मैं पूछता हूँ आसमान में उड़ते हुए सूरज से
क्या 'वक़्त' इसी का नाम है
कि घटनाएँ कुचलती हुई चली जाएँ
मस्त हाथी की तरह
एक समूचे मनुष्य की चेतना को?
क्यों कुचले जा रहे आदमी के चीख़ने को
हर बार कविता कह दिया जाता है?
मैं पूछता हूँ आसमान में उड़ते हुए सूरज से
~पाश
...मेरा एकांत मुझे एक दिन अधिक कुछ तो नहीं परन्तु पागल अवश्य बना देगा। तथाकथित लोगों की दृष्टि में। तत्पश्चात मैं जिया करुंगा अकेला तुम्हारी स्मृतियों में डूबकर खुद से ही दिनभर बातें किया करुंगा।।...