Google Search में अगर आपका मोबाइल नंबर, घर का पता, ईमेल, बैंक डिटेल्स या दूसरी निजी जानकारी जा रही है, तो आपको घबराना नहीं है. गूगल के सर्च रिजल्ट से आपकी जानकारी हटाने का तरीका हम आपको बताते हैं.
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Vemos una cesárea con nacimiento en caul, un caso poco frecuente en el que el bebé nace todavía dentro del saco amniótico intacto. Una escena tan delicada, donde esa membrana lo sigue envolviendo y protegiendo durante sus primeros segundos fuera del útero
आलसी व्यक्ति विद्वान होता है, क्योंकि वो जानता है कि वो कुछ क्षणों में उस काम को कर देगा जिसे करने में वाकी लोग ज्यादा समय लेंगे।
आलसी व्यक्ति विद्वान होता है, क्योंकि उसे कोई फर्क नहीं पड़ता है इस दुनिया की भीड़ में उसे प्रथम नंबर पर आंका जाए या अंतिम नंबर पर, उसे पता है जो बहुत जरूरी है जीवन में वो है सकून, खुशियां और मानसिक शांति।
आलसी व्यक्ति बहुत ही विद्वान होता है, क्योंकि उसे कोई भी फर्क नहीं पड़ता कि आप उसके बारे में अच्छा सोचते है या बुरा वो केवल और केवल अपने आप को खुश करने में लगा होता है, अपने ईश्वर को खुश करने में लगा होता है।
आलसी व्यक्ति विद्वान होता है, क्योंकि वो एक वैराग्य की स्थिति में आ चुका होता है उसे न सुख से बहुत ज्यादा खुशी होती है और दुख से न बहुत ज्यादा गम होता है।
आलसी व्यक्ति विद्वान होता है, क्योंकि उसे भीड़ में अपने मिजाज का आदमी नहीं मिलता वो लोगों के बीच खड़ा नहीं होता, अगर लोगो के बीच खड़ा होता है तो उसकी आत्मा कही और होती है उसका शरीर वही होता है।
तो कद्र कीजिए आलसी व्यक्ति की क्योंकि आलसी व्यक्ति विद्वान होता है।
यह पूरी शिक्षा हमें बदलनी पड़ेगी। लोगों को हमने सिखाया, काम करो, क्योंकि जिंदगी के लिए जरूरत थी। भोजन नहीं था, कपड़ा नहीं था। वह हालत बदल जाएगी। आलस्य इतना बुरा नहीं रह जाने वाला आने वाली सदी में, जितना पीछे था।
आपको खयाल न हो, हमारे पास जो शब्द है बुद्धू, वह बुद्ध से ही आया है। घर में कोई खाली बैठा हो तो हम उससे कहते हैं, क्या बुद्धू की तरह बैठे हुए हो? वह वही पुराना स्मरण है उसमें कि हम जानते हैं कि बुद्ध एक दिन बोधिवृक्ष के नीचे खाली बैठे रहे हैं वर्षों तक। अब भी हम कहते हैं, क्या बुद्धू की तरह बैठे हो! उठो, कुछ करो। हमें भूल गया है कि यह शब्द बुद्ध से आया है। लेकिन इस शब्द के पीछे छिपा हुआ भाव बताता है कि हमें बुद्ध को देख कर भी हमारे मन में यही उठा होगा। हमने आदर दिया, क्योंकि महिमा प्रकट हुई। हमने आदर दिया, क्योंकि ज्योति प्रकट हुई। लेकिन हम जानते थे, यह आदमी खाली बैठा है; यह कुछ कर नहीं रहा है। करने की भाषा में बुद्ध ने क्या किया है? महावीर बारह वर्ष अपने वन की साधना में क्या कर रहे हैं? खाली खड़े हैं। खाली बैठे हैं। खाली करने की ही बस कोशिश है कि कुछ न रह जाए, एक शून्यता रह जाए।
लेकिन हम होशियार हैं। हम इन खाली शून्यता में बैठे लोगों पर भी ऐसे शब्द चिपकाते हैं कि उनसे कर्म का भाव होता है। हम कहते हैं, महावीर साधना कर रहे हैं। यह हमारी कुशलता है और हमारी भाषा है कि हम कहते हैं, महावीर साधना कर रहे हैं। बुद्ध खाली बैठे हैं; हम कहते हैं, बुद्ध ध्यान कर रहे हैं। ध्यान कर रहे हैं कहने से लगता है कुछ कर रहे हैं। और बुद्ध जिंदगी भर समझाते रहे हैं कि जब तक तुम करोगे तब तक ध्यान नहीं होगा; ध्यान किया नहीं जा सकता। जब तुम कुछ भी नहीं करते हो तो जो अवस्था शेष रह जाती है उस शेष अवस्था का नाम ध्यान है। लेकिन हमारी भी तकलीफ है। हमारे पास शब्द ही सब कर्म से जुड़े हुए हैं। और जब हम शब्द बदल देते हैं तो पूरा भाव बदल जाता है। जब हम कहते हैं, महावीर जंगल में साधना कर रहे हैं तो हमारे मन में ऐसा खयाल उठता है, कोई बहुत बड़ा काम हो रहा है। महावीर कुछ भी नहीं कर रहे हैं; काम को छोड़ रहे हैं।
परम आलस्य?
पीएम ई-विद्या (PM eVIDYA)
पीएम ई-विद्या भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू की गई एक व्यापक पहल है, जो डिजिटल और ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देती है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के लगभग 25 करोड़ स्कूली बच्चों को मल्टी-मोड प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिक्षा उपलब्ध कराना है।
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यह केवल दो पन्नों का महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है। सभी वाहन चालकों से अनुरोध है कि इनकी कॉपी निकालकर अपने गाड़ी में सुरक्षित अवश्य रखें।
इन पन्नों में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि यदि वाहन पर फास्टैग नहीं लगा है या किसी कारणवश फास्टैग से भुगतान सफल नहीं हो पाता, तो चालक से टोल शुल्क का दुगना नगद भुगतान लिया जा सकता है। लेकिन यदि भुगतान यूपीआई के माध्यम से किया जाए, तो नियमानुसार केवल टोल राशि का 1.25 गुना ही देय होगा।
अक्सर देखा गया है कि टोलकर्मी फास्टैग न होने पर यूपीआई से भुगतान स्वीकार नहीं करते, या यूपीआई से भी दुगनी राशि लेकर नगद की रसीद दे देते हैं। यही स्थिति विवाद और झगड़े का मुख्य कारण बनती है।
इसलिए अपने अधिकारों की जानकारी रखें और आवश्यकता पड़ने पर इन दस्तावेज़ों का सहारा लें।
~ साभार: @NCIBHQ
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“मेरे पापा को शर्म आती है कि मैं चाय बेचता हूँ”
ये कहके BA(hons) राहुल रोने लगता है
पेपर लीक के शिकार हैं, घर से और पैसा नहीं मंगा सकते
तो अपने दोस्त के साथ मिलकर दिन में चाय बेचते हैं और रात में पढ़ते हैं
ये हज़ारों युवाओं का संघर्ष है
पूरी रिपोर्ट @TheRedMike YT