All-rounder” shabd bahut logon ke liye use hota hai. Sir Garfield Sobers ke liye yeh shabd banaya gaya tha.
.Fast bowling, Spin bowling, left handed poetic batting. Ek over mein Six sixes, 365 not out, sirf 23 saal ki umar mein. Way ahead of his times.
Is IPL era mein hote, toh sabse expensive player hote , bina shaq.
Cricket ne apna sabse complete khiladi khoya hai.
Condolences to his family and well-wishers all over the world.
एक "मेसी"हा अर्जेंटीना का।
कल जाकर हमलोग भी कहानी सुनाएँगे,टीवी पर मेसी को गोल करते LIVE देखता था और तब की पीढ़ी हमसे अचरज से पूछेगी,क्या माहौल होता था
मेसी,रोजर फेडरर और राहुल द्रविड़ को हारते देखने पर लगता है कि खुद कहीं हार रही है। इनका खेल सिर्फ दिमाग ही नहीं दिल से भी देखता रहा हूं।
बस एक जीत दूर और हम विश्व कप से सबसे महान खिलाडी की सबसे महान विदाई देखेंगे!
भले कल अलेक्जेंडर ज्वेरेव विंबलडन फाइनल हार गए लेकिन संघर्ष और जज्बा का ब्रांड एम्बेसडर उन्हें बनना चाहिए! वे कई लोगों के प्रेरणा श्रोत बन सकते हैं! 29 साल का यह जर्मन खिलाडी का जीवन सबके लिए एक मिसाल होनी चाहिए!
हर दिन इन्सुलन लेने वाला इंसान अक्सर हौसला खो देता है! अलेक्जेंडर ज्वेरेव को गंभीर डाईबेटिस है! लेकिन वह खेलता रहा!
खेल के दौरान वह शुरू में छिपकर इन्सुलिन लेता था! जब तीन साल का था तभी उसे यह बीमारी हो गयी थी!
अब टेनिस फेडरेशन ने उसे मैच के दौरान मोबाइल रखने की अनुमति दी है ताकि वह बीच में अपना ग्लूकोस लेवल चेक कर सके और जरुरत पड़ने पर इन्सुलिन ले सके! अलेक्जेंडर ज्वेरेव कई दूसरे मरीजों के लिउए हौसला बढ़ने वाले हो सकते हैं!
विंबलडन में अब यहाँ से जोकोविच के लिए इस मैच और आगे किसी ग्रैंडस्लैम में जीत के साथ वापसी मुश्किल दिख रही है!
लेकिन जोकोविच ऐसे महान और ऑल टाइम ग्रेट टेनिस खिलाड़ी हैं जिन्होंने धीरे धीरे अपना प्रशंसक बनाया।
मुझे शुरू में जोकोविच बिल्कुल पसंद नहीं थे। सिर्फ़ इस कारण वे मुझे पसंद नहीं थे क्योंकि वे मेरे पसंदीदा फेडरर को अक्सर हरा देते थे लेकिन बाद में वे मुझे कब अच्छे लगने लगे पता नहीं चला। अच्छे इंसान के साथ उसूलवादी भी लगने लगे। आज इस तरह एकतरफ़ा मैच हारते देख अच्छा नहीं लगा। फ़ेडरर-नडाल-जोकोविच का अंतिम स्तंभ भी अब धूमिल होता जा रहा है।
सीनर-अल्काराज का नया युग शुरू है। वैसे हमारे मिथिला में कहा भी जाता है-“नव घर उठे,पुरान घर ख़से”
Cricket gyaan: The team that won the T20 World Cup in February is being thoroughly outplayed by England. Rarely has an Indian side looked so flat and bereft of ideas. It also underlines one simple truth: no player is more indispensable to this team than Jasprit Bumrah, India’s true match-winner. One player doesn’t make a team. Bumrah is the exception!🙏
Form is temporarily,Messi is Permanent!
एक बारगी तो लगा कि अर्जेंटीना हार ही गया। मान चुका था ।
मेसी और पूरी टीम बहुत औसत खेल रही थी। पैनल्टी तक मिस हो गया!
लग ही नहीं रहा था कि यह वर्ल्ड चैंपियन टीम है।
अफ़सोस हो रहा था कि मेरे सबसे पसंदीदा मेसी का वर्ल्ड कप विदाई भी निराशाजनक होगा।
लेकिन तभी मेसी ने दिखा दिया कि वे GOAT क्यों है।
शानदार वापसी की। ख़ुद गोल किया। टीम में जान फूंकी और 10 मिनट में फ़ुटबॉल इतिहास की सबसे शानदार वापसी में एक कर दिया और हम जैसी का वर्ल्ड कप रोमांच जारी रखा। इस वर्ल्ड कप में सबसे अधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बने हुए हैं!
शुक्रिया मेसी! आपका अंत में जीत के बाद रोना समझ सकते हैं । करोड़ो लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने का सुखद आँसू था वह।
और इनके बीच इजिप्ट के लिए सलामी। आपने सही में दिल जीत और मैच भी लगभग जीत ही लिया था!
देश में रेलवे को सिर्फ वंदे भारत की सेवा तक सीमित कर दिया गया है।
जब बिहार में परीक्षा के डेट पहले से तय थे और सरकार प्रशासन से जुड़े अधिकारियों को पता था कि इसमें लाख से ऊपर स्टूडेंट्स भाग लेंगे तो राज्य के अलग अलग हिस्सों से सफर करेंगे तो तैयारी पहले से नहीं करनी थी ?
क्या राज्य सरकार और केंद्र सरकार तय नहीं कर सकती थी कि स्टूडेंट्स समय पर जाएं और खूब सारे स्पेशल ट्रेन चले? क्या इसके लिए वॉर लेवल पर कोआर्डिनेशननहीं होना चाहिए था? जैसे रैलियों में लोगों को ले जाने के लिए होता है!
क्या इस मामले के बाद शीर्ष स्तर पर एक्शन होगा ?
सरकार और बीजेपी कितनी सजग और सक्रिय रहती है वह कभी किसी रैली की तैयारी में देखें। राजनीतिक आयोजन की तैयारी देखें। किसी दूसरे दल के नेताओं को अपने पक्ष में करने की प्रक्रिया के दौरान सिस्टम की सक्रियता देखे। रैली स्थल की समीक्षा हर दिन ख़ुद सीएम करते दिख जाएँगे। अभी टीएमसी नेताओं को ख़ुद से जोड़ने की मुहिम देखें। पूरे दिन मीटिंग का दौर जारी है।मीडिया की भी सजगता देखें।
इससे रत्ती भर चिंता इन लाखों स्टूडेंट्स और उनके मुद्दों में पार्टी और सरकार की होती तो इस तरह के हालात पैदा नहीं होते। कभी नीट । कभी सीबीएसई । कभी पटना जैसे हालात। सरकार की प्राथमिकता में पोलिटिकल मैनेजमेंट के अलावा कुछ नहीं है।
सिर्फ 2.5 महीने पहले सपनों के साथ बैंक में शामिल हुआ एक युवा अधिकारी आज पीछे छोड़ गया एक दर्दनाक सुसाइड नोट।
उस नोट में लिखा है "असहनीय मानसिक दबाव, स्टाफ की भारी कमी, बिना उचित प्रशिक्षण के शाखा में फेंक देना, ग्राहकों की प्रताड़ना, परिवार से दूर पोस्टिंग और ₹5 लाख का बंधनकारी बॉन्ड"
क्या यही “प्रोफेशनल वर्क कल्चर” है?
यह केवल एक आत्महत्या नहीं बल्कि बैंकिंग व्यवस्था पर बहुत बड़ा सवाल है। Bank of Baroda सहित सभी बैंकों के शीर्ष प्रबंधन को आत्ममंथन करना चाहिए।
बैंक क्रुरता से नहीं, इंसानों से चलते हैं। कोई नौकरी इतनी क्रूर नहीं होनी चाहिए कि एक युवा अधिकारी लिखे “यह दुनिया मेरे लिए नहीं है”
@SunilLa58275710@ramshankarsingh@ManishkBarnwal9@manish3065365@idesibanda@iSourabhMishra@bankofbaroda@AllBaroda
ये 8 साल पुरानी बात है। इस इंटरव्यू के बाद उस दिन बाबा ने अपनी धोती कसकर स्टेज पर योगासन भी किया था। सोचिये अगर पीपीपी ( पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के तहत उनका पीपीपी ( पंतजलि पेट्रोल पंप ) लग गया होता तो आपको सौ रुपये में ढाई लीटर पेट्रोल मिल रहा होता। जनता नाहक ही देश में पीपीपी प्रोजेक्ट्स का विरोध करती है।
🆘 There are many candidates who miss their bank exams opportunity by 1 day, 1 month, or a few months.
There must be one fixed date for the age cutoff for all exams, and that date must be 1 January.
1st January should be the age cutoff for all banks and insurance exams.
Provide 2 years age relaxation to general category students, by increasing PO/AO/AAO/Grade B/A scale to 32 and 30 for Clerical cadre jobs
#FixIBPSAgeCutoffTo1stJan #AgeRelaxation #EqualOpportunity #AgeCutoff2026 #IBPS #InsuranceExams #1JanCutoff #JusticeForAspirants
“सॉरी मम्मी-पापा…..” लिखकर …खुशी दुबे ने कर ली आत्महत्या!
देश के प्रतिष्ठित, जाने-माने कॉलेज NIT कुरुक्षेत्र की होनहार छात्रा दीक्षा दुबे ने आत्महत्या कर ली। उसने पंखे से लटककर जान दे दी। गरीब बाप का घर उजड़ गया, उनके सपने बिखर गए।
UGC लाने वाली सरकार ने चुप्पी साध ली है? UGC के समर्थन में आत्महत्या जैसे संवेदनशील मामले के भी जातिवार फर्जी आंकड़े देने वाले तथाकथित प्रोफेसर और जातिवादी पार्टियों के प्रवक्ताओं के मुँह सिल गए हैं।
मीडिया चैनल चुप हैं, सोशल मीडिया खामोश है। क्यों? आख़िर क्यों? इस होनहार छात्रा के न्याय के लिए आख़िर आवाज़ कौन उठाएगा? कल तक सोशल मीडिया के हर प्लेटफार्म में ये खबर दिखनी चाहिए……
श्रेयस अय्यर प्रतिभा से सराबोर भारतीय टीम का वो अंडर-रेटेड खिलाड़ी है जिस पर कम चर्चा होती है।
आज फिर दबाव में आकर अपनी टीम को मैच जीत जितवा दिया।
इसीलिए इन्हें सरपंच साहब कहा जाता है।
At the moment Shreyas Iyer looks unflappable.
His ability to forecast a chase, guide his partner, staying unruffled amidst pressure and shot selection against a bowler he fancies at the right moment are attributes that not many cricketers can boast of at this point of time.
We have a plethora of batters who can excite with their shot making ability but not many like Shreyas.👌👌
Top Class.
पूरे देश में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति बचा होगा जिसने कैंसर जैसी बीमारी को नजदीक से न देखा हो , क्या नेता क्या अभिनेता कोई इससे बचा नहीं है,
इसके अलावा तमाम ऐसे डिसऑर्डर्स हैं जिनसे लोग डेली बेसिस में जूझ रहे हैं, डॉक्टर्स से आप कारण पूछेंगे तो वो आपको लाइफस्टाइल बोल कर आगे बढ़ जायेंगे,
आज के समय में हर कोई व्यक्ति स्वयं के लिए सारे सामान नहीं बना सकते , सुबह दांतों की सफाई से लेकर रात में कुल्ला करके सोने तक हम फैक्टरीज द्वारा बनाई गई पैकेज्ड चीजों पर निर्भर हैं और हर चीज पर सरकार द्वारा निर्धारित टैक्स दे रहे हैं,
हम इस भरोसे पर चल रहे हैं कि इतना टैक्स देने के बाद सरकार द्वारा संचालित एजेंसियां अपना काम बखूबी कर रही हैं और हम सही चीज़ें कंज्यूम कर रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं , हम इस मामले में पूरी दुनिया से काफी पीछे हैं,
पूरे देश में मिलावट चरम पर है, जो भी चीजें हम सुबह से शाम तक इस्तेमाल करते हैं ,उनमें प्रिजर्वेटिव्स से लेकर खराब और खतरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल हो रहा है, कुछ ब्रांडेड प्रोडक्ट्स को छोड़ दे तो हालत बहुत खराब है , ये काम धड़ल्ले से चल रहा है और रोज बढ़ रहा है ,
जहां दुनिया के कई देशों में एजेंसियां बहुत सजग होकर काम कर रही हैं, बेहतरीन से बेहतरीन गाइडलाइंस और पैरामीटर्स बना रही हैं और टेक्नोजिकली बहुत एडवांस्ड हैं,वहां FSSAI जैसी एजेंसियां केवल लाइसेंस देने में और भ्रष्टाचार में लिप्त हैं ,
आप और हम क्या बीमार होने का इंतजार कर रहे हैं?
इस मामले में हम सभी को मिलकर आवाज उठानी चाहिए , खुद बीमार होने का इंतजार न करें। @fssaiindia
❗️UNSUNG HEROES OF INDIA’S BANKING SYSTEM - RRB EMPLOYEES
Across the country, Regional Rural Banks (RRBs) have quietly delivered remarkable performance:
Total Business: ₹13.65 lakh crore
NPA: ₹31,500 crore (just 5.29%)
Profit: ₹6,662 crore
These numbers are not just figures, they are proof of resilience, dedication, and commitment.
Now think about this 👇
If RRBs were counted as one single PSU Bank with a nationwide presence, they would stand stronger than many established PSU banks.
But the real story is not just about numbers. The real story is about the people behind these numbers.
RRB employees are working in:
→ Remote villages
→ Interior regions
→ Areas where even basic infrastructure is missing
❌ No fancy branches.
❌ No high-end facilities.
❌ Limited staff.
❌ Endless pressure.
And still they deliver.
While many private and big PSU banks focus on global, corporate, urban and semi-urban profits,
RRB employees are building the real backbone of financial inclusion in India.
They are the ones:
→ Bringing banking to the last mile
→ Supporting farmers and rural entrepreneurs
→ Handling pressure with minimal resources
→ Delivering results against all odds
This “marvelous business” is not because of systems. It is because of people.
It is because of every RRB banker who shows up daily in challenging conditions and still performs.
Credit where it’s due - RRB employees are not just bankers, they are nation builders.
Respect. Recognition. And support
that’s what they truly deserve.
PC: @AirrbeaOfficial
#RRB #Bankersvoice
सैनिक स्कूल को निजी हाथों में देना सही फ़ैसला नहीं है।देश का दुर्भाग्य है कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं धंधा बन चुकी है।प्राइवेट स्कूल और अस्पताल तो अब सबसे बड़े व्यवसाय में शामिल हैं।