माननीय मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी एवं मंत्री @oprajbhar जी, 58 हजार पंचायत सहायकों के लिए ऐतिहासिक निर्णय लीजिए
माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी एवं माननीय मंत्री ओम प्रकाश राजभर जी, उत्तर प्रदेश के लगभग 58,000 पंचायत सहायकों को राज्यकर्मी एवं समूह ‘ग’ का दर्जा देने का ऐतिहासिक निर्णय लीजिए।
यह केवल 58,000 कर्मचारियों का विषय नहीं, बल्कि उनके परिवारों के भविष्य और ग्राम पंचायतों में डिजिटल एवं प्रशासनिक कार्यों को मजबूत करने का विषय है। सरकार यदि दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ निर्णय ले, तो इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक एवं वैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।
58 हजार पंचायत सहायकों को राज्यकर्मी और समूह ‘ग’ का दर्जा कैसे मिल सकता है?
उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में कार्यरत लगभग 58,000 पंचायत सहायकों को राज्य सेवा में शामिल करने के लिए केवल मानदेय बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए व्यवस्थित प्रशासनिक एवं वैधानिक प्रक्रिया अपनानी होगी।
पहला चरण—विभागीय प्रस्ताव:
पंचायती राज विभाग द्वारा वर्तमान में कार्यरत पंचायत सहायकों की संख्या, उनके कार्य, योग्यता, सेवा अवधि और ग्राम पंचायत स्तर पर उनकी आवश्यकता का आकलन करते हुए शासन के समक्ष प्रस्ताव रखा जा सकता है।
दूसरा चरण—पृथक संवर्ग का गठन:
पंचायत सहायकों के लिए पृथक राज्य सेवा संवर्ग बनाने का निर्णय लिया जा सकता है तथा पद को समूह ‘ग’ में रखा जा सकता है।
तीसरा चरण—58,000 पदों का सृजन:
सरकार आवश्यकता के अनुसार पंचायत सहायक के लगभग 58,000 स्वीकृत पदों का सृजन कर सकती है।
चौथा चरण—वित्तीय स्वीकृति:
वित्त विभाग द्वारा वेतन, भत्ते एवं अन्य लागू सेवा लाभों से पड़ने वाले वित्तीय भार का परीक्षण कर आवश्यक स्वीकृति दी जा सकती है।
पांचवां चरण—सेवा नियमावली:
पंचायत सहायक समूह ‘ग’ सेवा नियमावली बनाई जाएगी, जिसमें नियुक्ति, वेतनमान, वरिष्ठता, स्थानांतरण, अवकाश, पदोन्नति, आरक्षण, अनुशासन और अन्य सेवा शर्तें निर्धारित होंगी।
छठा चरण—वर्तमान 58,000 पंचायत सहायकों का समायोजन:
वर्तमान में कार्यरत पंचायत सहायकों के लिए उनकी सेवा अवधि, योग्यता और अनुभव को ध्यान में रखते हुए विधि-सम्मत विशेष समायोजन/विनियमितीकरण अथवा विशेष चयन प्रक्रिया का प्रावधान किया जा सकता है।
सातवां चरण—विधिक परीक्षण:
पूरे प्रस्ताव एवं नियमावली का विधिक परीक्षण कराया जाएगा, ताकि नई व्यवस्था संवैधानिक एवं कानूनी रूप से टिकाऊ हो।
आठवां चरण—कैबिनेट की मंजूरी:
आवश्यक विभागीय एवं वित्तीय सहमति के बाद प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जा सकता है। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद संबंधित अधिसूचना/शासनादेश जारी किए जा सकते हैं।
नौवां चरण—सत्यापन:
प्रदेश के सभी कार्यरत पंचायत सहायकों के दस्तावेज, नियुक्ति, योग्यता एवं सेवा संबंधी विवरण का सत्यापन कराया जा सकता है।
दसवां चरण—नियुक्ति/समायोजन आदेश:
पात्र पाए जाने वाले पंचायत सहायकों को नई सेवा व्यवस्था के अंतर्गत नियुक्ति अथवा समायोजन आदेश जारी किए जा सकते हैं और इसके बाद लागू नियमों के अनुसार वेतन एवं सेवा लाभ दिए जा सकते हैं।
एक निर्णय, हजारों परिवारों का भविष्य
यदि सरकार इस दिशा में गंभीरता से पहल करती है, तो 58,000 पंचायत सहायकों के लिए एक नई और सुरक्षित सेवा व्यवस्था का रास्ता खुल सकता है।
माननीय मुख्यमंत्री जी और मंत्री जी, ₹9,000 के मानदेय से आगे बढ़कर स्थायी समाधान की दिशा में कदम बढ़ाइए। पंचायत सहायकों के लिए पृथक राज्य सेवा संवर्ग बनाकर समूह ‘ग’ का दर्जा देने की प्रक्रिया शुरू कीजिए।
जो नेतृत्व यह ऐतिहासिक पहल करेगा, उसका योगदान पंचायत सहायक के इतिहास में लंबे समय तक याद किया जाएगा।
@BJP4UP@psunionup@smajwadi_party@ArunrajbharSbsp
हमारे क्रांतिकारियों ने ऐसे राष्ट्र की कल्पना की थी जहां समान न्याय और श्रम का सम्मान होगा।
क्योंकि अंग्रेज हुकूमत चलाकर बेगारी ,बंधुआ मजदूरी,करवाते थे।
आज भी उसी प्रकार की व्यवस्था व्याप्त है..!
ये उन सपनों का अपमान है जो हमारे वीर योद्धाओं ने देखे थे।
आज इंटरनेट बिल में तौल दी जाती है जिंदगिया सांसद विधायक सदन में बैठ कर अपना भत्ता वेतन बढ़वा लेते है संविदा कर्मियों को नाममात्र की वृद्धि के लिए सड़कों पर उतरना पड़ता है प्रताड़ना सहनी पड़ती है आश्वाशन लेना पड़ता है और आदेश लागू करवाने के लिए फिर से प्रदर्शन करना पड़ता है।
ऐसा दुर्भाग्य है हम सबका..! कौन सुधारेगा ये व्यवस्था।
#पंचायत_सहायक_संघर्ष
क्या इको गार्डन के धरना-प्रदर्शन में हमारी कमजोरी का कारण आपसी एकता की कमी के अलावा भी कुछ और हो सकता है?
सुझाव 👇
आज उत्तर प्रदेश में पंचायत सहायकों के नाम पर कई संगठन सक्रिय हैं। मेरा मानना है कि यह बिखराव हमारे आंदोलन की सबसे बड़ी कमजोरी बन चुका है। आपसी मतभेद और नेतृत्व को लेकर खींचतान का नुकसान अंततः जमीनी पंचायत सहायक को ही उठाना पड़ता है।
हर कोई अपने-अपने संगठन और नेतृत्व का दावा करे, लेकिन सवाल यह है कि 58,000 पंचायत सहायकों के अधिकारों की लड़ाई एकजुट होकर कौन लड़ेगा?
अब समय आ गया है कि व्यक्तिगत नेतृत्व और संगठन के बजाय लोकतांत्रिक तरीके से एक मजबूत, एकजुट संगठन बनाया जाए।
👉 प्रत्येक ब्लॉक के पंचायत सहायक मिलकर अपना ब्लॉक अध्यक्ष चुनें।
👉 सभी ब्लॉक अध्यक्ष मिलकर अपने जनपद का जिला अध्यक्ष चुनें।
👉 सभी जिला अध्यक्ष मिलकर प्रदेश स्तर पर एक प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश कार्यकारिणी का गठन करें।
इस प्रक्रिया से नेतृत्व भी पंचायत सहायकों के बीच से आएगा और संगठन पर सभी का विश्वास भी बनेगा।
5 संगठन हों या 50, यदि आवाज अलग-अलग होगी तो संघर्ष कमजोर रहेगा।
अब जरूरत है—
न बंटने की, न व्यक्तिगत श्रेय की लड़ाई की।
✊ एक मंच • एक संगठन • एक आवाज
58,000 पंचायत सहायकों के अधिकारों के लिए एकजुट हों।
@psunionup@PSKS_UP@BrijeshMishraPA@psu_knd@psu_wazirganj@PSU_LKO@jalaunps@pawanmaurya_1
कुशल कार्य करने वाले कर्मचारी को ₹9,000 देकर किस दौर की सैलरी दी जा रही है?
जब UP में कुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी ₹15,224 से ₹16,868 तक है, तो पंचायत सहायकों को ₹9,000 क्यों?
58k पंचायत सहायकों के साथ यह अन्याय बंद करो।
#पंचायत_सहायक_संघर्ष#पंचायत_सहायक_एकता_जिंदाबाद
पंचायत सहायक यूनियन उत्तर प्रदेश
की मुख्य मांगें..!
@CMOfficeUP#उत्तर#प्रदेश सरकार को अब हमारी महत्ता समझनी होगी।
1. अनुबंध व्यवस्था समाप्त कर पंचायत सहायकों का पृथक राज्य सेवा संवर्ग बनाया जाए तथा वर्तमान में कार्यरत पंचायत सहायकों का नियमानुसार समायोजन किया जाए।
2. राज्य सेवा संवर्ग बनने तक पंचायत सहायकों का न्यूनतम ₹18,000 मासिक मानदेय किया जाए तथा इसका नियमित DBT भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
3. पंचायत सहायक राज्य सेवा संवर्ग की सेवा नियमावली बनाकर वेतनमान, पदोन्नति, स्थानांतरण, अवकाश, सामाजिक सुरक्षा एवं अन्य सेवा लाभ निर्धारित किए जाएं।
4. वर्तमान पंचायत सहायकों की सेवा अवधि एवं अनुभव को प्रस्तावित राज्य सेवा संवर्ग में समायोजन के समय मान्यता दी जाए।
पंचायत सहायक यूनियन जिंदाबाद.!
#युवा #शक्ति
#पंचायत_सहायक_संघर्ष
उत्तर प्रदेश के 58,000 पंचायत सहायकों की भी सुन लीजिए महोदय @myogiadityanath जी कम से कम न्यूनतम मजदूरी तो लागू कर दीजिए।
हम न कुशल, न अर्द्धकुशल और न ही अकुशल मजदूरी की श्रेणी में आते हैं
चौथी श्रेणी क्या है जिसमें हम.....see more
#HappyBirthdayRaviDada#RecountingDusuResults
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी और पंचायती राज मंत्री @oprajbhar जी बताएं
गांव का टॉपर, कंप्यूटर चलाने वाला और 29 विभागों का काम करने वाला पंचायत सहायक ₹9,000 महीने में आखिर किस श्रेणी में रखा गया है?
यूपी में न्यूनतम मजदूरी की दरें:अकुशल: ₹12,356–₹13,690 अर्द्धकुशल ₹13,590–₹15,059 कुशल: ₹15,224–₹16,868
तो पंचायत सहायकों के लिए ₹9,000 क्यों?
काम के अनुरूप सम्मानजनक मानदेय और न्यूनतम मजदूरी लागू कीजिए।
2027 अब दूर नहीं अब नहीं पूरी होगी तो कभी नहीं पूरी होगी 🙏
#पंचायत_सहायको_की_मांगे_पूरी_करो
@UPGovt@yadavakhilesh@smajwadi_party@RahulGandhi@ajitanjum@ravish_journo@rajendradev6@Manojkmr_singh@uppanchayatiraj
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी और पंचायती राज मंत्री @oprajbhar जी बताएं
गांव का टॉपर, कंप्यूटर चलाने वाला और 29 विभागों का काम करने वाला पंचायत सहायक ₹9,000 महीने में आखिर किस श्रेणी में रखा गया है?
यूपी में न्यूनतम मजदूरी की दरें:अकुशल: ₹12,356–₹13,690 अर्द्धकुशल ₹13,590–₹15,059 कुशल: ₹15,224–₹16,868
तो पंचायत सहायकों के लिए ₹9,000 क्यों?
काम के अनुरूप सम्मानजनक मानदेय और न्यूनतम मजदूरी लागू कीजिए।
2027 अब दूर नहीं अब नहीं पूरी होगी तो कभी नहीं पूरी होगी 🙏
#पंचायत_सहायको_की_मांगे_पूरी_करो
@UPGovt@yadavakhilesh@smajwadi_party@RahulGandhi@ajitanjum@ravish_journo@rajendradev6@Manojkmr_singh@uppanchayatiraj