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@ImJPramodY इसे 'स्मार्ट/चीप मार्केटिंग' कहते हैं!
बड़े स्टार को करोड़ों देने से अच्छा है नए वायरल मीम/क्रिएटर को दुबई का फ्री टिकट व आईफोन दे दो।
क्रिएटर को ट्रिप और व्यूज मिल गया और दुकान को भारतीय दर्शकों के बीच तगड़ा प्रमोशन।
Zam-Zam Brothers(पाकिस्तानी) का यह पूरा प्री-प्लैनड खेल है।
@Prakharshri78@dtptraffic सर पूरे NCR का यही हाल है!!
अब Kalindi Kunj Yamuna bridge ही देख लीजिए, यहां पर तो हमेशा का यही हाल है 2 से 3KM तक का फिक्स ट्रैफिक रहता हैं!
@SonOfBharat7 दीपक जी यही सब हमारे मंदिरों में होता हैं, साबुत नारियल को फोड़ने नहीं देते हैं, भक्तों को खुद प्रसाद नहीं चढ़ाने देते, पूरा प्रसाद लेकर उसमें से 2 चुटकी वापस देते है और बाकी का प्रसाद अलग कंटेनरों में रखते हैं.... बहुत कुछ!
कोई जात-धर्म का कारण नहीं है - सब जगह धंधा चल रहा है!
@amitkilhor@gurgaonpolice@TrafficGGM NCR में ये बहुत आम है। हर 100 मीटर पर कैमरे के बावजूद जवाबदेही नहीं। Swift, Dzire, Eeco, Creta जैसी गाड़ियों से ऐसे लफंगे सड़क पर बाइकर्स/पैदल को निशाना बनाते हैं। रोड पर ब्लाइंडली न चलें—कभी भी सरप्राइज़ मिल सकता है। रोडसाइड झगड़े से बचें और खतरा लगे तो तुरंत सुरक्षित जगह जाएँ���
अगर सच है तो आम आदमी का सिस्टम से भरोसा उठना जायज है।
जो चोर पकड़कर लाया, उसी को पीटना… फिर “लोग कानून अपने हाथ में लेते हैं” कहना सिर्फ दोषारोपण है, समाधान नहीं।
जवाबदेही चाहिए, सिर्फ नसीहत नहीं।
📍 नॉर्थ दिल्ली
यादव नगर निवासी समीर अपनी मां के साथ रहता है और ई-रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च उठाता है। हाल ही में उसका ई-रिक्शा चोरी हो गया। समीर ने खुद तलाश कर ई-रिक्शा और कथित चोर को पकड़ लिया और दोनों को लेकर थाने पहुंचा।
आरोप है कि चोरी की शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिसकर्मियों ने समीर के साथ ही बुरी तरह मारपीट की।
जिस युवक ने चोर पकड़कर पुलिस की मदद की, अगर उसी को थाने में इंसाफ़ के बजाय मार मिले, तो आम आदमी कानून पर भरोसा कैसे करे? मामले की निष्पक्ष जांच ��रूरी है।
#Jaipur: शहर में तैनात एक इंस्पेक्टर साहब के विशेष शौक के चर्चे !
दरअसल साहब की कहीं भी होती है पोस्टिंग, साहब वहां के हट्टे कट्टे और हेंडसम दिखने वाले कांस्टेबल को रखते हैं अपने साथ.....
#RajasthanWithFirstIndia#JaipurNews
कितने दोगले लोग हैं हम!
अनंगपुर (फरीदाबाद), एक छत पर एक बंदर बैठा है। पिछला ��ैर पंजे के पास से बुरी तरह टूटा हुआ है, लटक रहा है। घाव पूरी तरह सड़ चुका है, कीड़े पड़ गए हैं। दर्द में कराह रहा है।
गाँव का पशु अस्पताल बंद है। भवन को घर और ग्राउंड को गांव की पार्किंग बना दी हैं।
अस्पताल भवन में रह रहे बुजुर्ग से पूछने पर जवाब मिला—“यहाँ कोई इलाज नहीं होता।”
Wildlife SOS और लोकल NGO ने बंदर का नाम सुनते ही मना कर दिया। ��ाँव वाले कहते हैं—“बंदर को इलाज की क्या जरूरत!”
इन्हीं लोगों ने केले-फल खिलाकर इन्हें बस्तियों पर निर्भर बनाया।
@Kapil_Jyani_ दूसरी बात, इंफ्रास्ट्रक्चर तो वही घटिया मिलने वाला है, फिर करोड़ों खर्च करने का क्या फायदा? इससे बेहतर है शहर से बाहर गाँव ��ें कहीं खेत लो, अच्छा-सा घर बनाओ और सुकून से बेहतर जीवन बिताओ।
@Kapil_Jyani_ दूर से देखने में सब चंगा सी! लेकिन निर्माण की हालत ऐसी है कि टॉप फ्ल���र तक जाते-जाते लिफ्ट डोलने लगती है और दीवारें रगड़ने पर रेत छोड़ती हैं। NCR जैसा घटिया निर्माण शायद ही कहीं हो!
इससे बेहतर है थोड़ा खुला फार्म लेकर मस्त बंगला बनाओ और हरियाली का आनंद लो और पीढ़ियाँ मौज करेंगी।