▶️उत्तर प्रदेश में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों को देखते हुए योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।
▶️सरकार की तरफ से मरीजों को 40 से 50 हजार रुपये में मिलने वाला इंजेक्शन मुफ्त में लगाया जाएगा।
▶️जानकारी के मुताबिक सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों एवं प्रमुख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इंजेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।
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यूपी में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों को लेकर योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. योगी सरकार हार्ट अटैक मरीजों को बचाने के लिए सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों एवं प्रमुख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में इंजेक्शन उपलब्ध करा रही है. खास बात यह है कि मरीजों का यह इंजेक्शन फ्री में लगाई जाएगी. बाजार में खरीदने जाएंगे तो यह इंजेक्शन 40 से 50 हजार रुपये में मिलती है.
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सीतापुर बीएसए/प्रधानाध्यापक प्रकरण:
आरोपी शिक्षक के चेहरे की हालत ही सबकुछ बयां कर रही है।
सभी को सब खबर है, फिर भी बनते बेखबर हैं,
गलत होते देख रस्ता बदलते हैं, शेष न है तुममें गैरत, हम खूब समझते हैं।
आवाज दो.......वो भी अलग-अलग दिशाओ से,, फिर भी कहेँगे हम एक हैं।
#शिक्षकसंगठन
@ravishndtv तो उन्होंने क्या गलत बोला, जो बात है वो है, उसमे गलत क्या है? अगर उन्होंने ब्राह्मणों के गुण गिना दिए तो इसका ये मतलब कैसे हो गया कि वो दलित और आदिवासियों के खिलाफ हैं।
बहुत ही सटीक तरीके से शिक्षकों का पक्ष रखा है लखनऊ की प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका लवली सिंह मैडम ने।
वीडियो को पूरा देखें और रिपोस्ट अवश्य करें।
शिक्षकों पर विश्वास करने से ही अच्छी पीढ़ी जन्म लेती है।
कोई शिक्षक देर से स्कूल नहीं पहुँचना चाहता है लेकिन कहीं सार्वजनिक परिवहन देर से चलना इसका कारण बनता है, कहीं रेल का बंद फाटक और कहीं घर से स्कूल के बीच की पचासों किमी की दूरी क्योंकि शिक्षकों के पास स्कूल के पास रहने के लिए न तो सरकारी आवास होते हैं, न दूरस्थ इलाकों में किराये पर घर उपलब्ध होते हैं। इससे अनावश्यक तनाव जन्म लेता है और मानसिक रूप से उलझा अध्यापक कभी जल्दबाज़ी में दुर्घटनाग्रस्त भी हो सकता है, जिसके अनेक उदाहरण मिलते हैं।
यदि किसी आकस्मिक कारणवश शिक्षकों को व्यक्तिगत स्वास्थ्य या फिर घर, परिवार और समाजिक कारणों से दिन के बीच में स्कूल छोड़ना पड़े तो पूरे दिन के अनुपस्थित होने की रिपोर्ट भेज दी जाएगी। देर से स्कूल पहुँचने या जल्दी स्कूल से वापस जाने के अनेक कारण हो सकते हैं। यहाँ तक कि विद्युत आपूर्ति के बाधित होने या तकनीकी रूप से भी कभी इंटरनेट जैसी सेवाओं के सुचारू संचालन में समस्या आती है। इसीलिए ‘डिजिटल अटेंडेंस’ का विकल्प बिना व्यावहारिक समस्याओं के पुख़्ता समाधान के संभव नहीं है। सबसे पहले ये अन्य सभी विभागों के प्रशासनिक मुख्यालयों में लागू किया जाए जिससे उच्चस्थ अधिकारियों को इसके व्यावहारिक पक्ष और परेशानियों का अनुभव हो सके, फिर समस्या-समाधान के बाद ही इसे लागू करने के बारे में कालांतर में सोचा जाए।
सबसे बड़ी बात ये है कि इससे शिक्षकों को भावनात्मक ठेस पहुँचती है, जिससे उनके शिक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। बोधपरक शिक्षण के लिए शिक्षकों का भावात्मक रूप से जुड़ना आवश्यक होता है। स्कूल में केवल निश्चित घंटे बिताना ही शिक्षण नहीं हो सकता।
हम इस मुद्दे पर शिक्षकों के साथ हैं!
हमारी_मांग_पूरी_करो_फिर_देंगे_डिजिटल_उपस्थिति #boycottऑनलाइनहाज़िरी#BasicEducation#UpBasicSchool
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1. 15 हॉफ CL
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