बलोचिस्तान में ॐ नमः शिवाय🙏
यह बलोच लड़की बलोचिस्तान की आजादी के लिए महादेव और हिंगलाज माता से पुकार कर रही है । 4 मिनिट के इस गीत के शब्द तो आपके पल्ले नहीं पड़ेंगे लेकिन आनन्द आ जाएगा सुनकर , ये पक्का है।
Physics Wallah के संस्थापक अलख पांडेय असम में बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रहे है। वहीं उनकी मुलाकात 17 वर्षीय कराटे खिलाड़ी जनमोनी कोंवर से हुई, जो बाढ़ में फंसी हुई थीं और उनका मुकाबला 7-9 अगस्त को होना था।
जब अलख पांडेय को उनकी स्थिति के बारे में पता चला, तो उन्होंने जनमोनी की फ्लाइट से लेकर प्रतियोगिता में शामिल होने तक का पूरा खर्च उठाया। नतीजा यह रहा कि जनमोनी ने Gold मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। असली हीरो वही होता है जो दूसरे के सपनों को पूरा करने में मदद करें।
क्या आप ऐसी किसी महिला के बारे में जानते हैं जिसने...
१. हावड़ा में गंगा नदी पर पुल बनाकर कलकत्ता शहर बसाया?
२. अंग्रेजों को ना तो नदी पर टैक्स वसूलने दिया, और ना ही दुर्गा पूजा की यात्रा को रोकने दिया?
३. कलकत्ता में "दक्षिणेश्वर मंदिर" बनवाया?
४. कलकत्ता में गंगा नदी पर बाबू घाट और नीमतला घाट बनवाए?
५. श्रीनगर में "शंकराचार्य मंदिर" का पुनरोद्धार करवाया?
६. मथुरा में "श्री कृष्ण जन्मभूमि" की दीवार बनवाई?
७. ढाका में मुस्लिम नवाब से 2,000 हिंदुओं की स्वतंत्रता खरीदी?
८. रामेश्वरम से श्रीलंका के मंदिरों के लिए "नौका सेवा" आरम्भ करवाई?
९. कलकत्ता का "क्रिकेट स्टेडियम" इनके द्वारा दान दी गई भूमि पर बना है?
१०. "सुवर्णरेखा नदी" से पुरी तक सड़क बनाई?
११. "प्रेसिडेंसी कॉलेज" और "नेशनल लाइब्रेरी" के लिए धन दिया?
क्या यह विदुषी महान हस्ती आज तक के भारत में विद्यार्थियों के सिलेबस में सम्मिलित हुआ...!
इन महान हस्ती का नाम है "रानी रासमणि"!
ये कलकत्ता के जमींदार की विधवा थी! 1793 से 1863 तक के जीवन काल में, रानी रासमणि जी ने इतना यश कमाया है, कि इनकी बड़ी बड़ी प्रतिमाऐं दिल्ली और शेष भारत में लगनी चाहिए थी!
रानी रासमणि जी कैवर्त जाति की थी, जो आजकल अनुसूचित जाति में सम्मिलित है!
भारत के चाटुकार इतिहासकारों ने "रानी रासमणि" को अपेक्षित सम्मान नहीं दिया!
जातीआधारित आरक्षणाला विरोध करणारे लोक बऱ्याच वेळा अतिरंजित आकडेवारी देतात..
उदा ओपन कट ऑफ 800, आरक्षित कट ऑफ 200 वगैरे ..
दोन मुद्दे..
एकतर असा इतका फरक अजिबात नसतो... ओबीसी ओपन कट ऑफ तर आता जवळपास सेम आलाय...
आणि एखाद्या प्रवर्गात (आदिवासी, गोवारी वगैरे) खरेच कमी कट ऑफ असेल तर उलट जातीआधारित आरक्षण काढल्यास ते मुख्य प्रवाहात येणार कसे?
ते समाज आत्ता कुठे शिकायला लागलेत... अचानक त्यांना कित्येक पिढ्या शिकणाऱ्या समाजासोबत स्पर्धा करायला लावणे म्हणजे अतीच होईल
Breaking News 🔥
गोल्ड पर इतिहास की सबसे बड़ी चेतावनी आ गई है। सोने के चार्ट पर 'डेथ क्रॉस' बन गया है।
बैंक ऑफ़ अमेरिका ने यह खतरनाक चेतावनी दी है कि 1980 और 2011 वाला हश्र फिर से होने वाला है।
ऊँचे भाव पर खरीदने वालों के हाथ जलने तय हैं। बाजार में तेज़ी कमजोर पड़ गई है और मौजूदा गिरावट अभी शुरुआत भर है।
दो साल से ज्यादा की तेजी, 15 साल की मंदी की पूँछ पकड़ कर आती है; गोल्ड का इतिहास यही रहा है।
सोने के दाम 2029 तक 50% नीचे चले जाएंगे। यही गोल्ड का भविष्य है।
#GoldPrice #StockMarket #MarketCrash #Economy
एक आदमी ने ₹50 लाख का घर खरीदने का फैसला किया।
Seller ने कहा,
"Payment कर दीजिए, Registry हो जाएगी और आपका घर तैयार।"
आदमी ने पूरे ₹50 लाख का Payment कर दिया।
उसे लगा कि अब सारी Formalities पूरी हो गईं।
कुछ दिन बाद उसके CA ने पूछा,
"1% TDS जमा कर दिया?"
आदमी हैरान होकर बोला,
"वो तो Seller का काम होगा।"
CA ने समझाया,
"नहीं, Income Tax Act की धारा 194-IA के अनुसार ₹50 लाख या उससे ज्यादा की Property खरीदने पर Buyer को 1% TDS काटना होता है।"
आदमी ने पूछा,
"मतलब कितना?"
CA बोला,
"₹50 लाख का 1% यानी ₹50,000।"
"अगर Property ₹75 लाख की हो, तो ₹75,000 TDS।"
"और अगर Property ₹1 करोड़ की हो, तो ₹1 लाख TDS जमा करना होगा।"
आदमी ने फिर पूछा,
"ये कब तक जमा करना पड़ता है?"
CA बोला,
"Transaction वाले महीने के खत्म होने के 30 दिन के अंदर Form 26QB के साथ TDS जमा करना जरूरी होता है।"
आदमी बोला,
"अगर समय पर नहीं किया तो?"
CA ने कहा,
"मान लो ₹50,000 का TDS 6 महीने तक जमा नहीं किया।"
"सिर्फ 1% प्रति महीने के हिसाब से करीब ₹3,000 का Interest बन सकता है।"
"अगर Form 26QB भी 60 दिन लेट हुआ, तो ₹200 प्रतिदिन के हिसाब से ₹12,000 तक की Late Fee लग सकती है (कानूनी सीमा के अधीन)।"
यानी सिर्फ एक Tax Formality भूलने पर,
₹50,000 के TDS के साथ ₹15,000 या उससे ज्यादा का अतिरिक्त बोझ भी पड़ सकता है।
तब जाकर आदमी को समझ आया,
कि Property खरीदते समय सिर्फ Registry नहीं,
TDS, Form 26QB, Form 16B और Tax Compliance भी उतनी ही जरूरी है।
क्या आप Property खरीदने से पहले सिर्फ Price और Registry देखते हैं, या Tax के इस ₹50,000 वाले नियम की भी पूरी जानकारी रखते हैं?
मेरे मामा जिस 20 साल पुरानी गाड़ी को scrap में कबाड़ी को ₹2000 में बेचकर खुश हो रहे थे वही गाड़ी उनके गले की हड्डी बन गई और ₹200000 का जुर्माना दे गई...😭
मेरे मामा के पास एक पुरानी गाड़ी पड़ी थी जिसका रजिस्ट्रेशन खत्म हो गया था,एक दिन एक कबाड़ी की नजर उसपर पड़ गई ₹2000 में सौदा तय हो गया और कागज पर लिखापढ़ी कर के गाड़ी कबाड़ी के सुपुर्द कर दी..🥺
उस कबाड़ी ने गाड़ी रिपेयर करवा ली और खुद चलाने लगा एक दिन एक व्यक्ति का एक्सीडेंट कर दिया और मौके पर गाड़ी छोड़कर भाग गया..😲
पुलिस ने इंजन और चेचिस नम्बर पर मेरे मामा को आरोपी बनाया क्योंकि RTO में गाड़ी उन्हीं के नाम रजिस्टर्ड थी..🙂
जिस व्यक्ति का एक्सीडेंट हुआ था वह घर का कमाने वाला सदस्य था कोर्ट ने मानवीय आधार पर मेरे मामा पर ₹200000 जुर्माना लगाया..😧
ध्यान रखे पुरानी गाड़ी scrap में बेचने के लिए सरकारी मान्यता प्राप्त scrap सेंटर RVS F में जमा करे,गाड़ी का चेचिस नंबर निकलवाए ।
और certificate of Deposit ले और RTO जाकर Form 24 भरे और अपनी orignal RC सरेंडर करे याद रखे Scrap में गाड़ी देने पर RTO रिकॉर्ड में गाड़ी रद्द करना अनिवार्य हे।
क्या आपने कभी पुरानी गाड़ी सिर्फ सेल लेटर बेची हे? यदि बेची हे तो RTO जाकर उसका रजिस्ट्रेशन रद्द करवा ले नहीं तो आप भी परेशानी में पड़ सकते हे..
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एक आदमी नई कार लेने शोरूम गया था।
उसे लगा कि आज वह अपनी पसंद की गाड़ी बुक करके घर जाएगा, लेकिन शोरूम में उसके साथ कुछ ऐसा हुआ जिससे उसे कार खरीदने का पूरा खेल समझ आ गया।
सबसे पहले सेल्समैन बोला, "सर, बस ₹2,000 EMI और बढ़ा दीजिए, ये वाला मॉडल ले जाइए।"
सुनने में ₹2,000 बहुत कम लगते हैं, लेकिन अगर लोन 5 साल का है तो ₹2,000 × 60 = ₹1,20,000 हो जाते हैं।
यानी छोटी सी EMI बढ़ोतरी उसे ₹1.2 लाख ज्यादा खर्च करवा सकती थी।
फिर सेल्समैन उसे Base Variant की कमियां बताने लगा और Top Variant की खूबियां गिनाने लगा।
ताकि वह बीच वाले Variant पर आकर रुक जाए, क्योंकि अक्सर वहीं सबसे ज्यादा फायदा होता है।
मान लीजिए Base Model ₹8 लाख का है, Mid Variant ₹9.5 लाख का और Top Variant ₹11 लाख का।
अगर उसे सिर्फ Reverse Camera और Touchscreen चाहिए थे, तो सिर्फ कुछ Extra Features के लिए ₹1.5 लाख ज्यादा देना कोई समझदारी नहीं थी।
इसके बाद Test Drive का समय आया।
गाड़ी पहले से स्टार्ट थी और AC भी चल रहा था, जिससे इंजन काफी Smooth लग रहा था।
तभी उसने Cold Start Test Drive की मांग की, क्योंकि असली इंजन की हालत वहीं पता चलती है।
फिर Insurance की बात आई।
शोरूम वाला Insurance लेने को कह रहा था, लेकिन जब उसने बाहर भी Rate चेक किए तो पता चला कि वही Insurance बाहर से ₹20,000–₹30,000 तक सस्ता मिल सकता है।
अब बात Delivery की आई।
ज्यादातर लोग सिर्फ कार की चमक देखते हैं, लेकिन उसने Tyre और Battery की Manufacturing Date भी चेक की।
तब पता चला कि गाड़ी लगभग 6 महीने से शोरूम में खड़ी थी।
यह जानकर उसने Stock Clearance Discount मांगा और अच्छी-खासी छूट भी हासिल कर ली।
उस दिन उसे समझ आया कि कार खरीदते समय सिर्फ गाड़ी नहीं देखनी चाहिए।
बल्कि हर उस जगह ध्यान देना चाहिए जहां बिना जरूरत के आपका पैसा खर्च कराया जा रहा हो।
क्योंकि सही जानकारी और सही सवाल पूछकर उसने हजारों रुपये बचा लिए।
और अगर वह सिर्फ सेल्समैन की बातों में आ जाता, तो शायद ₹50,000 से ₹1 लाख तक ज्यादा खर्च कर बैठता।
मराठीची एक गम्मत आहे. यात वस्तूंना नावं खूप सुंदर दिली आहेत. साधारण पणे मोठ्या वस्तूंना पुल्लिंगी आणि त्याच्याशी संबंधित लहान, नाजूक आणि हालचाल जास्त करणाऱ्या वस्तूंना स्त्रीलींगी नावं दिलेली आहेत. तसेच बहुतेक वेळा या वस्तू एकमेकांना पूरक आहेत.
बघा वाचून मजा येईल.
⚡ *जराशी गम्मत* 😅
ती कैरी आंबट ,🥴
तो आंबा गोड 🥭🥭
ती चांदणी लुकलुकणारी ,✨
तो चंद्र तेजोमय 🌝
ती वेल नाजूक,🌿
तो वृक्ष मोठा 🌳
ती फांदी छोटीशी , 🌿
तो बुंधा जाड🌳
ती झुळूक सुखावणारी,
तो वारा सोसाट्याचा
ती माळ नाजुकशी,
तो हार मोठा.
ती साखळी नाजुकशी ,
तो साखळदंड मोठा
ती बांगडी नाजुकशी,
तो कडा जाड💫
ती कविता गोड ,🙂
तो धडा रटाळ 🙁
ती घागर , कळशी ,
तो माठ , रांजण, घडा आणि हंडा
ती सुरी,
तो सुरा🍴
ती ओळ,
तो परिच्छेद
ती नदी वाहणारी,
तो सागर अथांग🌊
ती झोपडी , माडी लहान
🏕️⛺
तो महाल , बंगला महान
🏠🏘️
ती खिचडी साधीशी,
तो मसाले भात आणि पुलाव
ती मीटिंग,तो परिसंवाद
ती खिडकी,
तो दरवाजा
ती टेकडी छोटीशी , 🗻
तो डोंगर भलामोठा⛰️🌋
ती जखम लहान,
तो घाव मोठा
ती दोरी बारीकशी,
तो दोर जाडसर
ती डबी छोटीसी ,
तो डबा मोठा
ती थाळी,तो थाळा
ती पोळी , भाकरी साधी,
तो मात्र पराठा आणि ब्रेड
🍞🍞
ती सायकल, स्कुटी, रिक्षा,
🚲🛵🛺
तो ट्रक, रणगाडा
🚍🚍
ती पाटी छोटी
तो फळा मोठा
ती वाटी,
तो कुंडा
जीवनाचा हाच आहे फंडा.!
जाणकारांनी लेखकाचे नाव सांगावे... 🙏
ती इडली नाजूक 😋
तो ढोकळा फुगलेला😜
🤣😂🤣😂😊
तलाठी भरती आणि मंडळ अधिकारी पदोन्नती प्रक्रिया लवकरच सुरु करण्यात येणार आहे. ३ हजार ११० तलाठी आणि ५१८ मंडळ अधिकारी असे एकूण ३ हजार ६२८ पदे निर्माण करण्यात येणार असून याबाबतचा शासन निर्णय निर्गमित झाला असल्याची माहिती महसूल मंत्री @RVikhePatil यांनी दिली.
मंदिर मुक्ति हेतु सर्वोच्च न्यायालय में पुनः शुरू होगी ऐतिहासिक सुनवाई
:आलोक कुमार (@AlokKumarLIVE), सीनियर एडवोकेट, (अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व हिन्दू परिषद् )
भारत पर ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन काल में अंग्रेज अधिकारियों के द्वारा तमिलनाडु और बंगाल में हिन्दू मंदिरों का व्यापक सर्वेक्षण हुआ था। इस सर्वेक्षण से मालुम पड़ा कि लगभग सब हिन्दू मंदिरों में छोटा या बड़ा गुरुकुल और गौ-शाला थी। समाज अपने उत्सव जैसे नवरात्री और दीपावली इत्यादि मिलकर मंदिरों में मनाता था। परिवारों के शादी, मुंडन, शोकसभा जैसे सब कार्यक्रम भी मंदिरों में होते थे। समाज के झगड़े भी मंदिर में गर्भगृह की साक्षी में समाज के वरिष्ठ लोगों द्वारा निपटाएं जाते थे।
अंग्रेजों ने समझ लिया कि हिन्दू धर्म के प्राण मंदिरों में बसते हैं। अंग्रेज सरकारों ने मंदिरों का प्रबंधन सुशासन के नाम पर अपने हाथों में ले लिया। धीरे-धीरे अब मंदिर केवल व्यक्तिगत पूजा के स्थान बन रहे हैं। इससे हिन्दू धर्म कमजोर हो रहा है।
सरकार गुरुद्वारे, चर्च, मस्जिद, जैन-स्थानक और बौद्ध-विहार नहीं चलाती। भारत का शासन संविधान की मर्यादा में धर्मनिरपेक्ष है। फिर भी अनेक राज्यों में सरकारें हिन्दू मंदिरों को अपने मुट्ठी में क्यों दबाये हुए हैं। मंदिरों के चढ़ावे का एक बड़ा हिस्सा सरकारी खजाने में जाता है। मंदिरों में सरकार के ऑफिसर कार्यकारी अधिकारी के नाते लगा दिए जाते है और उनका वेतन और भत्ते मंदिर की आय में से लिए जाते है। मंदिरों और मठों का नियंत्रण मठाधिपति या धार्मिक संत इत्यादि के हाथों में न रहकर इन बाबुओं के हाथ में रहता है।
हिन्दू समाज ने निर्णय किया है कि वह अपने मंदिरों का नियंत्रण सरकार के हाथों से वापस लेगा। समाज ने यह भी निर्णय किया कि हिन्दू मंदिरों का पैसा हिन्दुओं के लिए ही खर्च होना चाहिए।
इस उद्देश्य से पूज्य स्वामी दयानन्द सरस्वती ने सन 2012 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में याचिका डाल कर कहा कि सरकार हिन्दू मंदिरों का सञ्चालन वापिस हिन्दू समाज को सौंपें। यह याचिका मुख्य रूप से तमिलनाडु, आंध्र, तेलंगाना और पुडुचेरी के सन्दर्भ में लगायी गयी थी। इसमें सरकारों को नोटिस हुआ और उनका जवाब रिकॉर्ड पर आया। कई बार इस याचिका में बहस के लिए तारीख निश्चित हुई पर किसी न किसी कारण से टलती गयी।
अंततः अप्रैल 2025 को यह मामला न्यायालय के समक्ष रखा गया। प्रतिपक्षी वकीलों ने कहा कि इस याचिका में कई राज्यों के कानूनों को चुनौती दी गयी है। यह सब कानून एक जैसे नहीं हैं। मांग की गयी कि सर्वोच्च न्यायालय इस याचिका को ख़ारिज करके याचिकाकर्ताओं को अपने-अपने राज्य में इन कानूनों को चुनौती देने की छूट दे दें। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करके 13 साल से लंबित यह याचिका ख़ारिज कर दी।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से याचिका को ख़ारिज करने के निर्णय पर पुनर्विचार याचिका करने का आग्रह किया। इस प्रक्रिया में समय लगा। याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने सोमवार 18 मई 2026 के आदेश में यह स्वीकार किया कि इस याचिका को गुण-दोष के आधार पर सुना जाना आवश्यक है। कोर्ट ने अप्रैल 2025 के उस आदेश को वापस ले लिया जिसके द्वारा इस याचिका को ख़ारिज कर दिया गया था।
अब यह विषय जुलाई में सुनवाई के लिए नियत किया गया है। हिन्दू अपने मंदिरों का स्वयं सञ्चालन करें और मंदिरों पर सरकार का नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो। हिन्दुओं का पैसा हिन्दुओं के काम में आये। हिन्दू मंदिर स्वाधीन होने पर हिन्दू का संगठन, उसकी तेजस्विता और संस्कार युक्त जीवन पुनः अपने समाज को प्राप्त हो। मुकदमे में तथ्य और तर्क हमारे साथ हैं। श्री भगवान के आशीर्वाद से हम न्यायालय में सफल होंगे।
MHADA सहसा लॉटरी पद्धतीनं घरे विकते..पण ,
४ मे ला पुण्यात ऑनलाईन चालू होणाऱ्या योजनेत ~ ३०० घरे
" प्रथम येणाऱ्याला
प्रथम प्राधान्य "
यानुसार मिळणार आहेत..!
घरांच्या किंमती ~ १६ ते ४५ लाख
अट फक्त एकच उत्पन्न ९ लाखांच्या आत पाहिजे..!
योजनेची चांगली आणि विशेष गोष्ट म्हणजे
AC खरीदने जा रहे हैं? रुकिए! कहीं दुकानदार आपको चूना तो नहीं लगा रहा?
नया AC लेना हो या पुराने की सर्विसिंग करानी हो, अक्सर हम टेक्नीशियन की बातों में फंस जाते हैं। आज इस AC वाली गणित को समझ लीजिए, आपके हजारों रुपये बचेंगे!
कितने टन का AC चाहिए? (आसान गणित)
दुकानदार के भरोसे न रहें, खुद कैलकुलेट करें:
1. अपने कमरे का Volume निकालें: (लंबाई × चौड़ाई × ऊंचाई)
उदाहरण: 20ft × 12ft × 10ft = 2400 Cubic Feet
2. अब इसे 5 से गुणा करके BTU निकालें: 2400 × 5 = 12,000 BTU
यानी इस कमरे के लिए 1 टन का AC काफी है!
नोट: अगर कमरा टॉप फ्लोर पर है और सीधी धूप आती है, तो आधा टन बढ़ाकर लें।
खरीदते समय ये 3 बातें गांठ बांध लें
1. कॉपर कॉइल (Copper Coil) ही लें: एल्युमीनियम सस्ता तो होता है पर जल्दी लीक होता है और रिपेयर नहीं होता।
2. पाइप की लंबाई: जितनी कम होगी, कूलिंग उतनी ही जबरदस्त होगी।
3. आउटडोर यूनिट: इसे ऐसी जगह लगवाएं जहाँ हवा का वेंटिलेशन अच्छा हो, वरना बिजली बिल बहुत आएगा!
⚠️ टेक्नीशियन के खेल से सावधान रहें!
गैस कभी खत्म नहीं होती: अगर कूलिंग कम है, तो पक्का कहीं 'लीकेज' है। बिना लीकेज ठीक कराए गैस न भरवाएं, वरना पैसे पानी में जाएंगे। पहले साबुन के झाग से लीकेज चेक करवाएं!
वैक्यूम (Vacuum) है जरूरी: नया AC लगवाते समय गैस खोलने से पहले कम से कम 30 मिनट तक Vacuum Pump चलवाएं। टेक्नीशियन जल्दबाजी करते हैं, जिससे बाद में कूलिंग कम हो जाती है।
पार्ट्स का खेल: कभी-कभी सिर्फ धूल की वजह से मशीन ट्रिप करती है, पर टेक्नीशियन कैपेसिटर या सेंसर खराब बता देते हैं। हमेशा ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर से ही काम कराएं।
पुराने पार्ट्स: बदले गए पुराने पार्ट्स कभी टेक्नीशियन को न ले जाने दें।
💡 प्रो टिप: सर्विसिंग के समय सिर्फ पानी का छिड़काव न कराएं, बल्कि Jet Pump से फिन्स की गहराई से सफाई सुनिश्चित करें।
सही जानकारी ही आपको ठगे जाने से बचा सकती है! इस पोस्ट को Save करें और अपनों के साथ Share करें ताकि उनका भी पैसा बच सके।
नित्यानंद शर्मा
#ACBuyingGuide #SmartConsumer #SaveMoney #AirConditioner #HomeAppliances #TechTips #IndiaSummer
गेल्या अनेक दशकांपासून NCERT च्या पाठ्यक्रमाद्वारे इस्लामी आक्रमणकर्ते व मुगल साम्राज्य यांस गौरवण्यात येत होते. भारत देशाचा जाज्वल्य इतिहास आपल्यापासून लपवून ठेवला गेला होता. परंतु विद्यमान सरकारने या पाठ्यक्रमात पुराव्यांच्या आधारावर बदल करायचे
ठरवले आणि या देशावर राज्य असलेल्या अनेक साम्राज्यांचा जाज्वल्य इतिहास या पाठ्यक्रमात समाविष्ट केला.
इयत्ता ८वी च्या समाजशास्त्र या विषयाच्या पुस्तकात - Exploring Society: India and Beyond (First Edition - July 2025 Ashadha 1947; ISBN 978-93-5729-293-1) मध्ये Chapter No. 3 - ‘The Rise of the Marathas’ या मध्ये छत्रपती शिवाजी महाराजांनी बलाढ्य मोगल साम्राज्याला दिलेला लढा, त्यातून निर्माण झालेले हिंदूंचे स्वराज्य आणि पुढे त्यांच्या वैचारिक वारसदारांनी त्या स्वराज्याचे साम्राज्यात केलेले रुपांतर या सगळ्या घटना समाविष्ट करण्यात आल्या आहेत. यो सोबत मराठा साम्राज्य व मराठ्यांना खंडणी देणाऱ्या राज्यांचा एक नकाशा समाविष्ट केला गेला होता. (Pg. No. 71, Fig. No. 3.11 - The extent of Maratha empire in 1759).
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