नोएडा में जो कर्मचारियों का आंदोलन चल रहा है, उसे कह दिया जाएगा कि चुनावों के समय में ‘करवाया’ गया है। परंतु कुछ प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
१. 13,000/महीने, दस-दस घंटे की नौकरी किस तर्क से उचित है? बगल के गुड़गाँव में न्यूनतम सैलरी ₹19,000 कर दी गई है।
२. ओवरटाइम का पैसा सामान्य कैसे हो सकता है? डेढ़ या दो गुणा माँगना अनुचित नहीं।
३. आग लगाने की स्थिति पहुँची कैसे? अधिकारियों को इसकी सूचना नहीं थी? क्या आंदोलनकारियों ने अपनी माँगें ज्ञापन के रूप में प्रशासन को नहीं दी थी?
मैं तो अब वामपंथी बता दिया जाऊँगा क्योंकि मैं आंदोलनकारियों की माँगे बता रहा हूँ। परंतु, सत्य यह है कि सरकारें जब अधिकारियों की बात सुन कर सोई रहती है तब विरोधी ऐसे आंदोलन करते हैं, या कराते हैं।
एक और आंदोलन हुआ था हाल ही में। उसकी सूचना सरकार तक पहुँची भी नहीं। नोएडा में ही बाल्मीकी समुदाय के लोगों ने 30-30 वर्षों से कार्य करने के बाद भी परमानेंट न होने पर आंदोलन किया। ये लोग सड़कें साफ करते हैं, सीवर में उतरते हैं।
सीवर में उतरने के लिए सेफ्टी की माँग की। ये उस समाज के लोग हैं जिनके वोट के लिए सरकार मरी जा रही है। क्या अम्बेडकर के तीर्थ और मूर्तियों की स्थापना बाल्मीकी समाज के नौकरी को स्थाई बना देंगी?
फ़ैक्ट्री के कर्मचारी कौन हैं? उसी ‘दलीत-पीड़ीत-शोषीत-वंचीत’ समाज से आते हैं अधिकतर। तो @narendramodi और @myogiadityanath क्या इस समाज के लिए भी मूर्ति और लेखों के अलावा कुछ कर रहे हैं?
किसी ने आज बताया कि हाल ही में कूड़ा फेंकने वालों की सैलरी नोएडा में कम कर के दी गई। फिर बहुत बवाल हुआ और कर्मियों ने यह कहा कि कूड़ा नहीं उठाएँगे, तब पूरी सैलरी दी गई है।
मैं तो चलो वामपंथी हूँ, सपाई हूँ, कॉन्ग्रेस से फंडेड हूँ, राज्यसभा चाहिए, पर आप लोग तो नेता हैं। आपको यदि दिख रहा है कि चुनावों के पूर्व ऐसी आग लगाई जा सकती है तो आप अग्निशमन के प्रयास क्यों नहीं कर रहे?
मोदी जी ने कहा था - LPG Gas Crisis को COVID की तरह हैंडल करेंगे।
और सच में वही किया।
बिल्कुल COVID के जैसे ही - नीति शून्य, घोषणा बड़ी, और बोझ गरीबों पर।
₹500-800 की दिहाड़ी कमाने वाले प्रवासी मज़दूरों के लिए रसोई गैस पहुंच से बाहर हो गई है। रात को घर लौटते मज़दूर के पास चूल्हे जलाने तक के पैसे नहीं। नतीजा - शहर छोड़ो, गाँव भागो।
जो मज़दूर textile mills और factories की रीढ़ हैं - आज वही टूट रहे हैं।
Textile sector पहले से ICU में है। Manufacturing दम तोड़ रही है। और यह संकट आया कहाँ से? कूटनीति की मेज़ पर हुई उस चूक से जिसे सरकार आज तक स्वीकार नहीं करती।
जब अहंकार नीति बन जाए - अर्थव्यवस्था चरमराती है, मज़दूर पलायन करते हैं, उद्योग बर्बाद होते हैं और देश दशकों पीछे धकेल दिया जाता है।
सवाल एक ही है - हर संकट में सबसे पहले गरीब क्यों मरता है? चुप मत रहो। यह सिर्फ़ गरीब का नहीं, हम सबका सवाल है।
Champions once again! 🇮🇳
A magnificent victory for our Men in Blue with a special mention to Sanju Samson and Jaspreet Bumrah for their remarkable performance throughout the tournament.
Congratulations to Team India on retaining the trophy at home and giving the nation yet another unforgettable moment to celebrate.
संजू सैमसन विश्व कप शुरू होने से पहले पिछले 20 मैचों में सिर्फ 1 बार 40 रन के ऊपर बना पाए थे। वह भी ओमान के खिलाफ था। 20 मैचों में 12 पारियां तो ऐसी थी जो पॉवर प्ले में ही खत्म हो गई।
विश्व कप में फिर भी चयन हुआ। जिम्बॉब्वे और नमीबिया के खिलाफ 22-24 रन बनाकर आउट हो गए। टीम से बाहर कर दिया गया। कप्तान सूर्यकुमार से इन्हें टीम में लेने की बात की गई तो ऐसे रिएक्ट किया गया जैसे ये संभव ही नहीं।
हम तो सुनते ही आ रहे हैं कि दिन बदलता है। सो संजू सैमसन का भी बदल गया। वेस्टइंडीज के खिलाफ मौका मिला। एक तरह से क्वॉर्टर फाइनल था वह मैच। 50 गेंद में नाबाद 97 रन जड़ दिए।
सेमीफाइनल आया। महज 42 गेंद में 89 रन जड़कर टीम को 250 के पार पहुंचा दिया। आज फाइनल में जो कुछ किया वह तो देखा ही आपने।
क्लास है इस बंदे के पास। गड़बड़ खेलेगा तो आलोचना होगी ही। लेकिन जब अच्छा खेले तो हम सबका कर्तव्य है कि तारीफ करें। इस खिलाड़ी में अभी बहुत क्रिकेट है। शानदार संजू। ❤️
दो तस्वीरें हैं। एक बुरे वक्त की। एक अच्छे वक्त की।
#t20worldcup2026 #INDvsNZ #SanjuSamson
एक महत्वपूर्ण खबर ⚡
• आजादी के बाद पहली बार भारत के साथ गुलामों जैसा बर्ताव हो रहा है.
• ट्रंप सरकार ने कहा- हम भारत की तेल कम्पनियों को रूस से तेल खरीदने की 'इजाजत' दे रहे हैं. भारत को ये छूट 30 दिन तक मिलेगी.
• इसके साथ ही ट्रंप सरकार ने ये उम्मीद जताई है कि भारत अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगा.
ऐसा मत समझिए कि ये सब गुपचुप नहीं हो रहा है. ट्रंप सरकार के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने खुलेआम ये ट्वीट किया है.
मने... मोदी सरकार ने क्या हाल कर दिया है देश का.
अब अमेरिका हमें बता रहा है कि हमें क्या खरीदना है, किससे खरीदना है, कितना खरीदना है. गुलामों से बदतर हालात हैं.
कमाल की खबर 👇
दुबई में अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन हुआ, 28 फरवरी को.
इस सम्मेलन में भाग लेना वो ज्योतिषी गए, जो सबका भविष्य बताते हैं.
अब वहां वॉर छिड़ गई, ज्योतिषी लोग वहीं फंस गए.
सबका भविष्य बताने वाले, खुद का भविष्य नहीं देख पाए. समझ रहे हैं आप 🙃
अगर देश की संसद के भीतर प्रधानमंत्री जी को विपक्षी महिला सांसदों से खतरा है तो एनएसए से लेकर गृह मंत्री तक को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।संसद के भीतर भी षड्यंत्र रचे जा रहे तो फिर जनरल नरवणें ने अपनी किताब में जो लिखा है वह 100 % सही है।
@narendramodi UK got 10% tariffs, Japanese-Korean-European got 15% tariffs.
Modi gov gives up on Russian oil, Agriculture compromised, committed to USA of buying $500 Billion worth of just Energy & Tech,
And still India gets to pay 18% Tariffs.
Tell me who is the winner & loser here ?
मैं अगर चोरी नहीं करता तो चोरी की सजा के लिए कितना भी बड़ा कानून आ जाए मैं नहीं डरूँगा
OBC दलित एसटी छात्रों के साथ भेदभाव होता है जो की नहीं होना चाहिए इसलिए यूजीसी का नया नियम जरूरी है ।