बसपा की रैली को लेकर एक रिपोर्टर ने BJP पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह से सवाल पूछा तो सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि बसपा जब भी रैली करती हैं तब उनकी रैली ऐसी होती हैं क्योंकि उनके पास समर्पित कार्यकर्ता ���ैं, उनके पास कैडर हैं और मजबूत सं��ठन हैं अगर बसपा चाहे तो इससे भी बड़ी रैली कर सकती हैं।
बीजेपी के लोगों को अच्छे से मालूम है कि बसपा की ताकत क्या है और क्या कर सकती हैं बस यही ताकत बहुजन समाज के लोग समझ जाएँ तो समझ लीजिए उसी दिन बीजेपी बाहर का रास्ता ढूँढ लेगी।
फैलाके नूर चार सुखावर चला गया
बहुजन की राजनीति का महवर चला गया
औहदे सजाएं थाल में दुनिया खड़ी रही
ठुकरा के तख्तोताज कलंदर चला गया
देखो मिसाल बनगई साहब की तिसन्नगी
मायूस होके दर से समन्दर चला गया
#manyavar#kanshiram
His own party unleashed the dog called the CBI to bark at BSP’s elephant before the 2012 UP Assembly election, trapping several BSP leaders in false cases. Two years later, in the 2014 Lok Sabha election, a BJP with just 10 members in Parliament won 73 seats in UP. We have a BJP government led by Modi today only because of him and his Congress party.
“श्री अमिताभ बच्चन जी” ने
KBC में पूछा ‘परम आदरणीय बहन कुo मायावती जी’ के जीवन के बारे में 6,40000 का सवाल।
अगर ये ‘कल्पना सिंह’ नाम की शिक्षिका थोड़ा बहुत भी ‘भारत की महानायिका,बहुजन समाज की जिन्दा देवी बहनजी” के बारे में पढ़ा होता तो 6‚40000 ना गबाने पड़ते।
सुनिए
देश में जाति के आधार पर सदियों से तोड़े व पछाड़े गये ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के करोड़ों दलितों, आदिवा���ियों, पिछड़ों एवं अन्य कमज़ोर तबक़ों आदि को उनके वोट की ताक़त के माध्यम से सत्ता की मास्टर चाबी देकर उन्हें शोषित से शासक वर्ग बनाने हेतु इनके मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के रुके एवं बिखरे हुये कारवाँ को आगे मंज़िल तक पहुँचाने के लिये बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी को आज उनके महापरिनिर्वाण दिवस पर बी.एस.पी. परिवार की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित।
मान्यवर श्री कांशीराम जी के मिशनरी संकल्प का ही यह सुखद परिणाम था कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल व महत्वपूर्ण राज्य में मेरे नेतृत्व में बी.एस.पी. की चार बार सरकार बनी और इसके माध्यम से ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ के ऐतिहासिक कार्य करके ’बहुजन समाज’ में समय-समय पर जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों में भी ख़ासकर महात्मा ज्योतिबा फुले, श्री नारायणा गुरु, राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज व बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर आदि के समता व समानता के हक़ के लिये उनके अतुलनीय संघर्ष व बहुमूल्य योगदान को ज़मीनी स्तर पर उतारकर संविधान के पवित्र मंशा की पूर्ति की गयी।
यही नहीं बल्कि इन महापुरुषों की प्रेरणा से, यूपी में सर्वसमाज के हित में अपराध नियंत्रण व क़ानून व्यवस्था के मामलों म��ं क़ानून द्वारा क़ानून का राज क़ायम करके तथा जनहित, जनकल्याण एवं विकास के मामलों में भी, बेहतरीन सरकार देकर मान्यवर श्री कांशीराम जी को सच्ची श्रद्धांजलि व श्रद्धा-सुमन अर्पित किया गया।
एससी जनसँख्या कर्नाटक में 17.15%
उपवर्गीकरण करके दिया 15%
2% कँहा गया?
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नेहरू ने 1961 में सभी राज्यो को आरक्षण के प्रति अपनी नाखुशी जाहिर करते हुए पत्र लिखा था। इसलिए एससी आरक्षण को बैकलॉग में।भरा गया। नेहरू के जाने के बाद बाबू जगजीवराम ने बड़ी चतुराई व कुशलता से आरक्षण लागू करवाया।
अब कर्नाटक में;
1.मजेदा�� बात यह है कि भाजपा की पिछली बो��्मई सरकार ने जनसँख्यानुसार एससी आरक्षण 15% से बढ़ाकर 17% व एसटी आरक्षण 3.5% से बढ़ाकर 7% किया था जिसे वर्तमान की कोंग्रेस सरकार ने कानूनी अड़चन मानकर वापस ले लिया था।
2.कर्नाटक की कोंग्रेस सरकार अथार्त सिद्धारमैया सरकार ने;
1.एससी के 15% आरक्षण को 3 भागो में बांट दिया है।
2.तीन भाग इस प्रकार होंगे;
Left-Hand Community = 5.25%
Right - hand Community = 5.25%
Touchable SCs. = 4.5%
में विभाजित कर दिया है।। यह कुल 15% है। जबकि;
2011 जनगणना में एससी जनसँख्या = 17.15%
2015 के सर्वे में एससी जनसँख्या = 18.2%
है। चलो 2011 का ही मान लो। फिर 17.15% आरक्षण क्यो नही दिया?
3.इसमे;
Left-Hand Community = चमड़े के काम से जुड़ी जातिया। जैसे मदिगा व अन्य। उत्तर भारत मे चमार व उसकी उपजातिया इससे जुड़ी रही है।
Right - hand Community = खेती में मजदूरी से जुड़ी रही अछूत जातिया। जैसे हौलया, चलवाड़ी।।
Touchable SCs. = लम्बानि, भोवी, कोरमा, कोरचा जातिया है जो स्पर���शयोग्य जातिया मानी जाती थी।।
4.वास्तव में उप वर्गीकरण और कुछ नही बल्कि भविष्य में अनुसुचित जातियो को केंद्रीय दवाबकारी समूह से बाहर करना है। यह सहन नही हो रहा कि बाबा साहब, मान्यवर कांशीराम, बहनजी के बहुजन मूवमेंट की वजह से एससी क्यो राजनीतिक दवाबकारी समूह बन चुका है
5.अब आप अगर कहोगे की तुम चिढ़ रहे हो तो यह मूर्खता होगी क्योंकि कर्नाटक में चमड़े का कार्य करने वाली मदिगा ही इसकी माँग कर रह��� थी, उत्तर प्रदेश में मेरी जाति यह कार्य करती है। कार्य के गुण के आधार पे उत्तर भारत की चमार व मदिगा एक ही वर्ग समूह है। बिहार में भी उपवर्गीकर्ण में चमार जाति को लाभ है।
लेकिन में इस छोटे मोटे लाभ की जगह सीधा केन्द्रीय दवाबकारी समूह बनना ज्यादा महवपूर्ण समझता हूं।।उपवर्गीकर्ण भविष्य में एससी आरक्षण ही नही बल्कि अन्य योजनाओं को बन्द करने या उन्हें निष्प्रभावी करने का कार्य करेगा।
विकास कुमार जाटव
सपा + गठबंधन = 105 विधायक
भाजपा + गठबंधन = 288 विधायक
अखिलेश यादव को तीस��ी राज्यसभा सीट के लिए मात्र 6 विधायक कम पड़ रहे थे फिर भी सपा ने तीसरा प्रत्याशी ख��़ा ही नही किया ।
भाजपा को आठवीं राज्यसभा सीट के लिए 8 विधायक कम पड़ रहे थे फिर भी भाजपा ने अपना आठवा प्रत्याशी खड़ा किया और अब वो प्रत्याशी निर्विरोध चुना जा रहा है ।
लेकिन खबरदार जो किसी ने सपा को B टीम बोला ।
बसपा ने @PalVishwnathbsp को प्रदेश अध्यक्ष बनाया पहले सपा को पाल याद आया और उनका प्रदेश अध्यक्ष पाल हुआ अब भाजपा को पाल याद आया और राज्यसभा प्रकाश पाल चले गए अभी विधानपरिषद में भी पाल भेजा जाएगा सपा की तरफ से ।
इसे कहते हैं पिछड़ों को हक़ दिलाना ।
आप लोगो ने ये वीडियो अभी तक नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा, भारतीय मुस्लिम मंच के राष्ट्रीय संयोजक डॉ @mumtaz_rizvi जी ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस मे BJP व सपा के मिलीभगत का एक एक धागा खोलकर जनता के बीच रख दिए है।
डॉ. मुमताज आलम रिजवी जी ने BJP व समाजवादी पा���्टी पर जमकर हमला बोले है।
उत्तर प्रदेश के एक सरकारी अस्पताल में मुसहर समाज की महिला को प्रसव होने से रोक दिया गया और आपने वायरल वीडियो देखा होगा..
यह रामराज का नमूना है और हम आपको दिखाते हैं मायावती राज का करिश्मा..
इस बच्चे को सिर्फ बुखार आ गया था और पूरा प्रदेश हिला दिया था @Mayawati जी ने..
“जाट समाज चवन्नी था अखिलेश ने रूपया बनाया”
के बाद पेश है एक और जातिसूचक टिप्पणी-👇
मुलायम सिंह ने आरक्षण का इंतजाम ना किया होता तो जिला पंचायत की कुर्सी पर बैठी प्रेमावती धोबी किसी धोबी घाट पर कपड़े धो रही होती।
यूपी हरदोई में सपा नेता शराफत अली-
पिता = भाजपा सांसद
पुत्र = सपा प्रत्याशी
व्यवसाय = भारत के प्रमुख कॉरपोरेट लीडर व रिलायंस इंडस्ट्रीज में ग्रुप प्रेसिडेंट पद पर कार्यरत। अम्बानी परिवार के काफी करीब है।
कारण = चुनाव की सबसे ज्यादा जरूरी "विटामिन एम" (Money) की पूर्ति
लेकिन टिकट तो केवल बहनजी बेचती है। जबकि बसपा कूपन के माध्यम से कार्यकर्ताओ से पै��े इकट्ठा करवाने का संकल्प चुनाव लड़ने वाले से लेती है जिससे पार्टी का।प्रचार भी हो सके और चुनाव लड़ने के लिए धन भी आ सके। बिना पैसे आप पार्षद का चुनाव नही लड़ सकते और इंहा विधानसभा की बात है।
अब प्रत्याशी स्वयं की जेब से पैसा कूपन का दे देता है और ��ाद में टिकट के बदले पैसे का आरोप लगाता है।
और सपा ;
"एक झटके में उधोगपतिओ से जुगाड़ कर लेती है। लेकिन सरकार बनने में बाद बसपा गरीब शोषित, वंचित, इंहा तक कि रिक्शे वाले तक के बच्चे को जीरो शुल्क पर शिक्षा देगी और सपा उधोगपतियों का कर्ज उतारेगी"
यह अंतर मान्यवर साहब कैडर में समझाते थे। लेकिन आजकल के नौशिखिया अपरिपक्व जो अभी अभी उम्र में निक्कर से पेंट में आये है, वो सोचते है कि सुबह उठे, कुर्ता पजामा पहना, बाहर जय भीम करा, सभी उनके लिए रास्ते खोलकर खड़े हो जाएंगे और सीधा विधायक बन जाएंगे वो अखिलेश के उधोगपतियों से चुनाव खर्च पर चुप और बसपा के कूपन से इकट्ठे पर हाय हाय करते रहते है।
विकास कुमार जाटव
@Mayawati
सपा नेता इंद्रजीत सरोज कह रहे हैं कि उनकी सरकार में सपा कार्यकर्ता��ं के लिये अवैध खनन की खुली छूट होगी
अखिलेश यादव मुख्यमंत्री रहते हुए मुस्लिम इलाक़ों में दावा करते फिरते थे कि उनकी सरकार में किसी को कटिया मारने और बिजली चोरी करने से नहीं रोका गया
विकास का समाजवादी मॉडल
1. यूपी के आगामी विधानसभा आमचुनाव की तैयारी हेतु समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख का प्रचारित ’पीडीए रथ’ सपा के अपने लाल रंग का कम तथा आरएसएस/भाजपा के ’भगवा’ रंग का (भगवाकरण) ज़्यादा है, तो ऐसे में लोगों में चर्चा यही है कि यह सब उनका वोटों के स्वार्थ की ख़ातिर गिरगिट की तरह लगातार रंग बदलना है या फिर मुसलमानों पर से सपा प्रमुख का वोट पाने का भरोसा उठ जाना है?
2. वैसे भी यूपी के ख़ासकर मुस्लिम समाज को इस कड़वी हकीकत का पूरी तरह से अहसास है कि पिछले चुनावों में सपा को उनके द्वारा अधिकांश एकतरफा वोट देने के बाव��ूद भी यह पार्टी (सपा) यूपी व केन्द्र की सत्ता में भाजपा को सरकार बनाने से नहीं रोक पाती है तो इस पार्टी को बार-बार वोट देकर अपना वोट ख़राब क्यों किया जाये और इस मामले में अब वे अपरकास्ट में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज की तरह ही अपना रवैया काफी तेज़ी से बी.एस.पी. के पक्ष में बदल रहे हैं।
3. क्योंकि बी.एस.पी. यूपी में खासकर अपराध नियंत्रण व शान्ति-व्यवस्था के मामलों में क़ानून द्वारा क़ानून के राज के साथ ही व्यापक जनहित, जनकल्याण एवं विकास के मामलों में भी बेहतरीन आयरनलेडी राज यहाँ कई बार स्थापित करके दिखा चुकी है और जिसकी सर्वसमाज के हित व कल्याण में प्रदेश को सख़्त ज़रूरत भी है।
4. इसके साथ ही, सपा को यह भी जनता को ज़रूर बता देना चाहिये कि अब इनके ’पीडीए’ की असली वास्तविकता क्या है? क्योंकि चुनावी स्वार्थ में अब तक इन���होंने कभी ’पीडी’ को ’पिछड़ा, दलित’ बताया तो कभी ’पीडी’ को ’पण्डित’ बताया है और कभी अपने आपको ’अम्बेडकरवादी’ दर्शाने के चक्कर में बी.एस.पी. का ’नीला’ रंग वाला वस्त्र धारण कर तस्वीरें खिंचवाई है, किन्तु इसको लोगोें ने फौरन ही फेक अम्बेडकरवादी कहकर रिजेक्ट भी कर दिया।
5. जबकि इसके विपरीत, बी.एस.पी. सर्वसमाज हेतु ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नी��ि व सिद्धान्त वाली अम्बेडकरवादी पार्टी है तथा सभी को रोटी-रोज़गार-युक्त आत्म-सम्मान व स्वाभिमान आदि का जीवन जीने की पक्षधर है। इसीलिये सर्वसमाज में बी.एस.पी. का अपना सम्मान है।