My dear prime minister @narendramodi
This is import inld man
Close in shop in @BJP4Haryana
Plz current action this man
@AmitShah
https://t.co/5LCFv1sU5A
@DeepisboyAnoop टोटल बकवास है स्वर्गीय चौधरी भजनलाल जी 36 बिरादरी के नेता थे,,,हां बस उन्हें राजनीति करनी आती थी ऊपर नीचे होता बस वहीं वो करते थे जो आज टोटल देश में भारतीय जनता पार्टी करती है
तूफानों से टकराकर हमने अपनी हस्ती बनाई है,
स्वाभिमान की आग में तपकर यह शख्सियत पाई है।
जब बात हक और सच की आएगी, तो याद रखना,
नज़रे झुकाना हमारी फितरत नहीं, हमने सच को दहाड़ना सीखा है!"
लगता है हिमंता ने किसी एजेंसी को अपना एक्स हैंडल सौंप दिया है।
इस पोस्ट का मतलब क्या निकाला जाए?
गुवाहटी में आज IPL का मैच खेला जा रहा है राजस्थान रॉयल्स व चेन्नई सुपर किंग्स के बीच।
राजस्थान के कप्तान रियान पराग असम के ही रहने वाले हैं। राजस्थान की टीम ने गुवाहटी को अपना सेकेंड होम माना है और सात घरेलू मैचों में से तीन यहां खेलने वाली है।
तो क्या इस पोस्ट को लिखने वाला यह कहना है चाहता है कि IPL को मत देखो? कुछ समझ में नहीं आई यह बात।
#AssamNews #IPL2026 @rajasthanroyals@CSKFansOfficial@ChennaiIPL@ParagRiyan
लगता है हिमंता ने किसी एजेंसी को अपना एक्स हैंडल सौंप दिया है।
इस पोस्ट का मतलब क्या निकाला जाए?
गुवाहटी में आज IPL का मैच खेला जा रहा है राजस्थान रॉयल्स व चेन्नई सुपर किंग्स के बीच।
राजस्थान के कप्तान रियान पराग असम के ही रहने वाले हैं। राजस्थान की टीम ने गुवाहटी को अपना सेकेंड होम माना है और सात घरेलू मैचों में से तीन यहां खेलने वाली है।
तो क्या इस पोस्ट को लिखने वाला यह कहना है चाहता है कि IPL को मत देखो? कुछ समझ में नहीं आई यह बात।
#AssamNews #IPL2026 @rajasthanroyals@CSKFansOfficial@ChennaiIPL@ParagRiyan
आजादी के लिए कालापानी की सजा काटने वाले बिहार के लोगों की सूची :-
18 में 8 ब्राह्मण है !
- गौरी शंकर दुबे
- जोगेंद्र शुक्ल
- कमल नाथ तिवारी
- कन्हैया लाल मिश्र
- महावीर मिश्र
- मलय ब्रह्मचारी
- सूरज नाथ चौबे
- केदार मनि शुक्ल
एक भी अहीर /कोइरी नहीं है ..!
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री श्री अजीत पवार जी का विमान दुर्घटना में निधन अत्यंत दुःखद है।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों को यह अपार दुःख सहने की शक्ति दें।
भावभीनी श्रद्धांजलि !
उचाणा हल्के से राजनीतिक परिवारों का दबदबा रहा है कभी चौटाला परिवार कभी बिरेन्द्र सिंह
लेकिन पहली बार उचाणों वालों को लग रहा है की एक आम घरों का लड़का विधायक चुना हैं
आज मेरे घर में चीनी खत्म हो गई थी सोचा, बाहर जाने से अच्छा है Blinkit से ऑर्डर कर दूँ।
मोबाइल उठाया, double क्लिक किए, और स्क्रीन पर दिखा....
10 मिनट में डिलीवरी।
मन में सुकून आ गया। अपने काम में लग गई।
लेकिन आज के वो 10 मिनट
हम सब अब इसी के आदी हो गए हैं। एक बटन दबाया,
और मान लिया अब सामने वाला इंसान नहीं,एक मशीन काम करेगी।
समय पर आए तो ठीक,और अगर दो-चार मिनट भी देर हो जाए
तो गुस्सा, शिकायत, या ऑर्डर कैंसल। आज भी दरवाज़े पर दस्तक हुई
लेकिन समय से थोड़ी देर बाद।
दरवाज़ा खोला तो सामने एक लड़का खड़ा था।
उम्र बहुत ज़्यादा नहीं,
लेकिन चेहरे पर ज़िम्मेदारियों की शिकन थीं।
उसकी साँसें तेज़ थीं, हाथ हल्के काँप रहे थे, और आँखें
जैसे बहुत कुछ कहना चाह रही हों।
मैंने सामान लिया। लेकिन जाने क्यों मुँह से बस एक ही सवाल निकला
सब कुछ ठीक है?
आप बहुत परेशान लग रहे हो
बस यहीं उसका सब्र टूट गया।
उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। बिना आवाज़ के।
जैसे किसी ने सालों से
रोने की इजाज़त ही नहीं दी हो। थोड़ी देर बाद बोला मैम
आज तक किसी ने ये नहीं पूछा।
लेट होने पर लोग सिर्फ गुस्सा करते हैं।
कभी सामान लौटा देते हैं,
कभी ऑर्डर कैंसल।
वो रुक गया।
साँस संभाली।
फिर बहुत धीमी आवाज़ में बोला
मेरी पत्नी हॉस्पिटल में है।
अभी उसकी डिलीवरी है।
फोन आ रहा है
जल्दी आ जाओ
उस पल जैसे समय थम गया।
मेरे सामने कोई डिलीवरी बॉय नहीं खड़ा था।
मेरे सामने एक पति था
जो पिता बनने वाला था।
उसने आगे कहा
रास्ते में ही हॉस्पिटल पड़ता है। सोचा एक बार देख आऊँ।
बस एक पल लेकिन उसी पल में देर हो गई।
वो शर्मिंदा था।
जैसे उसने कोई गुनाह कर दिया हो।
लेकिन सच्चाई ये थी वो गुनहगार नहीं,
मजबूर था।
एक तरफ उसकी पत्नी दर्द से जूझ रही थी। दूसरी तरफ काम
जिससे घर चलता है।
अगर वो ड्यूटी छोड़ देता
तो शायद नौकरी चली जाती। और अगर देर करता
तो लोगों का गुस्सा झेलना पड़ता।
आज वो बीच में फँसा था परिवार और पेट के बीच।
मैं पूरी तरह निशब्द थी। आँखें भर आईं।
दिल भारी हो गया।
हम जिन 10 मिनट के लिए लड़ते हैं, चिल्लाते हैं,
कभी-कभी वही किसी की ज़िंदगी के
सबसे अनमोल पलों को छीन लेते हैं।
आज मैंने एक बात समझी हर देर लापरवाही नहीं होती।
हर इंसान लापरवाह नहीं होता। कुछ लोग चुपचाप
अपनी खुशियाँ अपने आँसू और अपने सपने
दूसरों की सुविधाओं के लिए कुर्बान कर रहे होते हैं।
हम कमरे में बैठकर समय गिनते हैं। और कोई सड़क पर
अपनी ज़िंदगी समेटे भाग रहा होता है।
एक छोटी-सी अपील
अगली बार अगर कोई थोड़ा देर से आए तो गुस्सा करने से पहले
बस एक बार पूछ लीजिए
सब ठीक है?
हो सकता है सामने खड़ा इंसान किसी का पति हो,
किसी का पिता हो, या किसी का बेटा
जो अपनी ज़िम्मेदारियों के नीचे दबा
बस थोड़ी सी इंसानियत चाहता हो।
क्योंकि हम ग्राहक हैं ,लेकिन वो भी इंसान हैं।
इंसान पहले।
सुविधा बाद में।
~ credit : Surbhi Choubey