@Medhareports काबिले तारीफ हैं बहन आपके काम को, एसी वाले कमरे में बैठ कर इंटरव्यू लेने को लोग पत्रकारिता कहते हैं, असली पत्रकारिता तो ये है।शहरों के चकाचौंध भरी दुनिया से दूर हाशिए पर खड़े लोगों के आवाज़ सरकार तक पहुंचाने का काम कर रही हैं आप, लेकिन पता नहीं सरकार इनके बारे मे कब सोचेगी।
उन्हें नहीं मालूम कि मैं क्या बोल रही हूँ, क्यों बोल रही हूँ और मेरे बोलने में किसका ज़िक्र है, फिर भी जब मैं वहाँ बैठी थी तो दोनों दादी बड़े ग़ौर से मुझे सुन रहीं थीं, मानो उन्हें सब समझ आरहा हो। ये रिपोर्ट मैं कभी नहीं भूल पाऊँगी, इसने झकझोर दिया था।