حضرت محدثِ کبیر علامہ ضیاء المصطفیٰ صاحب قبلہ کے لیے دعائے صحت کی اپیل
اسیرِ مفتیِ اعظم محمد سعید نوری نے اہلِ سنت سے خصوصی دعاؤں کی اپیل کی
ممبئی: ۱۳؍ اکتوبر۔ رضا اکیڈمی کے بانی و سربراہ، اسیرِ مفتیِ اعظم الحاج محمد سعید نوری نے شہزادۂ صدر الشریعہ، خلیفۂ حضور مفتیِ اعظم ، حضرت علامہ مولانا ضیاء المصطفیٰ صاحب قبلہ دامت برکاتہم العالیہ کی علالت پر گہری تشویش کا اظہار کرتے ہوئے تمام مسلمانوں بالخصوص علمائے کرام، ائمہ مساجد، مشائخ عظام اور وابستگانِ اہلِ سنت سے حضرت کی جلد صحت یابی کے لیے خصوصی دعاؤں کی اپیل کی ہے۔
انہوں نے کہا کہ حضرت محدثِ کبیر علامہ ضیاء المصطفیٰ صاحب قبلہ اس وقت مئو کے ایک اسپتال میں زیرِ علاج ہیں۔ آپ کی دینی، علمی اور روحانی خدمات اہلِ سنت کے لیے ایک عظیم سرمایہ ہیں۔ آپ کی ذاتِ گرامی سے لاکھوں عقیدت مندوں کی وابستگیاں ہیں اور آپ کی صحت و عافیت ہم سب کے لیے باعثِ مسرت و اطمینان ہے۔
اسیرِ مفتیِ اعظم محمد سعید نوری نے بارگاہِ رب العزت میں دعا کرتے ہوئے کہا کہ اللہ تعالیٰ اپنے پیارے حبیب، رحمتِ عالم حضرت محمد مصطفیٰ ﷺ کے صدقے میں حضرت محدثِ کبیر کو صحتِ کاملہ، عاجلہ عطا فرمائے، تمام ظاہری و باطنی تکالیف سے نجات دے، اور آپ کو جلد صحت یاب فرما کر دوبارہ دینی و علمی خدمات انجام دینے کی طاقت عطا فرمائے۔
انہوں نے مزید دعا کی کہ اللہ تعالیٰ حضرت کا سایۂ عاطفت تادیر اہلِ سنت و جماعت کے سروں پر قائم و دائم رکھے اور آپ کی عمر، علم و عمل اور فیوض و برکات میں خوب اضافہ فرمائے۔
آخر میں اسیرِ مفتیِ اعظم محمد سعید نوری نے تمام اہلِ سنت سے گزارش کی کہ وہ اپنی خصوصی دعاؤں میں حضرت محدثِ کبیر کو یاد رکھیں اور بارگاہِ الٰہی میں آپ کی جلد صحت یابی کے لیے دعا کریں۔
دعا ہے: یا اللہ! حضرت محدثِ کبیر کو صحتِ کاملہ عطا فرما، اپنے حفظ و امان میں رکھ اور اہلِ سنت کو آپ کے علم و فیض سے طویل عرصے تک مستفید فرماتا رہ۔ آمین بجاہِ سید المرسلین ﷺ۔
فقط
محمد عارف رضوی
سکریٹری رضا اکیڈمی
नफ़रत फैलाने वालों ने हमेशा “जिहाद” शब्द को गलत तरीके से पेश किया,
जबकि सच यह है कि इसका असली मतलब बुराई, अन्याय और अपने नफ़्स के खिलाफ संघर्ष है।
सच जानिए, झूठ नहीं।
#IslamicFactCheck#TruthOverMyth#StopFakePropaganda
“This is how the right defends the rights of Iranian women: by celebrating the murder of 160 girls.”
This Spanish politician called out the hypocrisy in using feminist rhetoric to support the U.S. and Israeli bombing of Iran.
कल्पना करिए की "यहूदी जेफ्री एप्सटीन" ईरान का मुस्लिम होता और इसमें डोनाल्ड ट्रंप, बिल गेट्स, प्रिंस एंड्रयू, जेफ बेज़ोस की जगह "सद्दाम हुसैन, मोअम्मर गद्दाफी, एमबीएस" का नाम होता...
ये सारी घिनौनी हरकतें करते हुए इन लोगों के वीडियो और फोटो होते तो क्या होता..!!
भारतीय मीडिया समेत पूरी दुनिया का मीडिया नंगा नाच रहा होता, हर टीवी स्टूडियो मे दाढ़ी वाले बैठे होते जिनसे जवाब मांगा जा रहा होता।
दुनिया के दो अरब मुसलमानों को इसका जिम्मेदार ठहरा दिया गया होता, इस्लाम और कुरआन पर चर्चाएं हो रही होतीं।
अल्लाह ने जालिमों को जालिमों के जरिए ही सरेआम जलील करवा दिया। #EpsteinFiles
अतहर हुसैन के परिजनों की सिसकियां सिस्टम से सवाल कर रही हैं…
कानून कहां था जब भीड़ ने फैसला सुना दिया?
दोषियों को सख़्त सज़ा मिले तभी ऐसी हत्याओं पर लगाम लगेगी। #JusticeForAtharHussain
दोस्तों आप लोग 15 मिनट के लिए ट्रेंड पर आ जाओ। कोई आपका साथ देने के लिए नहीं आयेगा।
कांग्रेस अपने लिए कैंपेन करवा रही है उसके नेता भी आपका साथ देने नहीं आयेंगे। खुद ट्रेंड करवाओ इसको। #FixUMEEDPortal#SaveWaqf
जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, 67 मुस्लिम एमएलए जीत कर आये थे, पहली बार आज़ादी के बाद इतने मुसलमान जीते थे, मुज़फ्फरनगर दंगा हुआ, बड़ी तादाद में लोग मारे गए, औरतों के साथ गैंग रेप हुए, एक भी एमएलए उस वक़्त वहाँ नहीं गया, सैफई में जश्न जारी रहा, आज़म खान ने तो ध्यान ही नहीं दिया, ऐसे बयान दिए जैसे बिलावजह इस पर बात की जा रही हो. सत्तर हज़ार से एक लाख मुसलमान माइग्रेट कर गए, गाँव खाली हो गए
हद तो तब हुई जब इसके बाद सपा सरकार ने ये कहा कि रिलीफ कैम्प बंद करो, इससे बदनामी हो रही है, असेम्ब्ली में किसने आवाज़ उठाई? पार्टी के गुलाम और पार्टी लाइन से बंधे लोग जो बयान देने और स्पॉट पर जाने से डरते हैं, जो स्टेटमेंट इशू नहीं कर पाते, लिखा हुआ बयान नहीं दे पाते, ऐसी तादाद से क्या फायदा? लानत है उन पर जिनको कुछ याद नहीं. जाओ अगर तादाद पसंद है तो जाओ और तादाद चाहिए तो और यज़ीद, नमरूद या फ़िरऔन के हामी और पैरोकार बन जाओ, ऐसी तादाद किस काम की, कि आप खड़े हो कर ऐवान में अपनी बात न कह पाएं, पार्टी आपको बोलने न दे, बोलना चाहें तो इजाज़त न मिले, और ये मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी नहीं अखिलेश की समाजवादी पार्टी थी जिसने मैनफेस्टो में मुसलमानों से जो अहम् वादे किये थे, पांच सालों में उनमें से ज़्यादातर पूरे करना तो दूर, उनकी तरफ देखा भी नहीं और याद दिलाने पर भी मभी जवाब नहीं दिया
--By Shams Ur Rehman Alavi
चार आदमी हों, मगर असेम्ब्ली में खड़े हो कर बोल तो पाएं, ये नहीं कि पार्टी ने इजाज़त नहीं दी, हिफ्जुर्रहमान साहब तो आज़ादी के बाद भी हाउज़ में मध्य प्रदेश के सी एम और अपनी पार्टी के रोल पर इतने सख्त हो कर बोल लेते थे, वह तो बहुत मुश्किल हालात थे, तुम से न बोला जाए, ने मेमोरेंडम दिया जाए, न कभी दिक़्क़त हो तो आकर खड़े हो, जहांगीरपुरी में बृंदा करात ने बुलडोज़र रोक दिया था, हम एहसान फरामोश नहीं हैं, हम कोई एहसान नहीं भूलते.
कोई कम्युनिटी इतना एक तरफ़ा वोट किसी पार्टी को नहीं देती, मगर इसके बाद तुमको नाम लेने और साथ खड़े होने में दिक़्क़त है. तुम अपने लिए नहीं लड़ सकते, तुम हमारे लिए क्या लड़ेगा. जब वोट चोरी कहते हो तो घेराव छोडो, क्या किसी दफ्तर तक मार्च या बड़े शान्तिपूर्ण मगर अहम धरने काका एलान नहीं कर सकते थे. जो खुद के साथ सिंसियर न हों, वह किसी और के साथ क्या सिंसियर होंगे.
[Shams Ur Rehman Alavi]
शरद पवार को ईडी ने बुलाया था, शरद पवार ने कहा था, 'हम आएंगे, अपने समर्थकों के साथ'. फ़ौरन एजेंसी ने कहा, नहीं आप मत आइये, सब को पता था पवार बुज़ुर्ग हैं मगर 5 लाख आदमी ला सकते हैं, मुंबई में इंसानों का सैलाब आ जाएगा, ये होती है सियासत और ताक़त.
जो सड़क पर इन्फ़्लुएनस या कंट्रोल रखता है, वह पावर रखता है. आप के कहने पर एक लाख लोग आ सकते हैं, मगर आपके हर विंग, यूथ कांग्रेस से महिला कांग्रेस, एनएसयूआई से ले कर किसान कांग्रेस और दर्जनों सेक्शन हैं, किस में जज़्बा या इंट्रेस्ट है. बजरंग दल स्ट्रीट कंट्रोल करता है मुल्क की. बगैर एक एमएलए की पार्टी माणसे आज भी किसी भी दिन देश की आर्थिक राजधानी में बंद करवा कर काम काज ठप करवा सकती है, आप क्या हैं? इंटेरवीन करना तो दूर, साथ खड़े नहीं होते, किसी के साथ क्या, जब आप अपने ही साथ नहीं हैं.
ऊपर से आपके छुटभय्ये नेता आ कर टॉन्ट करते हैं कि बीजेपी का झेलना, मतलब तुम्हें भी लुत्फ़ आ रहा है, हमें जो झेलना है वह झेल रहे हैं और झेलेंगे मगर जब आपको कोई सॉलिडरेटी नहीं, तो फिर एहसान किस बात का?
जो ग्रुप पांच हज़ार वोट भी एक तरफ़ा देते हैं, उनके लिए भी पार्टी बोलती है, नेता काम करता है, आ कर खड़ा होता है, आप तो पचास हज़ार से दो लाख वोट एक एक असेम्ब्ली में लेते हैं और लोक सभा में हमारे पांच लाख वोट ले कर भी आपका पेट नहीं भरता
और उल्टा आपके वह लड़के जो कल तक कॉलेज में कोई झंडा उठाये रहते थे, जो कार्पोरेटर का इलेक्शन नहीं जीत सकते, वह आपके बड़े नेताओं के सलाहकार बन कर उल्टा हम पर धाक जमाते हैं जैसे बड़ा एहसान किया हो आपने.
[@indscribe]
I see a lot of people talking about fall in representation of Muslims in Assembly in one state or other.
Representation is important but legislators who never open mouth on any issue, don't speak up, let alone intervene, don't fall in category of representation.
When Akhilesh led SP ruled UP, the state had more than 67 Muslim MLAs but Muzaffarnagar riots--mass killings and gang rapes occurred, how many of them were bothered?
Who intervened, who issued statement or who visited the place. The 'mahotsava' continued. Tens of thousands migrated.
SP was upset that there were rehabilitation camps as they felt it was affecting party image. Azam Khan's role was pathetic and he tried to divert attention from it, hush it up. SP's Muslim MLAs were mute even though mass rapes took place.
The MLAs should raise issues of public, should put pressure and hold regime to account. Its not that if you are in government, you will not speak.
Speak for harmony and speak against injustice. One riot affects thousands. Go for quality, not quantity. Ensure that the leader you elect or vote for, will stand up in Assembly and ask questions.
If there is illegal action, at least, a few party workers will come and stand with you in your town or city. Not like @INCIndia that has leaders who feel that they are doing so much for Muslims that it is affecting their Hindu vote.
Reality is that the sole community that gives en bloc vote to Congress is Muslim and still party is totally apathetic.
Stand in front of bulldozer like Brinda Karat did or take stand against UAPA, open mouth for Gulafshan Fatima, wipe tears of Najeeb's mother. No, they will not do anything.
Instead, avoid taking the name of a Muslim, either Siddiq Kappan or any other man wronged. However, will go to contest from a 'Muslim seat' to win election, but remain a royal and feel that they have been doing a lot for Muslims.
We know that section of society is more communal than even the communal parties. This politics of hate for decades, has brought this situation.
But we don't expect anything special. We just hope that you speak for justice, stand with us, show some degree of solidarity. Nothing. We get 'Zero' support for a community that gives 70%-90% votes to Congress.
Others have Bajrang Dal to go to police station and support even the offender, we don't have any party cadre that comes when need someone to stand with us, on the street. You can't stand on your own issue on the street--can't gherao the office or launch a campaign over vote chori, except press conference, you can't stand for us, ever.
भदोही के बुनकरों और कालीन उद्योग के साथ किया गया अन्याय असहनीय है!
कालीन एक्सपो के मेले के उद्घाटन के अवसर पर भदोही के बुनकर, मज़दूर, छोटे और मझोले निर्यातकों को यह उम्मीद थी कि संकट की इस घड़ी में माननीय मुख्यमंत्री जी जब दूसरी बार मेले का उद्घाटन करने आ रहे हैं, तो वे भदोही के कालीन उद्योग के लिए किसी राहत पैकेज या ठोस सहायता योजना की घोषणा ज़रूर करेंगे।
लेकिन अफसोस की बात है कि डबल इंजन की सरकार ने भदोही के बुनकरों की आवाज़ को एक बार फिर नज़रअंदाज़ कर दिया। मुख्यमंत्री जी ने कोई भी राहत पैकेज या सहायता योजना घोषित नहीं की — यह भदोही के लाखों परिवारों की उम्मीदों पर गहरा आघात है।
यह स्पष्ट हो गया है कि मौजूदा सरकार को बुनकरों, मज़दूरों और निर्यातकों की पीड़ा से कोई सरोकार नहीं है। संकट की इस घड़ी में जब उद्योग ध्वस्ति के कगार पर है, तब सरकार मूक दर्शक बनी बैठी है।
भदोही के लोगों ने हमेशा मेहनत, कला और ईमानदारी से देश का नाम रोशन किया है — लेकिन आज उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। यह सरकार विकास की नहीं, उपेक्षा की सरकार बन चुकी है।
2027 में जब पी.डी.ए. की सरकार बनेगी, तो भदोही के कालीन उद्योग की हर जायज़ माँग को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। बुनकरों को सम्मान, उद्योग को संजीवनी और भदोही को उसका खोया गौरव वापस दिलाना हमारा पहला वादा है।
श्री अभिमन्यु मांगलिक, पुलिस अधीक्षक भदोही के निर्देशन में अपराध व अपराधियों पर अंकुश एवं प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने हेतु चलाए जा रहे अभियान के क्रम में तथा श्री शुभम अग्रवाल, अपर पुलिस अधीक्षक भदोही के कुशल पर्यवेक्षण में दिनांक 07.10.2025 समय रात्रि बजें थाना भदोही क्षेत्र अंतर्गत थाना भदोही पुलिस टीम एवं एसओजी टीम की संयुक्त टीम द्वारा संदिग्ध व्यक्ति, वस्तु व वाहनों की चेकिंग के दौरान जौनपुर की तरफ से आ रहे थाना भदोही क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रड़ई में फोर व्हीलर वाहन सवार 03 अभियुक्तों को पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है।
उक्त गिरफ्तारी/बरामदगी के सम्बन्ध में श्री शुभम अग्रवाल, अपर पुलिस अधीक्षक भदोही की बाईट~
@Uppolice@adgzonevaranasi@digmirzapur