हमारी तीन मांग हैं-
1. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो और पेपर लीक माफिया से इनके संबंधों की जांच की जाए
2. हिंदुस्तान की शिक्षा व्यवस्था को बदला जाए, जिसके लिए UPA सरकार ने कमेटी बनाई थी, लेकिन NDA सरकार ने मनमाने तरीके से NTA को खड़ा कर दिया
3. युवाओं के लिए नियमित जॉब कैलेंडर जारी किया जाए और परीक्षा भर्ती प्रक्रियाओं के लिए एक Academic कैलेंडर निकाला जाए
: @nsui प्रभारी @kanhaiyakumar जी
📍 दिल्ली
जंतर मंतर पर पिछले 16 दिन से अपनी मांग को लेकर युवा शिक्षा मंत्री जी से इस्तीफा मांग रहे हैं,
पर सरकार के कानों में जूं तक नहीं जा रहा है,
आखिर क्यों??
हम फिर उसी दौर में लौट रहे हैं जहाँ राजा का मूड ही क़ानून होता था।
ना अदालत की ज़रूरत, ना संविधान की क़द्र– बस चेहरा पसंद नहीं आया, तो ED भेज दो।
- नेता विपक्ष राहुल गांधी जी
#RahulGandhi#Congress
Watch this- 7 term MP, Cabinet Minister, 3 term CM been put under house arrest by BJP to to not let her travel to Baruipur to meet the young rape victim. Shame Bengal govt!
श्रीराम, श्रीकृष्ण, श्री हनुमान...
ये किसी पार्टी के स्टार प्रचारक नहीं हैं।
ये करोड़ों लोगों की आस्था हैं।
आस्था का सम्मान राजनीति से ऊपर हैं।
सवाल राजनीति की मर्यादा का है- सत्ता किसी की भी हो, आस्था का सम्मान वोट से ऊपर हैं।
जब विकास, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य पर तालियाँ कम पड़ने लगें...
तब आस्था को भी चुनावी मंच पर बुला लो। भगवान चुनाव नहीं लड़ते...
दिल्ली के जंतर मंतर पर एक मुस्लिम बुजुर्ग NEET पेपर लीक के बाद सुसाइड करने वाले छात्रों को इंसाफ दिलाने के लिये ईश्वर से दुआ मांगता है और हिंदू भाई बुजुर्ग पर पंखा उड़ा रहा है , ताकि गर्मी क़ी वजह से इबादत में खलल पैदा ना हो ,
गंगा जमुना तहजीब क़ी असली मिसाल पेश करते हुए ,
बीजेपी सरकार मुर्दाबाद और अमित शाह मुर्दाबाद जैसे नारे लगाने पर आप किसी को तड़ीपार कर देंगे ? क्या ऐसे नारे नहीं लगाए जा सकते ?
यह क्या हो रहा है ? देश के सभी नागरिकों को क्या भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है ? देश के नागरिक न विरोध-प्रदर्शन कर सकते हैं, न आंदोलन कर सकते हैं. यह सब क्या है ? इतने सारे पेपर लीक हो चुके हैं. अगर लोग विरोध करेंगे, तो क्या आप उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कर देंगे ? विरोध करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है.
न जस्टिस माधव जामदार की ये फटकार महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार और बीजेपी सरकार की पुलिस पर एक तमाचे की तरह है. महाराष्ट्र पुलिस को ऐसी ही फटकार लगाकर बॉम्बे हाईकोर्ट के इस जस्टिस ने 49 साल के सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी नाम के शख्स को जिला बदर करने के पुलिसिया फैसले को रद्दी की टोकरी में फेंककर रद्द कर दिया.
पूरा वीडियो मेरे यूट्यूब चैनल पर
.@Wangchuk66 जी का अनशन 7 वें दिन भी जारी है।
अगर 59 साल के @Wangchuk66 आपके लिए अपना जीवन दाँव पर लगा सकते हैं तो आप घरों में क्यों बैठे हैं?
@abhijeet_dipke ने देश के युवाओं को ताक़त दी है।
युवाओं को उनका साथ देना चाहिए।
AISA की नेहा भी साथियों के साथ 7 दिन से अनशन पर हैं।
दानिश को आज अस्पताल में भर्ती कराया गया।
युवाओं के संघर्ष को सलाम।
SP को तो हम बात ही नहीं करते DGP को फोन करने के बाद DGP ने बोला!
आई एम डायरेक्टिंग पुलिस पुलिस वहां पर खड़ी थी!
मुझे एक चीज की खुशी है
सब कुछ ऑन कैमरा पकड़ा गया कोई बोले कि वह बीजेपी का नहीं था!
तो हर कोई को उनका नाम और शक्ल सबको पता है!
_Mahua Moitra
His birthday cake can’t be baked with the blood of our children. Don’t let them label you, your only label is “Hindustani”. Don’t give up. Stay true to the cause. Jai Hind.
TMC सांसद @MahuaMoitra CJP प्रोटेस्ट का समर्थन करने जंतर-मंतर पहुंचीं
कहा इन बेशर्म लोगों के सिर पर सत्ता का नशा चढ़ गया है आस-पास क्या हो रहा है वो देख नहीं सकते
मेहनत की कमाई से जिंदगी भर की पूंजी लगाकर लोग कार-बाइक खरीदते हैं, सपने देखते हैं।
लेकिन आज E20 पेट्रोल पंपों से गन्ने juice जैसा पीला पानी निकल रहा है।
इंजन खराब, माइलेज घटने की बात लोग ख़ुद बोल रहे है नई गाड़ियां तक बेकार हो रही हैं।
वही सुप्रीम कोर्ट में सरकार खुद कह रही कि ये ongoing experiment है, नतीजे अगले साल आएंगे।
तो क्या आम आदमी की गाड़ियां सरकार के लिए प्रयोग की लैब Experiment हैं? करोड़ों लोगों की मेहनत की कमाई और सपनों के साथ खिलवाड़ आख़िर किसके लिए ?
इतने सारे आरोप लोग लगा रहे है ! किसी के पास कोई जवाब नहीं है! और है तो हमेशा की तरह चुप्पी !
क्या गुंडागर्दी मची है बंगाल में?
एक सांसद अपने संसदीय क्षेत्र में सुरक्षित नहीं मा. लोकसभा अध्यक्ष @ombirlakota जी को तत्काल इस घटना का संज्ञान लेना चाहिए और अधिकारियों को विशेषाधिकार हनन समिति के समक्ष बुलाना चाहिए।
@MahuaMoitra जी आप इन तानाशाहों से लड़ते रहना इतिहास कायरों का नहीं बहादुरों का लिखा जाता है।