पैसा यूपी का सड़क सेठ की
मेरठ से प्रयागराज 594 किमी
गंगा एक्सप्रेसवे टोल:
• दोपहिया वाहन: ₹905
• तीनपहिया वाहन: ₹905
• कार (आना-जाना): ₹3,600
• हल्के वाणिज्यिक वाहन LCV आना-जाना ₹5,600
• ट्रक/बस आना-जाना ₹11,400
कितने भारतीय इस एक्सप्रेसवे का उपयोग करने का खर्च उठा सकते हैं?
कुल 9 हजार करोड़ ₹ सेठ ने खर्च किया है शेष यूपी सरकार ने।
योगी सरकार इस मामले में स्वेत पत्र लेकर आये और बताये कि सेठ ने कितना पैसा खर्च किया?
9 हजार करोड़ रुपये सेठ ने बैंक लोन से खर्च किया जिसकी बैंक गारेंटी योगी सरकार ने लिया है।
25-30 साल सेठ टोल वसूली करेगा।
Critical v adaptive thinking
Critical thinking makes you aware.🙂
#Adaptive#thinking makes you unstoppable.
Staying the same isn’t loyalty… it’s limitation.
Agree?
मुंबई में स्कूली बस ने ही दो बच्चों और उनकी
अभिभावक को कुचल दिया! एक बच्चे की मौत हो गई दूसरा घायल है। अभिभावक भी बस के नीचे आ गई और वो भी गंभीर रूप से घायल है।
मैं जानता हूं कि ये भारत है अमेरिका नहीं लेकिन फिर भी ये लिख रहा हूं कि जब भी अमेरिका जाता हूं, देखता हूं और आप भी देखते होंगे, कि कोई भी स्कूल बस जब बच्चों को चढ़ा या उतार रहा होती है, सड़क का ट्रैफ़िक ख़ुद बख़ुद ठहर जाता है। बच्चे जब चढ़ जाते हैं या उतर कर सुरक्षित दूरी पर चले जाते हैं तभी ट्रैफ़िक चलता है। ये वहां के लोगों के जीवन में शुमार है। कोई ट्रैफ़िक लाइट या पुलिस वाला बताने नहीं आता। सड़क पर चलने को लेकर हमारी ऐसी मानसिकता तो शायद सौ साल बाद भी नहीं होगी। फ़िलहाल यहां तो स्कूल बस ही बच्चों को उतारने के बाद कुचल दे रही है!
बच्ची पर गिरे बड़े स्पीकर्स, हो गई मौत
मुंबई के विक्रोली इलाके में गणतंत्र दिवस के उत्साह के बीच भारी भरकम स्पीकर गिरने से 3 साल की बच्ची की जान चली गई.
#Mumbai
जयपुर में नवीन सिंह नाम के लड़के ने अपनी मां की पीट पीटकर हत्या कर दी। आरोपी का पिता जो कि दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल है वो और उसकी बहनें बीच बचाव करती रही लेकिन आरोपी ने अपनी मां को इतना मारा कि वह खत्म ही हो गई।
नवीन नशे का आदी था। जिसकी वजह से उसकी पत्नी भी छोड़कर चली गई थी
पहले नीचे 👇 वीडियो को ध्यान से देखे फिर 2 मिनिट वक्त निकालकर पोस्ट को आराम से पढ़ें आपको पूरा हेल्थ बिजनेस समझ आ जाएगा ...
कभी डॉक्टर को भगवान माना जाता था। वजह थी..... उनका सेवा भाव , उनकी निष्ठा , और मरीज़ों की जिंदगी को बचाने का जुनून। डॉक्टर सिर्फ इलाज नहीं करते थे , वे अपने पेशे को धर्म मानते थे। उनका उद्देश्य इंसानियत की सेवा था , ना कि मुनाफा कमाना। लोग उन्हें श्रद्धा से देखते थे , और उनके सामने सिर झुकाते थे।
लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। अब डॉक्टर को भगवान नहीं , बल्कि एक बेशर्म बिजनेसमैन समझा जाता है। अस्पताल अब सेवा के मंदिर नहीं , धंधे की दुकानें बन चुके हैं। इलाज से पहले ही हज़ार रुपए की पर्ची पकड़ा दी जाती है। हर बीमारी को कमाई का जरिया समझा जाता है।
टेस्ट , स्कैन , रिपोर्ट्स ... सब एक प्लान का हिस्सा लगते हैं। ऐसा लगता है जैसे बीमारी नहीं , एक पैकेज चल रहा हो।
और यही नहीं , अब तो कुछ जगहों पर इलाज के नाम पर अंगों की तस्करी तक हो रही है। जो मरीज ज़िंदगी की उम्मीद लेकर अस्पताल जाता है , वो कभी-कभी अंगहीन होकर या लाश बनकर लौटता है। इंसान की तकलीफ अब संवेदना नहीं , अवसर बन गई है। इलाज नहीं , शोषण हो रहा है।
जरूरत है इस सिस्टम को आईना दिखाने की। डॉक्टर वही पूज्य हैं जो पेशे को सेवा समझें , ना कि धंधा। वरना जल्द ही डॉक्टर शब्द से भरोसे का रिश्ता हमेशा के लिए टूट जाएगा।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक अदभुत केस की सुनवाई का ये वीडियो इंटरनेट पर बंपर वायरल है।
एक महिला पर आरोप है उसने करंट देकर अपने पति को मार डाला। हत्या की।
सुनवाई के दौरान आरोपी महिला से मुखातिब जज ने सब सवाल किया तो उन्होंने जवाब जो दिया वो सुनकर कोर्ट दंग रह गया।
आरोपी महिला केमिस्ट्री की टीचर हैं और उनका जवाब आप भी सुनिए।
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