🏗️ निर्माण श्रमिक पंजीयन कराएँ, कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पाएँ!
मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीकृत होना आवश्यक है।
✅ पंजीयन के लिए पात्रता
🔹 आयु 18 से 60 वर्ष के बीच हो।
🔹 पिछले 12 महीनों में कम से कम 90 दिन निर्माण कार्य में नियोजित रहे हों।
🔹 सदस्य समग्र ID की Aadhaar e-KYC पूर्ण हो।
📄 आवश्यक दस्तावेज
• निर्धारित प्रारूप में आवेदन
• e-KYC युक्त समग्र ID की प्रति
• e-Shram की प्रति
• पिछले 12 महीनों में 90 दिन नियोजन का प्रमाण-पत्र
🌐 यहाँ करें ऑनलाइन आवेदन:
https://t.co/mM6A1wqfSt
अपनी पात्रता जाँचें, आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें और आज ही पंजीयन के लिए आवेदन करें।
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खेत, जमीन और पैतृक संपत्ति
(Ancestral Property) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (SC) ने कई ऐसे ऐतिहासिक और क्रांतिकारी फैसले दिए हैं, जिनकी जानकारी न होने के कारण ग्रामीण और शहरी इलाकों में आम जनता वर्षों तक अदालतों के चक्कर काटती रहती है।
1-
पैतृक कृषि भूमि (खेत) सीधे बाहरी व्यक्ति को नहीं बेच सकते (जुलाई 2026)
सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (HSA) की धारा 22 के तहत मिलने वाला प्राथमिकता का अधिकार (Preferential Right) कृषि भूमि पर भी पूरी तरह लागू होता है !
आदेश:
यदि किसी परिवार को विरासत या पैतृक रूप से खेती की जमीन मिली है और कोई हिस्सेदार (Co-heir) अपना हिस्सा बेचना चाहता है, तो वह उसे सीधे किसी बाहरी अजनबी को नहीं बेच सकता !
नियम -
उसे सबसे पहले अपने ही परिवार के क्लास-1 उत्तराधिकारियों (Class-1 Heirs) जैसे भाई, बहन या मां को वह जमीन खरीदने का पहला प्रस्ताव देना होगा !
परिवार द्वारा मना करने के बाद ही जमीन बाहर बेची जा सकती है!
इससे पारिवारिक खेतों को बाहरी हस्तक्षेप से बचाया जा सकेगा !
2-
बेटियों को जन्म से ही पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार
(विनीता शर्मा बनाम राकेश शर्मा)
यह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के इतिहास में सबसे बड़ा फैसला माना जाता है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है!
आदेश -
एक बेटी हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) में जन्म से ही समान रूप से हिस्सेदार (Coparcener) है, ठीक वैसे ही जैसे एक बेटा होता है!
मुख्य स्पष्टीकरण-
यह अधिकार इस बात पर निर्भर नहीं करता कि बेटी का जन्म 2005 के संशोधन से पहले हुआ था या बाद मे !
साथ ही, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि 9 सितंबर 2005 को पिता जीवित थे या नहीं।
बेटी विवाहित हो या अविवाहित, पैतृक संपत्ति और खेतों में उसका हिस्सा कानूनी तौर पर सुरक्षित है !
3-
केवल 'दाखिल-खारिज' (Mutation Entry) से मालिकाना हक नहीं मिलता
ग्रामीण क्षेत्रों में यह सबसे बड़ी गलतफहमी है
की राजस्व रिकॉर्ड
(जैसे खतौनी, जमाबंदी या दाखिल-खारिज) में नाम आ जाने से व्यक्ति जमीन का पूर्ण मालिक बन जाता है।
आदेश-
सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार स्पष्ट किया है कि म्यूटेशन या दाखिल-खारिज केवल टैक्स (लगान) वसूलने के प्रशासनिक उद्देश्य के लिए होता है !
अधिकार-
यह किसी व्यक्ति के पक्ष में जमीन का मालिकाना हक (Title) तय नहीं करता।
असली मालिकाना हक केवल रजिस्टर्ड सेल डीड (रजिस्ट्री), वसीयत या कोर्ट की डिक्री जैसे वैध दस्तावेजों से ही साबित होता है !
4-
पिता की खुद की कमाई संपत्ति (Self-Acquired Property) पर बेटी का पहला हक (अरुणाचला गौंडर मामला)
आदेश-
यदि किसी हिंदू पुरुष की मृत्यु बिना कोई वसीयत (Intestate) किए हो जाती है, और उसकी संपत्ति पैतृक न होकर खुद की कमाई हुई (Self-Acquired) है, तो वह संपत्ति उसके भाइयों या भतीजों के पास जाने के बजाय उसकी बेटी को विरासत में मिलेगी !
नियम -
कोर्ट ने माना कि बेटी का अपने पिता की खुद की अर्जित संपत्ति पर पूर्ण और पूर्णकालिक अधिकार होता है, न कि केवल जीवन यापन के लिए सीमित अधिकार !
5.
पैतृक संपत्ति को बिना वैध कारण के दान या उपहार में नहीं दिया जा सकता !
(के.सी. लक्ष्मणा मामला)
कई बार परिवार के मुखिया पूरी पैतृक संपत्ति या खेत को किसी एक पसंदीदा व्यक्ति या संस्था को उपहार (Gift Deed) में दे देते हैं, जिससे बाकी हिस्सेदारों का हक मारा जाता है।
आदेश -
सुप्रीम कोर्ट ने तय किया है कि कोई भी व्यक्ति पूरी पैतृक संपत्ति को अपनी मर्जी से किसी को गिफ्ट नहीं कर सकता !
नियम -
पैतृक संपत्ति का उपहार केवल बहुत ही सीमित दायरे में, जैसे धार्मिक या धर्मार्थ कार्यों
(Pious Purpose) के लिए ही दिया जा सकता है, वह भी बेहद छोटे हिस्से को।
पूरे खेत या बड़ी संपत्ति को बिना सभी सह-दायदों (Coparceners) की सहमति के दान नहीं किया जा सकता !
क्या आप जानते हैं पसीने की अपनी कोई बदबू नहीं होती? 😱
असली गुनहगार कोई और है!
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1. असल में हमारी skin पर मौजूद bacteria पसीने में मौजूद fat और protein को तोड़ते हैं!
2. इस प्रक्रिया में बनने वाले chemicals ही body odor की वजह होते हैं!
3. सबसे दिलचस्प बात - ABCC11 gene में बदलाव के कारण जापान और कोरिया के लोगों में body odor बहुत कम या नहीं के बराबर होता है!
अगली बार पसीने को नहीं, skin bacteria को दोष दीजिए! 🦠🤯
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मॉडल युवा ग्राम सभा: आत्मविश्वास और नेतृत्व की पाठशाला।
मॉडल युवा ग्राम सभा युवाओं में आत्मविश्वास, संवाद और निर्णय लेने की क्षमता का विकास करती है। यह उन्हें स्थानीय शासन और विकास से जोड़कर, योजना और सामाजिक परिवर्तन में सक्रिय भागीदारी के लिए तैयार करती है, जिससे वे अगली पीढ़ी के सशक्त लोकतंत्र का नेतृत्व कर सकें।
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12वीं या ITI पास हैं? सीखिए, अनुभव पाइए और ₹10,000 तक स्टाइपेंड पाएं! 🎓
मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की ‘सीखो कमाओ योजना’ पंजीकृत निर्माण श्रमिकों एवं उनकी संतानों को उद्योगों में प्रशिक्षण और काम के साथ व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर देती है।
✅ कौन ले सकता है लाभ?
• पंजीकृत निर्माण श्रमिक या उनकी संतान
• श्रमिक का पंजीयन कम से कम 1 वर्ष पुराना हो
• न्यूनतम योग्यता 12वीं या ITI उत्तीर्ण
• आयु 18 से 29 वर्ष
• मध्यप्रदेश का स्थायी निवासी
प्रशिक्षण के दौरान ₹8,000 से ₹10,000 तक स्टाइपेंड पाने का अवसर।
📌 आवेदन से पहले पात्रता एवं आवश्यक शर्तें अवश्य जान लें। NAPS Apprenticeship Training का लाभ लेने वाले इस योजना के पात्र नहीं हैं।
🌐 अधिक जानकारी: https://t.co/Dd0iQaVUa4
सीखिए • अनुभव पाइए • आगे बढ़िए!
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अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना समाज में समरसता, समानता और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने की एक सशक्त पहल है।
अंतर्जातीय विवाह करने वाले पात्र दंपतियों को ₹1,00,000 का फिक्स्ड डिपॉजिट एक नई शुरुआत के लिए मज़बूत सहारा।
भारत के अलग-अलग राज्यों की प्रसिद्ध चप्पलें । राजस्थान में कोल्हापुरी चप्पल, उत्तर प्रदेश में कामपूरी चप्पल, महाराष्ट्र में पूरी चप्पल #कोल्हापूरी#चप्पल#भारत🇮🇳 #राज्यों#प्रसिद्ध
सेवा ही साधना, राष्ट्र ही सर्वोपरि और समर्पण ही संकल्प!
आद्य सरसंघचालक परम पूजनीय डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार जी ने भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और राष्ट्रभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुँचाने के संकल्प के साथ 1925 में एक स्वयंसेवी संगठन की गौरवशाली यात्रा प्रारंभ की।
राष्ट्र प्रथम की भावना, अनुशासन, निःस्वार्थ सेवा के मूल मंत्र के साथ माँ भारती को समर्पित उस विराट संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (@RSSOrg) के स्थापना दिवस की करोड़ों स्वयंसेवकों को ढेरों शुभकामनाएँ।
राष्ट्रसेवा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना का यह संकल्प निरंतर नई ऊर्जा के साथ यूंही आगे बढ़ता रहे।