बी.एस.पी. द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति-दिनांक 03.09.2026
(1) बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन कु. मायावती जी द्वारा आज बी.एस.पी. की आल-इण्डिया की हुई बैठक में पार्टी व मूवमेन्ट से सम्बन्धित पिछले दिये गये कार्यो की समीक्षा व कमियों को दूर करने तथा आगे के हर वर्ष सालाना होने वाले कार्यों के बारे में भी पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों को दिये गये ज़रुरी दिशा-निर्देशों का पूरी ईमानदारी व निष्ठा से अनुपालन करने की सख़्त हिदयात।
(2)वैसे भी पार्टी के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी के त्याग, तपस्या व समर्पण की तरह ही, मेरे लिये भी ’बहुजन समाज’ का हित, कल्याण व उसकी अस्मिता अर्थात बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट द्वारा ’शोषित वर्ग को शासक वर्ग’ बनाने का मिशनरी लक्ष्य सर्वोपरि है जिसके लिए सत्ता भी ज़रूरी।
(3)इसके अलावा, आर.एस.एस. (RSS) प्रमुख श्री मोहन भागवत के अमेरिका दौरे में कही गयी बातों का भी संज्ञान लेते हुये बहन कु. मायावती जी ने कहा कि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने जातिवाद व असमानता आदि के विरुद्ध आजीवन कड़े संघर्षों के बल पर एससी, एसटी व ओबीसी समाज के
(4)अर्थात् ’बहुजन समाज’ के करोड़ों लोगों के आत्म-सम्मान तथा उनके वास्तविक हित, कल्याण व उनके लिये आरक्षण के संवैधानिक अधिकार के साथ-साथ मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के जान, माल एवं मज़हब की सुरक्षा तथा महिलाओं आदि के मामलों में भी आरएसएस की कथनी व करनी में ज़मीन-आसमान का भारी अन्तर होने से उनमें विश्वसनीयता का अभाव है। अतः आरएसएस, बाबा साहेब के मानवतावादी व समतामूलक संविधान पर खुद ईमानदारी व निष्ठा से अमल करे और अपने लोगों पर उसपर अमल भी कराये, यही पूरी तरह से देश व जनहित में होगा।
(5)साथ ही, पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने देश व दुनिया के ज्वलन्त मुद्दों पर भी पार्टी के लोगों का ध्यान आकृर्षित कराया।
लखनऊ, 03 सितम्बर 2026, वृहस्पतिवार: बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की चार बार रहीं मुख्यमंत्री व पूर्व सांसद तथा ’बहुजन समाज’ के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान की प्रतीक बहन कु. मायावती जी द्वारा आज बी.एस.पी. की आल-इण्डिया की हुई बैठक में पिछले दिये गये कार्यो की समीक्षा व उनकी कमियों को दूर करने तथा आगे के हर वर्ष के सालाना होने वाले कार्यों के बारे में भी पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों को दिये गये ज़रूरी दिशा-निर्देशों का पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ अनुपालन करने की भी सख़्त हिदायत दी गयी।
इसी क्रम में उन्होंने यह भी कहा कि बी.एस.पी., परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के आदर्श सिद्धान्तों व उच्च आदर्शों को लेकर चलने वाली उनके ’आत्म-सम्मान व स्वाभिमान’ के कारवाँ को सत्ता की मंज़िल तक पहुँचाने के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु समर्पित पार्टी एवं मूवमेन्ट है, जिसको लेकर मान्यवर श्री कांशीराम जी ने उच्च वैज्ञानिक पद की अपनी सरकारी नौकरी भी छोड़ दी थी।
और फिर अपने माँ-बाप का घर, परिवार, रिश्तों-नातों आदि ये सब कुछ त्यागकर अपना पूरा जीवन कड़ा संघर्ष करते रहे और मुझे भी ख़ासकर शोषितों को जागरुक करने के लिए देश के कोने-कोने में भेजकर इस योग्य बनाया कि मैं, उन्हीं के नक्शेक़दम पर चलते हुये, उनके अधूरे रहे कारवाँ को आगे बढ़ाने की पूरी त्याग व तपस्या में लगी रहूँ और अन्ततः उन्होंने मुझे बी.एस.पी. पार्टी व बहुजन मूवमेन्ट का राजनीतिक उत्तराधिकारी भी बनाया। और मैंने भी उनके जीते-जी ही काफी हद तक अच्छा रिज़ल्ट लाकर भी दिखाया है और उनके संघर्ष को विनम्र श्रद्धांजलि के रूप में यूपी में पूर्ण बहुमत की बी.एस.पी. सरकार बनाकर बहुजन मूवमेन्ट के मान-सम्मान को ऐतिहासिक व गौरवशाली भी बनाया है, जो सबकी ज़ुबान पर होने के साथ-साथ तथा यहाँ इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में भी दर्ज है।
इसके साथ ही, आदरणीया बहन कु. मायावती जी ने यह भी बताया कि बहुजन समाज पार्टी के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी के संकल्प व समर्पण की तरह ही, मेरे लिये भी ’बहुजन समाज’ का हित, कल्याण व उसकी अस्मिता अर्थात् बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट द्वारा ’शोषित वर्ग को शासक वर्ग’ बनाने का मिशनरी लक्ष्य सर्वोपरि है और इस महान लक्ष्य की प्राप्ति के लिये निजी तौर पर मेरा ना तो कोई अपना है और ना ही पराया। जो भी बी.एस.पी व बहुजनों के हित के काम करेगा उसका स्वागत व आभार भी है।
और इसीलिये जिस प्रकार मान्यवर श्री कांशीराम जी ने अपने परिवार के लोगों व अन्य रिश्तों-नातों आदि को पार्टी कार्य में सहयोग करने की छूट तो दे दी थी, किन्तु उन्हंे चुनाव लड़ाने या सरकार बनने पर कोई भी पद आदि देने के वे खिलाफ थे, उसी प्रकार से उस संकल्प पर मैं भी पूरी तरह से क़ायम हूँ। जिस पर अमल करते हुये ही मैंने श्री आकाश आनन्द को पार्टी में कार्य करने की तो इनको इजाज़त दी है, जो हक़ीकत आप सभी लोगों के सामने है, लेकिन इस मामले में श्री आकाश आनन्द को अभी और अधिक परिपक्व/मैच्योर होने की जरुरत है। तब तक इनको पार्टी की अभी बड़ी ज़िम्मेवारी देना उचित नहीं होगा, जो कि विरोधियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों को इस्तेमाल करके चुनाव में हानि पहुँचाने से बचने के लिये भी समय की ज़रूरत है।
बी.एस.पी. यूपी स्टेट कार्यालय में आयोजित इस आल-इण्डिया की बैठक को सम्बोधित करने से पहले मा. बहनजी ने बी.एस.पी. सेन्ट्रल कैम्प कार्यालय में विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ पदाधिकारियों व अन्य ज़िम्मेदार लोगों से राज्यवार समीक्षा बैठक की और उनसे उनके राज्यों में पार्टी संगठन की मज़बूती एवं पार्टी के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने के बारे में पिछली आल-इण्डिया की हुई बैठक में दिये गये दिशा-निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट ली और उल्लेखित कमियों को समयबद्ध तरीके़ से दूर करने की भी हिदयात दी। ख़ासकर यूपी, उत्तराखण्ड व पंजाब में ये कार्य चुनाव की घोषणा से काफी पहले ही पूरा करने के भी जरुरी निर्देश मा. बहनजी ने पार्टी के लोगों को दिये, जिसके लिए उन्होंने 25 अगस्त को पंजाब स्टेट की व 31 अगस्त को उत्तर प्रदेश स्टेट की अलग से पार्टी की बड़ी बैठक भी बुलाई, जिसकी जानकारी मीडिया बन्धुओं को भी है।
इसके साथ ही, बी.एस.पी. के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी की अगले महीने दिनांक 9 अक्तूबर को पुण्यतिथि के अवसर पर यूपी मंे प्रदेश स्तर पर तथा बाकी राज्यों में ज़ोन-स्तर पर ’खुली संगोष्ठी के कार्यक्रम’ पूरी मिशनरी भावना से आयोजित करने के निर्देश देते हुये कहा कि इन कार्यक्रमों को बी.एस.पी. के प्रदेश व मुख्य ज़ोन प्रभारी आदि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जबकि बी.एस.पी. दिल्ली प्रदेश के सभी लोग नई दिल्ली गुरुद्वारा रकाबगंज रोड पर स्थित ’बहुजन समाज प्रेरणा स्थल’, जहाँ मान्यवर श्री कांशीराम जी की अस्थिकलश प्रतिष्ठापित है, वहाँ पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित करेंगे।
इसके अलावा, यूपी-दिल्ली सीमा पर बी.एस.पी. सरकार द्वारा स्थापित भव्य ’बहुजन प्रेरणा केन्द्र’ में रख-रखाव का वर्तमान में सरकारी कार्य चलने के कारण इस वर्ष पश्चिमी यूपी के लोग भी, यूपी के बाकी सभी मण्डलांे के लोगों के साथ ही लखनऊ आकर यहाँ वीआईपी रोड पर, वहाँ ’बौद्ध स्मृति उपवन’ के सामने, बी.एस.पी. सरकार द्वारा स्थापित विशाल गुम्बद आकार के भव्य ’मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल’ पर अपनी विनम्र श्रद्धांजलि एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित करेंगे, जिस कार्यक्रम को पूरी मिशनरी भावना से सफल बनाना है। इसके साथ-साथ हर वर्ष की तरह बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष के जन्मदिन के मौके पर पार्टी को आर्थिक सहयोग देने के लिए भी ज़रूरी दिशा-निर्देश दिये गये, जिस पर पार्टी के लोगों ने अपनी सहमति भी जताई।
इसके अलावा, आरएसएस प्रमुख श्री मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान भारत की अनेकता में एकता आदि सम्बंधी कही गयी बातों का संज्ञान लेते हुये बहन कु. मायावती जी ने कहा कि भारत में ख़ासकर जातिवाद व असमानता तथा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के अथक संघर्षों से एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों के अर्थात देश में ’बहुजन समाज’ के करोड़ों लोगों के वास्तविक हित, कल्याण और उनके आरक्षण के संवैधानिक अधिकार के साथ-साथ महिलाओं, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के जान, माल व मज़हब की सुरक्षा-सम्मान आदि के मामलों में आरएसएस की कथनी व करनी में ज़मीन-आसमान का भारी अन्तर होने के कारण ही उनमें विश्वसनीयता का अभाव है तथा यह संगठन काफी पुराना होने के बावजूद वह मान्यता/सम्मान अर्जित नहीं कर पाया है जो वे चाहते हैं।
इसीलिये आरएसएस के लोग, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी, कल्याणकारी व समतामूलक संविधान में अपनी पूरी आस्था व निष्ठा रखते हुये उस पर खुद ईमानदारी से अमल करें और उसी के हिसाब से अपने लोगों को उस पर अमल करने को बाध्य भी करें तो यह पूरी तरह से देश व जनहित में होगा और देश अवश्य ही अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी, अशिक्षा को दूर करके विकास की ओर तेज़ी से अग्रसर होगा जो कि संविधान का मुख्य उद्देश्य भी है और जिसके लिये बी.एस.पी. की स्थापना की गयी है और सरकार में रहते हुये व सरकार में नहीं रहने पर भी लगातार संघर्षरत है, और यही देश की जातिवादी व जनविरोधी पार्टियों के खिलाफ बी.एस.पी. की अम्बेडकरवादी पहचान है।
जबकि अन्य पार्टियों की तरह कांग्रेस पार्टी तो हर मामले में जबरदस्त दलित व अम्बेडकर विरोधी पार्टी है, जिसका इतिहास किसी से छिपा नहीं है। ऐसी स्थिति में अब पार्टी ने पूरे देश में सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले ही लड़ने का फैसला लिया है।
इसके साथ ही, पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह भी कहा कि इस समय दुनिया के कई भागों में जारी जंग तथा उसके फलस्वरूप तेज़ी से बदलते हुये संगीन हालात व सुरक्षा उपायों आदि में भी भारत की अपनी नीति/रणनीति मज़बूत होनी चाहिये।
और अब फिर से देश में आएदिन बढ़ रही महंगाई व कुदरती हो रही मार भी काफी चिन्ताजनक है। साथ ही, वर्तमान में जेन-जी (Gen-Z) व जेन-अल्फा (Gen-Alpha) आदि की भी चल रही गम्भीर समस्याओं को दूर करना बहुत ज़रूरी है। राज्यों के साथ-साथ खासकर केन्द्र सरकार भी इन सब मामलों को ज़रूर गम्भीरता सेे ले, तो यह देश व जनहित में उचित होगा।
जारीकर्ता:
बी.एस.पी. यूपी स्टेट कार्यालय
12 माल एवेन्यू,
लखनऊ-226001
जय भीम नमो बुद्धाय जय संविधान जय भारत
साथियों एक बात समझ आ गई बाबा साहब कह था उस समय राजाओं की विरासत चलती थी उसको विराम लगाया राजा की रानी के पेट से राजा पैदा उसका फुल विराम बाबा साहब ने लगा दिया वोट की अधिकार दिया लेकिन बाबा साहब अपने समाज के गद्दार चंद पैसे के कांग्रेस की गुलामी करनी शुरू ओर ने बाबा साहब के हारने के लिए सब कुछ किया जो वो कर सकती कूटीनीति बाबा साहब को हर जगह से हरवाया कुछ हरामखोरो समाज दलित गुलाम इन पार्टियों के आपकी जानकारी है बाबा साहेब का जब देहांत हुआ था दिल्ली में उस समय दिल्ली मैं कांग्रेसी की सरकार थी लेकिन बाबा पार्थिक शरीर
Grok
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उनका पार्थिव शरीर दिल्ली में नहीं दफनाया/जलाया गया। उसी दिन (6 दिसंबर) विमान से मुंबई (तब बंबई) लाया गया। 7 दिसंबर 1956 को दादर चौपाटी के पास बौद्ध रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार हुआ। यही स्थान आज चैत्यभूमि के नाम से जाना जाता है। बेटे यशवंतराव अम्बेडकर ने चिता को अग्नि दी। लाखों लोग शामिल हुए। उसी मौके पर कई लोगों ने बौद्ध धर्म की दीक्षा भी ली, क्योंकि बाबासाहेब 16 दिसंबर को मुंबई में धम्म दीक्षा समारोह करने वाले थे।14f314
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दिल्ली में क्यों नहीं हुआ?
मुख्य कारण ये थे:
उनका पुराना घर राजगृह और सबसे बड़ा अनुयायी आधार मुंबई में था।
उन्होंने खुद मुंबई में 16 दिसंबर को बड़े धम्म दीक्षा कार्यक्रम की योजना बनाई थी।
परिवार और अनुयायियों ने मुंबई ले जाने का फैसला किया। पत्नी सविता अम्बेडकर की कुछ रिपोर्टों में सारनाथ की इच्छा का जिक्र भी आता है, लेकिन अंत में मुंबई का फैसला हुआ।
मुंबई में शिवाजी पार्क या कुछ श्मशान घाटों पर अनुमति/स्थान संबंधी कठिनाई बताई जाती है, इसलिए चौपाटी के पास (एक सहयोगी की जमीन पर) बौद्ध शैली में संस्कार हुआ।
कुछ राजनीतिक नेता बाद में यह आरोप लगाते रहे हैं कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने दिल्ली में अंतिम संस्कार नहीं होने दिया। समकालीन विवरणों से पता चलता है कि दिल्ली में नेहरू समेत कई नेता श्रद्धांजलि देने आए, जगजीवन राम ने विमान की व्यवस्था की और शरीर परिवार/अनुयायियों के निर्णय पर मुंबई भेजा गया।
उस समय सरकार किसकी थी?
केंद्र सरकार: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद।
बॉम्बे राज्य (जिसमें मुंबई आता था) में भी कांग्रेस की सरकार थी। 1 नवंबर 1956 से मुख्यमंत्री यशवंतराव चव्हाण थे (उससे पहले मोरारजी देसाई)।
आज दिल्ली में मृत्यु स्थल पर स्मारक है और मुंबई में चैत्यभूमि पर समाधि/अस्थियां हैं। हर साल 6 दिसंबर को चैत्यभूमि पर लाखों लोग महापरिनिर्वाण दिवस मनाते हैं
मेरा अनुमान है
ये सब कांग्रेस की चल थी इसका कारण है गांधी का जन्म कहां हुआ था और उनकी समाधि कह पे पूरी जानकारी पढ़ ले
दूसरी बात बाबा साहब भारत रत्न कब मिला
ये जानकारी grok जानकारी पोस्ट करता हूं
गांधी के हरिजनों तुम जो बाबा साहब कांग्रेस की गुलामी देश आजाद हुआ 15 अगस्त 1947
बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को भारत रत्न (देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान) मरणोपरांत 1990 में दिया गया। घोषणा 31 मार्च 1990 को हुई। सम्मान समारोह 14 अप्रैल 1990 को राष्ट्रपति भवन में हुआ, जहां उनकी पत्नी डॉ. सविता अम्बेडकर ने राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन से यह पुरस्कार ग्रहण किया। उस समय प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह थे (जनता दल सरकार
Grok जानकारी पोस्ट कर रहा हू
राजनीतिक परिस्थितियों (मंडल आयोग, बसपा का उदय) का दबाव भी था। कांग्रेस सरकारों के लंबे शासनकाल में यह सम्मान नहीं दिया गया था, यही वजह है कि 1990 का फैसला अक्सर राजनीतिक चर्चा में आता है।बीएसपी मान्यवर साहब काशीराम सोच और इसकी शिष्य बहन मायावती जी का योगदान
है
हरियाणा इंस्टिट्यूट ऑफ सिविल अविएशन करनाल में महेंद्रगढ़ की रहने वाली प्रीती की कहानी दुःखद है की किस तरह जाति वाद हर जगह कायम है कहीं पीएचडी पुरी नहीं होने देते कहीं NFS के तहत पोस्ट किसी और को देते हैँ.उड़यन मंत्री और सिविल अविएशन मंत्रालय संज्ञान लें @RamMNK,@MoCA_GoI,
@NCIBHQ@PMOIndia आरक्षण और गरीबी दोनों व्यवस्था अलग है।
आरक्षण से व्यवस्था में भागीदारी उस वर्ग की जिसे तथाकथित उच्च वर्ग के लोग हजारों साल से वंचित रखे।देश में गरीबी बनाये रखने में अभी तक रही सरकारों की अहम भूमिका रही है। सरकारें गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा देती हैं।
यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री और बीएसपी अध्यक्षा आदरणीया बहन जी के आज दिनांक 27 अगस्त 2026 को किए गए ट्विटर पर पोस्ट का सार :
1.उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा चुनावी कदम और छलावा ज्यादा है।
2.यूपी की भाजपा सरकार एससी,एसटी और ओबीसी वर्गों के आरक्षित पदों की बैकलॉग भर्तियों में पदों के भरने की सरकारी घोषणा कब करेगी?
3.यूपी में भाजपा सरकार में 69000 शिक्षक भर्ती में एससी-एसटी-ओबीसी आरक्षण में गड़बड़ी की गई, इन वर्गों के 6800 अभ्यर्थियों को अविलम्ब उनका संवैधानिक अधिकार देकर जॉइनिंग करानी चाहिए।
4. यूपी में भाजपा सरकार में बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में स्कूली शिक्षा बदहाल स्थिति में है,यह अति निन्दनीय है।
5.यूपी में भाजपा सरकार ने 30000 सरकारी विद्यालय बन्द किए हैं,इन विद्यालयों को अविलम्ब सक्रिय और बहाल किया जाना चाहिए।
6.यूपी की भाजपा सरकार द्वारा बुजुर्ग महिलाओं को बसों में नि:शुल्क यात्रा की घोषणा से देने बेहतर है उन्हें शोषण, अत्याचार से बचाना चाहिए।
7. महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं आत्मनिर्भरता के बारे में भाजपा तथ्या अन्य सरकारों को सही नियत एवं नीति से कार्य करना चाहिए।
@Mayawati@AnandAkash_BSP@bspindia
@SurajKrBauddh जितने लोग आरक्षण खत्म करने की बात कर रहे हैं तो आओ पहले
*पहले जाति खत्म करते हैं*
*मंदिरों में एक ही जाति के आधिपत्य को खत्म करते हैं*
*ज्यूडिशियरी में एक वर्ग के आधिपत्य को खत्म करते हैं*
अगर यह खत्म नहीं कर सकते तो कान खोलकर सुन लो
आरक्षण किसी का बाप भी खत्म नहीं कर सकता।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने मानवतावादी, कल्याणकारी व सभी जाति-धर्मों के मानने वालों को एक-समान समतामूलक अधिकार देने वाला सेक्युलर संविधान देकर पूरे देश को एक कड़ी में जोड़ कर सशक्त भारत बनाने की गारण्टी सुनिश्चित की है और इसके तहत् सभी धर्म के ग्रंथों व उनके धार्मिक रीति-रिवाज व मान्यताओं के आधार पर शान्त एवं सुखी जीवन जीने का अधिकार है, जिसकी अनदेखी करने व उसमें दख़ल देने के बजाय सभी को उसकी पवित्रता का सम्मान करना चाहिये।
2. इस क्रम में महिलाओं की अस्मिता, सम्मान व पर्दा आदि के ज़रिये अपने आत्म-सम्मान व स्वाभिमान की रक्षा जैसे मामलों को उसकी उसी संवेदनशीलता से देखना चाहिये और जहाँ तक स्कूलों में यूनीफार्म, पर्दा, चादर, हिजाब आदि पहन्ने का मामला है, तो इन मामलों को ज़्यादा तूल देकर कोर्ट-कचहरी में विवाद का क़ानूनी मुद्दा बनाने के बजाय, उन्हें स्थानीय स्तर पर स्कूल प्रबंधन व शासन-प्रशासन की आपसी समझ व सूझबूझ से सुलझा लेना चाहिये ताकि किसी को भी इसकी आड़ में संकीर्ण राजनीति करने का मौक़ा ना मिल पाये।
3. जबकि बी.एस.पी. सर्वसमाज के सम्मान व उनके जान-माल व मज़हब की सुरक्षा की गारण्टी वाली अम्बेडकरवादी पार्टी है और यही मानना है कि किसी भी धर्म, धार्मिक ग्रंथ व धार्मिक प्रचलन/मान्यताओं के संवेदनशील मामलों पर सभी लोग टीका-टिप्पणी करने से बचें तो यह देश व जनहित में होगा।
4. इसके साथ ही, यूपी के ज़िला बदायूँ में भारतरत्न परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर जारी विवाद व तनाव की स्थिति को शासन-प्रशासन तुरन्त इसका शान्तिपूर्ण व उचित समाधान निकाले तो यह उचित होगा।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख द्वारा अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल व उस पार्टी के नेता केन्द्रीय मंत्री के बारे में यह सार्वजनिक बयान देना कि ’हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है’, यह कहना पूर्णतः अमर्यादित, अशोभनीय व अति-शर्मनाक है तथा इस प्रकार की अहंकारी व अलोकतांत्रिक बयानबाज़ी के लिये उन्हें उस पार्टी से व उनके नेता से ही नहीं बल्कि स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी के परिवार का अपमान करने हेतु पूरे जाट समाज से भी अविलम्ब माफी माँगनी चाहिये तो यह उचित होगा।
2. वैसे देश की राजनीति में सपा का चाल, चरित्र व चेहरा अपने विरोधी पार्टियों के लिये ही नहीं बल्कि अपने सहयोगियों के लिये भी हमेशा से राजनीतिक संकीर्णता व जातिवादी द्वेष आदि से ग्रसित ज़्यादातर अप्रिय और अविश्वसनीय ही रहा है, जिस कारण इसका राजनीतिक एवं चुनावी लाभ भी अक्सर मौक़ों पर भाजपा ही उठाती रही है और सेक्युलर ताक़तें कमज़ोर होती रहीं हैं।
3. इस पार्टी के इसी प्रकार के अति-अहंकारी स्वाभाव के कारण पहले सन् 1993 में, यू.पी. में श्री मुलायम सिंह यादव के साथ सपा व बसपा का बना गठबन्धन जल्दी ही टूट गया, जिसके फलस्वरूप दिनांक 2 जून 1995 को मेरी हत्या करने के षडयन्त्र के तहत् मेरे विरुद्ध कुख्यात लखनऊ स्टेट गेस्ट हाऊस काण्ड हुआ।
और फिर आगे चलकर इनके बेटे श्री अखिलेश यादव द्वारा, इनके पिता की तरह पुरानी ग़लतियों को फिर से ना दोहराने का आश्वासन देते हुये, लोकसभा का चुनावी गठबन्धन हुआ जो चुनाव का नतीजा इनके अनुरुप ना आने की वजह से कुछ समय के बाद ही बी.एस.पी. के प्रति इनके अहंकारी व स्वार्थी आदि रवैये के कारण फिर यह गठबन्धन भी टूट गया, क्योंकि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के कारवाँ वाली पार्टी बी.एस.पी. व उसकी नेतृत्व ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सर्वसमाज हितैषी अम्बेडकरवादी नीतियों व सिद्धान्तों से कदापि विमुख नहीं हो सकती है।
4. अब संक्षेप में यही कहना है कि यह पार्टी (सपा) गठबन्धन के मामले में केवल अपना काम निकालना जानती है और अपना काम निकलते ही फिर यह पार्टी गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेती है तथा दूसरी पार्टी के बारे में अनाप-शनाप भाषा का भी ख़ूब इस्तेमाल करती रहती है, जो कि यह सपा का पुराना रवैया है। ऐसे में सर्वसमाज के लोग सपा की संकीर्ण व जातिवादी राजनीति से ज़रूर सावधान रहें।
5. इसके साथ ही, यह बात भी जग-ज़ाहिर है कि सपा मुखिया श्री अखिलेश यादव अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए अपने PDA में से P को कभी पिछड़ा वर्ग, तो कभी P को पण्डितों का हितकारी बता देते हैं, जबकि इनके बारे में सच्चाई तो यह है कि वे पिछड़े वर्गों में अपनी ख़ुद की जाति के अलावा बाकी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों तथा अपरकास्ट समाज में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज के भी क़तई हितैषी नहीं रहे हैं।
6. इतना ही नहीं बल्कि इस पार्टी (सपा) की सभी रही सरकारों में दलितों, पिछड़ों, अक़लियतों, अपरकास्ट समाज में से विशेषकर ब्राह्मण समाज का भी काफी शोषण व उत्पीड़न आदि किया गया है तथा ना ही इनके हितों में कोई भी सकारात्मक क़दम उठाये गये हैं, बल्कि इनकी सरकार में वास्तव में केवल गुण्डों, बदमाशों, माफियाओं व अन्य अराजक तत्वों का ही भला हुआ है और साथ ही इनकी सरकार में दिन-छिपने के बाद हमारी बहिन-बेटियाँ भी घर से बाहर नहीं निकल सकती थीं। ऐसे में सर्वसमाज के लोग यू.पी. आगामी विधानसभा आमचुनाव में इस पार्टी (सपा) को सत्ता में क़तई भी ना आन दें, जो यह उनके हित में होगा।
1. देश में वन्दे मातरम् गायन को पूरा गाना है या शुरू के दो छंद (पैरा) गाना है या नहीं गाना है, इसको लेकर जो इस समय में देश में राजनीति चल रही है, यह ठीक नहीं है और इस मामले में हमारी पार्टी का यही कहना है कि वन्दे मातरम् गायन को लेकर अभी हाल ही में संसद में जो क़ानून पास किया गया है यह कोई पहली बार ऐसा नहीं हो रहा है।
2. क्योंकि केन्द्र व राज्यों में भी सत्ता परिवर्तन के दौरान् सभी पार्टियाँ अपने राजनैतिक स्वार्थ/फ़ायदे के हिसाब से या फिर अपनी कमियों पर से जनता का ध्यान बाँटने के लिए यह सब करती रहती हैं अर्थात् एक-दूसरे के बने क़ानूनों को बदलती रहती हैं।
3. जबकि इस समय देश व जनहित के मुद्दों पर व ख़ासकर बेरोज़गार युवाओं व छात्र-छात्राओं ’जेन-जी’ व स्कूली बच्चे-बच्चियों की ’जी-अल्फा’ एवं इस समय देश के कुछ भागों में भयंकर आई बाढ़ से हो रही जान-माल की हानि आदि के अनेकों और भी अति-महत्वपूर्ण मुद्दों पर केन्द्र व सभी राज्य सरकारों को तथा साथ ही सभी राजनैतिक पार्टियों को भी सही से समुचित ध्यान देना चाहिये, यही वर्तमान में देश व जनहित में समय की सबसे ज़रूरी माँग भी है।
@Mayawati 🟥 मायावती का सरकारों पर हमला, स्कूलों की बदहाल स्थिति पर उठाए सवाल
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान में Gen-Z और Gen-Alpha के उतरने का किया जिक्र।
मायावती ने कहा—छोटे बच्चे भी सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
केंद्र और राज्य सरकारों से स्कूलों की स्थिति पर तुरंत ध्यान देने की अपील
चलो जयपुर
चलो जयपुर | चलो जयपुर
यूथ आइकॉन, माननीय आकाश आनंद जी
राष्ट्रीय संयोजक, बहुजन समाज पार्टी
के स्वागत में एवं कार्यकर्ता महासम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचें।
📅 दिनांक: 23 अगस्त 2026
⏰ समय: सुबह 11:30 बजे
📍 स्थान: बिरला ऑडिटोरियम, जयपुर
समय पर पहुंचकर कार्यक्रम को सफल बनाएं।
जय भीम | जय भारत | जय बसपा
1. उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा आमचुनाव सन् 2027 की तैयारियों के मद्देनज़र बी.एस.पी. के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने की ज़मीनी मज़बूती के साथ-साथ पार्टी उम्मीदवारों के चयन व उनके नामों की पार्टी के विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलनों में घोषणा करने आदि की प्रक्रिया भी चल रही है, जिसको लेकर विरोधी पार्टियों में काफी बेचैनी है और सत्ताधारी पार्टी बीजेपी व अन्य विरोधी पार्टियों में भी अब अनवरत बदलाव होना भी स्वाभाविक है।
2. वैसे बी.एस.पी. ने, सर्वसमाज में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज को भी पार्टी में उनकी सन् 2007 की तरह बी.एस.पी. की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की तैयारी के हिसाब से, उन्हें बी.एस.पी. उम्मीदवार बनाना जब से शुरू किया है तब से विरोधी पार्टियों में इसको लेकर चर्चा व चिन्तायें दोनों होना स्पष्ट हैं, जिनके हथकण्डों से ’बहुजन समाज’ के लोगों को लगातार सजग व सतर्क रहने की ज़रूरत है।
3. इसी क्रम में बहुजन समाज पार्टी के काफी लम्बे अरसे से चले आ रहे राष्ट्रीय महासचिव, वरिष्ठ अधिवक्ता व बी.एस.पी. शासनकाल में यूपी के महाधिवक्ता, उत्तर प्रदेश बार काउन्सिल के कई बार अध्यक्ष तथा बी.एस.पी. सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं कई बार बी.एस.पी. के राज्यसभा सांसद रहे श्री सतीश चन्द्र मिश्र जी को, पार्टी द्वारा लीगल व मीडिया आदि के साथ-साथ अब चुनाव आयोग सम्बंधी कार्यों की भी महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी साैंपी गयी है, जो कि ख़ासकर आगामी विधानसभा आमचुनाव के दौरान कई मायने में इनकी अहम् भूमिका रहेगी।
@AmitSin95865779@Bsp4u सत्ता आए या ना आए। बहुजन समाज पार्टी जाति व्यवस्था के खिलाफ हमेशा आवाज उठाती रहेगी।आज जो शोषित पीड़ित और वंचितों में अपने खिलाफ हो रहे जाति आधारित शोषण की आवाज उठाने का जो साहस पैदा हुआ है वो बहुजन समाज पार्टी की ही देन है
बहुजन समाज पार्टी बराबरी की व्यवस्था में विश्वास रखती है