मोदी जी !! आप बहुत निष्ठुर हो !!
क्या आपको इस व्यक्ति को देख कर इस पर दया नहीं आ रही ??
पिछले कई दिनों से यह आदमी दिल्ली में किसी लावारिस पशु की तरह सड़कों पर बैठा है ! बिलकुल कुत्ते जैसी हालत हो रखी है इसकी …. लेकिन आपको कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा !
अगले ने अपनी हालत ऐसी कर ली है जैसे कोई खुजली वाला कुत्ता हो लेकिन आपकी कान पर जूँ तक नहीं रेंग रही ! इसकी शक्ल देखो ऐसे लग रहा है जैसे कोई गंदी नाली में लोटता हुआ सूअर हो !
सारा देश देख रहा है कि सचमुच देश के इतने बड़े इस समाज सेवी का आपके लिए महत्व नाली में कीचड़ से लिपटे हुए किसी सूअर से ज़्यादा नहीं है !
मोदी जी !! आप बहुत निष्ठुर हो !!🤣🤣
खान सर के लोए लगने वाले हैं... बिहार पुलिस की जाँच में पता चला है कि फायरिंग खान सर ने ही कराई है अपने गॉर्ड से...
अब खान सर की गॉर्ड का इचगॉर्ड बनाया जाएगा...! 😂😂
@cmohry@diprojind1
Cast certificate one week se under process hai
Unko aproval kyo nhi kiya ja rha sir
Public b presan h
Certificate k bina addmission nhi ho rhe kisi k form apply nhi ho rhe
Sir Ye to approved ak din k ander ho jane chayiye taki kisi ko koi presani na ho.
राहुल गांधी सदन में न कोई नियम मान रहा है, न अध्यक्ष की रूलिंग मान रहा है
बार बार रोकने के बावजूद वही कर रहा है जो नियम विरुद्ध है
अजीब बवाल है भाई
एक पगलेट सदन में पूरे तंत्र को मजाक बना रहा है
ओर देश की पूरी सरकार प्रधानमंत्री सहित उस पगलेट को झेलने के लिए मजबूर है ।
तुरन्त उठा कर बाहर फिंकवाईये इस पगलेट को
एक तुचिए के चक्कर में पूरी व्यवस्था को पंगु नही बनने दिया जा सकता ।
बोलने के लिए कुछ है नही
मुद्दे है नही
बस फोकट में फुटेज खा कर खबरों में आना है
भक्कक हैंचो
यूजीसी एक्ट पर रोक के मामले में वकील विष्णु शंकर जैन की भूमिका अहम रही।
आस्था और कानून के पक्ष में मजबूती से खड़े रहने के लिए स्वर्ण समाज हमेशा आपका ऋणी रहेगा। 🙏🏻
विष्णु शंकर जैन जी ने पूरे हिंदू समाज को बिखरने से बचा लिया। जब राजनीति आग लगाए तो समाज के लोग अपनी समझदारी से उस आग पर पानी डाल सकते हैं।
बिना किसी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाए, टूलकिटियों को छोड़कर बिना अपशब्दों के प्रयोग के, बिना किसी तरह की अस्थिरता, बिना किसी धमकी के सभ्य और शिक्षित तरीके से न्याय के सहारे अपनी बात को रखना, विरोध दर्ज कराना, न्याय की जीत कराना एक मिसाल है।
सारे हिंदू चाहे वे किसी पंथ, जाति के हों आपस में भाई हैं। सभी की प्रगति में एक की प्रगति और एक की प्रगति में सभी की प्रगति है।
सत्यमेव जयते 🙏
#UGCAct से असहमति और चेतावनी 🏹
हित-वचन नहीं तूने माना,
मैत्री का मूल्य न पहचाना,
तो ले,मैं भी अब जाता हूँ,
अन्तिम संकल्प सुनाता हूँ
याचना नहीं, अब रण होगा,जीवन-जय या कि मरण होगा !
#Feb1BharatBand#UGC_RollBack
रजत शर्मा भी बोल पड़े 🔥🤟
INDIA TV पर भी UGC का विरोध शुरू
सवर्णों के साथ अन्याय हो रहा है
ST/ST/OBC के साथ गलत ना हो
सवर्णों के साथ भी गलत नही होना चाहिए
जो दलित या पिछड़ा कानून का दुरूपयोग करें उस पर कारवाई होना चाहिए, सवर्णों के खिलाफ भी गलत बयानबाजी पर कारवाई होना चाहिए
यही एक वर्ग को दबाया जाएगा तो कही ऐसा ना हो नई पीढ़ी के स्टूडेंट्स जो देश के भविष्य हैं, उनके मन में जातिवाद बढ़ता जाए फिर परिणाम भयानक होगा
पत्रकार ने प्रश्न किया— “यूजीसी में नियम परिवर्तन से सवर्ण समाज में भारी आक्रोश है, इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?” माइक भाजपा के नेता जी ने थामा। उत्तर देने के स्थान पर उन्होंने गला साफ किया और गर्जना की— “हर हर महादेव!” पीछे खड़े समर्थक उछल पड़े—“हर हर महादेव!” पत्रकार ने फिर साहस कर प्रश्न दोहराया— “सर, नियम परिवर्तन पर आपका स्पष्ट पक्ष…?” नेता जी ने तुरंत दूसरा अस्त्र निकाला— “भगवान विष्णु की जय! माता लक्ष्मी की जय!”
समर्थक फिर दहाड़े, पर उनके नेत्रों में श्रद्धा नहीं थी, होंठों पर भक्ति नहीं थी, केवल दाँतों की नुमाइश और उपहास की टेढ़ी रेखाएँ थीं।
पत्रकार फिर बोला— “जनता उत्तर चाहती है…” नेता जी बोले— “हरि हर नाथ की जय! बाबा मुतनेश्वर नाथ की जय!”
समर्थक ऐसे हँसे मानो किसी राक्षसी सभा में देवताओं के नाम पर ठहाके लगाए जा रहे हों। वह हँसी पूजा की नहीं थी, वह हँसी पाखंड की थी। वह हँसी भक्ति की नहीं, वह हँसी राजनीति की थी। पत्रकार ने अंतिम प्रयास किया— “आप प्रश्न से बच क्यों रहे हैं?” तुरंत अंतिम ब्रह्मास्त्र छोड़ा गया— “भारत माता की जय!”
माइक मेज़ पर पटक दिया गया। नेता जी अपने समर्थकों के साथ ऐसे तेजी से निकल लिए जैसे प्रश्न कोई अपराध हो और उत्तर कोई दंड। यह दृश्य साधारण नहीं था। यह भाजपा की उस राजनीति का जीवंत चित्र था, जहाँ तर्क के स्थान पर नारा, उत्तर के स्थान पर शोर और उत्तरदायित्व के स्थान पर धर्म का मुखौटा रख दिया जाता है।
धर्म का सहारा लेना बुरा नहीं है। अधर्म से तो कहीं श्रेष्ठ है। परंतु प्रश्नों से बचने के लिए धर्म का प्रयोग करना, ईश्वर को ढाल बनाना और जनता को मूर्ख समझना—यह सबसे बड़ा अधर्म है।
उन समर्थकों की हँसी बता रही थी कि मंच पर राम का नाम है, पर भीतर कालनेमि बैठा है। वेश साधु का, आत्मा मारीच की। मुख पर जयकार, मन में छल।
जिसे थोड़ी भी बुद्धि है, वह समझ जाएगा कि यह भक्ति नहीं, राजनीतिक नौटंकी है। यह धर्म नहीं, धर्म का अपहरण है। यह साधना नहीं, सत्ता की साधिश है।
आज धर्म को माइक बना दिया गया है, और ईश्वर को ढाल। यही कारण है कि प्रश्न अनाथ हैं, उत्तर लापता हैं, और जयकारों की भीड़ में सच्चाई दम तोड़ रही है।