@AKTKbasics शायद हिसाब बराबर करने वाले संदेश के मद्देनजर चींजे की जा रही हैं ..!
लेकिन किसी के भी पास इस बात कोई सुबूत/ तथ्य नही कि, आखिर जबरन हिसाब बराबर किन चीजों का करना है।।
@thorodinson07@ajeetbharti समझदार लोग छोड़ रहे हैं वो बहुत दुःखी होकर जाना नही चाहते लेकिन जो हालात पैदा किये गए हैं उस वजह से मजबूर हैं लोग , जो लोग जा रहे है या चले गए हैं उनसे बात की इस विषय पर बोले नही जाना चाहते हैं लेकिन जबरन जा रहे/चले गए ..!
Two more students have died at IIT Bombay in the last six months.
July 28 – Sohil Sangwan
February 04 – Naman Agarwal
Since neither belonged to an influential community, there was no uproar no one demanded the Director's resignation no professor was accused.
1/2 Read continue
@abhinaymaths@harnathsinghmp शर्म कर लेते थोड़ा सा आप ..! नीचता की भी हद होती है।।
महोदय , 2018 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदला गया था , जबकि इस राष्ट्र विरोधी एक्ट को समाप्त भी किया जा सकता था ।
@NijiSachiv
मैं सालों से कह रहा हूँ कि तकनीकी संस्थानों से humanities का सफाया ज़रूरी है
हम JNU को वामपंथी विचारधारा से मुक्त कराने निकले थे, उल्टे हर कॉलेज में इस विषैली मानसिकता की एक शाखा खुल गयी
@RajivMessage जी ने चेताया था कि STEM यानी विज्ञान, तकनीकी, इंजीनियरिंग और गणित के अलावा पश्चिम के अकादमिक संस्थानों से कुछ भी लेना घातक साबित होगा
#IITBombayProtest
BHU बना… तो उसके “कम्पटीशन” में AMU भी बना 🤔
नाम देखिए
📍 बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU)
📍 अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU)
एक हिंदू, एक मुस्लिम
दोनों यूनिवर्सिटी, नाम भी धर्म आधारित।
पर फर्क कहाँ आ गया?
👉 BHU सबके लिए है
👉 AMU “अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय” है
अब ज़रा जोर से बोलिए
❓ अल्पसंख्यक कौन है?
संविधान में कहीं साफ़-साफ़ लिखा है क्या?
कोई कॉलम, कोई परिभाषा, कोई निश्चित मापदंड?
❌ नहीं।
फिर भी AMU माइनॉरिटी यूनिवर्सिटी है और BHU न माइनॉरिटी है, न मेजॉरिटी। बस — सबका साथ, सबका विकास।
अब ज़रा इतिहास की दूसरी लाइन पकड़ते हैं 📜
🗓️ 1925 — बना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)
🗓️ 1926 — ठीक एक साल बाद बना एक और संगठन… 👉 तबलीगी जमात
अब गूगल कर लीजिए
🌍 दुनिया के कितने देशों ने तबलीगी जमात पर प्रतिबंध लगाया है?
👉 9 देश
किन-किन में?
किर्गिज़स्तान, अज़रबैजान, अरब के कुछ देश…
और हैरानी की बात यह कि जिस संगठन का
📌 मुख्यालय भारत में है
📌 सुप्रीम कोर्ट से ~3 किमी
📌 संसद से ~4 किमी
📌 निज़ामुद्दीन में
उसके बारे में
❌ न Gen-X जानती है
❌ न Gen-Y
❌ न Gen-Z
❌ न बुज़ुर्ग
❌ न आम जनता
कोविड नहीं आता, तो शायद
👉 यह नाम भी सामने नहीं आता 😷
अब ज़रा और सीधे सवाल ❓
🩸 भारत-पाक विभाजन में
सबसे बड़ी भूमिका किसकी थी?
🩸 बांग्लादेश में हिंदुओं के नरसंहार में?
🩸 अफ़ग़ानिस्तान में हिंदुओं के सफ़ाए में?
और फिर पूछिए
🌍 दुनिया की सबसे बड़ी जमात कौन-सी है?
👉 जवाब वही है।
फिर सवाल यह भी
❓ जब 9 देशों ने बैन किया
तो भारत में
✔️ न बैन
✔️ न संसद में चर्चा
✔️ न राष्ट्रीय बहस
तो हम
👉 वाकई सुरक्षित हैं?
या
👉 बस चुप हैं?
📊 1931 की जनगणना याद कीजिए
अंग्रेज़ों ने 1881 से हर 10 साल में कराई।
1931 में
📍 सिंध में हिंदू ~70%
📍 लरकाना सहित कई इलाकों में 65–70%
तो ज़रा सोचिए
❓ क्या उन्होंने कभी सोचा होगा कि 15 साल बाद क्या होगा?
जवाब ज़ोर से बोलिए
👉 नहीं।
🔚 निष्कर्ष
ये सवाल
❌ न नफ़रत के हैं
❌ न डर फैलाने के
ये सवाल हैं
👉 इतिहास की अनदेखी
👉 नीति की असमानता
👉 संविधान की व्याख्या
👉 और चुप्पी की कीमत
सवाल पूछना ग़लत नहीं है।
ग़लत है — सवालों से भागना।
🗣️ सोचिए। पूछिए। समझिए।
@AshwiniUpadhyay@ARanganathan72@HMOIndia