मोदी जी ! देख रहे है आप क्या हाल बना दिया है आपने देश का। शर्म आ रही है ये वीडियो देखकर।
एक छह साल के बच्चे को आपकी पुलिस प्रताड़ित कर रही है सिर्फ इसलिए कि उसने प्रधानमंत्री के इस्तीफे की माँग वाला पोस्टर पकड़ा रखा था।
बेहद शर्मनाक है ये। बेहद शर्मनाक।
इतना डर, इतना ख़ौफ़?
छह साल के बच्चे को पुलिस ले जा रही है क्योंकि उसने प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगने वाला पोस्टर पकड़ा हुआ था।
इस तरह का भय अक्सर सरकारों की विदाई का संकेत होता है या फिर इमर्जेंसी राज का।
An investigation by Amnesty International says the Indian government used lethal weapons, including pellet-firing shotguns, grenades, batons and electric shock devices against Cockroach Janta Party-led protesters. The Modi government has denied it used excessive force.
मुख्यमंत्री @Dev_Fadnavis जी,
महाराष्ट्र के अनेक आदिवासी छात्र 10 दिनों से अधिक से अपने अधिकारों के लिए भूख हड़ताल पर हैं।
पुणे में 'छात्रों की गूंज' के दौरान छात्राओं ने बताया कि छात्रावासों में 30 वर्ष की अनावश्यक उम्र सीमा, अपमानजनक नियम, असुरक्षित सुविधाएं और महिलाओं के लिए गर्भावस्था जांच जैसे अमानवीय प्रावधान लागू हैं।
सुदूर गांवों-कस्बों से आने वाले ये छात्र कोई दान नहीं, अपना अधिकार मांग रहे हैं। अपेक्षा है कि आप उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान करेंगे।
Getting paid only ₹2,000 a month for cooking, washing utensils & cleaning the school.
The govt school staff are being exploited. They deserve better pay.
“जब नाश मनुज पर छाता है पहले विवेक मार जाता है ”
तबेले में चल रहे जिस स्कूल को छिपाने के लिए CJP कार्यकर्ताओं पर हमला हुआ,,
उस स्कूल की तस्वीर आज पूरे हिंदुस्तान ने देख लिया अब तो BBC भी पहुँच गया है !!
देखिए BBC की ये रिपोर्ट 👇
साहिल की FIR दर्ज हुई। यह न्याय की तरफ़ पहला क़दम है।
पर सोचिए - एक FIR लिखने की इजाज़त तक गृह मंत्रालय से आनी पड़ी। अब समझ आया कि न्याय पर लगाम किसने लगा रखी है।
मैंने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया।
उस जनसभा में मैंने किसी जाति या धर्म का नाम नहीं लिया, सिर्फ जनता की समस्याओं पर बात की।
लेकिन बड़े दुख के साथ कहना पड़ता है कि मेरे भाषण के बाद BJP के लोगों ने वहाँ हवन किया और उस स्टेज का शुद्धिकरण करने का काम किया।
Is this the way Democracy works?
How are you protecting the Constitution?
हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खरगे जी की सभा के बाद मंच का “शुद्धिकरण” सिर्फ़ एक व्यक्ति का अपमान नहीं - यह उस संविधान का अपमान है जिसने छुआछूत को अपराध घोषित किया।
और यह कोई इकलौती घटना नहीं है। यह BJP-RSS की सालों से पाली-पोसी मनुवादी सोच का नतीजा है - वो घिनौनी सोच जो आज भी इंसान का दर्जा उसके जन्म से तय करती है, समानता और मानवता से नहीं।
पैलेट गन, कील लगी लाठियां और आंसू गैस के गोले - शांतिपूर्ण तरीके से सिर्फ़ अपने भविष्य के बारे में सवाल पूछ रहे छात्रों पर इनसे हमला किया गया।
पुलिस ने लड़कियों को पीटा, कई के प्राइवेट पार्ट्स पर चोटें आईं। नाबालिगों की हड्डियां टूट गई। मोदी सरकार सवालों का जवाब ऐसी बर्बरता से देती है।
और गृह मंत्री? लगभग 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अमित शाह इस मामले पर जवाब देने के लिए संसद तक नहीं आए। चर्चा के लिए विपक्ष के हर प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया है।
उनकी चुप्पी सिर्फ अनदेखी या चूक नहीं - यह हिंसा को मंज़ूरी है। वो या तो गुनहगार हैं या फिर नाकाबिल।
हम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग करते हैं। और जब तक उन्हें जवाबदेह नहीं ठहराया जाता, ये लड़ाई नहीं रुकेगी।
https://t.co/YHA3mGhX0h
झारखंड में विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ बल का इस्तेमाल ग़लत है।
छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है और बातचीत से ही समाधान निकल सकता है।
झारखंड सरकार को इन छात्रों की बात सुननी चाहिए और हर समस्या का तुरंत समाधान करना चाहिए।
The use of force against students protesting in Jharkhand is wrong.
Students have a right to peaceful protest, and only dialogue can yield solutions.
The Jharkhand government must continue to hear these students out and resolve their issues immediately.
यह जंतर मंतर या रांची नहीं है। उड़ीसा का भुवनेश्वर हैं। युवक कांग्रेस अमित शाह और नरेंद्र मोदी के इस्तीफे को लेकर सड़क पर उतर आई है।
युवा अब बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है। पूर्व से पश्चिम तक उत्तर से दक्षिण तक आग लगी हुई है। उड़ीसा के युवा पेपर लीक को लेकर शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड का इस्तीफा मांग रहे हैं।
शानदार बात है कि जेन ज़ी इस तरह से तर्क कर रहे हैं। मोहन भागवत संवाद के नाम पर सरकार से अलग दिखने का प्रयास कर रहे हैं। संवाद की कमी का उपदेश दे रहे हैं मगर सरकार ने संवाद तो किया नहीं। मोहन भागवत कहते हैं कि जेन ज़ी ईमानदार है। एंटी नेशनल नहीं है जबकि संघ के ही लोग टीवी में जाकर जेन ज़ी को एंटी नेशनल बता रहे हैं। गोदी मीडिया एक बच्ची के घर और दुकान तक पहुंच गया। इसलिए मोहन भागवत की बातों से प्रभावित नहीं हैं। यह बातचीत आंदोलन के ख़त्म होने के बाद हो रही है। सरकार और गोदी मीडिया का आचरण ठीक होता तो मोहन भागवत की बातें प्रभावित भी करतीं। एक लाइन की आलोचना से वह भी बिना नाम लिए, सरकार की आलोचना नहीं हो जाती।