🚨 अहीरो का महा-फर्जीवाड़ा: पढ़ाई से लेकर खेल तक!
याद रहें शॉर्टकट से मिली कामयाबी कभी टिकती नहीं है. पिछले कुछ दिनों में 'उम्र छुपाने' के दो ऐसे मामले आए हैं, जिसने सबको हैरान कर दिया है:
1️⃣ पढ़ाई में फर्जीवाड़ा: यूपी संस्कृत बोर्ड में पूरे प्रदेश में टॉपर बनने वाला रजनीश यादव असल में 28 साल का युवक (अजय कुमार) निकला, जिसने कागजों पर उम्र 15 साल कर ली थी. सीएम योगी से मिला इनाम अब वापस छिनेगा और FIR भी दर्ज हो गई है.
2️⃣ खेल में फर्जीवाड़ा: टीम इंडिया के अंडर-19 क्रिकेटर रोहित यादव के पास से 3-3 अलग-अलग बर्थ सर्टिफिकेट (2007, 2009, 2010) मिले हैं. उम्र में हेराफेरी के कारण BCCI ने उन्हें टीम से बाहर कर 2 साल के लिए बैन कर दिया है.
बड़ा सवाल: जब ऐसे फर्जी लोग शॉर्टकट से आगे आते हैं, तो असली और हकदार युवाओं का हक मारा जाता है. ऐसे जालसाजों पर क्या कार्रवाई होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में बताएं! 👇
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@goluyadav476@TeamRajanyas अबे झोपड़ी के अनपढ़ शूद्र ग्वाले पहले लिखना बोलना सीख ले ढंग से😂😆अब जा जाके 🐃 चरा जो तेरा काम है। पढ़ाई लिखाई तुम लोगों के बस की बात ही नहीं है।
@yaduvansham13@iamarunsinghydv@grok मेरे जैसा क्षत्रिय एक अच्छा जीवन जी रहा है ये ही काफ़ी है। तेरी तरह नहीं सुबह शाम भैंसों और बकरियों को नाले में नहलाने पहुँच जाए।
@iamarunsinghydv@yaduvansham13@grok ग़लत, आप लोगों की आबादी काफ़ी ज़्यादा है यहाँ पे लेकिन आपके लोगों में जाहिल ज़्यादा और पढ़े लिखे कम है। और आप उसको मैनीपुलेशन बोल के @grok के इंटेलीजेंसी पे सवाल उठा रहे जो की वो बस एआई है जो फैक्ट पे डेटा शेयर करता है।
@yaduvansham13@iamarunsinghydv@grok ख़ुद के बारे मैं ख़ुद बता देता हूँ, पूर्वांचल(बनारस) का रघुवंशी क्षत्रिय हूँ और तेरे जैसे ग्वाले\अहीर आज भी मेरे घर पे झाड़ू पोछा करते हैं और खेतों में काम करते हैं।
@yaduvansham13@iamarunsinghydv@grok 1:30 बज गए अब रहने दे तेरे से ना हो पाएगा 🫏 तेरे मुंह में ग्रोक ने पहले ही हग दिया है इसलिए अच्छी बातें तो तेरे मुंह से निकल ही नहीं सकती।
@yaduvansham13@iamarunsinghydv 🐃 🐏 aur 🐐 चराने का काम शुद्र अहीरों\ग्वालों\गड़ेरियों का कार्य था और अभी भी करते हैं इससे उनकी जातीय पहचान छुप नहीं पाती और यादव लिखना तो तुम लोगों ने १९२० के बाद से ही अपनाया था @grok इसी अहीरांड को बताओ अहीर\ग्वाले\गड़ेरिया कब से यादव लिखने लगे ख़ुद को यदुवंशी कहने लगे?
@yaduvansham13@iamarunsinghydv वही तो मैं भी कह रहा हूँ।असली नक़ली का भेद पूरा आर्यावर्त जानता है और उसको हम क्षत्रियों को सिद्ध करने की कोई अवश्यकता नहीं है ये काम शूद्रों का होता है जो ३६४ दिन शोषित पिछड़े बने रहते हैं और १ दिन के लिए नकली ☂️ बन के सुख लेना चाहते है और ख़ुद भगवान का वंशज साबित करने लगते है।
@SabhapatiM30191 भगवान से ख़ुद को जोड़ने में कोई बुराई नहीं लेकिन जब ये मलेच्छ ख़ुद को उनका वंशज बताते है तो ये स्वतः सिद्ध हो जाता है की ये शुद्र ही थे और आज भी वही हैं।३६४ दिन ख़ुद को शोषित, प्यासा और पिछड़ा बताते है १ दिन श्री कृष्ण के वंशज बन जाते है। इनके दोगलेपन का कोई जवाब नहीं।
ऐतिहासिक स्रोतों के मुताबिक अहीर/ग्वाला समुदायों ने यादव सरनेम और यदुवंश दावा मुख्यतः 19वीं सदी के अंत से 20वीं सदी की शुरुआत में अपनाया। 1910 में अहीर यादव क्षत्रिय महासभा और 1924 में अखिल भारतीय यादव महासभा बनी जिसने इसे संगठित रूप से बढ़ावा दिया। 1930 के आसपास यह और फैला। प्राचीन आभीर-यादव लिंक पर विद्वानों में मतभेद हैं। ऐसी वंशावली दावे इतिहास में कई समुदायों में आम रहे।
ये तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। अखिलेश यादव का यूट्यूबर खुलेआम ब्राह्मण समाज पर अभद्र टिप्पणी कर रहा है।
363 दिन हम देवी देवताओं को नहीं मानते फिर अगले 2 दिन भगवान श्रीकृष्ण से सम्बन्ध रखने लगते हैं 🤣
@iamarunsinghydv@grok किसलिए शुद्रों का नक़ली ☂️ बनने के लिए या फिर उनका भगवान श्री कृष्ण का वंशज बनने के लिए| जो असली है उनको पूरी दुनिया जानती है और जो नकली है उसको दिखावा करना होता है।
@satyavachane कलयुग में कोई इंसान इतना बड़ा नहीं हुआ कि उसे भगवान के स्थान पर पूजा जाए और अगर खुद को इस योग्य कोई समझता है तो जिस तरह अंबानी के वहां नंगे पांव दौड़ते हुए पहुंचते वैसे हम जैसे आम इंसान के वहां भी पहुंचे
@iamarunsinghydv@grok@grok तो ये भी बताता है की अहीरों/ग्वालो ने यादव नाम १९३० के बाद से लिखना स्टार्ट किया और ख़ुद को यदुवंश से जोड़ने लगे? इसको भी तुमको मानना पड़ेगा क्यूँ?