मेरा पूरा समर्थन ओम सुधा भाई को है।
जिसके ऊपर अत्याचार हुआ होता है उसे हक है कि जब वह समर्थ हो तो अपने मन का खाये पिये। जिसके खानदान को 5000 साल से साफ पानी भी नहीं पीने दिया गया। जिसके खानदान की महिलाओं का शारीरिक शोषण जमींदार से लेकर सुपरवाइजर तक सबने लाखों बार किया हो , जिसे खाने के लिए सदियों से हमेशा जूठा सदा गला कुत्तों को दिया जाने वाला भोजन मिला हो वो भला नवरात्रि वगैरह का संयम क्या मानेगा और क्या जानेगा?
ऐसे लोगों को नवरात्रि में मांस खाने पर पाप भी नहीं लगता क्योंकि इनके पुरखों ने जुल्म सहा है - जूते खाये हैं - लातें खाई है ।
इसलिए तो आज आदरणीय बाबा साहेब का संविधान इन्हें नवरात्रि में पेट भर मटन खाने की इजाज़त देता है इसलिए इन्हें कोई कृपया भला बुरा ना कहे।
मुझे बुरा लग रहा है जब कमेंट बॉक्स में लोग इन्हें माँ बहन की गलियाँ दे रहे हैं।
कृपया अब तो इन्हें कोई प्रताड़ित ना करे , जो खा पी रहे हैं प्रेम पूर्वक खाने पीने दिया जाए।
वैसे भी सनातन धर्म में खाते हुए कुत्तों को भी नहीं प्रताड़ित किया जाता, ये तो फिर भी मनुष्य हैं और भारतीय नागरिक हैं।
इन्हें प्रेम से खाने दीजिए , बुरा मत मानिए।
ये ओम सुधा भाई भी अपने प्रिय ही हैं कोई पराये नहीं।
जात पात को छोड़ों -तोड़ो नहीं जोड़ो:
बटोगे तो कटोगे🙏
@PragyaLive शूर्पणखा ने जो हरकतें की थी, लक्ष्मण चाहते तो उसका वध भी कर सकते थे; लेकिन उनको पता था कि रावण वध 🎯 के लिए ऐसे कई शूर्पणखा के नाक/कान काटकर छोड़ना होगा, ताकि वो इतना बिलबिलाए जितना प्रज्ञा यादव बिलबिला रही है, और उनकी बिलबिलाहट रावण वध का एक जरिया बन सके।