This question is absolutely legitimate because it must be answered because due to the leaders of our country, the policies abroad are getting spoiled and if the country has said this then it is necessary to answer it.
@MEAIndia@rashtrapatibhvn@ravish_journo@khanumarfa
"सऊदी अरब में रहते हुए अगर यहां कोई हमारी नागरिकता पूछता है, तो हम क्या दिखाएं? क्या हमारा भारतीय पासपोर्ट ही नागरिकता का प्रमाण है या हमें कुछ और दिखाने की आवश्यकता है? कृपया इस पर मार्गदर्शन करें, @MEAIndia@IndianEmbRiyadh।"
#Passport_India@ravish_journo@khanumarfa
"सऊदी अरब में रहते हुए अगर यहां कोई हमारी नागरिकता पूछता है, तो हम क्या दिखाएं? क्या हमारा भारतीय पासपोर्ट ही नागरिकता का प्रमाण है या हमें कुछ और दिखाने की आवश्यकता है? कृपया इस पर मार्गदर्शन करें, @MEAIndia@IndianEmbRiyadh।"
#Passport_India@ravish_journo@khanumarfa
This is the situation in all the states of the country. #Police have the most expensive mobile phones in their hands and their action is in this manner. Should no action be taken against them too??
बल्कि न्यायपालिका और कानून के राज को खुली चुनौती है।
क्या ऐसा किसी और लोकतंत्र में संभव है, या सिर्फ भारत में ही न्याय देने वाले जजों को इस तरह निशाना बनाया जा सकता है?
भीड़ द्वारा नाज़िर अहमद की पीट-पीटकर हत्या के मामले में उम्रकैद की सज़ा पाए 14 दोषियों की रि��ाई की मांग को लेकर गौ रक्षा परिषद ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान फैसला सुनाने वाली जज तबस्सुम खान का पुतला जलाया गया, "तबस्सुम बेगम मुर्दाबाद"
के नारे लगाए गए और 14 दोषियों की रिहाई की मांग की गई।
जब हत्यारों के समर्थन में भीड�� सड़कों पर उतरे, न्याय देने वाले जज का पुतला जलाया जाए, उन्हें उनकी धार्मिक पहचान से निशाना बनाकर "मुल्ली" कहा जाए और खुलेआम डराने-धमकाने की कोशिश की जाए, तो यह सिर्फ एक विरोध नहीं,
सोचिये हम उस उस दौर मे जी रहे जहां हमारी आस्था को इंच टेप लेकर नापा जा रहा, और दवा होता है सबका साथ सबका विकास का?
यूपी के फिरोजाबाद में मुहर्रम के मौके मे रक्खी जाने वाली ताज़िया को वहाँ के एएसपी अनुज चौधरी इंची टेप लेकर नापने पहुंच गये।
खैर ज़ुल्म का एक दिन अंत ज़रूर होता है
30 हजार नहीं दोगे तो PM आवास की किस्त खाते में नहीं आएगी..!
यूपी के सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार किस कदर फैला हुआ है..इसकी बानगी देखिए...👇👇
PM आवास की किस्त डलवाने के लिए 14 बार कार्यालय के चक्कर लगा चुके रोते हुए इस पीड़ित को सुनिए...आरोप है कि -
पीएम आवास स्वीकृत हो चुका है..पहली किस्त का मैसेज भी फोन पर आ चुका है..लेकिन पैसा अकाउंट में नहीं आया...!
पीड़ित डूडा कार्यालय गया तो बाबू ने बताया कि तुम्हारा अकाउंट गड़बड़ है..जब तक 30 हजार रुपए नहीं दोगे किस्त खाते में नहीं आएगी..!
पीड़ित चक्कर लगाकर तक चुका है..कोई सुनने वाला नहीं है...!
ये वीडियो मैनपुरी जनपद से वायरल है..!
कानपुर पुलिस की इस 'थ्री-स्टार' परफॉर्मेंस को देखिए!
मोबाइल चोरी के आरोप में दो युवकों को पकड़ा और फिर वाहवाही लूटने के लिए जबरन हाथ में डिब्बा देकर फोटो खिंचवाने का दबाव बनाने लगे।
एक युवक ने ने साफ कह दिया - "जब चोरी नहीं की तो डिब्बा कैसे पकड़ लें..?"
वाह री योगी जी की पुलिस! असली अपराधियों को पकड़ने में पसीने छूटते हैं, और अपनी पीठ थपथपाने के लिए बेकसूरों को मोहरा बनाकर 'फोटोशूट' कराया जा रहा है।
What can be said on this, there is nothing to say.
Such a big conspiracy is going on against a particular community not only in Uttar Pradesh but in the entire country???
यह कांवड़ियों पे पुष्प वर्षा करने वाले SP रवि विश्नोई जी है।
संभल में एक मस्जिद शहीद किया गया जिसमें I LOVE MUHAMMAD के पोस्टर्स और हरे रंग का झंडा मिला
जिसके बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर ली मानो जैसे मस्जिद में बम मिला हो जिसे SP साहब जस्टिफाई कर रहे है।
इन लोगों के ख़िलाफ़ #उत्तरप्रदेश_पुलिस क्यों करवाई नहीं कर रही उनके घरों पर जार क्यों नहीं चल रहे क्यों गेरफ़्तारी नहीं हो रही एक समुदाय को टारगेट करना और इस तरीक़े से उनके व्यापार पर हमला करना क्या सही है?
करवा ही @Uppolice@mathurapolice क्यों नहीं करती?
#UP1/2
Location: Vrindavan, Mathura (Uttar Pradesh)
A fresh incident of alleged vigilante action by self-styled cow protectors has surfaced in Vrindavan. According to reports, a group of individuals chanting “Jai Shri Ram” allegedly forced a roadside biryani vendor to shut down his stall.
The vendor claims that his livelihood has been directly affected and that he was compelled to stop operating without any formal order from the administration or any legal authority.
The incident raises important questions: when laws, regulations, and government authorities already exist, under what authority can private individuals take such actions on the streets?
The silence of the administration has also prompted concerns, with many questioning whether due process and the rule of law are being upheld in such cases.
दरभंगा में बाइक शोरूम के मैनेजर फैज़ कि हत्या के मामले में पिता का दर्द सुनिए, ये उसी सरकार के कार्यकाल में हो रहा है जो इंसाफ के लिए बुलडोज़र उठाक��� चलाने को तैयारी रहती है. लेकिन मामला फैज़ का है तो ऐसा होना संभव नहीं लग रहा है।