हमें राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की लकीरों में बाँटकर हमारी ताकत को कम करने की साजिश रची गई। लेकिन वे भूल गए कि हमारा खून एक है, हमारी संस्कृति एक है और अब हमारी आवाज़ भी एक है। हम अपना हक़ लेकर रहेंगे!
#हमारी_मांग_भीलप्रदेश
भील समाज की भाषा, संस्कृति, परंपरा और पहचान के सम्मान के साथ जल, जंगल, जमीन और समग्र विकास के अधिकारों के लिए अलग भीलप्रदेश राज्य की मांग है।
#हमारी_मांग_भीलप्रदेश
*राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की धरती पर बसे भील आदिवासी एक आत्मा, एक संस्कृति और एक विरासत के धनी हैं। हमारे पुरखों ने अपने खून से इस भूमि को सींचा है।*
नये भील राज्य बनाने की दिशा में केंद्र सरकार को फैसला करने की आवश्यकता है।*
#हमारी_मांग_भीलप्रदेश
जब देश में राज्यों और रियासतों का एकीकरण हो रहा था तब राजनीतिक षड्यंत्र के तहत आदिवासी बाहुल्य (भीलप्रदेश) क्षेत्र को अलग-अलग राज्यों में बाँट दिया गया था! हम चार राज्यों (RJ, GJ, MH और MP) के आदिवासी एक स्वतंत्र राज्य भीलप्रदेश की मांग करते हैं
#हमारी_मांग_भीलप्रदेश
कमलकांग्रेस के नेताओं अंग्रेज़ी हुक़ूमत के पूर्व से ही आदिवासी क्षेत्रों की अपनी स्वायत्त व्यवस्था थी जिसे आज़ादी के बाद राज्यों के पुनर्गठन के नाम पर नष्ट कर दिया गया।
भील प्रदेश आदिवासी क्षेत्रों में पुरानी स्वशासन व्यवस्था को लागू करने की सबसे ज़रूरी शर्त हैं।
#हमारी_मांग_भीलप्रदेश
भीलप्रदेश की माँग आजादी के पहले से ही उठती आई है, क्योंकि यहाँ के लोगों की संस्कृति, भाषा, बोली और रीति रिवाज दूसरे प्रदेशों से अलग है और आदिवासी संस्कृति और सभ्यता को बचाने और उसके सरंक्षण के लिए जरूरी है।! #हमारी_मांग_भीलप्रदेश
न्यायपालिका में सारा काम अंग्रेजी भाषा में होता हैं, आदिवासी अंग्रेजी भाषा जानता नहीं हैं, इसलिए आदिवासी समुदाय को न्यायपालिका में भी न्याय नहीं मिल रहा हैं, इसलिए भीलप्रदेश राज्य चाहिए..!
@devilalbarod45@The_Mooknayak#हमारी_मांग_भीलप्रदेश
इतिहास गवाह है कि हम इस मिट्टी के मूल रक्षक हैं। अब भील संस्कृति और हमारे अस्तित्व को मिटाने की साजिशें नहीं चलेंगी। अपनी पहचान और हकों की रक्षा के लिए 'भील प्रदेश' का गठन हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। जाग जाओ!
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