यहां हजारों आदिवासी अपने अधिकारों, सम्मान और बेहतर जीवन के लिए एकत्र हुए थे। अंग्रेजी शासन द्वारा किए गए मानगढ़ गोलीकांड में अनेक आदिवासी वीरों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया।
#हमारी_मांग_भीलप्रदेश
राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की धरती पर बसे भील आदिवासी एक आत्मा, एक संस्कृति और एक विरासत के धनी हैं। हमारे पुरखों ने अपने खून से इस भूमि को सींचा है।
आज वक्त आ गया है कि इस क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी सहित मानवतावादी सोच के साथ रहने वाले सभी वर्ग के हित में नये भील राज्य बनाने की दिशा में केंद्र सरकार को फैसला करने की आवश्यकता है।
#हमारी_मांग_भीलप्रदेश
संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत के आदिवासी (Indigenous Peoples) समुदाय की ओर से अपनी बात रखने का अवसर मिला।
संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में भारत सरकार द्वारा लंबे समय से किये जा रहे उस दावे का तथ्यात्मक खंडन किया कि भारत में कोई विशेष आदिवासी (Indigenous) समुदाय नहीं हैं। मैंने स्पष्ट कहा कि मैं इस दावे को स्वीकार नहीं करता।
मैंने बताया कि भारत में प्रोटो-ऑस्ट्रालॉइड, नीग्रिटो, द्रविड़ और मंगोलॉयड नस्लीय समूहों से संबंधित आदिवासी निवास करते हैं, जो कुल 705 आदिवासी समूह के रूप में अपनी पहचान बनाये हुए हैं।
वर्तमान भारत के संविधान में इन आदिवासी समुदाय को अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता प्रदान की गई है, जिनकी वर्तमान जनसंख्या लगभग 14 करोड़ के करीब है।
अतः यह स्पष्ट है कि भारत की अनुसूचित जनजातियां ही भारत के इंडिजिन्स पीपुल्स हैं।
मैंने अपने वक्तव्य में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू के Kailas v. State of Maharashtra (2011) निर्णय का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि "अनुसूचित जनजातियां भारत के मूल निवासियों की वंशज हैं।"
संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसे वैश्विक मंच पर भारत के भील आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए गर्व और सम्मान की बात है। यह आवाज केवल मेरी नही, बल्कि देश के करोड़ों आदिवासी भाई-बहनों की आवाज है। जोहार
@UN@rashtrapatibhvn@narendramodi@RahulGandhi@kharge@PMOIndia@MEAIndia@JPN_PMO@timesofindia@thewire_in@HindustanTimes@BBC@BBCWorld@PTI_News@ANI@IndianExpress@ndtv
संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत के आदिवासी (Indigenous Peoples) समुदाय की ओर से अपनी बात रखने का अवसर मिला।
संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में भारत सरकार द्वारा लंबे समय से किये जा रहे उस दावे का तथ्यात्मक खंडन किया कि भारत में कोई विशेष आदिवासी (Indigenous) समुदाय नहीं हैं। मैंने स्पष्ट कहा कि मैं इस दावे को स्वीकार नहीं करता।
मैंने बताया कि भारत में प्रोटो-ऑस्ट्रालॉइड, नीग्रिटो, द्रविड़ और मंगोलॉयड नस्लीय समूहों से संबंधित आदिवासी निवास करते हैं, जो कुल 705 आदिवासी समूह के रूप में अपनी पहचान बनाये हुए हैं।
वर्तमान भारत के संविधान में इन आदिवासी समुदाय को अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता प्रदान की गई है, जिनकी वर्तमान जनसंख्या लगभग 14 करोड़ के करीब है।
अतः यह स्पष्ट है कि भारत की अनुसूचित जनजातियां ही भारत के इंडिजिन्स पीपुल्स हैं।
मैंने अपने वक्तव्य में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू के Kailas v. State of Maharashtra (2011) निर्णय का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि "अनुसूचित जनजातियां भारत के मूल निवासियों की वंशज हैं।"
संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसे वैश्विक मंच पर भारत के भील आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए गर्व और सम्मान की बात है। यह आवाज केवल मेरी नही, बल्कि देश के करोड़ों आदिवासी भाई-बहनों की आवाज है। जोहार
@UN@rashtrapatibhvn@narendramodi@RahulGandhi@kharge@PMOIndia@MEAIndia@JPN_PMO@timesofindia@thewire_in@HindustanTimes@BBC@BBCWorld@PTI_News@ANI@IndianExpress@ndtv
संयुक्त राष्ट्र (UN) के मुख्यालय, जिनेवा पहुँचने के दौरान स्विट्ज़रलैंड के ज़्यूरिख़ शहर के करीब स्थित विश्व प्रसिद्ध राइन फॉल्स का भ्रमण किया।
राइन फॉल्स, राइन नदी पर स्थित यूरोप के सबसे प्रसिद्ध और विशाल जलप्रपातों में से एक है। यह नदी आल्प्स पर्वतमाला से निकलकर कई देशों से होकर बहती है और यूरोप की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में गिनी जाती है।
साथियों, यूरोप के एक दिन के अनुभव ने बहुत कुछ सिखाया, उसमें सबसे बड़ी सीख यहां का अनुशासन हैं।
भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने मात्र तीन वर्षों के भीतर भारतीय राजनीति में एक मजबूत और जनआधारित हस्तक्षेप दर्ज किया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन लाल रोत के नेतृत्व में BAP ने खुद को केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि आदिवासियों, दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की सामूहिक आवाज के रूप में स्थापित किया है।
संसद के भीतर शिक्षा, जल-जंगल-जमीन, महिलाओं पर अत्याचार और हाशिये के समाजों के अधिकारों जैसे मूलभूत मुद्दों को मजबूती से उठाने का काम किया गया है। मणिपुर से लेकर छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्यप्रदेश और राजस्थान तक—हर क्षेत्र में वंचित समाज के पक्ष में संघर्ष करते हुए डूंगरपुर-बाँसवाड़ा के सांसद राजकुमार रोत ने इस आवाज को राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाया है।
राजस्थान विधानसभा में थावर चंद मीणा, उमेश डामोर, अनिल कटारा, जय कृष्ण पटेल (बागीदोरा) और मध्यप्रदेश में कमलेश्वर डोडियार जैसे जनप्रतिनिधि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और स्थानीय विकास के मुद्दों पर लगातार संघर्ष कर रहे हैं। ये केवल विधायक नहीं, बल्कि जनआंदोलन के प्रतिनिधि हैं।
लेकिन BAP की असली ताकत केवल संसद और विधानसभा तक सीमित नहीं है। यह पार्टी जमीन पर लड़ाई लड़ने वाले हजारों कार्यकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के समर्पण से खड़ी हुई है। कांतिभाई आदिवासी के नेतृत्व में देशभर में आदिवासी एकता और अधिकारों के लिए निरंतर अभियान चल रहा है।
पूर्व विधायक रामप्रसाद डिंडोर, मांगीलाल निनामा, जीतेश मीणा, अशोक भील, दिनेश पांडोर, बबीता कच्छप, प्रसून मसार, माया कलासुआ, आज़ाद भाई, अनुतोष रोत, अमित खराड़ी, डॉ. राम मीणा जैसे अनेक साथी इस संगठन की रीढ़ हैं—जो दिन-रात जनता के हक की लड़ाई में लगे हुए हैं।
यह मुकाम यूं ही हासिल नहीं हुआ। इसके पीछे हजारों कार्यकर्ताओं का त्याग, संघर्ष और बलिदान है। कई साथियों ने अपना घर-परिवार छोड़ा, अपनी जेब से पैसा लगाया, अपना खून-पसीना इस आंदोलन को दिया।
तीन साल पहले पार्टी के रजिस्ट्रेशन के बाद दिल्ली से लौटते समय जयपुर के पास एक दर्दनाक हादसे में हमने अपने साथी जगदीश भाई पांडोर को खो दिया। यह क्षति केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे आंदोलन की थी।
आज, तीन साल बाद, उनकी शहादत हमारे संकल्प को और मजबूत करती है। BAP ने मात्र 8 महीनों में राजस्थान और मध्यप्रदेश विधानसभा में तीसरी सबसे बड़ी ताकत बनकर यह साबित कर दिया है कि यह आंदोलन जनता के दिलों में बस चुका है।
भारत आदिवासी पार्टी केवल एक संगठन नहीं—यह करोड़ों लोगों की उम्मीद है। इसमें आदिवासियों का खून और पसीना शामिल है, इसमें “भील प्रदेश” का सपना बसता है, इसमें सामाजिक न्याय और सम्मानजनक भविष्य की आकांक्षा है।
हमारा विश्वास अटूट है—हम यह लड़ाई जीतेंगे।
मन्नारे जगदीश भाई के सपनों को मंज़िल तक पहुँचाएंगे।
मन्नारे जगदीश का मिशन अधूरा नहीं रहेगा—BAP उसे पूरा करेगी।
प्रो जितेंद्र मीणा
राष्ट्रीय प्रवक्ता
भारत आदिवासी पार्टी
131 वाँ संविधान संशोधन बिल दरअसल परिसीमन से जुड़ा है। महिलाओं को आरक्षण देने का बिल (106 वाँ संशोधन बिल) पहले ही 2023 में पास किया जा चुका था।
बिना जाति जनगणना के परिसीमन बेईमानी है। OBC को उसका हक मिलना चाहिए।
आज जिला मुख्यालय बांसवाड़ा पर घाटोल से अशोक भील के भाई स्व. अनिल निनामा की निर्मम हत्या के विरोध में आयोजित धरना-प्रदर्शन में सम्मिलित होकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को मजबूती से रखा। यह घटना अत्यंत निंदनीय एवं दुर्भाग्यपूर्ण है।