“किसी ने लोकमान्य बालगंगाधर तिलक जी से पूछा था की स्वराज्य मिलने पर आप किस विभाग के मंत्री बनना चाहेंगे?
तिलक जी ने कहा, यदि स्वराज्य हो जाय, तो मैं तो मंत्री बनने के बजाय गणित का प्रोफेसर बनना अधिक पसंद करूँगा”
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी की जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन।💐🙏
दो महान दार्शनिक जॉनी वॉकर और ग्लेनलिवेट के मुंह बोले गुरु ने कहा था…पीछे देखो, पीछे…
लोग समझे कि जीवन में बार बार पीछे झांकना है..पुरानी सफलताओं और असफलताओं की गठरी ढोनी है और वहीं मूर्खता कर बैठे।
पीछे देखने का अर्थ अतीत में अटक जाना नहीं था।
उसका अर्थ था
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सबसे मुश्किल दिन
यह जताने नहीं आते कि
हम ज़िन्दगी से पंजा लड़ा सकते हैं।
सबसे मुश्किल दिन
यह बताने आते हैं कि
हम ज़िन्दगी से हाथ मिला सकते हैं।
बाबुषा कोहली
@Baabusha
मैंने कहा :
भई! आदमी
दस हज़ार साल पुराना है
और
तकलीफ़ें उसकी
उससे भी पुरानी
कि जब आदमी
आदमी नहीं था
तकलीफ़ें तब भी थीं
उसने कहा :
अच्छा!
अब आदमी कहाँ है
अब तो बस तकलीफ़ें हैं
और अब तो बस
तकलीफ़ें ही रहेंगी
कई शताब्दियों तक!
अच्युतानंद मिश्र
"मैं पूरे का पूरा थक गया हूँ
इस मशीनी-सी अफरा-तफरी में चलते हुए
जहाँ रिश्ते अँधे वेग में, अपने अर्थों से टकरा गए हैं
मैं - जो सिर्फ़ एक आदमी बनना चाहता था
यह क्या बना दिया गया हूँ?"
पाश
सुंदर पिचाई के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में दिए गए भाषण का यह छोटा सा हिस्सा सभी युवाओं को जरूर सुनना चाहिए। होने को बड़ों के लिए भी यह उतना ही उपयोगी है।
@Stanford@sundarpichai
INSTEAD OF WATCHING AN HOUR OF NETFLIX TONIGHT.
This 1 hour Stanford lecture by Joel Peterson will teach you more about negotiation and getting what you want than most people learn in years.
Bookmark it and give it an hour, no matter what.