वर्षों से डेढ़ रोटी और शाम को रामदाने की खिचड़ी खाने वाले, कारसेवकपुरम की एक सामान्य सी कोठरी में रहने वाले,
बरगद जैसे विशाल व्यक्तित्व—कौन हैं चंपत राय...?
1975 के आपातकाल के दौरान बिजनौर के धामपुर स्थित RSM डिग्री कॉलेज में फिजिक्स पढ़ाने वाले युवा प्रोफेसर चंपत राय को संघ से जुड़े होने के कारण गिरफ्तार करने पुलिस पहुंची।
उन्होंने पुलिस से कहा कि बच्चों की क्लास खत्म कर थाने आ जाऊँगा। पुलिस लौट गई। क्लास पूरी कर, माता-पिता का आशीर्वाद लेकर वे स्वयं थाने पहुंचे और 18 महीने जेल में रहे।
जेल से निकलने के बाद रज्जू भैया ने उन्हें अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन की तैयारी का दायित्व सौंपा।
उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अवध के गाँव-गाँव जाकर संगठन खड़ा किया। अयोध्या की ऐसी जानकारी जुटाई कि साथी उन्हें "अयोध्या की इनसाइक्लोपीडिया" कहने लगे।
बाबरी ढाँचा ध्वंस से पहले ही उन्होंने राम जन्मभूमि से जुड़े लाखों पन्नों के दस्तावेज, ग्रंथ और साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए थे।
जन्मभूमि की कानूनी लड़ाई में के. परासरण और अन्य वकीलों को अकाट्य दस्तावेज उपलब्ध कराने वालों में वे प्रमुख रहे।
6 दिसंबर 1992 को जब मंच से अनुशासन और संयम की बातें हो रही थीं, तब एक पत्रकार के प्रश्न पर चंपत राय ने कहा था—"ये राम की वानर सेना है, सीटी की आवाज पर पीटी करने यहां नहीं आयी...
ये जो करने आयी है करके ही जाएगी।" इसके बाद वे स्वयं बेलचा लेकर ढाँचे की ओर बढ़ गए।
राम मंदिर ट्रस्ट का सचिव पद उन्हें यूँ ही नहीं मिला। उन्होंने अपना पूरा जीवन रामलला के चरणों में समर्पित किया है।
लोग उन्हें प्यार से "रामलला का पटवारी" भी कहते हैं। बाबरी प्रकरण में कल्याण सिंह के बाद चंपत राय ने ही खुलकर उस घटना की जिम्मेदारी स्वीकार की।
वे धर्म की छोटी से छोटी बात का भी ध्यान रखने वाले तपस्वी हैं। एक बार काशी में रुकने पर उन्होंने केवल इसलिए रात में बिस्तर की दिशा बदलवाई क्योंकि सोते समय पैर दक्षिण दिशा की ओर जा रहे थे।
जो व्यक्ति धोती-कुर्ता पहनकर भारत का गाँव-गाँव नापता रहा हो और जीवन भर सनातन के कार्य में लगा रहा हो, वह श्रीराम मंदिर के संदर्भ में कितना विचारशील और जुझारू होगा, समझा जा सकता है।
जय श्री सियाराम!
@RatanRanjan_ पुनीत वशिष्ठ ने बताया यह फेक लॉयर है, इसकी तीन शादियां हो चुकी है और यह सभी सनातनियों को चुना लगा रही है, पुनीत ने ठरकी भी बोला इसको।
@ElahiNazia1
सलीम वास्तिक हत्या केस में गाजियाबाद से गिरफ्तार..
सलीम ने 1995 में 13 साल के संदीप बंसल का अपहरण करने के बाद उसकी हत्या की थी। 1997 में उम्रकैद की सजा मिली थी , जमानत पर बाहर आने के बाद से फ़रार था। अब समझो की क्यों Ex Muslim बना था।