैं कि....
सूर्य प्रकाश 1/2 (आधे) निमिष में 2202 योजन चलता है.... अर्थात,
0.08889 सेकंड में 17, 616 मील चलता है.
अर्थात, 0.08889 सेकंड में प्रकाश की गति = 17,616 मील
तो, 1 सेकेंड में = 17,616 / 0.08889 = 1,98,177 मील (3,18,934.966 किलोमीटर) लगभग
तथा, हैरानी की बात है कि आज की आधुनिकतम विज्ञान भी प्रकाश गति को.... 1,86,000 मील (3,18,934.966 किलोमीटर) प्रति सेकंड ही बताती है.
कहने का मतलब है कि.... खगोल विज्ञान के जिस ज्ञान को आधुनिकतम विज्ञान ने 1676 में खोजा और बताया ...
वो ज्ञान तो हमारे ऋग्वेद में हजारों लाखों साल पहले से ही उल्लेखित है.
क्योंकि, हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि ऋग्वेद को निर्विवाद रूप से मानव सभ्यता का सबसे प्राचीन ग्रंथ माना जाता है.
तो, हमारी ऐसी अनमोल उपलब्धियों के कारण हमें धर्मग्रंथों तथा अपने सनातन धर्म पर आखिर क्यों गर्व नहीं होना चाहिए ????
हमे अपने वेदों शास्त्रों का ज्ञान ना हो।
In 1948, Huang Yijun, a 31-year-old Chinese woman, discovered that she was pregnant. She went to the doctor, who informed her that the fetus was growing outside her uterus, specifically in her abdomen, a condition known as ectopic pregnancy.
Huang needed to undergo surgery to have the pregnancy removed, but she had no money for the procedure. Since she experienced no discomfort, she decided to ignore it.
One characteristic of this type of pregnancy is that the fetus can either be reabsorbed by the body or have calcium deposits form on it, resulting in a condition known as a stone baby or lithopedion.
In Huang's case, the baby developed into a stone baby, and she carried the pregnancy for 61 years before it was finally removed in 2009, when she was 92 years old.
𝗶𝗱𝗮 𝗽𝗶𝗻𝗴𝗮𝗹𝗮. 𝘀𝘂𝘀𝗵𝘂𝗺𝗻𝗮 𝗻𝗮𝗱𝗶𝘀
#thread
नाड़ियों पर आधारित सब कुछ शास्त्रों के अनुसार हमारे शरीर में 72 हजार 864 नाड़ियाँ हैं, जिनमें 24 नाड़ी प्रमुख होती हैं। उनमें 10 कुछ ज्यादा प्रमुख नाड़ियाँ होती हैं और इन 10 नाड़ियों में 03 अति महत्वपूर्ण नाड़ियां हैं जो कि हमारे जीवन में प्राण संचारित करती हैं, वे हैं इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना।
यहां पर नाड़ी से तात्पर्य धमनियाँ या वे नसें नहीं हैं जिनमें रक्त का प्रवाह होता है बल्कि इनसे तात्पर्य यह है कि वह मार्ग है जिनमें प्राण संचारित होते हैं। जो एक्टिवली हमारे जीवन में कई कार्यों के लिए जिम्मेदार होती है। जो बदलती भी है और इन्हें बदला भी जा सकता है। सामान्यत: दोनों स्वर 60 से 80 मिनिट में बदलते रहते हैं।
आयुर्वेद में यह कहा जाता है कि यदि आप शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहना चाहते हैं तो तीन नाड़ियों में जो रूकावटें हैं उनको दूर कर लें तो आप जीवन पर्यन्त स्वस्थ रहेंगे मतलब कि नाड़ियों में संतुलन बना लें। हमारी दिन में कई बार ये नाड़ियाँ बदलती रहती हैं। इड़ा मन से संबंधित कार्य के लिए है और पिंगला शरीर से संबधित कार्य के लिए। एक पुरूष है तो एक स्त्रीतत्व नाड़ी। एक नैगेटिव है, तो एक पॉजिटिव। अत: दोनों का संतुलन आवश्यक है। जैसे-जैसे हमारी नाड़ियाँ संतुलित होती जाएंगी हमारा जीवन भी संतुलित होता जाएगा।