"यूपी के 10 आईपीएस अफसर आज रिटायर हो गए.. डीजी, एडीजी, आईजी, डीआईजी और एसपी स्तर के अफसर रिटायर हुए हैं.. इन अफसरों के रिटायरमेंट के साथ ही कुछ प्रमोशन होंगे और जल्द ही बड़े पैमाने पर आईपीएस और पीपीएस अफसरों के तबादले भी होंगे..
आईपीएस मुथा अशोक जैन, जो डीजी फायर सर्विसेज थे, रिटायर हो गए.. डीजी पद की एक कुर्सी खाली हो गई.. अब सीनियर लेवल का एक आईपीएस डीजी बनेगा..
आईपीएस रवि जोसेफ लोक्कू, बीपीआर एंड डी के एडीजी भी आज रिटायर हो गए. सीआईडी के आईजी डॉ. अखिलेश कुमार निगम, यूपी 112 के डीआईजी शहाब रशीद खान, वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट में तैनात डीआईजी आलोक प्रियदर्शी, पीएसी मुख्यालय की डीआईजी सुनीता सिंह, लखनऊ कमिश्नरेट में डीसीपी वेस्ट कमलेश कुमार दीक्षित, ईओडब्ल्यू में एसपी अरविंद मिश्रा, ट्रेनिंग मुख्यालय के एसपी हरि गोविंद, पीएसी 49वीं वाहिनी गौतमबुद्धनगर में एसपी राम नयन सिंह रिटायर हो गए..
अबइंतजार कीजिए प्रमोशन और ट्रांसफर लिस्ट का.. ट्रांसफर में दो कमिश्नरेट समेत कुछ जिलों के एसएसपी या एसपी के नाम शामिल हो सकते हैं..
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त्योहारों को देखते हुए अगले दो माह आंदोलन के साथ उपभोक्ता सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता:निजीकरण के विरोध में प्रांतव्यापी प्रदर्शन जारी: निजीकरण को लेकर संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से पूछे पांच सवाल
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के बिजली कर्मियों से अपील की है कि वे त्योहारों के मद्देनजर अगले दो माह तक बिजली आपूर्ति और उपभोक्ताओं सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता पर अटेंड करें। संघर्ष समिति ने कहा है कि निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन में हम शुरू से ही किसानों और उपभोक्ताओं को साथ लेकर चल रहे हैं अतः त्योहारों में उन्हें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। ध्यान रहे अगले दो माह पितृ पक्ष, नवरात्र, रामलीला, दशहरा, दीपावली और छठ जैसे अति महत्वपूर्ण पर्व हैं।
इस बीच विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले आज लगातार 283 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
संघर्ष समिति ने आज सप्ताहांत में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से निजीकरण पर पांच प्रश्न पूछे हैं।
संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से आज पांच प्रश्न पूछे जो निम्नवत है।
पहला प्रश्न है कि ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी ने यूपी ट्रांस्को को स्टेट ट्रांसमिशन कंपनी ऑफ द ईयर का पुरस्कार मिलने पर इसे प्रदेश का गौरव बताया है जो उचित ही है । तो सवाल यह है कि जब सरकारी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की ट्रांसमिशन बिजली व्यवस्था देश में श्रेष्ठतम हो गई है तब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में लगातार हो रहे सुधार के बाद भी इनका निजीकरण क्यों किया जा रहा है ? ट्रांसमिशन की तरह वितरण कंपनियां भी लगातार सुधार कर रही हैं ऐसे में इनका निजीकरण क्यों ?
दूसरा प्रश्न है कि यदि घाटे के नाम पर निजीकरण किया जा रहा है तो चंडीगढ़ और दादरा नगर हवेली दमन एवं दीव जहां ए टी एंड सी हानियां क्रमशः तीन प्रतिशत और 8% थी, और इन दोनों स्थानों पर विद्युत विभाग मुनाफे में था तो दादरा नगर हवेली दमन एवं दीव और चंडीगढ़ का बिजली का निजीकरण क्यों किया गया ?
तीसरा प्रश्न है कि दिल्ली में निजीकरण के 23 साल बाद भी दिल्ली विद्युत बोर्ड के कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए उपभोक्ताओं के बिजली बिल में निजी कंपनियां 07% की दर से पेंशन का सरचार्ज वसूलती है तो सवाल है कि निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पेंशन देने के एवज में निजी कंपनियां उपभोक्ताओं से कितने प्रतिशत सरचार्ज वसूलेंगी ?
चौथा प्रश्न है कि निजीकरण के बाद बिजली कनेक्शन देने के लिए क्या निजी कंपनियों को उपभोक्ताओं से मनमाना बिल वसूलने का अधिकार मिल जाएगा ? उदाहरण के तौर पर 12 फरवरी 2025 को आगरा में टोरेंट पावर के एक बिल की कॉपी संलग्न की जा रही है जिसमें 02 किलो वाट का कनेक्शन देने के लिए उपभोक्ता से 09 लख रुपए वसूल गया है । उपभोक्ता द्वारा 09 लाख रुपए के भुगतान की रसीद भी संलग्न है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं। क्या निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल की गरीब जनता के साथ यही होने जा रहा है ?
और पांचवा प्रश्न यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण होने के बाद गरीब किसानों, बुनकरों और गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले उपभोक्ताओं को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाएगी या नहीं ? उदाहरण के तौर पर ग्रेटर नोएडा में निजीकरण के 32 साल बाद भी किसानों को सब्सिडी नहीं मिलती जबकि पूरे प्रदेश में किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के बाद उपभोक्ताओं और कर्मचारियों को होने वाली दिक्कतों के बारे में प्रत्येक सप्ताहांत संघर्ष समिति पांच - पांच प्रश्न पूछेगी।
राज्य विद्युत परिषद प्राविधिक कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष डी के मिश्रा जी के आकस्मिक निधन पर आज सभी जनपदों में बिजली कर्मचारियों ने सभा में 2 मिनट का मौन रखकर स्वर्गीय डी के मिश्रा जी के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
#stop_privatization_of_uppcl
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जो मंत्री अपने कर्मचारियों से नहीं मिल सकता, जो मंत्री जनता से नहीं मिल सकता है, जो मंत्री अपने समझौते का पालन नहीं करा सकता है, जो मंत्री लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहे कर्मचारियों का दमन और उत्पीड़न कर पुलिस की दम पर अपने ऊर्जा विभाग का निजीकरण करने पर तुला है उसे लोकतंत्र में मंत्री के पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है, उन्हें तत्काल व्यापक जनहित में अपना इस्तीफा देना चाहिए।
जब से ऊर्जा मंत्री जी आए हैं तब से प्रदेश की गरीब जनता परेशान है, बिजली कर्मचारी परेशान है, किसान परेशान है, युवा परेशान है, छात्र परेशान है, आरक्षण खतरे में है।
माननीय ऊर्जा मंत्री जी का एकमात्र उद्देश्य है कि कितनी जल्दी सरकारी संपत्तियों और सरकारी जमीनों को कौड़ियों के भाव अपने पूंजीपति मित्रों को सौंप दें, फिर ना रहेगा विभाग, ना रहेगी नौकरी, और ना रहेगा आरक्षण।
लेकिन ऊर्जा मंत्री जी बिजली कर्मचारी प्रदेश की सरकारी संपत्तियों को नहीं बिकने देंगे, ऊर्जा विभाग नहीं बिकने देंगे, जनता को लालटेन युग में नहीं जाने देंगे और बाबा साहब द्वारा दिया गया आरक्षण समाप्त नहीं होने देंगे।
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उत्तर प्रदेश में हर साल होती है लगभग 5000 करोड़ की बिजली चोरी मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में लगभग 1280 करोड़ की चोरी हर माह 106 करोड़ की चोरी नौकरशाह नेता आम उपभोक्ता सभी मौका पाते ही करते हैं बिजली चोरी इस गंभीरता से करना होगा विचार बटलर पैलेस बिजली चोरी कांड की दिलाई याद।
बिजली मंत्री की बिजली गुल,अफ़सर सस्पेंड !! 🕯️
उत्तर प्रदेश के बिजली मंत्री ए.के शर्मा के मुरादाबाद कार्यक्रम के दौरान ग़लती से बिजली 10 मिनट के लिए नाराज़ होकर चली गयी...फ़िर क्या बिजली विभाग के 5 इंजीनियर सस्पेंड हो गये...IAS ईशा दुहन PVVNL MD
ने जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई करते हुए
चीफ इंजीनियर से लेकर जूनियर इंजीनियर तक को निलंबित कर दिया 🔦
📍चीफ इंजीनियर अरविन्द सिंघल सस्पेंड
📍SE सुनील अग्रवाल सस्पेंड
📍EE प्रिंस गौतम सस्पेंड
📍SDO राणाप्रताप सस्पेंड
📍JE ललित कुमार सस्पेंड,
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विगत 222 दिन से बिजली के कर्मचारी बिजली के निजीकरण के विरोध में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं।
बिजली का निजीकरण सिर्फ और सिर्फ चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है, अरबों, खरबों की सरकारी संपत्तियां कौड़ियों के भाव बेची जा रही हैं, 42 जनपदों के बिजली की सभी जमीन मात्र ₹1 प्रति माह की लीज पर दी जा रही है।
अब बिजली कर्मियों और किसानों के साथ-साथ प्रदेश की जनता भी मानने लगी है कि बिजली के निजीकरण में बहुत बड़ा घोटाला होने जा रहा है। बिजली के निजीकरण से बिजली की दरों में कई गुना वृद्धि होने वाली है, और बिजली का निजीकरण प्रदेश की जनता के हित में नहीं है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रदेश की जनता बिजली के निजीकरण का विरोध कर रही है, प्रदेश का किसान बिजली के निजीकरण का विरोध कर रहा है, प्रदेश का बिजली कर्मचारी बिजली के निजीकरण का विरोध कर रहा है, प्रदेश का छात्र बिजली के निजीकरण का विरोध कर रहा है, प्रदेश का व्यापारी बिजली के निजीकरण का विरोध कर रहा है, प्रदेश का गरीब बिजली के निजीकरण का विरोध कर रहा है, प्रदेश के युवा बिजली के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं, तो फिर यह बिजली का निजीकरण किसको लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है ?
जबकि सबको पता है कि बिजली के निजीकरण से बिजली की दरों में वृद्धि होगी, सरकारी नौकरियां के पद समाप्त होगे, सरकारी नौकरियों में मिलने वाला आरक्षण समाप्त होगा, किसानों को मिलने वाली मुफ्त बिजली समाप्त होगी, गरीब बीपीएल उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी भी समाप्त होगी। तो फिर निजीकरण क्यों किया जा रहा है ?
अब प्रदेश की जनता बिजली कर्मचारियों के साथ खुलकर निजीकरण का विरोध कर रही है प्रदेश की देवतुल्य जनता का सादर आभार।
माननीय मुख्यमंत्री जी से अनुरोध है कि व्यापक जनहित में बिजली की निजीकरण का प्रस्ताव निरस्त किया जाए।
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पावर कारपोरेशन के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2016-17 में एटी&सी लॉसेस 40.79% थे जो वर्ष 2023-24 में घटकर मात्र 16.92 प्रतिशत रह गए हैं राजस्व वसूली जो वित्तीय वर्ष 2019-20 में 41219 करोड़ थी अब वित्तीय वर्ष 2023-24 में बढ़कर 62069 करोड़ हो गई है (जिसमें सरकार की सब्सिडी और सरकारी विभागों पर बकाया की धनराशि सम्मिलित नहीं है) यह आंकड़ा दर्शाता है कि बिजली चोरी रोकने के लिए एवं राजस्व वसूली को बढ़ाने के लिए बिजली कर्मचारियों ने माननीय मुख्यमंत्री जी के कुशल नेतृत्व में व्यापक सुधार किया है। 1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2025 भारत सरकार की रिवैंप योजना के अंतर्गत 40000 करोड़ से अधिक का राजस्व सिस्टम को मजबूत करने में लगाया जा रहा है, हमें पूरा विश्वास है कि अप्रैल 2025 के बाद जब रिवैंप योजना का कार्य कंप्लीट हो जाएगा तो यह लाइन हानियां घटकर मात्र 12% रह जाएगी और राजस्व वसूली में गुणात्मक सुधार होगा। ऐसे में अगर वितरण व्यवस्था का निजीकरण किया जाता है तो बिजली के ढांचे में सुधार के लिए बड़े पैमाने पर खर्च किए गए सरकारी धन का लाभ प्राइवेट कंपनियों का होगा, मतलब खर्चा सरकार करेगी और मुनाफा प्राइवेट कंपनी ले जाएगी, इसलिए हम कह रहे हैं कि यह निजीकरण नहीं बल्कि दिन दहाड़े सरकारी धन और सरकारी संपत्ति की खुली लूट है इसे जनहित में रोका जाना चाहिए, नहीं तो जनता सब समझ रही है कि किसको लाभ पहुंचाने के लिए जल्दबाजी में निजीकरण किया जा रहा है।
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पावर कॉरपोरेशन बोर्ड आफ डायरेक्टर द्वारा विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 131(4)के तहत पूर्वांचल दक्षिणांचल को पीपीपी मॉडल में पांच कंपनियों मे दिए जाने को विद्युतनियामक आयोग में उपभोक्ता परिषद ने दी चुनौती कहा इस धारा का प्रयोग पावरकॉरपोरेशन नहीं कर सकताआयोग तत्काल ले इसका संज्ञान।
आज दिनांक 23.10.2024 को वि0वि0खं0ग्रा0 कासगंज के क्षेत्रान्तर्गत उपभोक्ताओं को डोर टू डोर बकाया विद्युत बिल की जानकारी देते हुये साथ ही बिल जमा करने हेतु प्रेरित किया गया।
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भारत के प्रख्यात उद्योगपति, 'पद्म विभूषण' श्री रतन टाटा जी का निधन अत्यंत दुःखद है।
वह भारतीय उद्योग जगत के महानायक थे। उनका जाना उद्योग जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका सम्पूर्ण जीवन देश के औद्योगिक और सामाजिक विकास को समर्पित था। वे सच्चे अर्थों में देश के रत्न थे।
प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान तथा उनके शोकाकुल परिजनों और प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।
ॐ शांति!