एक बच्चा चला गया...
लेकिन कल फिर वही बहस होगी-
मंदिर-मस्जिद,
हिन्दू-मुस्लिम,
विपक्ष-सत्ता...और मीडिया ढिंढोरा पीटेगी कि "मोदी जी ने ऑनलाइन कोचिंग फ्री कर दी।"- अच्छी पहल है, होनी भी चाहिए।
94,000 सरकारी स्कूल बंद होने की खबरों पर बहस कम हुई,
जो स्कूल बचे हैं, उनमें से कितनों की छतें जर्जर हैं, इस पर बहस और कम हुई...
लेकिन ज़रा Basic Education की भी बात कर लीजिए।
जिस देश में लाखों बच्चे आज भी मज़बूत सरकारी स्कूल, अच्छी लैब, प्रशिक्षित शिक्षक और Skill-based Education से वंचित हों...
जहाँ सरकारी स्कूल बंद होते जाएँ और परिवार महँगी Private School Fees भरने को मजबूर होते जाएँ...वहाँ सिर्फ online Coaching free कर देना शिक्षा सुधार नहीं है।
Hypocrisy की भी एक सीमा होती है।
CJP Protest और सरकार के बीच कम्युनिकेशन गैप पर क्या बोले सीनियर जर्नलिस्ट दिबांग?
पूरी बातचीत यहां देखें -
https://t.co/3HxcPmTVyR
CJP | CJP Protest | Sonam Wangchuk | @Abhinav_Pan | @dibang
'अगर आप टीवी पर दिखाई बात पर विश्वास करते हैं तो आप ग़लत हैं' CJP Protest की कवरेज पर क्या बोले सीनियर जर्नलिस्ट दिबांग?
पूरी बातचीत यहां देखें -
https://t.co/3HxcPmTVyR
CJP | CJP Protest | Sonam Wangchuk | @Abhinav_Pan | @dibang
इतने वर्षों से देश के लाखों युवाओं ने सैकड़ों पेपर लीक झेले।
25 दिनों से छात्र शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे।
क्या सरकार की कोई ज़िम्मेदारी नहीं थी कि वह जवाब देती?
अगर आख़िर में आंदोलन को लाठियों से ही खत्म करना था, तो 25 दिन पहले ही कर देते।
इतने दिनों तक बढ़ने क्यों दिया?
क्या ज़्यादा लोगों को घायल होना था?
क्या देश को ज़्यादा बड़ी पीड़ा देना था?
आज चाहे छात्र घायल हुए हों या पुलिसकर्मी...
इस स्थिति तक बात पहुँचने की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी सरकार की है, कि ऐसे हालात पैदा ही हुए।
देश ऐसे नहीं चलता।
शिक्षा व्यवस्था बचाने की ख़ातिर मध्य प्रदेश से आए एक छात्र को सुनिए और देखिए… मूँगफली के बचे खुचे दाने खाकर जुटा जंतर मंतर पर… जब इस तरह से छात्र जुड़ते हैं तो बात दूर तलक जाती है…
SMS अस्पताल दुर्घटना…...
ब्राह्मण, गजेंद्र सिंह खिंवसर को टार्गेट कर रहे हैं….
राजपूत, भजनलाल शर्मा को टार्गेट कर रहे हैं….
बाक़ी वालो ने सहूलियत के हिसाब से धड़ा पकड़ लिया है…
विपक्ष फ़ोटो सेशन करवा के लौट आया है…
इन सबके बीच पीड़ित कहीं खो से गए हैं…..!!!!
कितना टार्गेट करोगे हमें? कब तक?
परसों रात जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में हुए अग्निकांड के बाद चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने जिस गैर जिम्मेदारी का परिचय दिया, 17 घंटे बाद तक वे अस्पताल नहीं पहुंच पाए, उसे देखते हुए मैंने और कुछ साथी पत्रकारों ने उनसे इस्तीफा देने की मांग की थी ।
इस्तीफा नहीं देने की स्थिति में मुख्यमंत्री भजनलाल से मांग की कि अगर वे चिकित्सा मंत्री का इस्तीफा नहीं ले पा रहे हैं तो खुद इस्तीफा दे दें।
हमने यह आवाज भी उठाई कि प्रधानमंत्री की रैली में एक मामूली सी तकनीकी गलती के कारण भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी को एपीओ कर दिया गया तो इतनी बड़ी लापरवाही का दंड किसी अधिकारी को क्यों नहीं मिल सकता?
इसे लेकर आज सुबह से ही देख रहा हूं कि अनेक लोग हमारे ऊपर जातिवाद का आरोप लगा रहे हैं। हमारा दोष सिर्फ यह है कि हम एक साइड खड़े नहीं हो सकते। सही को सही और ग़लत को ग़लत कहना हमारा काम है। चिकित्सा मंत्री जी ने 17 घंटे बाद घटनास्थल पर पहुंचकर गैर जिम्मेदारी और संवेदनहीनता का परिचय दिया था। इस तथ्य को जो झुठलाए, वह और भी बड़ा संवेदनहीन।
हमारी कोशिश रहती है कि सरकार में या विपक्ष में जो भी अच्छा काम कर रहा है उसकी तारीफ करें और जो भी लापरवाही कर रहा है, उसको आईना दिखाएं।
हालांकि आपके टार्गेट करने से हमारे कमिटमेंट पर बाल भर भी फर्क नहीं पड़ने वाला है, यह बात भी आप लोग बहुत ही अच्छे से जानते हैं। लेकिन इतना याद जरूर रखिएगा, लोकतंत्र में कुछ स्वतंत्र आवाजें बेहद जरूरी होती हैं। ये आवाजें आपकी मर्जी के हिसाब से तो नहीं ही उठेंगी।
जय हिन्द
मंत्री और अफसरों को कौन हटाएगा...
SMS हॉस्पिटल अग्निकांड में हटाने की कार्रवाई चिकित्सा मंत्री और विभाग के बड़े अफसरों पर होनी चाहिए थी जबकि सरकार ने अस्पताल अधीक्षक और ट्रोमा सेंटर प्रभारी को हटाया है। इस मामले में चिकित्सा मंत्री ने जिस संवेदनहीनता का परिचय दिया है और अफसरों ने जिस तरह अनदेखी की है, उसके बाद वे अपने पदों पर रहने के हकदार ही नहीं हैं।
अगर मंत्री जी किसी नैतिक आधार को मानते होते तो अभी तक इस्तीफा दे चुके होते। सरकार को कोई कड़ा संदेश देना होता तो अब तक चिकित्सा विभाग के बड़े अफसर को हटा चुकी होती लेकिन जिस प्रकार किसी जिले में कानून व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ने पर कांस्टेबल को निलंबित करके जिम्मेदारी पूरी कर ली जाती है सवाई मानसिंह अस्पताल मामले में सरकार ने वैसा ही करके दिखाया है।
इस अग्निकांड के बाद चिकित्सा मंत्री जी जिस मुस्तैदी के साथ खींवसर से अस्पताल तक पहुंचे हैं, वह आने वाले लंबे समय तक याद किया जाएगा। इस सरकार का जैसा मजाक बनाया है, वैसा अभी तक कोई नहीं बन पाया।
भजनलाल शर्मा की सरकार में जिस प्रकार का ढीलापन, पतलापन, निकम्मापन और जड़ता घर कर गई है, उसे थोड़ा सा ठीक करने और कड़ा संदेश देने का यह उचित अवसर है। यह मानकर चलिए कि अगर अभी कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो लोगों का भरोसा सरकार से स्थाई रूप से उठ जाएगा।
बड़े मामलों में छोटी-मोटी कार्रवाई के संदेश भी छोटे-मोटे ही जाते हैं।
@BhajanlalBjp
आपको क्या लगता है?
जब प्रधानमंत्री की सभा में एक मामूली सी टेक्निकल एरर के लिए एक सीनियर आईएएस अफसर को तत्काल एपीओ किया जा सकता है तो नकली दवाओं से अनेक बच्चों की मौत और अग्निकांड में आठ लोगों की जान जाने पर किसी बड़े अफसर पर आंच क्यों नहीं आनी चाहिए?
भजनलाल शर्मा जी ने ये कैसे मानदंड बनाए हैं?
#sms_hospital #एसएमएस_अस्पताल
निर्दलीय विधायक सबसे पहले मौके पर पहुंचे, विपक्ष भी सुबह से ही वहां मौजूद रहा…
लेकिन काश, जिन्हें जनता ने जिम्मेदारी दी है, वे भी समय पर पहुंचते।
#SMSHospitalFire
भांकरोटा का टैंकर कांड अब भी याद है — 19 जिंदगियाँ जलकर खाक हुईं,
फिर झालावाड़ में स्कूल की छत गिरी और मासूमों की चीखें दीवारों में गुम हो गईं।
सिरप कांड में 4 बच्चों की मौत के बाद कोई जिम्मेदारी तय नहीं,
अब SMS में कई मरीज जो जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे थे लेकिन लापरवाही से जिन्दा जल गए, आखिर कब तक?
हादसे बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारी शून्य!
ये मौतें आंकड़े नहीं हैं, ये उस सिस्टम की लापरवाही की लकीरें हैं जो हर बार “जांच होगी” कहकर सो जाता है।
राजस्थान रो रहा हैं...
आपकी संवेदनाओं के लिए सभी 8 मृतकों की ओर से हम 8 करोड़ राजस्थान के लोग आभार व्यक्त करते हैं।
आपके खींवसर से जयपुर पहुंचने से पहले पहले जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है और आपके जयपुर पहुंचने तक संभवत: जांच भी पूरी हो जाएगी।
आप व्यर्थ ही जयपुर तक आने का कष्ट कर रहे हैं। यहां समस्त व्यवस्थाएं संभालने के लिए पूरा सिस्टम मौजूद है।
पुनः आभार मंत्री महोदय
यह संवेदनशीलता है सरकार की?
प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में आग लगने से आठ लोग मारे जाएं और चिकित्सा विभाग के मंत्री घटना के 12 घंटे बाद भी खींवसर से जयपुर तक नहीं पहुंच पाएं, इसे क्या कहेंगे?
पूर्व के समस्त घटनाक्रमों के अनुभव के आधार पर पूरा राजस्थान जानता है कि घटना घट चुकी है, लोग मारे जा चुके हैं। अब होना जाना कुछ भी नहीं है। मुख्यमंत्री जी ने कमेटी बना दी है। पता नहीं कब तक जांच करेगी और कब तक रिपोर्ट आएगी और रिपोर्ट आने तक लोग घटना को भूल भी जाएंगे लेकिन संवेदनशीलता वह होती है कि आप जितनी जल्दी हो सके उतना जल्दी मौके पर मौजूद हों।
अगर आप इतना सा कष्ट भी नहीं कर सकते तो फिर आपके होने और नहीं होने का कोई अर्थ नहीं रह जाता है।
जहरीला कफ सिरप बनाने वाले ,बेचने वाले और उसकी सरकारी खरीद करने वाले अधिकारियों--- इन तीनों के लिए कड़ा दंड निर्धारित होना चाहिए ---- दंड ऐसा होना चाहिए जिसका भय कमसे कम कुछ सालों तक तो कायम रहे ----