A GOLDEN ROAR from Bharat!
Heartiest congratulations to our Women’s Cricket Team on their Gold Medal triumph at the #AsianGames2026.
What a performance, Champions!
#Cheer4Bharat
Back-to-back 𝗚𝗢𝗟𝗗 𝗠𝗘𝗗𝗔𝗟𝗟𝗜𝗦𝗧𝗦 🏅
Congratulations to #TeamIndia on clinching a 2️⃣nd consecutive Gold Medal in women's cricket at the #AsianGames 🇮🇳👏
Scorecard ▶️ https://t.co/DVlhLBajxB
साधु-संगति का अद्भुत फल :
एक बार देवर्षि नारद ने भगवान विष्णु से पूछा कि प्रभु! भक्तों और संतों की संगति करने से जीव को क्या फल प्राप्त होता है?
भगवान मुस्कुराकर बोले कि नारद, इसका उत्तर तुम्हें पृथ्वी पर मिलेगा।
नारद मुनि विष्णु भगवान की आज्ञानुसार एक वन में पहुँचे और बरगद के वृक्ष पर बैठे एक नन्हे तोते से वही प्रश्न पूछा। प्रश्न पूरा होते ही तोते ने प्राण त्याग दिए। नारद दुखी होकर भगवान के पास लौटे। भगवान ने उन्हें एक नवजात बछड़े से वही प्रश्न पूछने को कहा। प्रश्न सुनते ही बछड़े ने भी शरीर छोड़ दिया।
इसके बाद भगवान के निर्देश पर नारद ने एक नवजात घोड़े के बच्चे से भी वही प्रश्न किया और वह भी चल बसा। नारद अत्यंत व्याकुल होकर बोले कि प्रभु! मैं और किसी जीव की मृत्यु का कारण नहीं बनना चाहता।
भगवान ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा कि अब काशी के राजा के नवजात पुत्र से यही प्रश्न पूछो। इस बार तुम्हें उत्तर अवश्य मिलेगा।
राजमहल पहुँचकर नारद ने शिशु को गोद में लेकर पूछा कि वत्स! बताओ, साधु-संगति का क्या फल होता है?
तभी शिशु ने स्पष्ट वाणी में कहा कि हे देवर्षि! मैं वही तोता हूँ। आपके पवित्र संग से मुझे क्रमशः तोते, बछड़े और घोड़े के शरीर से मुक्ति मिली और अब मुझे दुर्लभ मनुष्य जन्म प्राप्त हुआ है। यही साधु-संगति का प्रभाव है।
नारद मुनि का सारा संदेह दूर हो गया। उन्हें समझ आया कि संतों का संग जीव की चेतना को ऊँचा उठाने वाली शक्ति है।
इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि सत्संग केवल साथ बैठना नहीं, बल्कि जीवन और चेतना को ऊँचा उठाने वाला संस्कार है।
संतों और भक्तों की संगति हमें सत्य, सेवा, भक्ति, करुणा और ईश्वर-स्मरण की ओर प्रेरित करती है।
सच्चा सत्संग थोड़े समय का हो, फिर भी उसका प्रभाव जीवनभर बना रह सकता है।
🙏 जय श्री हरि विष्णु 🙏
गणपति क्यों बिठाते हैं
हम सभी हर साल गणपती की स्थापना करते हैं, साधारण भाषा में गणपति को बैठाते हैं
लेकिन क्यों
किसी को मालूम है क्या
हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार, महर्षि वेद व्यास ने महाभारत की रचना की है
लेकिन लिखना उनके वश का नहीं था
अतः उन्होंने श्री गणेश जी की आराधना की और गणपति जी से महाभारत लिखने की प्रार्थना की
गणपती जी ने सहमति दी और दिन-रात लेखन कार्य प्रारम्भ हुआ और इस कारण गणेश जी को थकान तो होनी ही थी, लेकिन उन्हें पानी पीना भी वर्जित था
अतः गणपती जी के शरीर का तापमान बढ़े नहीं, इसलिए वेदव्यास ने उनके शरीर पर मिट्टी का लेप किया और भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश जी की पूजा की
मिट्टी का लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई, इसी कारण गणेश जी का एक नाम पर्थिव गणेश भी पड़ा
महाभारत का लेखन कार्य 10 दिनों तक चला
अनंत चतुर्दशी को लेखन कार्य संपन्न हुआ
वेदव्यास ने देखा कि, गणपती का शारीरिक तापमान फिर भी बहुत बढ़ा हुआ है और उनके शरीर पर लेप की गई मिट्टी सूखकर झड़ रही है, तो वेदव्यास ने उन्हें पानी में डाल दिया
इन दस दिनों में वेदव्यास ने गणेश जी को खाने के लिए विभिन्न पदार्थ दिए
तभी से गणपती बैठाने की प्रथा चल पड़ी
इन दस दिनों में इसीलिए गणेश जी को पसंद विभिन्न भोजन अर्पित किए जाते हैं
गणपती बाप्पा मोरया
पार्थिव श्रीगणेश पूजन
अलग अलग कामनाओ की पूर्ति के लिए अलग अलग द्रव्यों से बने हुए गणपति की स्थापना की जाती हैं।
(1) श्री गणेश* मिट्टी के पार्थिव श्री गणेश बनाकर पूजन करने से सर्व कार्य सिद्धि होती हे!
(2) हेरम्ब* गुड़ के गणेश जी बनाकर पूजन करने से लक्ष्मी प्राप्ति होती हे।
(3) वाक्पति* भोजपत्र पर केसर से पर श्री गणेश प्रतिमा *चित्र* बनाकर। पूजन करने से विद्या प्राप्ति होती हे
(4) उच्चिष्ठ गणेश*लाख के श्री गणेश बनाकर पूजन करने से स्त्री। सुख और स्त्री को पतिसुख प्राप्त होता हे घर में ग्रह क्लेश निवारण होता हे
(5) कलहप्रिय, नमक की डली या। नमक के श्री गणेश बनाकर पूजन करने से शत्रुओ में क्षोभ उतपन्न होता हे वह आपस ने ही झगड़ने लगते हे।
(6) गोबरगणेश, गोबर के श्री गणेश बनाकर पूजन करने से पशुधन में व्रद्धि होती हे और पशुओ की बीमारिया नष्ट होती हे(गोबर केवल गौ माता का ही हो
(7) श्वेतार्क श्री गणेश* सफेद आक मन्दार की जड़ के श्री गणेश जी बनाकर पूजन करने से भूमि लाभ भवन लाभ होता हे
(8) शत्रुंजय* कडूए। निम् की की लकड़ी से गणेश जी बनाकर पूजन करने से शत्रुनाश होता हे और युद्ध में विजय होती हे
(9) हरिद्रा गणेश* हल्दी की जड़ से या आटे में हल्दी मिलाकर श्री गणेश प्रतिमा बनाकर पूजन करने से विवाह में आने वाली हर बाधा नष्ठ होती हे और स्तम्भन होता हे
(10) सन्तान गणेश* मक्खन के श्री गणेश जी बनाकर पूजन से सन्तान प्राप्ति के योग निर्मित होते हैं
(11) धान्यगणेश* सप्तधान्य को पीसकर उनके श्रीगणेश जी बनाकर आराधना करने से धान्य व्रद्धि होती हे अन्नपूर्णा माँ प्रसन्न होती हैं
(12) महागणेश* लाल चन्दन की लकड़ी से दशभुजा वाले श्री गणेश जी प्रतिमा निर्माण कर के पूजन से राज राजेश्वरी श्री आद्याकालीका की शरणागति प्राप्त होती हैं
सब दुखो का नाश करने वाले प्राणायाम की आसान विधि: भगवान शिव के द्वारा वर्णन!
जब योगी की नाडी शुद्ध होगी तब समकाय हो जायगा अर्थात् न स्थूल न कृश न वक्र रहेगा और शरीरमें सुगंधी संयुक्त अच्छी कान्ति अर्थात् तेज रहैगा और वायुस्व रका साधन हो जायगा और आरम्भका लक्षण जान पडैगा और सब योगका ज्ञान होजायगा इसको योगावस्था कहतेहैं | प्राणवायु सिद्ध होनेके आरम्भमें यह चिन्ह होताहै और इसके पीछे सर्व दुःखका नाश होताहै
इस प्राणायाम को करने की विधि : https://t.co/iC8ypO2ddK
पूरा ग्रन्थ : https://t.co/b97pYKXKMN