RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और यूके का दौरा करेंगे
◆ वे वहां मौजूद स्थानीय संघों और संगठनों के निमंत्रण पर जा रहे हैं
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लंदन, इंग्लैंड। सुप्रसिद्ध उद्योगपति एवं "वेदान्ता समूह" के संस्थापक-चेयरमैन आदरणीय श्री अनिल अग्रवाल जी के स्नेहिल आमंत्रण पर श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ अनन्तश्रीविभूषित पूज्यपाद जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर पूज्यपाद गुरूदेव श्रीस्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज “आचार्यश्रीजी” 08 अगस्त, 2026 की सायंकाल उनके मेफेयर, लंदन स्थित निवास पर पधारे।
इस आत्मीय भेंट के प्रारम्भ में "पूज्य आचार्यश्री" ने श्री अनिल अग्रवाल जी के दिवंगत पुत्र की पुण्यस्मृति में भावपूर्ण प्रार्थना की तथा परमात्मा से दिवंगत आत्मा की शान्ति और परिवार को आत्मबल प्रदान करने की मंगलकामना की।
इसके पश्चात श्री अनिल अग्रवाल जी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती किरण अग्रवाल जी के साथ "पूज्य आचार्यश्री" का अध्यात्म, उद्योग, पुरुषार्थ, सेवा, परोपकार, लोकमंगल और भारतीय सनातन संस्कृति के विश्वकल्याणकारी स्वरूप पर अत्यन्त आत्मीय एवं सारगर्भित संवाद हुआ।
"पूज्य आचार्यश्री" ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति मूलतः समष्टि-कल्याण और लोकमंगल की संस्कृति है। हमारे ऋषियों ने कभी मनुष्य को केवल अपने लिए जीने की प्रेरणा नहीं दी। भारतीय जीवन-दृष्टि व्यक्ति से परिवार, परिवार से समाज, समाज से राष्ट्र और राष्ट्र से सम्पूर्ण विश्व के कल्याण की ओर ले जाती है। इसी उदात्त चेतना से “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे सार्वभौमिक आदर्श प्रकट हुए।
वेदान्त की दृष्टि में सम्पूर्ण सृष्टि में एक ही परम चेतना व्याप्त है। जब मनुष्य दूसरे के भीतर भी उसी ईश्वरीय सत्ता का अनुभव करता है तब यह अनुभूति भक्ति और आत्मीयता की सहज अभिव्यक्ति बन जाती है। पीड़ित के दुःख का निवारण, साधनहीन को अवसर, अशिक्षित को शिक्षा और रोगी को चिकित्सा प्रदान करना भी ईश्वर-आराधना का ही व्यापक स्वरूप है।
"पूज्य आचार्यश्री" ने श्री अनिल अग्रवाल जी की दीर्घ पुरुषार्थ-यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि अथक परिश्रम, अदम्य संकल्प, साहस और निरन्तर कर्मशीलता के माध्यम से उन्होंने अपने औद्योगिक कार्यों को वैश्विक विस्तार दिया। वेदान्ता एवं हिन्दुस्तान जिंक सहित विविध औद्योगिक उपक्रमों के माध्यम से उनकी यात्रा भारत से विश्व के अनेक क्षेत्रों तक पहुँची है।
विशेष रूप से उनके पारिवारिक संस्कारों और माता-पिता के प्रति श्रद्धा की चर्चा करते हुए "पूज्य आचार्यश्री" ने कहा कि भारतीय संस्कृति में माता-पिता का आशीर्वाद जीवन की अमूल्य निधि माना गया है। सफलता के उच्च शिखरों पर पहुँचने के बाद भी अपनी जड़ों, संस्कारों, माता-पिता और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञ बने रहना भारतीय जीवन-मूल्यों की विशिष्टता है।
"पूज्य आचार्यश्री" ने कहा कि “सम्पदा की सार्थकता केवल संग्रह में नहीं, उसके सदुपयोग में है; सामर्थ्य की श्रेष्ठता प्रभुत्व में नहीं, परोपकार में है। हमारी उपलब्धियाँ तभी पूर्णता प्राप्त करती हैं, जब उनसे किसी पीड़ित का दुःख कम हो, किसी अभावग्रस्त को अवसर मिले और समाज में आशा एवं प्रसन्नता का विस्तार हो।”
श्री अनिल अग्रवाल जी के सेवा एवं परोपकार के विविध प्रयासों की चर्चा करते हुए "पूज्य आचार्यश्री" ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक उत्थान और वंचित वर्गों के सशक्तीकरण की दिशा में किया गया कार्य भारतीय संस्कृति की लोकमंगलकारी चेतना का व्यावहारिक स्वरूप है।
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण कर्म करते हुए लोकसंग्रह की भावना को महत्त्व देते हैं। जब उद्योग, उद्यमिता और आर्थिक सामर्थ्य के साथ नैतिकता, मानवीय संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व जुड़ जाते हैं, तब उद्योग केवल आर्थिक विकास का साधन नहीं रहता; वह राष्ट्र-निर्माण और मानव-कल्याण की एक महत्त्वपूर्ण शक्ति बन जाता है।
संवाद के मध्य "पूज्य आचार्यश्री" ने सत्यनिष्ठा और पुरुषार्थ के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जीवन में परिस्थितियाँ कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, सत्य का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए। निरन्तर श्रम, साहस, संकल्प और सत्य के प्रति अविचल निष्ठा मनुष्य को स्थायी सफलता की ओर ले जाती है।
उन्होंने श्री अनिल अग्रवाल जी के पुरुषार्थ की सराहना करते हुए कहा कि कठिनाइयों के बीच भी निरन्तर आगे बढ़ने का उनका स्वभाव, कर्म के प्रति समर्पण और अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति अनुराग प्रेरणादायी है। सत्य के साथ रहना, पुरुषार्थ करते रहना और अपने सामर्थ्य को लोककल्याण से जोड़ना ही विजय का वास्तविक मंत्र है।
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दीपावली पर क्यों करते हैं, लक्ष्मी पंचायतन पूजा❓❓❓
कल विष्णु पंचायतन पर लिखा था मैंने दीपावली पर लक्ष्मी पंचायतन पूजा की जाती है धन समृद्धि और ऐश्वर्य दायक श्री लक्ष्मी पंचायतन के बारे पढ़ें।
📌 कुबेर संपत्ति धन देते हैं, तथा उसका संग्रह भी करते हैं।
धनदाय नमस्तुभ्यम् निधिपद्माधिपाय च ।
भवन्तु त्वत्प्रसादान्मे धनधान्यादि सम्पदः ।।
📌गजेंद्र ऐरावत को माँ लक्ष्मी का सहोदर कहा जाता है क्योंकि वो समुद्र मंथन से प्रकट 14 रत्नों में एक हैं।
ॐ गजराज नमस्तेस्तु नरकार्णव तारक ।
सुखदः पुत्र पौत्रादिः सर्वदा बृद्धि हेतवे ।
📌देवराज इंद्र इंद्र ऋग्वेद के पीठासीन देवता हैं और लक्ष्मी पंचायतन में से एक स्वरूप इनका भी रहता है।
ऐरावत समारुढो वज्रहस्तो महाबलः ।
शतयज्ञाधिपौ देवमस्तस्म इन्द्राय ते नमः ।।
📌श्री विष्णु भोग मोक्ष दायक सृष्टि के पालनहार प्रभु के साथ ही चंचला कही जाने वाली माँ लक्ष्मी स्थायित्व धारण करती हैं।
ॐ शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥
📌 श्रीलक्ष्मी समृद्धि और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी कोजागर पूर्णिमा से कालरात्रि तक माता लक्ष्मी धन ऐश्वर्य से भक्तों की झोली भरती हैं।
नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते | शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते ||
Cameras don’t lie: Witness the unbecoming conduct of Justice Shyam Suman of the Bombay High Court and the valiant, dignified response of a young woman lawyer.
Who Designed the Shakti Chalana Kriya?
Question: Namaskaram, Sadhguru. The Shakti Chalana Kriya that is taught to us is such an intricate process. I was wondering where you learned it from. Is it from Patanjali’s Yoga Sutras?
Sadhguru: The Shakti Chalana Kriya practiced..
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कहा जा रहा है कि अगले मंगलवार तक ही इनको छोड़ा जाएगा।
इस संदर्भ में आपसे निवेदन है कि आवश्यक वस्तुओं की पूर्ति हेतु बिजनौर एसएसपी महोदय से समन्वय बैठाने की कृपा करें।
धन्यवाद
ये कांग्रेस की हिन्दू विरोधी मानसिकता ही है कि कांग्रेस भगवा आतंकवाद की थ्योरी गढ़ती है, लेकिन कभी इस्लामिक आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल नहीं करती।
घमंडिया फाइल्स के 21वें एपिसोड में देखिए, कांग्रेस और उसके घमंडिया गठबंधन की हिन्दू विरोधी साजिश...