#Ghaziabad#cjp_पार्टी
आज की घटना की टाइम लाइन देखिए और समझिए की कैसे हिंदूवादी संगठनों को पुलिस संरक्षण दे रही है..
हिंदू रक्षा दल का सदस्य रविन्द्र गोविंदा पिंकी चौधरी के बेटे के साथ यूपी गेट पहुंचता है, फिर पुलिस वाली के सामने कहता है सारे अधिकारी जानते है मुझको, मुझे परेशान न करो” उसके बाद दिल्ली में कॉकरोचों का इलाज करने की ब
धमकी देकर निकल जाता है, @ghaziabadpolice उसे हिरासत में भी लेती है जाने देती है, वो बाइट देकर बिना नंबरो की गाड़ी से निकल जाता है,
इन्हीं गुंडों ने CAA-NRC के प्रोटेस्ट में पुलिस की मौजूदगी में बच्चों पर गोलियाँ चलाई थीं।
तब सेकुलर पार्टियाँ ही नहीं, देश की सबसे बड़ी आबादी भी खामोश थी।
ये तो कुछ भी नहीं है, जो हम गुज़रे हैं, वो दर्द हम ही जानते हैं।
अब इन फ्रिंज एलिमेंट्स को देखिए! ये नारा लगा रहे हैं कि, “हिंदुस्तान में रहना होगा, हिंदुओं को बाप कहना होगा।” @dgpup और @Uppolice बस इतना बता दें कि इन फ्रिंज एलिमेंट्स को ऐसे कौनसे विशेषाधिकार मिले हुए हैं, जो इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती? ये फ्रिंज एलिमेंट्स आए दिन इसी तरह की वाह्यात टिप्पणियां करते रहते हैं, लेकिन मजाल भला कि इनके खिलाफ कोई कार्रवाई हो!
ये मोदी-मोहन यादव की पुलिस है। मुसलमान देखते ही ख़ून की प्यासी हो जाती है। इतनी बर्बरता उसके अंदर तो पहले से बैठी रहती है मगर जब सरकार सिर पर हाथ रहकर कहे मरो तो वह पूरी बेरहमी से टूट पड़ती है।
ये वीडियो उज्जैन का है मगर ये दृश्य देश के किसी भी हिस्से में देखा जा सकता है। बीजेपी शासित राज्यों में तो ये बहुत आम बात है।
Big Breaking-
योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को गुमराह किया!
कानून की पढ़ाई करने वाले छात्र अक्षत त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट के सामने सबूत रखे।
सुप्रीम कोर्ट में योगी सरकार ने कहा था कि जिस अधिकारी ने छात्र अक्षत त्रिपाठी को काकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में हिस्सा लेने की खातिर 5 लाख का बॉंड नोटिस दिया था,
उसे सस्पेंड कर दिया गया है।
जबकि हकीकत में योगी सरकार ने केवल उस सब इंस्पेक्टर को सस्पेंड किया जिसने इस मामले को 'फॉरवर्ड' किया था।
नोटिस जारी करने वाले ACP (Executive Magistrate) पर कोई एक्शन ही नहीं हुआ।
अक्षत त्रिपाठी ने इस बात की गवाही देती इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट के आगे रखी है।
योगी सरकार में चल क्या रहा है?
नियति की आंख में पल क्या रहा है?
हम @Uppolice से अनुरोध करते हैं कि इस व्यक्ति के विरुद्ध तत्काल उचित कार्रवाई की जाए जो मान्य राष्ट्रीय अध्यक्ष ओवैसी साहब के विरुद्ध हत्या की खुले आम धमकी दे रहा है, जबकि यह व्यक्ति पहले भी कई बार @aimim_national के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष @imshaukatali साहब व मुझे (@shadab_chouhan1) जान से मारने की धमकी दे चुका है जिसकी शिकायत भी दर्ज कराई गई थी।
@dgpup@meerutpolice@CMOfficeUP
"मोदी सरकार को मालूम था कि एक दिन चुनाव आयोग के भीतर का खेल बाहर आएगा और जनता चुनाव आयुक्त को गिरफ्तार करने की मांग करेगी। इसीलिए दिसंबर 2023 में मोदी सरकार ने कानून बनाया कि चुनाव आयुक्तों को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। यह कानून तब बना जब दोनों सदनों के 141 सांसदों को सस्पेंड कर दिया गया था। सदन में कोई विपक्ष ही नहीं था। अब समझ में आ रहा है कि वह कानून किसलिए बनाया गया था।"
सुप्रीम कोर्ट के 13 जुलाई से लागू रोस्टर के हिसाब से ज्ञानेश कुमार की बेटी और गौतम बुद्ध नगर की DM और ज्ञानेश की बेटी मेधा रूपम के जुर्माने का मामला जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की बेंच में सुनवाई के लिए जाना चाहिए था।
यह मामला ऐन मौके पर जस्टिस एस.सी. शर्मा और एन. के. सिंह की बेंच में भेजा गया और वहां से इलाहाबाद हाईकोर्ट के आर्डर को स्टे करवा लिया गया।
यह रोस्टर सीजेआई सूर्यकांत महोदय तय करते हैं। अब आप इनसे उम्मीद करते हैं कि ज्ञानेश को लेकर कोई जनता के पक्ष में फैसला देंगे तो आप बेवकूफ हैं।आज अगर चुनाव आयोग स्वेच्छाचारी है तो इसके जिम्मेदार महोदय भी हैं।
लेकिन शाहरुख खान कहता है कि— अगर कोई पदार्थ हानिकारक पदार्थ है तो सरकार उसे Ban क्यों नहीं कर देती है।
देश को नशे से दूर रखना सरकार की जिम्मेदारी है तो सरकार हानिकारक पदार्थों को Ban करे वरना हमें तो पैसे मिलते हैं हम प्रचार करेंगे।
ज्ञानेश कुमार के एजेंट दो चुनाव आयुक्तों को झूठा साबित करने में जुट गए हैं . सूत्रों के हवाले से प्लांट किया जा रहा है कि सारे फैसले सहमति से लिए गए हैं .
है हिम्मत तो ज्ञानेश कुमार आएं मीडिया के सामने और एक एक प्वाइंट पर जवाब दें .
अपने चुनिंदा पत्रकारों के ज़रिए सूत्रों के नाम से खबरें क्यों प्लांट करवा रहे हैं ज्ञानेश कुमार ?
देश भर का चुनाव लूटने के अपराध में ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करके जेल भेजना चाहिए।
दिल्ली हरियाणा महाराष्ट्र बिहार बंगाल के सारे चुनाव बेईमानी से जीते गये ये सभी चुनाव तत्काल प्रभाव से रद्द किये जाय।
मोदी ने “लोकप्रियता” नहीं “लूटप्रियता” से चुनाव जीता है।
#चुनावी_लुटेरा_ज्ञानेश
न्यूज 24 से दबाव में इस्तीफा देने वाली ईमानदार पत्रकार गरिमा सिंह ने वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ज़बरदस्त रिपोर्टिंग करते हुए आइना दिखाया ,
गरिमा सिंह तुम भारत क़ी गरिमा हो , सलाम है आप को ऐसी पत्रकारिता के लिये ,
मैसुर घूमने के बाद मेरा एक विचार और मजबूत हो जाता है।
आजादी से पहले जिन राजाओं ने गुलामी को स्वीकार नहीं किया और अंग्रेजों से लड़े और लड़कर शहीद हो गए, उनकी नस्लें आज कहीं मुफलिसी की जिंदगी जी रहे हैं।
और जिन राजाओं ने अंग्रेजों का साथ दिया या फिर अंग्रेजों से संधि करके उनकी हुकूमत स्वीकार कर लिया उनके वंशज आज भी महलों में जी रहे हैं।
@grok माना कि यह मेरा निजी विचार है, लेकिन क्या मेरा यह विचार पूरी तरह गलत है? या इसमें कुछ सच्चाई है?