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अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव पर आध्यात्मिक ज्ञान चर्चा
- उत्तम अनुत्तम का क्या अर्थ है?
- श्राद्ध निकालने वाले पितर बनेंगे
- क्या ब्रह्मा, विष्णु, महेश अजर-अमर हैं?
देखिए तत्वज्ञान से ओतप्रोत हमारा विशेष कार्यक्रम :-
रविवार 04 दिसम्बर को सुबह 11 बजे से Live
#यथार्थ_KnowledgeOfGita
पवित्र श्रीमद्भागवत गीता के अध्याय 7 श्लोक 25 में गीता ज्ञान दाता ने खुद को अव्यक्त (गुप्त) क्यों कहा ?
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गीता अध्याय 15 श्लोक 16 में कहा है कि इस संसार में दो पुरूष (प्रभु) हैं। एक क्षर पुरूष तथा दूसरा अक्षर पुरूष। ये दोनों तथा इनके अंतर्गत सब प्राणी नाशवान हैं।
#यथार्थ_KnowledgeOfGita यदि गीता ज्ञानदाता (श्री विष्णु उर्फ श्री कृष्ण जी) जन्मता
मरता है तो अविनाशी यानि जन्म-मरण से रहित प्रभु कौन है? जानने के लिए अवश्य पढ़ें पवित्र पुस्तक गीता तेरा ज्ञान अमृत तथा देखें सुदर्शन न्��ूज़ चैनल पर सत्संग सुबह 6 बजे।
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पवित्र गीता जी अध्याय 15 श्लोक नंबर 1 में वर्णित उल्टे लटके हुए वृक्ष का रहस्य क्या है ❓👇
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Why has it been said in Mantra 23 of Adhyay 16 of Holy Gita that there will be no benefit to those who behave arbitrarily?
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गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में गीता ज्ञान दाता ने अर्जुन को अपने से अन्य परमेश्वर की शरण में सर्व भाव से जाने के लिए कहा है।
- जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी
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गीता अध्याय 15 श्लोक 17:- उत्तम पुरूष यानि श्रेष्ठ परमेश्वर तो उपरोक्त क्षर पुरूष और अक्षर पुरूष से अन्य ही है जो परमात्मा कहा जाता है। जो तीनों लोकों में प्रवेश करके सब��ा धारण-पोषण करता है और वही अविनाशी परमेश्वर है।
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गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में गीता ज्ञान दाता ने अर्जुन को अपने से अन्य परमेश्वर की शरण में सर्व भाव से जाने के लिए कहा है।
👉जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी
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पवित्र गीता जी अध्याय 11 श्लोक 32 में गीता ज्ञानदाता कहता है कि हे अर्जुन! मैं बढ़ा हुआ काल हूं और अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रवृत्त हुआ हूं? वह काल कौन है? जानने के लिए पढ़ें पवित्र पुस्तक गीता तेरा ज्ञान अमृत तथा नेपाल-1 चैनल पर सत्संग सुबह 6 बजे।