PM Narendra Modi : India celebrated its Republic Day on January 26 last year. Twenty-six... 2 plus 6 equals 8, and Indonesian President Prabowo Subianto's birthday is on the 17th, 1 plus 7 also equals 8. Same same.
किसी केंद्रीय मंत्री का सारा निजी स्टाफ अचानक हटा दिया जाये तो ये असाधारण घटना है।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के निजी सचिव व दो अति निजी सचिवों को एक साथ हटाया गया है।
ऐसा कहा जा रहा आदेश उपर से आये थे और तुरंत पद से हटाने को कहा गया था।
राम मंदिर के चंदे पर कोहराम मचा है।इथेनॉल पर हंगामा है।पेपर लीक पर देशभर में प्रदर्शन हो रहे है और गर्मी से जनता बेहाल है।
ऐसे में प्रधानसेवक फिर कई दिन की विदेश यात्रा पर निकले हैं। सवा महीने के भीतर ये उनकी चौथी विदेश यात्रा है।
वैसे आस्ट्रेलिया, खासकर न्यूजीलैंड में 👇इस वक्त मौसम बेहद दिलकश है।सच तो ये है इंडोनेशिया में भी तापमान 28-29 डिग्री से ज्यादा नहीं है।
उम्मीद है इस बार भी कई अवार्ड लेकर प्रधानसेवक स्वदेश लौटेंगे।
यह फैसला नहीं, जस्टिस जामदार ने लोकतंत्र को हिम्मत देने वाली आवाज़ दी है!
जब आम आदमी डरने लगे कि सरकार से सवाल पूछने पर मुक़दमा हो जाएगा, नारे लगाने पर जिला बदर कर दिया जाएगा और विरोध करने पर अपराधी बना दिया जाएगा, तब लोकतंत्र कमजोर होता चला जाता है. ऐसे समय में अदालत से उठी एक आवाज़ करोड़ों लोगों को यह भरोसा दिलाती है कि संविधान अभी ज़िंदा है.
बॉम्बे हाई कोर्ट में जस्टिस माधव जामदार की टिप्पणियाँ इसी भरोसे को मज़बूत करती हैं. उन्होंने एक मामले की सुनवाई के दौरान सीधा सवाल पूछा कि क्या नागरिक विरोध भी नहीं कर सकते? क्या सरकार की आलोचना करना अपराध है? यह सवाल किसी एक पार्टी या एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि हर भारतीय नागरिक के अधिकार का सवाल है.
लोकतंत्र का मतलब यह नहीं कि जनता सिर्फ़ पाँच साल में एक बार वोट डाले और फिर चुप बैठ जाए. लोकतंत्र का असल मतलब है, जनता सवाल पूछे और सरकार जवाब दे. जनता विरोध करे, सत्ता उसे सुने. जनता नाराज़गी जताए तो उसे देशद्रोही या अपराधी न बना दिया जाए.
जस्टिस जामदार की टिप्पणी कि ‘विरोध करना नागरिकों का मूल अधिकार है’ संविधान की मूल भावना को याद दिलाती है. अगर कोई व्यक्ति शांतिपूर्ण तरीके से ‘सरकार मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाता है, तो यह देश विरोध नहीं बल्कि लोकतंत्र में असहमति की अभिव्यक्ति है. याद रखिए सरकारें स्थायी नहीं होतीं, लेकिन बाबा साहेब के संविधान से मिले नागरिकों के अधिकार स्थायी होते हैं.
जस्टिस जामदार ने ये कहा कि एक 10 साल के बच्चे की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई, लेकिन विधानसभा में चर्चा जनता के दुख-दर्द पर नहीं, बल्कि कौन नेता किस पार्टी में गया, इस पर हो रही थी. उन्होंने वर्तमान राजनीतिक हालत का असल आईना दिखाते हुए ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ और ‘वॉशिंग मशीन’ जैसी टिप्पणियों के ज़रिए उस राजनीतिक संस्कृति पर भी चोट की, जिसमें दल बदलते ही कई नेताओं पर लगे आरोप अचानक हल्के पड़ते दिखाई देते हैं.
यह फैसला हो या इस दौरान की गई टिप्पणियां, इसका सबसे बड़ा संदेश ‘डर’ के खिलाफ़ है. संदेश यह है कि नागरिक गुलाम नहीं हैं. वे सवाल पूछ सकते हैं. वे विरोध कर सकते हैं. वे सरकार की आलोचना कर सकते हैं. और सबसे जरूरी याद रखने वाली बात कि ये संविधान प्रदत्त अधिकार हैं. आज देश के युवाओं, छात्रों, बेरोज़गारों, पेपर लीक से परेशान अभ्यर्थियों और आम नागरिकों को इस बात की ज़रूरत है कि वे अपने अधिकारों को समझें. लोकतंत्र में चुप्पी नहीं, जागरूकता सबसे बड़ी ताकत होती है.
याद रखिए, लोकतंत्र में सरकार मालिक नहीं होती, जनता ही मालिक होती है.
जब जब अदालत इस तरह से नागरिकों के अधिकारों की याद दिलाती है, तो वह सिर्फ़ कानून नहीं पढ़ रही होती बल्कि लोकतंत्र की रीढ़ को मज़बूत कर रही होती है. ये केवल एक टिप्पणी नहीं, बल्कि उन करोड़ों भारतीयों के लिए हिम्मत बढ़ाने वाली आवाज़ है जो अब भी मानते हैं कि संविधान की ताकत किसी भी सत्ता से बड़ी है.
यह पिछले 12 वर्षों के इतिहास में किसी भी न्यायालय द्वारा दिया गया अकेला न्याय है जिसमें संविधान, देश और आम आदमी के मौलिक अधिकारों की विजय हुई है। यह बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस माधव जामदार हैं। इस विद्वान न्यायाधीश ने अपने एक फैसले में जो कहा है वो नजीर है, नजीर रहेगीं। इनका फैसला बीजेपी और मोदी एवं शाह की आँखों के किरचों की तरह चुभेगी।
दरअसल सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी के खिलाफ एक साल के लिए जिला बदर आदेश पारित किया था। सईद केंद्र सरकार के विभिन्न फैसलों जैसे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के खिलाफ मोर्चे और धरने आयोजित कर रहे थे
जस्टिस जामदार इस आदेश पर आगबबूला हो गए। उन्होंने कहा "यह क्या है? सभी नागरिकों को भारतीय सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है। वे प्रदर्शन नहीं कर सकते, आंदोलन नहीं कर सकते ।यह सब क्या है? अब इतने सारे पेपर लीक हो रहे हैं। अगर लोग विरोध करें तो आप केस थोप देंगे। यह क्या है? नागरिकों का प्रदर्शन करना उनका अधिकार है।
याचिकाकर्ता ने तो सिर्फ 'बीजेपी सरकार मुर्दाबाद', 'अमित शाह मुर्दाबाद' जैसे नारे लगाए.।नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? ऐसे नारों के लिए जिला बदर आदेश क्यों?"
जस्टिस जामदार ने आगे मौखिक रूप से टिप्पणी की कि पुलिस नागरिकों को सिर्फ इसलिए बाहर नहीं कर सकती क्योंकि उन्होंने सरकार के फैसलों का विरोध किया है।"पुलिस मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की सेवक नहीं है, वे जनसेवक हैं। मैं आपके अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगाऊंगा।"
जस्टिस जामदार ने महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे "हॉर्स ट्रेडिंग" पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा "कल परसों एक 10 साल के बच्चे की दुर्घटना में मौत हो गई और राज्य विधानसभा में क्या चर्चा हो रही थी कि प्रेसिडिंग ऑफिसर कैसे चुना जाए और वह एक पार्टी से दूसरी पार्टी में कैसे शिफ्ट हो गया।यह क्या है? वैसे भी पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है। आपके पास कुछ FIRs हैं।केस बदलने पर विचार करें, वॉशिंग मशीन है।" और सईद अहमद का जिला बदर रद्द कर दिया गया।
सैल्यूट जस्टिस माधव, सैल्यूट बॉम्बे हाईकोर्ट
" iPhone is against the culture of India & hurts Hindu sentiments because SIRI gives replies to ' "Assalamualaikum" but remains silent on "Jai Shri Ram"
Imagine your faith getting hurt coz AI didn't say JAI Shri Ram
The level of inferiority complex 😭
क्या तरक्की की है Instagram के PM @raghav_chadha .Shameful . बीजेपी को गुंडों की पार्टी बताना- फिर उसी गर्त में खुद को दफ्न कर लेना ! What a disappointment!
कितनी अच्छी बात है। डिमोलिशन करने वाले कर्मचारियों को भी भूख लगती है। जब कानून व्यवस्था की पिकनिक मन रही है तो काजू रोल और कचौरी क्यों नहीं बटनी चाहिए। बहुत अच्छा हुआ। बल्कि ब्राउनी और वेनिला का कॉम्बो भी बंटना चाहिए था। इतनी गर्मी है। जब सब ख़त्म होना है तो खाते पीते ख़त्म किया जाए।
Blud stood up during a rehearsed band match in Seychelles 🇸🇨 to show deshbhakti
But didn’t meet the families of the soldiers martyred during Operation Sindoor back home in India.
Make it make sense.
बीजेपी नेता राम माधव कोलंबो में पाकिस्तानियों से ‘प्राइवेट मीटिंग’ कर आएं तो कोई बात नहीं…
…हंगामा तभी मचता जब पाकिस्तान हाई कमीशन में मणिशंकर अय्यर जैसे नेता पब्लिक फ़ंक्शन में चले जाएं!
राजीव कुमार याद हैं ना, मुख्य चुनाव आयुक्त थे. प्रेस कॉन्फ़्रेंस में शेर सुनाते थे. चर्चा हो रही थी कि कहाँ चले गए? अब वो HDFC बैंक के नए चेयरमैन होंगे. इससे पहले अतानु चक्रवर्ती ने बैंक के कामकाज पर सवाल उठाते हुए इस्तीफ़ा दे दिया था. राजीव कुमार IAS रह चुके हैं. वित्त मंत्रालय में काम कर चुके हैं. अब देश की सबसे बड़ी प्राइवेट बैंक के चेयरमैन होंगे.
आज विदेश मंत्रालय ने औपचारिक रूप से स्वीकार लिया कि कुछ लोगों ने “निजी तौर “ पर पाकिस्तान डेलीगेशन से मुलाक़ात की। इसे सरकारी प्रयास नहीं माना जाए। जिन लोगों ने मुलाक़ात की उनमें बीजेपी नेता भी शामिल थे। बाक़ी बीजेपी के करीबी लोग इसमें थे। कोई ग़लत नहीं या। सामान्य प्रकिया है। होना भी चाहिए।
बस अब यहाँ सवाल है कि अगर कोई निजी तौर पर पाकिस्तानी डेलीगेशन से मिल रहा है,पार्टी कर रहा है तो इसका कहीं गुस्सा टीवी चैनल पर दिखा?
अब यही सोच कर देखिए कि किसी विपक्षी नेता के मित्र के ससुर का समधी का मामा भी ऐसे बातचीत/पार्टी में दिख जाता तो पूरी विपक्ष को पाकिस्तानी बुलाकर अंतहीन टीवी डिबेट हो रहे होते। तमाम न्यूज़ एजेंसी के कैमरा उन सभी लोगों के घर के हर छेद में लग गए होते जो ऐसी मीटिंग में शामिल हुए होते।
चाहे धर्म के नाम पर करोड़ों के चढ़ावा घोटाला हो या राष्ट्रवाद के नाम पर पाकिस्तान के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाना,यह कुछ “खास” लोगों के लिए मानो आरक्षित कर दिया गया है!