हमारे बीच प्यार की कमी नहीं थी, हाँ— वक़्त की थी।न कोई विद्रोह, न आँसू, न अलविदा फिर भी हम अलग हो गए।क्योंकि मैंने उसे तब चाहा जब वो खुद को तलाश रही थी,और उसने तब जब मैं कुछ बनने की ज़िद में था।हमारी त्रासदी यह नहीं थी कि हम बिछड़े, बल्कि यह कि वक्त की कमी से हम कभी मिले ही नहीं|
ज़िंदगी जब भी तिरी बज़्म में लाती है हमें
ये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती है हमें!
सुर्ख़ फूलों से महक उठती हैं दिल की राहें
दिन ढले यूँ तिरी आवाज़ बुलाती है हमें!!
मेरे पिता अक्सर कहा करते हैं
कि
लिखना उसी भाषा में चाहिए
जिसमें व्यक्ति सपने
देखता हो।
मुझे आज सुबह आभास हुआ
कि
मैं तुम्हारी भाषा में सपने देखता हूँ।
वो भाषा जो न हिंदी है-न अंग्रेजी
और न कोई अन्य बोली।
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मैं आदमी हूँ
बहुत कुछ छोटा-छोटा जोड़कर बना हूँ
और उन सभी चीज़ों के लिए
जिन्होंने मुझे बिखर जाने से बचाए रखा
मेरे पास आभार है
मैं शुक्रिया करना चाहता हूँ...
अवतार सिंह संधू 'पाश'
मुझे अवसाद और नाउम्मीदियों से बचना है
थकान और नैराश्य से भी
ईर्ष्या और अधैर्य से भी
मुझे अभिनय नहीं सच के साथ जीना है
जबकि यह दिन-ब-दिन मुश्किल होता जाएगा
भरमाएगा आस-पास और पड़ोस और नगर
लेकिन घृणा नहीं सब कुछ में यक़ीन बचाए रखना है मुझे
स्थितियाँ अब भी संभावनाओं से ख़ाली नहीं।