@iimcomic तीन दिवस तक पंथ मांगते रघुपति सिंधु किनारे,
बैठे पढ़ते रहे छंद अनुनय के प्यारे-प्यारे।उत्तर में जब एक नाद भी उठा नहीं सागर से,
उठी अधीर धधक पौरुष की आग राम के शर से।
सिंधु देह धर त्राहि-त्राहि करता आ गिरा शरण में,
चरण पूज दासता ग्रहण की,
बंधा मूढ़ बंधन में।
@ashutoshjourno अभी कुछ दिन पहले एक दला पाकिस्तानी घोषित कर रहा था उस टाइम ga and में बत्ती डाल कर सो रहे थे क्या? साले सब एक ही बार में सियार की तरह हुआं हुआं कर रहे हो कि अगला no न जाये। और चूतिये एेसा क्यों लगता है तुमलोगों को की जनता के दिमाग नहीं है कुछ समझ नहीं सकती खुद से।we are watching
@TheCipherDesk@ABHISHEKJOURNO2 Fir wahi baat sarkar kyu hai? isliye to ki koi galat na kare aur kre to saza mile? Fir hum kyu research kare aur agar jis din kar lenge us din sarkar palat denge. Aur rahi tumhari baat kya hi bole yrr hamare yaha ek kahawat hai यीरवो मीठ भतरो मीठ
@GyanP1990 "लगेगी आग तो आयेगा तुम्हारा भी घर जद मे
केवल तुम्हारी विपरीत विचारधारा वालों का घर थोड़ी है"
- इतने तूफ़ान गुज़रे हैं मेरी ज़िंदगी से,
कि अब सन्नाटों से भी डर नहीं लगता।